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नेशनल हेराल्ड विवाद: सोनिया-राहुल को राहत या नए झटके का दिन?

सोनिया गांधी और राहुल गांधी

सोनिया गांधी और राहुल गांधी

आज देश की न्यायिक और राजनीतिक नज़रें एक ही सुनवाई पर टिकी हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट आज यह तय करेगी कि क्या Young Indian के माध्यम से कथित संपत्ति हड़पने और मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोपों वाली चार्जशीट को मान्यता दी जाए या नहीं. इस चार्जशीट में कांग्रेस नेता Sonia-Rahul गांधी समेत अन्य को आरोपी बनाया गया है. अगर कोर्ट ED की चार्जशीट को स्वीकार करती है, तो यह मामला फिर से तेजी से आगे बढ़ेगा और गांधी परिवार की राजनीति व कानूनी लड़ाई दोनों के लिए आज का दिन अहम बनेगा.

आरोप और चार्जशीट की मुख्य बातें

ED का दावा है कि निजी कंपनी Young Indian (जिसमें गांधी परिवार की हिस्सेदारी थी) ने मात्र ₹90 करोड़ के ऋण के बदले में Associated Journals Limited (AJL) — जो ‘National Herald’ निकलती थी. लगभग ₹2,000 करोड़ की संपत्ति अधिग्रहित कर ली. चार्जशीट में Sonia Gandhi, Rahul Gandhi, साथ ही अन्य लोगों/कंपनियों को आरोपी बनाया गया है. ED का तर्क है कि यह एक ‘धनशोधन व प्रॉपर्टी हड़पने’ की साजिश है, जिसमें कानूनों (जैसे PMLA) का आवेदन किया गया है. 

 कोर्ट की सुनवाई और आज की अहमियत

इस केस की सुनवाई पहले कई बार टली; अदालत ने पहले चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इंकार कर दिया था क्योंकि फाइलों की पुनः जाँच की जरूरत बताई गई थी. अब 29 नवंबर 2025 को अदालत अपना आदेश सुनाएगी. यानी तय करेगी कि ED की चार्जशीट स्वीकार होगी या नहीं.

इसका मतलब है कि अगर कोर्ट चार्जशीट स्वीकार करती है तो मामला मुकदमेबाजी की अगली कड़ी में जाएगा. वहीं यदि अस्वीकार करती है तो Gandhi परिवार को इस आरोपों से राहत मिल सकती है.

राजनीतिक और कानूनी मायने

यह फैसला सिर्फ एक कानूनी मोड़ नहीं है. वर्तमान राजनीतिक माहौल और अफवाहों व आरोपों की पृष्ठभूमि में इसका असर बड़ा हो सकता है. दएक तरह से, इससे तय होगा कि यह लंबा विवाद फिर से सुर्खियों में आएगा या फिलहाल शांत हो जाएगा. आम जनता, मीडिया और विपक्ष-सपोर्टर तीनों की निगाहें इस फैसले पर टिकी हैं. क्योंकि इससे भविष्य में भ्रष्टाचार-आरोप, राजनैतिक रुख और न्यायिक प्रक्रिया की दिशा तय हो सकती है.


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Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

29 Nov 2025  ·  Published: 07:16 IST

दुर्गापुर रेप केस पर बंगाल में सियासी बवाल, ममता बनर्जी अपने बयान से पलटीं, दी सफाई - जानें किसने क्या कहा

ममता बनर्जी

ममता बनर्जी

दुर्गापुर रेप केस का मामला तूल पकड़ने के बाद ममता बनर्जी ने अपने विवादास्पद बयानों के लिए सफाई दी है. अब उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया है. उन्होंने दोहराया कि वह घटना की निंदा करती हैं और दोषियों को दंडित करने की के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है. बीजेपी ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ममता बनर्जी सरकार ने बंगाल बलात्कारियों का पनाहगार बना दिया है. 

