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Jhalawar School Building Collapse: राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहरथाना ब्लॉक स्थित पिपलोदी गाँव में शुक्रवार, 25 जुलाई की सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहाँ राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत और दीवार अचानक गिर गई। इस हादसे में अब तक 4 बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य बच्चों के मलबे में दबे होने की आशंका है।
हादसे के समय स्कूल में 60 से ज़्यादा छात्र मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्कूल की छत अचानक गिर गई और बच्चे उसमें फंस गए। मलबे में फंसे बच्चों को निकालने के लिए प्रशासन और ग्रामीण मिलकर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। मौके पर जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है, जबकि घायल बच्चों को मनोहरथाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएससी) में भर्ती कराया गया है।
राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने तीन बच्चों की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने ज़िला प्रशासन को राहत कार्य में तेज़ी लाने और घायलों के इलाज के लिए सभी ज़रूरी इंतज़ाम करने के निर्देश दिए हैं। झालावाड़ के एसपी अमित कुमार बुडानिया और कलेक्टर भी मौके पर पहुँच गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल की छत और दीवारें बेहद जर्जर थीं। इसके बावजूद स्कूल में पढ़ाई चल रही थी। भारी बारिश के कारण दीवारों में नमी आ गई थी, जिससे उनकी मज़बूती कमज़ोर हो गई और यह हादसा हुआ। लोगों का आरोप है कि स्कूल की समय पर मरम्मत नहीं की गई, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "झालावाड़ के मनोहरथाना में एक सरकारी स्कूल की इमारत गिरने से कई बच्चों और शिक्षकों के घायल होने की सूचना है। मैं ईश्वर से कम से कम जनहानि और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ।"
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Suresh Raina ED Summons: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्टार बल्लेबाज और खब्बू खिलाड़ी सुरेश रैना से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को पूछताछ की. रैना को ईडी ने 13 अगस्त को समन भेजकर अपने दिल्ली दफ्तर बुलाया था. यह मामला ऑनलाइन बेटिंग ऐप 1xBet से जुड़ा हुआ है, जो भारत में प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म्स में शामिल है.
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने हाल के महीनों में ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ अपनी जांच तेज कर दी है. इसमें खास तौर पर उन सेलिब्रिटी और खिलाड़ियों पर ध्यान दिया जा रहा है, जिन्होंने इन कंपनियों के लिए विज्ञापन किए हैं. इन प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म्स में 1xBet, FairPlay, Parimatch और Lotus365 जैसे नाम शामिल हैं.
सुरेश रैना के मामले में, 1xBet ने दिसंबर 2023 में उन्हें अपना ब्रांड एंबेस्डर बनाया था. उस समय कंपनी ने उन्हें "रेस्पॉन्सिबल गेमिंग एंबेस्डर" का टैग दिया था और दावा किया था कि रैना ऐसे पहले एंबेस्डर हैं जो स्पोर्ट्स बेटिंग फैंस को जिम्मेदारी के साथ खेल में भाग लेने के लिए प्रेरित करेंगे. हालांकि, भारत में इस तरह की ऑनलाइन बेटिंग कानूनी रूप से मान्य नहीं है, और इन्हीं वजहों से ईडी इन सौदों की गहराई से जांच कर रही है.
ईडी पहले भी इस मामले में कई बड़े नामों से पूछताछ कर चुकी है. इसमें पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह और युवराज सिंह के साथ ही फिल्मी हस्तियां सोनू सूद और उर्वशी रौतेला भी शामिल हैं. माना जा रहा है कि इन सभी से पूछताछ का मकसद यह पता लगाना है कि उन्होंने इन कंपनियों के लिए प्रमोशन कैसे किया. भुगतान किस माध्यम से हुआ और क्या इन डील्स में मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अवैध लेन-देन की भूमिका रही.
1xBet और अन्य ऐसे प्लेटफॉर्म विदेशी ऑपरेटरों द्वारा चलाए जाते हैं और भारत में इनके विज्ञापन कानूनी विवादों का कारण बन चुके हैं. कई बार यह आरोप भी लगाए गए हैं कि ऐसे ऐप न केवल सट्टेबाजी को बढ़ावा देते हैं, बल्कि अवैध वित्तीय लेन-देन का जरिया भी बनते हैं.
