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WHO Gaza Attack: गाज़ा में जारी संघर्ष के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसराइली सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। WHO का कहना है कि सोमवार को इसराइली हवाई हमलों में गाज़ा के देर अल-बलाह शहर में उसके कर्मचारियों के घर और मुख्य गोदाम को निशाना बनाया गया। इन हमलों की वजह से इलाके में आग लग गई, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों की जान खतरे में पड़ गई।
डब्ल्यूएचओ ने दावा किया कि हमले के बाद इसराइली सैनिकों ने उसके पुरुष कर्मचारियों को बंदूक की नोक पर रोका और उनसे पूछताछ की गई। इस दौरान उनके कपड़े भी उतरवाए गए, जो एक अपमानजनक और चिंताजनक स्थिति थी। संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। हालांकि इसराइल की ओर से अब तक WHO के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
गौरतलब है कि सोमवार को पहली बार इसराइली टैंक देर अल-बलाह शहर के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में दाखिल हुए। इससे पहले रविवार को इसराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने स्थानीय लोगों को आदेश दिया था कि वे तुरंत इस क्षेत्र को खाली कर दें।
WHO ने बताया कि उसका गोदाम गाज़ा में मानवीय सहायता के वितरण के लिए एक अहम केंद्र था। वहां दवाइयाँ, जीवन रक्षक उपकरण और अन्य आवश्यक वस्तुएँ रखी गई थीं। अब इस गोदाम के जलने और क्षतिग्रस्त होने के कारण गाज़ा के लोगों तक ज़रूरी मदद पहुँचाने में भारी बाधा आ रही है।
गाज़ा में हालात पहले से ही बेहद गंभीर हैं। अस्पतालों में दवाइयों की कमी है, लोग खाने-पीने की वस्तुओं के लिए तरस रहे हैं और सुरक्षित स्थानों की भारी कमी है। ऐसे में WHO का कहना है कि उसके ठिकानों पर हमला मानवीय राहत कार्यों को और मुश्किल बना देगा।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पहले भी गाज़ा में स्वास्थ्य और राहत सेवाओं पर हमलों को लेकर चिंता जताई है। WHO ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह इन घटनाओं को गंभीरता से ले और मानवीय कानूनों की रक्षा के लिए कदम उठाए।
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Jagdeep Dhankhar Resignation: कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को दावा किया कि उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के पीछे सिर्फ़ उनकी सेहत ही नहीं, बल्कि कुछ और गंभीर कारण भी हैं। कांग्रेस ने कहा कि धनखड़ का इस्तीफा न सिर्फ़ उनके विचारों को दर्शाता है, बल्कि उन्हें उपाध्यक्ष बनाने वालों की नीयत पर भी सवाल उठाता है।
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर कई बातों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि सोमवार दोपहर 12:30 बजे धनखड़ ने राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और किरेन रिजिजू समेत कई सदस्य शामिल हुए। बैठक के बाद तय हुआ कि बैठक शाम 4:30 बजे फिर होगी।
लेकिन जब शाम को दोबारा बैठक हुई, तो नड्डा और रिजिजू नहीं आए। रमेश का दावा है कि न तो धनखड़ को इसकी पहले से जानकारी दी गई और न ही बैठक में अनुपस्थित रहने का कोई कारण बताया गया। इससे धनखड़ आहत हुए और उन्होंने अगली बैठक अगले दिन यानी मंगलवार दोपहर 1 बजे के लिए टाल दी।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि सोमवार दोपहर 1 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच कुछ गंभीर हुआ, जिसके कारण दोनों मंत्री जानबूझकर दूसरी बैठक में नहीं आए। उसी रात, जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
रमेश ने कहा कि भले ही धनखड़ ने अपने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य को कारण बताया हो, लेकिन इसके पीछे कुछ गहरे कारण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धनखड़ नियमों, मर्यादाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति बेहद सजग व्यक्ति थे। उन्होंने न्यायपालिका की जवाबदेही, सार्वजनिक जीवन में विनम्रता और किसानों के अधिकारों की भी कई बार वकालत की थी।
कांग्रेस का यह भी कहना है कि उपाध्यक्ष रहते हुए भी धनखड़ ने विपक्ष को पूरा सम्मान देने की कोशिश की थी, जो आज की सरकार के व्यवहार से अलग लगता है। फिलहाल, सरकार की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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Vice President Election India 2025: देश में उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने बुधवार को अपने उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी का नामांकन दाखिल करा दिया. नामांकन के मौके पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत समेत विपक्ष के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे. इस दौरान विपक्ष ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया.
एनडीए और विपक्ष आमने-सामने
इससे एक दिन पहले ही एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने नामांकन दाखिल किया था. अब मैदान पूरी तरह साफ है और मुकाबला एनडीए बनाम INDIA गठबंधन के बीच होगा. सूत्रों के मुताबिक, सुदर्शन रेड्डी ने चार सेट में नामांकन दाखिल किया, जिनमें 20 प्रस्तावक और 20 समर्थक शामिल थे. नामांकन से पहले उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और महान नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की.