ममता बनर्जी ने मीडिया पर आरोप लगाया कि उनका बयान तोड़ा-मरोड़ा गया है और उन्हें गलत तरह से प्रस्तुत किया गया है. उन्होंने कहा है कि उन्होंने “लड़कियों को बाहर नहीं जाना चाहिए.” इस कथन को इस सूरत में बोलने का अर्थ नहीं लिया जाना चाहिए और कहा कि वे कानून का उल्लंघन नहीं कर रही हैं. उन्होंने विरोधियों पर आरोप लगाया कि ये बयान राजनीति करने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं. 

ममता ने पहले क्या कहा था? 

ममता बनर्जी ने दुर्गापुर रेन की घटना तूल पकड़ने के बाद कहा था कि “लड़कियों को रात को बाहर नहीं जाना चाहिए.” उन्होंने कहा कि प्राइवेट कॉलेजों को छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, और ऐसा नहीं होना चाहिए कि छात्राएं रात में बाहर निकल सकें. 

बाहर कैसे निकली छात्रा? 

ममता ने यह सवाल उठाया कि छात्रा कैसे इतनी देर रात को कॉलेज परिसर से बाहर जा सकी. उन्होंने यह तर्क दिया कि कॉलेजों को यह देखना चाहिए कि छात्राएं सुरक्षित रहें. विशेषकर यदि परिसर जंगल क्षेत्र में हो. साथ ही, उन्होंने कहा कि पुलिस पूरी तरह हर जगह उपस्थित नहीं हो सकती, इसलिए संस्थाओं को सावधानी बरतनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. 

ममता का बयान शर्मनाम 

बीजेपी नेताओं ने इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी ने कानून व्यवस्था पर आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ने बंगाल को “बलात्कारियों का सुरक्षित पनाहगार” बना दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य में महिला सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय है और सरकार अपराधियों पर निर्णायक कार्रवाई नहीं कर रही है. 

बीजेपी नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान “शर्मनाक” है और उन्होंने आरोप लगाया कि वह पीड़िता को शर्मिंदा कर रही हैं. 
कुछ भाजपा नेताओं ने इसे “दोषारोपण” और “नारी का अपमान” कहा है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार सख्ती दिखाती, तो यह घटना नहीं होती. 

भाजपा नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान “शर्मनाक” व “महिलाओं का अपमान” है। वे उसे “victim blaming” (पीड़िता को दोष देना) कह रहे हैं. भाजपा का यह कहना है कि इस मसले पर केवल बयानबाजी नहीं होनी चाहिए, बल्कि त्वरित और कार्रवाई की जरूरत है. भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने भाजपा नेताओं को पीड़िता से मिलने से रोका. यह आरोप लगाया कि राज्य सरकार और पुलिस आरोपियों की रक्षा कर रही है. 

ओडिशा सरकार ने प्रभावी जांच की मांग 

पीड़िता ओडिशा की निवासी है और ओडिशा की टीम ने बंगाल पुलिस की जांच प्रक्रिया की समीक्षा करने के बाद कहा कि उन्होंने पहले 36 घंटे में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और साक्ष्य जुटाए हैं. उन्हें तत्काल कार्रवाई में भरोसा है. 

क्या है मामला?
 
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक मेडिकल छात्रा से कथित सामूहिक बलात्कार (ग‍ैंगरेप) का मामला सामने आया. पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक मेडिकल छात्रा पर कथित सामूहिक बलात्कार (gangrape) की घटना पुलिस ने दर्ज की. पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया. 


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Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

13 Oct 2025  ·  Published: 06:39 IST

कौन हैं Mira Murati, जिन्होंने ठुकरा दिया 8700 करोड़ का ऑफर, जानें उनकी नेटवर्थ

मीरा मुराती

मीरा मुराती

अल्बानियाई मूल की पूर्व मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी मीरा मुराती पिछले कुछ दिनों से दुनिया भर में सुर्खियों में हैं. दरअसल, उन्होंने अपनी खुद की स्टार्टअप कंपनी OpenAI स्थापित की है. उसके बाद से अधिकांश लोग उनकी बैकग्राउंड और नेटवर्थ के बारे में जानकारी चाहते हैं. अल्बानिया से टेस्ला और ओपनएआई में प्रमुख पदों तक का उनका सफर इंजीनियरिंग से प्रेरित उनके करियर और एआई के प्रति उनका जुनून से अचंभित करने वाला है. 

