पीएम मोदी
भारत की अर्थव्यवस्था की चमक अब विश्व संस्थानों की रिपोर्टों में भी साफ दिखाई देने लगी है. IMF ने कहा है कि भारत आने वाले दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था का इंजन साबित होगा. रिपोर्ट में अमेरिका और चीन जैसे दिग्गज देशों को भी भारत की बढ़ती ताकत पर नजर रखने की सलाह दी गई है.
रिपोर्ट में भारत का दबदबा
IMF ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि भारत की GDP ग्रोथ रेट 2025 में 7.2% तक रहने का अनुमान है. यह चीन से अधिक और अमेरिका से कई गुना तेज है. संस्था ने माना कि भारत अब दुनिया की सबसे मजबूत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है.
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट का नया हब
IMF की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में निवेश का माहौल पहले से कहीं ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर में रिकॉर्ड विदेशी निवेश आ रहा है.
अमेरिका-चीन के लिए नई चुनौती
IMF का कहना है कि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत से अमेरिका और चीन दोनों को रणनीतिक और व्यापारिक मोर्चे पर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. भारत अब ग्लोबल सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभा रहा है.
नीति और स्थिरता का असर
रिपोर्ट में भारतीय सरकार की आर्थिक नीतियों, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सराहना की गई है. IMF के अनुसार, इन कदमों ने भारत को विश्व अर्थव्यवस्था के केंद्र में ला खड़ा किया है.
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे
महाराष्ट्र की सियासत में अचानक गर्मी बढ़ गई है. एक दिन में दो बार उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की मुलाकात ने नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है. दोनों नेताओं की यह ‘डबल मीटिंग’ क्या आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किसी नए गठबंधन की तैयारी का संकेत है? इस बीच बीजेपी ने भी बड़ा दावा कर सियासी तापमान और बढ़ा दिया है.
बीएमसी चुनाव से पहले पहले मुंबई में ठाकरे बंधुओं की लगातार बढ़ती मुलाकातें महाराष्ट्र की नई राजनीतिक दिशा के संकेत दे रही हैं. बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले राज ठाकरे के शिवतीर्थ निवास पर दोनों नेताओं के बीच गठबंधन को लेकर प्रारंभिक चर्चा हुई थी. अब एक बार फिर रविवार (5 अक्टूबर) को राज ठाकरे मातोश्री पहुंचे. इससे यह सवाल फिर उठा कि क्या शिवसेना यूबीटी और एमएनएस में गठबंधन पर बातचीत चल रही है?
3 माह में 5 मुलाकात
विगत तीन महीनों में ठाकरे बंधु 5 बार मिल चुके हैं. मुंबई के बांद्रा एमसीएम में संजय राउत के पोते का नामकरण का कार्यक्रम था. इसमें राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दोनों साथ पहुंचे. इस कार्यक्रम में दोनों नेताओं ने खुलकर बातें कीं. संजय राउत और अन्य सहयोगियों के साथ हंसी-मजाक करते हुए दोनों का वीडियो भी सामने आया है.
मनसे प्रमुख राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे जब कार्यक्रम से साथ बाहर निकले, तब रश्मि ठाकरे और आदित्य ठाकरे ने खुद राज ठाकरे को विदा किया. बाहर निकलते समय रश्मि ठाकरे, राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया. यह मुलाकात पारिवारिक माहौल में हुई, जिससे वातावरण हल्का-फुल्का और सौहार्दपूर्ण बना रहा.
इसके तुरंत बाद जब राज ठाकरे शिवतीर्थ बंगले पर न जाकर सीधे मातोश्री पहुंचे. राजनीतिक हलकों में फिर से चर्चा तेज हो गई. संजय राउत के नाती के नामकरण समारोह के बाद राज ठाकरे एक बार फिर उद्धव ठाकरे से मातोश्री में मिले. हालांकि, दोनों नेताओं के बीच आखिर क्या बातचीत हुई, इसका विवरण अभी सामने नहीं आया है.
बीजेपी का बड़ा दावा
बीजेपी के विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर ने कहा कि उनकी पार्टी को इन चचेरे भाइयों के एक साथ आने से कोई फर्क नहीं पड़ता है. यह पूछे जाने पर कि क्या दोनों के बीच गठबंधन सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए खतरा बन सकता है, दरेकर ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि इन दावों में कोई सच्चाई है कि सत्तारूढ़ (गठबंधन के) दल इस बात से डरे हुए हैं कि राज और उद्धव गठबंधन कर सकते हैं. यह पूरी तरह से काल्पनिक है. मतदाता चुनाव के दौरान फैसला करेंगे.’’
मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इंदौर में परोपकारी संस्था 'गुरुजी सेवा न्यास' द्वारा स्थापित माधव सृष्टि आरोग्य केंद्र का उद्घाटन किया. इसका मकसद लोगों को किफायती दर पर कैंसर उपचार की सुविधा मुहैया कराना है. इस मौके पर कार्यक्रम में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "अच्छी स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा अब आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गया है."
मोहन भागवत ने कहा, "अच्छा स्वास्थ्य और शिक्षा बेहद जरूरी है और इन्हें पहले 'सेवा' माना जाता था, लेकिन अब दोनों ही आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गए हैं. इनका व्यवसायीकरण हो गया है. उन्होंने आगे कहा, "ये न तो सस्ते हैं और न ही सुलभ."