हालांकि नंबर गेम में विपक्षी गठबंधन पीछे है, क्योंकि संसद में एनडीए के पास मजबूत बहुमत है. इसके बावजूद INDIA ब्लॉक ने मुकाबले को दिलचस्प बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. विपक्ष के इस कदम को राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि वे पूरी मजबूती और एकता के साथ लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं.
“दक्षिण बनाम दक्षिण” की तस्वीर
इस चुनाव की एक खासियत यह है कि दोनों ही गठबंधनों ने अपने-अपने उम्मीदवार दक्षिण भारत से चुने हैं. एनडीए ने जहां तमिलनाडु से आने वाले सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, वहीं INDIA गठबंधन ने आंध्र प्रदेश के सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है. ऐसे में यह चुनाव “दक्षिण बनाम दक्षिण” की दिलचस्प तस्वीर पेश कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि विपक्ष का यह फैसला एक रणनीतिक कदम है, क्योंकि दक्षिण भारत में बीजेपी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है और विपक्ष यहां अपनी पकड़ मजबूत करने का संदेश देना चाहता है.
विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
नामांकन के दिन सुबह 11 बजे कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के कक्ष में INDIA गठबंधन के सभी प्रमुख नेता एकत्र हुए. इसके बाद वे सामूहिक रूप से राज्यसभा महासचिव और उपराष्ट्रपति चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर पी.सी. मोदी के दफ्तर पहुंचे और सुदर्शन रेड्डी का नामांकन दाखिल कराया. इस मौके पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूरे कार्यक्रम की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा की.
जयराम रमेश ने लिखा कि विपक्ष के लिए यह केवल एक चुनावी प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का संकल्प है. उन्होंने कहा कि INDIA ब्लॉक भले ही संख्या के हिसाब से कमजोर दिखाई देता हो, लेकिन उसकी राजनीतिक लड़ाई विचारों और सिद्धांतों पर आधारित है.
विपक्ष के लिए चुनाव का महत्व
विशेषज्ञ मानते हैं कि भले ही उपराष्ट्रपति चुनाव में NDA की जीत लगभग तय मानी जा रही हो, लेकिन विपक्ष का उम्मीदवार उतारना राजनीतिक दृष्टि से अहम है. इससे विपक्ष अपनी मौजूदगी और मुद्दों को सामने रख सकता है. साथ ही यह संदेश भी देने की कोशिश है कि विपक्ष केवल प्रतीकात्मक लड़ाई नहीं लड़ रहा, बल्कि वह संसद से लेकर सड़क तक जनता की आवाज उठाने के लिए तैयार है.
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Chief Justice Bhushan Gavai: महाराष्ट्र के दरियापुर (अमरावती) में नए न्यायिक भवन के उद्घाटन समारोह के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण गवई ने न्यायपालिका, प्रशासन और वकीलों को उनकी ज़िम्मेदारी का एहसास बेहद संयमित और कड़े शब्दों में कराया। 28.54 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस भव्य न्यायालय भवन में अब दीवानी और फौजदारी, दोनों तरह के मामलों की सुनवाई होगी।
समारोह में उपस्थित अधिकारियों, न्यायाधीशों और वकीलों को संबोधित करते हुए, सीजेआई गवई ने कहा, "यह कुर्सी जनता की सेवा के लिए है, शान के लिए नहीं। अगर कुर्सी सिर पर चढ़ जाए, तो वह सेवा नहीं, पाप बन जाती है।" यह कथन सिर्फ़ एक चेतावनी ही नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक चेतावनी और हर उस व्यक्ति के लिए एक अनमोल सबक भी था जो किसी भी तरह की प्रशासनिक या न्यायिक कुर्सी पर बैठा है।
उन्होंने ख़ास तौर पर जूनियर वकीलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "आजकल 25 साल का वकील कुर्सी पर बैठा है, और जब 70 साल का कोई सीनियर आता है, तो वह उठता भी नहीं। कुछ तो शर्म करो, सीनियर्स का सम्मान करो।" उन्होंने कहा कि न्यायपालिका वकीलों और न्यायाधीशों, दोनों की है और दोनों के बीच परस्पर सम्मान आवश्यक है।
चीफ जस्टिस ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी भी दी कि कोई भी पद - चाहे वह ज़िला मजिस्ट्रेट हो, पुलिस अधीक्षक हो या न्यायाधीश - अभिमान का कारण नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम होना चाहिए। उन्होंने कहा, "कुर्सी सम्मान की होती है, लेकिन अगर वह अभिमान में बदल जाए, तो न्याय का मूल्य समाप्त हो जाता है।"
यह नया न्यायिक भवन दरियापुर और अंजनगांव क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण उपहार है। इस समारोह में स्थानीय न्यायाधीश, वकील, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, अधिवक्ता संघ और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी मौजूद थे। मुख्य न्यायाधीश गवई का यह भाषण उन सभी लोगों के लिए एक गंभीर और नैतिक संदेश था जो सत्ता, अधिकार या पद के कारण खुद को दूसरों से ऊपर समझते हैं। उन्होंने कहा, "पद मिले तो झुकना सीखो, अहंकार नहीं।"