 मार्क जुकरबर्ग के ऑफर को ठुकराया 

जुकरबर्ग ओपनएआई की पूर्व मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी के रूप में मीरा मुराती जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि पा रही हैं, उनकी पृष्ठभूमि के बारे में जानने की लोगों में इच्छा उतनी की बढ़ती जा रही है. मीरा मुराती ने कथित तौर पर जुकरबर्ग के मेटा (पूर्व में फेसबुक) के एक नौकरी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया. Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने मीरा मुराती को 1 अरब डॉलर (8700 करोड़ रुपये) के आकर्षक ऑफर दिया था. जुकरबर्ग ने ये ऑफर मेटा के नए सुपरइंटेलिजेंस लैब में शामिल होने के लिए दिया था. 

मीरा और उनकी पूरी टीम ने अपने विजन को प्राथमिकता दी. उनका यह रुख ओपनएआई के प्रति उनके जुनून को दर्शाता है. मुराती ने मेटा को ज्वाइन करने के बदले ओपनएआई में रिस्पांसिबल एआई विकसित करने पर अपना ध्यान केंद्रित करने का फैसला लिया . 

कुल संपत्ति कितनी है?

मीरा मुराती की कुल संपत्ति का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है. कुछ रिपोर्टों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ओपनएआई में उनकी इक्विटी हिस्सेदारी और कार्यकारी वेतन को देखते हुए उनकी कुल संपत्ति करोड़ों डॉलर में है. संभवतः $50 लाख से $100 लाख अमेरिकी डॉलर के बीच. Thinking Machines Lab में उनके equity stake के आधार पर 2025 में उनका मूल्यांकन लगभग $1.4 बिलियन माना जा रहा है, क्योंकि उनकी स्टार्टअप की वैल्यू $10–12 बिलियन के आसपास है. उनकी हिस्सेदारी अनुमानित रूप से 10‑15 प्रतिशत हो सकती है.  

क्या मीरा मुराती भारतीय हैं?

नहीं, मीरा मुराती भारतीय नहीं हैं. उनका जन्म और पालन-पोषण अल्बानिया में हुआ, जो दक्षिण-पूर्वी यूरोप का एक छोटा लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश है. हालांकि उनका नाम कुछ लोगों को दक्षिण एशियाई लग सकता है, लेकिन उनकी विरासत पूरी तरह से अल्बानियाई है. अल्बानिया में शुरुआती साल बिताने के बाद मुराती बाद में कनाडा और अंततः संयुक्त राज्य अमेरिका चली गईं, जहां उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और एक शक्तिशाली तकनीकी करियर शुरू किया.

एयरोस्पेस से एआई तक का सफर 

मुराती ने डार्टमाउथ कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और जोडिएक एयरोस्पेस में काम करते हुए एयरोस्पेस में करियर की शुरुआत की। वहां से वह टेस्ला में शामिल हुईं, जहां उन्होंने मॉडल एक्स के विकास में योगदान दिया, लेकिन जल्द ही उनकी रुचि एआई और ह्यूमन कंप्यूटर नेटवर्क में बढ़ने पर वह की ओर से जुड़ गईं. 2018 में उन्हें ओपनएआई में लाया गया, जहां वह तेजी से आगे बढ़कर मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी और 2023 के अंत तक सीईओ बन गईं.

 


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Written by: Dhirendra Mishra

02 Aug 2025  ·  Published: 00:23 IST

कौन हैं हुमायूं कबीर जो ममता बनर्जी को दे रहे हैं खुली चुनौती?