'बीमार व्यक्ति केवल इच्छा कर सकता है'
मोहन भागवत ने आगे कहा, "यह ज्ञान का युग है, इसलिए शिक्षा महत्वपूर्ण है. यदि आप ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, तो साधन शरीर है. एक स्वस्थ शरीर सब कुछ कर सकता है. एक अस्वस्थ शरीर कुछ भी नहीं कर सकता. वह केवल इच्छा कर सकता है. दुर्भाग्य से, ये दोनों आज एक सामान्य व्यक्ति की आर्थिक क्षमता से बाहर हैं."
आरएसएस प्रमुख के अनुसार अस्पतालों और स्कूलों की कोई कमी नहीं थी, लेकिन पहले इन्हें एक सेवा माना जाता था और इस प्रकार ये आम लोगों की पहुंच में थे. आज, इसे व्यावसायिक बना दिया गया है. मानवीय विचारों व सोच ने इसे ऐसा बनाया है. मैंने कुछ साल पहले एक मंत्री से सुना था कि भारतीय शिक्षा एक खरब डॉलर का व्यवसाय का है. यह एक आम आदमी की पहुंच से बाहर है. खासकर उन लोगों के लिए जो सिर्फ वेतन के भरोसे जीते हैं. पहले, शिक्षा देना उनका कर्तव्य माना जाता था. अब, आपको यह अनुमान लगाना होगा कि इसकी लागत कितनी होगी.
'चिकित्सा सेवा बन गया पेशा'
उन्होंने यह भी कहा कि कॉर्पोरेट युग में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा केंद्रीकृत हो गई हैं, जिसके कारण छात्रों और आम लोगों को इसका लाभ उठाने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है. उन्होंने कहा, "अतीत में शिक्षा शिक्षकों का कर्तव्य थी जो अपने छात्रों की चिंता करते थे. जैसे डॉक्टरों का कर्तव्य था जो बीमारों का इलाज करते थे, लेकिन अब, दोनों ही एक पेशा बन गए हैं."
सीएम हेमंत सोरेन
बिहार चुनाव प्रचार के बीच अब इसको लेकर झारखंड की सियासत में अब हलचल बढ़ गई है. जब Jharkhand Mukti Morcha (JMM), जो कि इंडिया ब्लॉक के एक अहम घटक है, ने बहुचर्चित बिहार विधानसभा चुनाव में गठबंधन की राह छोड़ते हुए अपनी राह चुनने का संकेत दिया है. इसके पीछे JMM की अनुभूति है कि उन्हें गठबंधन में पर्याप्त अहमियत नहीं दी गई. इस कदम ने भारत के मुख्य विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक को भीतर से हिलाने का संकेत दे दिया है, खासकर जब राज्य-स्तर पर JMM की भूमिका तथा उसकी रणनीति पर अब नए प्रश्न उठ रहे हैं. महागठबंधन के किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार-प्रसार नहीं करेगी. अब देखना है कि क्या झारखंड में भी इंडिया अलायंस का गठबंधन टूट जाएगा.
JMM ने चुनाव न लड़ने का किया फैसला
सुदिव्य कुमार ने बताया कि पार्टी का यह निर्णय कांग्रेस और राजद द्वारा गठबंधन धर्म का पालन न करने के कारण लिया गया. उन्होंने कहा कि बिहार में सीट बंटवारे और अन्य व्यवस्थाओं में झामुमो को उलझा कर रखा गया और अंतिम समय में कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुईं, जिससे JMM ने बिहार में चुनाव न लड़ने का फैसला किया. मंत्री ने आरोप लगाया कि जिस प्रकार झारखंड में कांग्रेस और राजद को बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए सहयोग और सीटें दी गईं, उसी प्रकार बिहार में झामुमो के साथ अन्याय हुआ.
कांग्रेस ने झामुमो के पक्ष में नहीं लिया स्टैंड
सुदिव्य कुमार ने आगे कहा कि कांग्रेस ने झामुमो के पक्ष में कोई स्पष्ट स्टैंड नहीं लिया और न ही मध्यस्थता के लिए कोई पहल की. इस कारण, झामुमो ने बिहार में चुनाव नहीं लड़ने का कदम उठाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में राजद और कांग्रेस दोनों जिम्मेदार हैं.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली JMM ने भी बिहार में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. पार्टी ने कहा कि वह किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी और केवल छह विधानसभा सीटों चकाई, धमदाहा, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती से अपने उम्मीदवार उतारेगी. JMM के महासचिव सुप्रीमो भट्टाचार्य ने बताया कि इन सीमावर्ती सीटों में पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है और उनका मुख्य फोकस आदिवासी और वंचित वर्ग के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना रहेगा.
बीजेपी ने JMM के फैसले पर कसा तंज
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि JMM ने पिछले एक हफ्ते में अपना स्टैंड बदलकर बेशर्मी की नई मिसाल कायम की. पहले बंगाल से भागा, अब बिहार से भी भाग गया। पूरा घटनाक्रम ‘भाग JMM भाग’ की याद दिलाता है.
जानकारों का मानना है कि JMM की नाराजगी और बिहार में सीट बंटवारे पर असंतोष इंडिया अलायंस के लिए झारखंड में चुनौती बन सकता है. इस कदम का असर न केवल बिहार चुनाव में, बल्कि झारखंड में गठबंधन की सियासी स्थिति पर भी देखा जाएगा. यदि गठबंधन में संतुलन नहीं बना तो इंडिया अलायंस के झारखंड में टूटने की संभावना भी बढ़ सकती है.