तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव ने 9 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर बिहार की महिलाओं से एक्स पर पोस्ट कर बड़ा वादा किया है. उन्होंने कहा है कि महागठबंधन की सरकार बनी तो ऐसी योजनाएं लाएंगे, जिसे इतिहास में याद किया जाएगा. उसके लिए उनकी पार्टी अभी से रणनीति बनाने में जुटी है. उनका यह बयान सामने आने के बाद से बीजेपी-जेडीयू नेताओं के बीच खलबली मची है. उन्होंने नीतीश कुमार की भी परेशानी बढ़ा दी है. अब सीएम को भी इसका सियासी काट निकालना होगा. जानें तेजस्वी यादव के इस अपील को लेकर क्या कहती हैं बिहार की महिला नेता.
जंगलराज को भूली नहीं हैं महिलाएं - सोनम
बिहार लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास की प्रवक्ता सोनम का कहना है कि तेजस्वी यादव महिलाओं से अपील करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब उन्हें अवसर मिला तो उन्होंने महिलाओं के लिए क्या किया. हाल ही में गांधी मैदान में उन्होंने एक रैली को संबोधित किया था. उस रैली में शामिल महिलाओं का दुपट्टा उनके समर्थक ही खींच रहे थे. जब रैली में आने पर ये हाल है तो वो जब सत्ता में आ जाएंगे तो महिलाओं का क्या हाल होगा?
एलजेपी रामविलास की प्रवक्ता सोनम ने ये भी कहा कि तेजस्वी यादव 'माई बहन योजना' भी महिलाओं के लिए लेकर आए हैं. ये महिला मतदाताओं के लिए रिझाने की चाल है. बिहार की महिलाएं 1990 के दशक के जंगलराज को भूली नहीं हैं. अब बिहार की महिलाएं सब कुछ समझने लगी हैं. इसलिए, उन्हें पता है कि उनकी बेहतरी किसके साथ जाने में है. तेजस्वी यादव के किसी भी वादों से महिलाएं गंभीरता लेंगी, इसकी उम्मीद बहुत कम है.
हर वादा झूठ का पुलिंदा - डॉ. सुनंदा केसरी
बिहार भारतीय जनता पार्टी वाणिज्य प्रकोष्ठ की प्रवक्ता डॉ. सुनंदा केसरी ने तेजस्वी यादव के वादों पर कहा कि उनके वादे खोखले होते है. वह कभी सच बोलते ही नहीं सकते. इसलिए, उनका हर वादा झूठ का पुलिंदा साबित होता है. इस बात को बिहार की महिलाएं बखूबी जानती है. हकीकत यह है कि तेजस्वी यादव को सत्ता का चस्का लग गया है. वो अब सत्ता से दूर नहीं रह सकते. वह सत्ता पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता इतनी इतनी बेवकूफ नहीं हैं कि हर बार झांसे में आकर वोट दे. मीसा भारती ने चुनाव में हर मोहल्ले में महिलाओं को दो-दो साड़ियां बांटी थीं. इससे कुछ गरीब महिलाएं जरूर झांसे में आ जाती हैं, लेकिन बहुसंख्यक महिलाएं खुद की भलाई जानती हैं कि उन्हें क्या करना है?
तेजस्वी की महिलाओं से अपील
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने 9 अगस्त, 2025 को रक्षाबंधन के दिन बिहार की बहनों के नाम एक संदेश लिखा, जिसमें उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता में आने पर उनके द्वारा किए जाने वाले कल्याणकारी कार्यों के बारे में बताया. उन्होंने बिहार की आधी आबादी से अनुरोध किया है कि अपने भाइयों को राखी बांधने के बाद, आप अपने भाई तेजस्वी के नाम पर एक और राखी बांधें. आपके तेजस्वी भैया बिहार के हर घर में नहीं आ सकते, लेकिन वे हर घर के बारे में, हर बहन की समृद्धि के बारे में सोच रहे हैं और उनके लिए नीतियां बना रहे हैं.