पश्चिम बंगाल की बेलडांगा सीट से विधायक हुमायूं कबीर

पश्चिम बंगाल की बेलडांगा सीट से विधायक हुमायूं कबीर

पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों एक नाम को लेकर खूब गरम है, वो हैं हुमायूं कबीर. टीएमसी के निलंबित विधायक अपने बयानों, नए राजनीतिक ऐलानों और ममता बनर्जी पर तीखे हमलों की वजह से अचानक सुर्खियों में आ गए हैं. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी संरचना बनाने की घोषणा के बाद पार्टी ने उन पर अनुशासनहीनता और सांप्रदायिक राजनीति का आरोप लगाकर निलंबित कर दिया, लेकिन हुमायूं कबीर यहीं नहीं रुके. उन्होंने अब मुख्यमंत्री को खुला चैलेंज दे दिया है और अपनी नई राजनीतिक शुरुआत के संकेत भी दे दिए हैं.

कौन हैं टीएमसी से निकाले गए हुमायूं कबीर?

पश्चिम बंगाल की बेलडांगा सीट से विधायक हुमायूं कबीर ने राजनीति 1993 में कांग्रेस के साथ शुरू की थी. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के करीबी माने जाने वाले हुमायूं कबीर ने पहली बार कांग्रेस में रहते ही पंचायत चुनाव में अपना नसीब आजमाया था. विधानसभा चुनाव भी पहला 2011 में कांग्रेस में रहते हुए ही लड़ा और जीते. एक साल में ही उनका कांग्रेस से मन भर गया और नवंबर 2012 में हुमायूं कबीर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए. तृणमूल कांग्रेस में हुमायूं कबीर को मंत्री बनाया गया. मंत्री बने रहने के लिए जरूरी चुनाव जीतने की शर्त पूरी करने के लिए रेजिनानगर विधानसभा उपचुनाव में उतरे, लेकिन हार गए, इसलिए मंत्रीपद भी गंवाना पड़ा.

कबीर सुर्खियों में क्यों?

हुमायूं कबीर ने जुलाई 2025 में घोषणा की थी कि अगर TMC अपने मुर्शिदाबाद जिला नेतृत्व में सुधार नहीं करता. तो वे अपनी अलग पार्टी बनाएंगे. उन्होंने कहा था कि नई पार्टी 2026 विधानसभा चुनाव में 50–52 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. अब दिसंबर 2025 में, कबीर ने एक और विवादित बयान देते हुए कहा कि मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखूंगा. 

इसके बाद TMC ने उन पर कार्रवाई करते हुए टीएमसी से सस्पेंड कर दिया है. TMC का कहना है कि कबीर सांप्रदायिक राजनीति (communal politics) कर रहे थे, जो पार्टी की नीतियों के खिलाफ है. सस्पेंशन के तुरंत बाद हुमायूं कबीर ने कहा कि वे 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी का ऐलान करेंगे और 2026 के चुनावों में टीएमसी व अन्य पार्टियों को टक्कर देंगे.

उन्होंने यह दावा भी किया कि वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2026 में मुख्यमंत्री नहीं बनेंगी. उन्होंने ममता बनर्जी को RSS का एजेंट तक करार दिया है. इससे पहले मुर्शिदाबाद व अन्य हिस्सों में नई पार्टी बनाने की चेतावनी दी है. 

पश्चिम बंगाल की बेलडांगा सीट से विधायक हुमायूं कबीर ने राजनीति 1993 में कांग्रेस के साथ शुरू की थी. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के करीबी माने जाने वाले हुमायूं कबीर ने पहली बार कांग्रेस में रहते ही पंचायत चुनाव में अपना नसीब आजमाया था. विधानसभा चुनाव भी पहला 2011 में कांग्रेस में रहते हुए ही लड़ा और जीते. एक साल में ही उनका कांग्रेस से मन भर गया और नवंबर 2012 में हुमायूं कबीर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए. तृणमूल कांग्रेस में हुमायूं कबीर को मंत्री बनाया गया. मंत्री बने रहने के लिए जरूरी चुनाव जीतने की शर्त पूरी करने के लिए रेजिनानगर विधानसभा उपचुनाव में उतरे, लेकिन हार गए, इसलिए मंत्रीपद भी गंवाना पड़ा.


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Written by: Dhirendra Mishra

05 Dec 2025  ·  Published: 16:34 IST