जॉली एलएलबी 3
Jolly LLB 3 Box Office Collection: बॉलीवुड के दर्शकों के बीच कोर्टरूम ड्रामा ‘जॉली एलएलबी 3’ ने रिलीज के साथ ही जोरदार धमाल मचा दिया है. पहले दो पार्ट्स की जबरदस्त सफलता के बाद इस फ्रेंचाइजी की तीसरी किस्त से लोगों की उम्मीदें काफी ऊंची थीं, और शुरुआती कलेक्शन ने साफ कर दिया है कि फिल्म इन उम्मीदों पर खरी उतर रही है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलीज से पहले ही फिल्म की एडवांस टिकट बुकिंग ने शानदार रिस्पॉन्स पाया था. सैकनिल्क के अनुसार, ओपनिंग डे पर फिल्म ने 12.50 करोड़ रुपए की कमाई की. इस कमाई के साथ यह साल 2025 में अक्षय कुमार की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग देने वाली फिल्म बन गई है. इससे पहले उनकी फिल्म ‘हाउसफुल 5’ ने 23 करोड़ रुपए की भव्य ओपनिंग दर्ज की थी.
शनिवार को यानी दूसरे दिन फिल्म की कमाई में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया. फिल्म ने एक ही दिन में 20 करोड़ रुपए कमा लिए, जिससे इसका कुल दो दिन का कलेक्शन बढ़कर 32.75 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. यह आंकड़ा साफ करता है कि दर्शक फिल्म को हाथों-हाथ ले रहे हैं और इसका बॉक्स ऑफिस सफर लंबे समय तक जारी रह सकता है.
फिल्म की कहानी एक गंभीर सामाजिक मुद्दे के इर्द-गिर्द घूमती है. इसमें एक भ्रष्ट कारोबारी गरीब किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश करता है. कहानी में मोड़ तब आता है जब अक्षय कुमार का किरदार शुरुआत में गलत पक्ष का बचाव करता है. कोर्ट में उसका सामना अरशद वारसी से होता है, जो अपने पुराने ‘जॉली’ अवतार में लौटकर पूरी फिल्म में दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं. दोनों के बीच की बहसें, नैतिक द्वंद्व और तीखे डायलॉग्स ही फिल्म को और ज्यादा रोचक बना देते हैं.
निर्देशक सुभाष कपूर, जिन्होंने पहले दोनों पार्ट्स का भी निर्देशन किया था, इस बार भी अपनी स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले से दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहे हैं. उनकी कहानी कहने की शैली और कोर्टरूम ड्रामा का सटीक चित्रण फिल्म की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है.
कलाकारों की बात करें तो फिल्म में हुमा कुरैशी, अमृता राव, सौरभ शुक्ला, गजराज राव, सीमा बिस्वास, राम कपूर और बृजेन्द्र कला जैसे अनुभवी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को जीवंत बना दिया है. खासकर गजराज राव ने भ्रष्ट कारोबारी के रोल में गहरी छाप छोड़ी है, जबकि सौरभ शुक्ला एक बार फिर न्यायाधीश की भूमिका में दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रहे हैं.
कुल मिलाकर, ‘जॉली एलएलबी 3’ ने न सिर्फ शानदार ओपनिंग से बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया है बल्कि अपनी दमदार कहानी, सटीक निर्देशन और जोरदार एक्टिंग से दर्शकों को भी खूब प्रभावित किया है. आने वाले दिनों में फिल्म का कलेक्शन और तेजी पकड़ने की पूरी संभावना है.
नीतीश कुमार और PM मोदी
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले प्रदेश के मतदाताओं में आपसी एकजुटता और मजबूती का संदेश देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. इस सियासी रणनीति के तहत पहले जनता दल यूनाइटेड के पटना मुख्यालय में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोटो लगाए. अब यानी गुरुवार को बीजेपी मुख्यालय में सीएम नीतीश कुमार के पोस्टर लगाए गए हैं, जो गठबंधन की मजबूती का संकेत है.
पटना के बीजेपी मुख्यालय में लगाए गए बैनरों में 'सोच दमदार, काम असरदार, फिर एक बार एनडीए सरकार' जैसे नारे लिखे हुए हैं. जेडीयू कार्यालय में पीएम मोदी और नीतीश की तस्वीरें पहली बार एक साथ लगाई गई हैं. इस तस्वीर का बिहार के राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा असर पड़ सकता है.
बिहार की राजनीति का नया समीकरण
बीजेपी नेता संजय मयूख के अनुसार यह तस्वीर बिहार की सियासत में नया समीकरण है. यह आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कई राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है. इससे पहले मंगलवार को जेडीयू प्रदेश कार्यालय में ऐसा पहली बार हुआ कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी तस्वीर लगाई गई. यह तस्वीर बहुत कुछ बयां कर रही है. बिहार से बीजेपी के एमएलसी और राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय मयूख ने कहा कि पोस्टरबाजी का पॉलिटिक्स कोई लेना देना नहीं है. बिहार में एनडीए सरकार विकास के पथ पर अग्रसर है. इस बात का मैसेज देने के लिए सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी के पोस्टर दोनों पार्टियों के कार्यालयों में लगाए गए हैं.
नीतीश और पीएम मोदी बने विकास के प्रतीक
लोगों के इस पोस्टरबाजी का साफ संदेश यह है कि मोदी नेतृत्व कुमार पोस्ट विकास पर्याय हैं. बुधवार को पटना में बीजेपी कार्यकारिणी की बैठक में भी देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यही कहा था कि विकासवाद ही बिहार में चलेगा. एनडीए में कहीं पर कोई पेंच नहीं फंसा है. केंद्र में पीएम नरेंद्र मोदी और प्रदेश में सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में हम लोग चुनाव लड़ेंगे. यह पूछे जाने पर क्या यह मान लें कि चुनाव के बाद फिर नीतीश कुमार ही बिहार के सीएम बनेंगे, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल हम उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे.