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार की बहनों से सहयोग देने और बिहार को नंबर वन बनाने का संकल्प लेने का आग्रह किया. उन्होंने आगे कहा, 'रक्षाबंधन पर एक राखी और चुनाव में अपने तेजस्वी भाई को वोट दीजिए. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि चाहे बेरोजगारी, महंगाई, अपराध, गरीबी, भ्रष्टाचार मुक्ति दिलाऊंगा. मैं हमेशा आपका सुरक्षा कवच बनकर आपके लिए काम करूंगा. यह बिहार की हर बहन के लिए तेजस्वी का संकल्प है.”
अल-फलाह यूनिवर्सिटी का AIU सदस्यता ख़त्म
Al-Falah University: दिल्ली लाल किला ब्लास्ट केस की जांच में अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सामने आया है. जांच एजेंसियों ने बताया कि बिल्डिंग नंबर 17 और रूम नंबर 13 आतंकियों की मीटिंग का ठिकाना था. इस बीच AIU ने यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है. इससे विदेशी एडमिशन, सरकारी नौकरियों और साख पर गहरा असर पड़ेगा. लेकिन सवाल है कि आखिर इनके स्टूडेंट्स के साथ क्या होगा.
हरियाणा-केन्द्रीय क्षेत्र में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द होने, झूठी मान्यता के आरोप लगने और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इसकी जांच के चलते इसके छात्रों तथा फॅकल्टी में चिंता बढ़ गई है. इस स्थिति में छात्रों को यह जानने की जरूरत है कि उनकी डिग्री वैध रहेगी कि नहीं, ट्रांसफर विकल्प क्या होंगे और आगे की पढ़ाई-रोज़गार पर क्या असर पड़ेगा.
AIU ने यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द
देश की राजधानी दिल्ली के दिल में हुई लाल किला ब्लास्ट की गूंज अब हरियाणा के फरीदाबाद तक पहुंच चुकी है. सोमवार शाम करीब 6:52 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास सफेद i20 कार में धमाका हुआ, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई. जांच में सामने आया कि इस साजिश के तार अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हो सकते हैं.
इसी बीच, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है. AIU ने कहा कि अब यूनिवर्सिटी को AIU का नाम या लोगो इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. यह फैसला न केवल संस्थान के लिए बड़ा झटका है, बल्कि हजारों छात्रों के करियर पर भी गहरा असर डाल सकता है.
छात्र फिलहाल UGC और AICTE से मान्यता प्रमाणपत्र लेकर भारतीय विश्वविद्यालयों या सरकारी नौकरियों में आवेदन कर सकते हैं. लेकिन विदेशी एडमिशन के लिए उन्हें AIU समकक्ष सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा. इससे बाहर पढ़ाई मुश्किल हो जाएगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि यूनिवर्सिटी को अब सुधारात्मक कदम उठाकर AIU से सदस्यता पुनः प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए.
जांच एजेंसियों के मुताबिक अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 आतंकियों की गुप्त बैठकों का केंद्र थी. बताया जा रहा है कि ये मीटिंग्स रूम नंबर 13 में होती थीं, जहां दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सीरियल ब्लास्ट की योजना बनाई जा रही थी.
तेलंगाना में प्याज ने किसानों को रुलाया (फाइल फोटो)
Telangana Onion Farmers News: तेलंगाना में प्याज किसानों की हालत इस समय बेहद खराब हो गई है. किसानों की बेबसी ने राज्य में कांग्रेस सरकार और केंद्र में प्रदेश सरकार के दावों की कलई खोल दी है. जिन किसानों ने मेहनत से प्याज की खेती की, अब वे अपनी फसल को खेतों में सड़ते हुए देखने को मजबूर हैं. इसकी वजह है बाजार में प्याज की कीमतों में आई भारी गिरावट.
ताज़ा फसल की बिक्री के लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं, जबकि जो किसान मजबूरी में प्याज बेचने जा रहे हैं, उन्हें खुली मंडियों में मात्र 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है. हालांकि, खुदरा बाजार में यही प्याज उपभोक्ताओं को 20 से 25 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है. यानी किसानों को उनकी लागत का भी भाव नहीं मिल पा रहा, जबकि बिचौलिये और व्यापारी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं.
