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फाइल फोटो
GST Cut 2025 India: त्योहारों से पहले केंद्र सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है. सोमवार को हुई 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिन्हें किसी प्री-दिवाली गिफ्ट से कम नहीं कहा जा सकता. बैठक में यह तय हुआ कि 22 सितंबर 2025 से 100 से ज्यादा जरूरी और रोजमर्रा की चीजों पर जीएसटी कम किया जाएगा. इस फैसले से आम लोगों के लिए न सिर्फ पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स बल्कि हेल्थ और फिटनेस सर्विसेज भी सस्ती हो जाएंगी. यानी अब जिम, सैलून, स्पा या योगा सेंटर जाने के लिए पहले की तुलना में कम खर्च करना पड़ेगा.
हेल्थ और फिटनेस सेवाएं
अभी तक जिम, सैलून, स्पा और योग केंद्रों जैसी सेवाओं पर 18% जीएसटी लगता था. अब इसे घटाकर सिर्फ 5% कर दिया गया है. हालांकि इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा नहीं होगी, लेकिन इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा।
उदाहरण: जिम फीस
मान लीजिए किसी जिम की मासिक फीस ₹2,000 है.
| बेस फीस | GST% | GST राशि | टोटल फीस | |
| पहले (18% GST): | ₹2,000 | 18 | ₹360 | ₹2,360 |
| अब (5% GST): | ₹2,000 | 5 | ₹100 | ₹2,100 |
| बचत | ₹260 |
यानी हर महीने सिर्फ टैक्स कम होने से ही एक ग्राहक को ₹260 की बचत होगी। साल भर में यह रकम हजारों रुपये तक पहुँच सकती है.
पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर राहत
सरकार ने रोजाना इस्तेमाल होने वाले कई पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर भी टैक्स घटाने का ऐलान किया है. अब बालों का तेल, शैंपू, साबुन, टूथपेस्ट और शेविंग क्रीम जैसी चीजों पर सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा. पहले इन पर 18% तक टैक्स देना पड़ता था.
उदाहरण: शैंपू की बोतल
मान लीजिए किसी शैंपू की बेस कीमत ₹300 है.
| बेस फीस | GST% | GST राशि | टोटल फीस | |
| पहले (18% GST): | ₹300 | 18 | ₹54 | ₹354 |
| अब (5% GST): | ₹300 | 5 | ₹15 | ₹315 |
| बचत | ₹39 |
यह तो सिर्फ एक बोतल का हिसाब है। अगर पूरे महीने का घरेलू खर्च देखें तो साबुन, शैंपू और पर्सनल केयर की अन्य चीजों पर परिवारों को सैकड़ों रुपये की बचत होगी।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्या है?
जीएसटी में अक्सर ITC (Input Tax Credit) शब्द सुनाई देता है. इसका मतलब है, जब कोई दुकानदार या सर्विस प्रोवाइडर (जैसे जिम मालिक या सैलून वाला) अपने काम के लिए सामान खरीदता है, तो उस पर टैक्स चुकाता है. बाद में जब वह कस्टमर से पैसा लेता है, तो पहले से चुकाए गए टैक्स को घटा लेता है. इसे ही ITC कहा जाता है. लेकिन जिम, सैलून और वेलनेस सर्विसेज पर जीएसटी घटाने के साथ सरकार ने ITC की सुविधा हटा दी है. इसका फायदा यह होगा कि सर्विस प्रोवाइडर कीमत बढ़ाने का बहाना नहीं बना पाएगा और ग्राहकों को सीधे कम जीएसटी का लाभ मिलेगा.
आम जनता पर असर
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को होगा. हेल्थ और वेलनेस सस्ती: जिम, योगा क्लास और सैलून की फीस अब पहले से कम होगी.
घरेलू खर्च हल्का: साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट जैसी चीजों पर टैक्स कम होने से हर महीने की बचत बढ़ेगी.
हेल्दी लाइफस्टाइल आसान: फिटनेस और पर्सनल केयर की सेवाएं सस्ती होंगी तो ज्यादा लोग इन्हें अपनाएंगे.
बजट में राहत: त्योहारों के मौसम में परिवारों का खर्च कम होगा और जेब पर बोझ घटेगा.
भारत की नेपाल की दो टूक (फाइल फोटो)
Mobile Recharge price Hike Jio Airtel VI News: अब मोबाइल पर इंटरनेट इस्तेमाल करना जेब पर और भारी पड़ने वाला है. देश की दो बड़ी टेलीकॉम कंपनियां रिलायंस जियो (Reliance Jio) और भारती एयरटेल (Bharti Airtel) ने अपने एंट्री-लेवल प्रीपेड प्लान्स बंद कर दिए हैं. इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि अब सस्ते रिचार्ज की सुविधा खत्म हो चुकी है.
टेलीकॉम कंपनियों का यह फैसला औसत राजस्व (ARPU) बढ़ाने के लिहाज से तो सही माना जा रहा है, लेकिन ग्राहकों के लिए इंटरनेट डेटा पहले से महंगा हो जाएगा. खासकर वे लोग जो हर महीने बेसिक पैक से गुजारा कर रहे थे, उन्हें अब ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. कामकाजी लोग जिनकी रोजी रोटी मोबाइल फोन के डेटा पर टिकी है, उनका महाना बजट बिगड़ सकता है.
जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के मौजूदा प्लान्स
अब देखते हैं कि तीनों बड़ी कंपनियां कौन-कौन से कम से कम 1GB डेटा रोजाना वाले प्रीपेड पैक ऑफर कर रही हैं, जिनकी वैधता 28 दिन है.
रिलायंस जियो
₹299 प्लान: 1.5 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
₹349 प्लान: 2 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
भारती एयरटेल
₹349 प्लान: 1.5 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
₹361 प्लान: 50 GB प्रति माह, वैधता 30 दिन
वोडाफोन-आइडिया (Vi)
₹299 प्लान: 1 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
₹349 प्लान: 1.5 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
₹408 प्लान: 2 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
टेलीकॉम मार्केट में बढ़ा मुकाबला
जियो और एयरटेल का यह कदम सीधी टक्कर को और तेज कर देगा, क्योंकि दोनों कंपनियां भारत की नंबर 1 टेलीकॉम ऑपरेटर बनने की जंग लड़ रही हैं. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 में रिलायंस जियो ने 19 लाख (1.9 मिलियन) नए यूजर्स जोड़े.
वहीं भारती एयरटेल ने 7.6 लाख (763,482) ग्राहक बढ़ाए. दूसरी तरफ वोडाफोन-आइडिया (Vi) की हालत और खराब हो गई और कंपनी ने करीब 2.17 लाख (217,816) यूजर्स खो दिए.
क्या मतलब है आम उपभोक्ता के लिए?
इस फैसले से साफ है कि मोबाइल डेटा अब सस्ता नहीं रहेगा. आम ग्राहक को महीनेभर की इंटरनेट जरूरत पूरी करने के लिए कम से कम ₹299 से ₹349 खर्च करने होंगे. पहले जहां कम पैसों में बेसिक रिचार्ज से काम चल जाता था, अब वही खर्च बढ़कर दोगुना हो जाएगा. कुल मिलाकर, जियो और एयरटेल का यह कदम कंपनियों के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन आम जनता की जेब पर सीधा बोझ डालने वाला है.
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(फाइल फोटो)
GST Tax Slab on Mobile Purchase: मोबाइल फोन अब महज एक लग्जरी नहीं बल्कि भारत के 90 करोड़ से ज्यादा लोगों की डिजिटल दुनिया से जुड़ने की बुनियादी जरूरत बन चुका है. ऐसे में मोबाइल पर 18 फीसदी GST को "पिछड़ा कदम" करार देते हुए इंडस्ट्री बॉडी ने सरकार से अपील की है कि इसे 5 फीसदी जीएसटी स्लैब में लाया जाए, आगामी जीएसटी सुधारों से पहले यह मांग और तेज हो गई है.
भारत में मोबाइल फोन पर लगने वाला 18 फीसदी वस्तु एवं सेवा कर (GST) अब विवाद का विषय बन गया है. मोबाइल उद्योग से जुड़ी संस्था इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि आगामी जीएसटी सुधारों में मोबाइल फोन और संबंधित उत्पादों को 5 फीसदी टैक्स स्लैब में लाया जाए.
मोबाइल के लिए 5% GST स्लैब की मांग
ICEA का कहना है कि मोबाइल फोन अब सिर्फ "आकांक्षात्मक" (aspirational) चीज नहीं रही, बल्कि जरूरी डिजिटल उपकरण बन गई है, खासकर उन 90 करोड़ भारतीयों के लिए जिनकी डिजिटल दुनिया का एकमात्र जरिया मोबाइल है. ICEA के चेयरमैन पंकज मोहिंदरू ने बयान में कहा, "मोबाइल फोन अब एक अत्यावश्यक वस्तु है. इसे 5 फीसदी जीएसटी स्लैब में रखा जाना चाहिए, ताकि पीएम मोदी के 500 बिलियन डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम के लक्ष्य को हासिल किया जा सके."
ICEA के चेयरमैन पंकज मोहिंदरू ने आगे कहा कि अगर मोबाइल फोन आम लोगों के लिए महंगे बने रहते हैं, तो डिजिटल इंडिया का सपना अधूरा रह जाएगा. "कम टैक्स से मोबाइल की कीमतें घटेंगी, मांग बढ़ेगी और हर भारतीय को डिजिटल एक्सेस मिल सकेगा."
जीएसटी बढ़ा तो बिक्री घटी
ICEA के मुताबिक, जब 2020 में मोबाइल पर GST 12 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी किया गया, तभी से देश में मोबाइल की सालाना बिक्री 300 मिलियन यूनिट से घटकर 220 मिलियन यूनिट पर आ गई. इसका मतलब है कि लोग मोबाइल बदलने में ज्यादा वक्त लगा रहे हैं, यानी रीप्लेसमेंट साइकल धीमा हो गया है.
मैन्युफैक्चरिंग में उछाल, घरेलू बाज़ार में सुस्ती
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मोबाइल निर्माण का आंकड़ा 2015 के ₹18,900 करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹5.45 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन चुका है और मोबाइल का निर्यात ₹2 लाख करोड़ के पार चला गया है.
लेकिन इसके उलट घरेलू बाज़ार की हालत कमजोर होती जा रही है. ICEA ने बताया कि जीएसटी लागू होने से पहले ज्यादातर राज्यों में मोबाइल फोन पर सिर्फ 5 फीसदी वैट लगता था, क्योंकि इसे अनिवार्य वस्तु माना गया था. 2017 में जब जीएसटी आया, तो इसे 12 फीसदी टैक्स स्लैब में रखा गया था, जिसे 2020 में बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया गया.
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