2013 की कहानी से क्या है संबंध?
साल 2013 की बात है, जब बिहार के सीएम नीतीश कुमार और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर देशभर के अखबारों में प्रकाशित हुई थी. इस तस्वीर से नीतीश कुमार सख्त नाराज हो गए थे. वह इतने नाराज हुए कि अपने सरकारी आवास पर आयोजित डिनर पार्टी को रद्द कर दिया था. इसके बाद एनडीए और जेडीयू के रिश्तों में दरार आनी शुरू हुई, जो इतनी गहरी हो गई कि नीतीश कुमार ने एनडीए से अलग होने का फैसला कर लिया. साल 2015 में महागठबंधन दलों के साथ चुनाव लड़े और सरकार बनाई. हालांकि, बाद में वो आरजेडी से संबंध समाप्त कर फिर एनडीए शामिल हो गए थे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के सीनियर सलाहकार जवाद लारीजानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी देकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है, जब ट्रंप अपने लग्जरी हाउस मार-ए-लागो में धूप सेंक रहे हों, उसी समय उन्हें गोली लग जाए. ईरान इंटरनेशनल वेबसाइट के अनुसार, 'जब वह पेट के बल धूप में लेटते हों, तब एक छोटा सा ड्रोन उन पर हमला कर सकता है.लारीजानी को अयातुल्ला खामेनेई का करीबी माना जाता है.'
खामेनेई के करीबी का यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘ब्लड पैक्ट’ नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सामने आया है, जो खामेनेई का अपमान करने वालों और उनकी जान को खतरे में डालने वालों के खिलाफ 'बदले' के लिए फंड इकट्ठा कर रहा है. वेबसाइट का दावा है कि अब तक वह 27 मिलियन डॉलर से अधिक जमा कर चुकी है और उसका लक्ष्य 100 मिलियन डॉलर तक पहुंचना है. वेबसाइट पर प्रकाशित एक बयान में कहा गया है, 'हम उन लोगों को इनाम देंगे जो अल्लाह के दुश्मनों और खामेनेई की जान को खतरे में डालने वालों को न्याय दिलाएंगे.'
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ी फार्स न्यूज एजेंसी ने इस अभियान की शुरुआत की पुष्टि की है और धार्मिक समूहों से पश्चिमी देशों के दूतावासों और शहरों के केंद्रों में प्रदर्शन करने की अपील की है. साथ ही यह भी कहा गया कि ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर 'मोहेरेबेह' जैसे इस्लामी कानूनों को लागू किया जाना चाहिए. ईरानी कानून में ‘मोहेरेबेह’ यानी ‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध’ एक गंभीर अपराध है जिसकी सजा मौत है.
ईरान सरकार ने बनाई दूरी
ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन से बातचीत में कहा कि यह ‘फतवा’ न तो सरकार का है और न ही खामेनेई का. लेकिन खामेनेई के अधीन चलने वाले ‘कायहान’ अखबार ने इस बयान को खारिज करते हुए लिखा, 'यह कोई अकादमिक राय नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा का धार्मिक आदेश है.' अखबार ने चेतावनी दी कि भविष्य में अगर किसी ने ऐसी ‘चिंगारी’ भड़काई, तो उसका अंजाम खतरनाक होगा. लेख के अंत में लिखा गया – 'इस्लामिक रिपब्लिक इजरायल को खून में डुबो देगी.'
ममता बनर्जी
West bengal News: पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका दिया. कलकत्ता हाईकोर्ट ने ओबीसी की नई सूची के संबंध में राज्य की ओर से प्रकाशित सभी अधिसूचनाओं पर अंतरिम रोक लगा दी. यह आदेश 31 जुलाई तक लागू रहेगा.
कलकत्ता हाईकोर्ट में ओबीसी सूची को लेकर अगली सुनवाई 24 जुलाई 2025 को होगी. यह मामला जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस राजशेखर मंथा की बेंच में आया था. इससे पहले सोमवार को राज्य ने पोर्टल खोलकर सभी विभागों से जाति प्रमाण पत्र जमा करने के लिए आवेदन मांगा था. हाईकोर्ट ने उस पर भी रोक लगाने का आदेश दिया.
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द करने के मामले में आवेदक ने दावा किया था कि हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार सर्वेक्षण नहीं किया गया. राज्य और पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने तर्क दिया कि सर्वेक्षण सभी नियमों के अनुसार किया गया था और इसकी रिपोर्ट पेश की गई थी. सोमवार को खंडपीठ सर्वेक्षण पद्धति समेत सभी दस्तावेज देखना चाहती है. हालांकि वादी के वकीलों ने दावा किया कि सर्वे के संबंध में कोई अधिसूचना प्रकाशित नहीं की गई.
सरकार की तरफ से दिया गया ये तर्क
आयोग के वकील ने कहा कि सर्वेक्षण न्यायालय के सभी आदेशों के अनुरूप किया गया था. गौरतलब है कि पिछले मंगलवार को विधानसभा सत्र में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि न्यायालय के आदेश पर पिछड़े समुदायों की नई सूची तैयार की गई है. कुछ दिन पहले पिछड़ा वर्ग विकास आयोग ने एक विशिष्ट सूची प्रकाशित की थी कि किन जनजातियों को ओबीसी के रूप में मान्यता दी जाएगी। इसमें 140 समुदायों की पहचान ओबीसी के रूप में की गई थी.