किसानों का कहना है कि उन्होंने इस फसल में भारी निवेश किया था, लेकिन अब उन्हें केवल बढ़ते कर्ज का बोझ झेलना पड़ रहा है. यह संकट सिर्फ तेलंगाना तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के प्याज उत्पादक किसान इसी तरह की स्थिति से जूझ रहे हैं. पिछले साल प्याज के दाम 4,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे. उसी कीमत को देखकर तेलंगाना के कई जिलों में इस साल किसानों ने प्याज की खेती का रकबा बढ़ाया था. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं.
तेलंगाना, जो सामान्य तौर पर प्याज की कमी वाली राज्य माना जाता है, वहां इस समय थोक बाजारों में प्याज का भाव केवल 10 से 15 रुपये प्रति किलो चल रहा है. यह दर किसानों की उत्पादन लागत (25-30 रुपये प्रति किलो) से काफी कम है, जिसमें मजदूरी और अन्य खर्च शामिल हैं. 17 अक्टूबर को बोइनपल्ली मंडी में प्याज की औसत कीमत 14 रुपये प्रति किलो (1,100-1,400 रुपये प्रति क्विंटल) रही, जबकि 15 अक्टूबर को गुडी मलकापुर मंडी में यह घटकर 11 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई.
तेलंगाना के जोगुलाम्बा गडवाल जिले के आलमपुर और आसपास के इलाके प्याज उत्पादन के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं. यहां के किसान लगातार नुकसान झेल रहे हैं क्योंकि प्याज की फसल के लिए सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय नहीं किया गया है. इस कारण किसान पूरी तरह से बिचौलियों और खुली मंडी के भाव पर निर्भर हैं, जहां उन्हें लागत से कम कीमत मिल रही है. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है.
कर्नाटक के एक चिड़ियाघर में 4 दिनों के भीतर 31 काले हिरणों की अचानक मौत
कर्नाटक के एक चिड़ियाघर में 4 दिनों के भीतर 31 काले हिरणों की अचानक मौत ने पूरे राज्य के वन विभाग और wildlife सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है. सामूहिक मृत्यु के इस मामले ने चिड़ियाघर के प्रबंधन, जानवरों के भोजन, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंताएँ खड़ी कर दी हैं.
कर्नाटक का यह चिड़ियाघर सामान्य दिनों में अपने wildlife संरक्षण मॉडल के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने इसकी छवि को सवालों के घेरे में ला दिया है. चार दिनों में लगातार 31 काले हिरणों की मौत ने वन विभाग में अलार्म बजा दिया है.
क्या है मामला?
पहले दिन कुछ हिरणों में अचानक कमजोरी और अजीब हरकतें दिखीं. दूसरे दिन कई हिरणों की हालत बिगड़ी, कुछ ने खाना पीना छोड़ दिया. अगले दो दिनों में स्थिति और भयावह हो गई और मौतों का आंकड़ा 31 पहुँच गया.
संभावित वजह
वन्यजीव डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में कई कारणों पर शक जताया है. Food Contamination चारा या पानी में संक्रमण, सर्कोवायरस या समान wildlife वायरस, जहरीले कीड़े/घास का सेवन, चिड़ियाघर का खराब प्रबंधन, स्वच्छता की कमी, फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही अंतिम निष्कर्ष निकल पाएगा.
अब तक क्या हुई कारवाई?
कर्नाटक सरकार ने हाई-लेवल जांच कमेटी बनाई. चिड़ियाघर के डायरेक्टर से जवाब तलब किया. वहां मौजूद सारे जानवरों के स्वास्थ्य परीक्षण का आदेश दिया. भोजन सप्लाई चैन की जांच शुरू कर दी. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसी सामूहिक मौतें बेहद दुर्लभ होती हैं और यह “सिस्टमेटिक फेलियर” की ओर संकेत करती हैं.
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
Wildlife विशेषज्ञों ने इसे बेहद गंभीर घटना बताया है. उनका कहना है कि ब्लैकबक संवेदनशील प्रजाति है और संक्रमण फैलने पर पूरी आबादी खतरे में पड़ जाती है. विशेषज्ञों ने चिड़ियाघर में क्वारंटीन जोन, फूड टेस्टिंग सिस्टम और मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की सलाह दी है.