सुरेश रैना की पूछताछ ऐसे समय हो रही है जब ईडी पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की कोशिश में है. फिलहाल रैना या उनके प्रतिनिधियों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. यह देखना दिलचस्प होगा कि ईडी की जांच आगे किन नामों तक पहुंचती है और क्या इसमें और भी मशहूर खिलाड़ी या फिल्मी सितारे शामिल निकलते हैं.
Ahmedabad Plane Crash
गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार को अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरने के तत्काल बाद एयर इंडिया का विमान हादसे का शिकार हो गया. इस हादसे में 241 लोग मारे गए. इंटरनेशनल फ्लाइट में क्रू मेंबर्स समेत 242 पैसेंजर्स सवार थे.
Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरने वाला एयर इंडिया का प्लेन 12 जून 2025 को अहमदाबाद में क्रैश हो गया. इंटरनेशनल फ्लाइट में क्रू मेंबर्स समेत 242 पैसेंजर्स सवार थे. इस भीषण विमान हादसे में 241 लोग मारे गए. प्लेन में सवार लोगों में सिर्फ एक शख्स जिंदा बचा. इस विमान हादसे ने भारत में हुए बड़े विमान हादसे की याद दिला दी। जानिए देश में कब-कब हुए बड़े विमान हादसे?
एयर इंडिया एकसप्रेस फ्लाइट हादसा 2010
एयर इंडिया एक्सप्रसे फ्लाइट 812, 22 मई 2010 को कर्नाटक के मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरते समय रनवे से आगे निकल गई. दुबई से आ रहा यह बोइंग 737—800 टेबलटॉप रनवे से आगे खाई में गिर गया और उसमें आग लग गई. इस हादसे में 158 लोगों की मौत हुई थी.
एलायंस एय फ्लाइट हादसा 2000
एलायंस एयर फलइट 17 जुलाई 2000 को उतरने का प्रयास करते समय बिहार के पटना में घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस हादसे में भी काफी संख्या में लोगों की मौत हई थी.
चरखी दादरी हवाई टक्कर 1996
12 नवंबर 1996 को भारत की सबसे विनाशकारी विमान दुर्घटना हुई थी. इसमें 349 लोग मारे गए थे. यह त्रासदी तब हुई जब जब सउदी फ्लाइट बोइंग 747 और कजाकिसतान एयराइंस की फ्लाइट 1907 इल्यूशिन आईएल 76 हरियाणा के चरखी दादरी में हवा में ही टकरा गई. इस घटना के बाद भारत ने सभी कमर्शियल विमानों पर ट्रैफिक टकराव परिहार प्रणाली की स्थापना को अनिवार्य करने की सहित कई विमानन सुरक्षा उपायों पर अमल किया.
इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट हादसा 1990
14 फरवरी 1990 को इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट 605 बेंगलुर के एचएएल एयरपोर्ट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस घटना में विमान में सवा 146 लोगों में से 92 की मौत हो गई. उस समय भारत में नया विमान एयरबस ए320 बहुत नीचे उतरा और रनवे से पहले ही जमन पर जा गिरा. जांच में पता चला कि पायलट की गलती और ए320 के लेटेसट डिजिटल कॉकपिट से अनजानेपन ने भी इस हादसे में अहम भूमिका निभाई.
इंडियन एयराइंस फ्लाइट 1988 19 अक्टूबर 1988 को लो विजिबिलीटी के कारण यह फ्लाइट अहमदाबाद के पास हादसे का शिकार हुई थी. मुंबई से आ रही यह फ्लाइट पेड़ों से टकरा गई और रनवे से पहले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस हादसे में विमान में सवार 135 में से 133 लोगों की मौत हुई थी. जांचकर्ताओं ने पायलट की गलती, अपर्याप्त मौसम की जानकारी और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की चूक को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया था.
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उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को विपक्षी दलों ने संयुक्त उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके नाम की घोषणा की और कहा कि विपक्षी दलों में इस नाम को लेकर पूरी सहमति है.
कौन हैं बी. सुदर्शन रेड्डी?
बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को हुआ. उन्होंने बीए और एलएलबी की पढ़ाई की. साल 1971 में वे हैदराबाद में आंध्र प्रदेश बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए और वहीं से उन्होंने कानूनी करियर की शुरुआत की. उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में रिट और सिविल मामलों में प्रैक्टिस की. बाद में 1988 से 1990 तक वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में सरकारी वकील भी रहे. केंद्र सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील और उस्मानिया विश्वविद्यालय के कानूनी सलाहकार के रूप में भी उन्होंने काम किया.
साल 1995 में उन्हें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया. इसके बाद दिसंबर 2005 में वे गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने. जनवरी 2007 में बी. सुदर्शन रेड्डी को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया, जहां से वे 8 जुलाई 2011 को रिटायर हुए.
करियर और साख
अपने पूरे न्यायिक करियर में बी. सुदर्शन रेड्डी ने निष्पक्ष और पारदर्शी छवि बनाई. उनके फैसले और दृष्टिकोण हमेशा न्याय और संविधान की मूल भावना पर आधारित रहे. यही वजह है कि विपक्षी दलों ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला किया. उनका गैर-राजनीतिक और साफ सुथरा रिकॉर्ड विपक्ष की रणनीति के लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है.
तेलंगाना की सोशल इंजीनियरिंग में भूमिका
बी. सुदर्शन रेड्डी की एक बड़ी पहचान उनकी सोशल इंजीनियरिंग में भूमिका रही है. तेलंगाना सरकार ने 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक-आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार, राजनीतिक और जातिगत सर्वेक्षण (SEEEPC) शुरू किया था. इस सर्वे के आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित करने और निष्पक्ष विश्लेषण के लिए जो विशेषज्ञ समिति बनाई गई, उसकी अध्यक्षता बी. सुदर्शन रेड्डी ने की.
इस पैनल का काम था यह देखना कि सर्वे के डेटा में कोई गड़बड़ी न हो और सभी आंकड़े पारदर्शी हों. साथ ही, यह सुनिश्चित करना कि सरकार भविष्य की नीतियों को बनाने के लिए इन आंकड़ों का सही उपयोग कर सके. उनकी अध्यक्षता में इस सर्वेक्षण ने तेलंगाना की सामाजिक संरचना और विकास योजनाओं के लिए नई दिशा तय की.
INDIA ब्लॉक ने क्यों चुना बी. सुदर्शन रेड्डी को?
INDIA ब्लॉक की रणनीति साफ थी. वे ऐसे चेहरे को उतारना चाहते थे जिनकी विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे और जिनकी छवि राजनीति से अलग और निष्पक्ष हो जस्टिस रेड्डी इन मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं. इसके अलावा विपक्ष के भीतर अलग-अलग दलों की अपनी-अपनी शर्तें थीं. उदाहरण के लिए, डीएमके चाहती थी कि उम्मीदवार दक्षिण भारत से हो, जबकि तृणमूल कांग्रेस गैर-राजनीतिक नाम चाहती थी. आम आदमी पार्टी भी साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवार की मांग कर रही थी. जस्टिस रेड्डी का नाम सामने आने के बाद सभी की सहमति मिल गई.
एनडीए की रणनीति और विपक्ष की चाल
इधर एनडीए ने सी. पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है. यह नाम खास तौर पर दक्षिण भारत की राजनीति को साधने के मकसद से चुना गया था. एनडीए की कोशिश थी कि दक्षिण की पार्टियों जैसे टीडीपी, वाईआरसीपी और बीआरएस को धर्मसंकट में डाला जाए, ताकि वे एनडीए का समर्थन करने से हिचकिचाएं नहीं लेकिन INDIA ब्लॉक ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उतारकर इस चाल को पलट दिया. अब विपक्षी दलों का कहना है कि एनडीए ने अपना उम्मीदवार "संघ से लाया है" जबकि उन्होंने उम्मीदवार "सुप्रीम कोर्ट से लाया है. यह विपक्ष के लिए बड़ा नैरेटिव बन सकता है.
क्या असर होगा चुनाव पर?
बी. सुदर्शन रेड्डी का नाम आने के बाद विपक्ष एकजुट दिख रहा है. आम आदमी पार्टी ने भी उनका समर्थन किया है. अब निगाहें टीडीपी, वाईआरसीपी और बीआरएस जैसे दलों पर हैं, जिनके रुख से इस चुनाव की तस्वीर और साफ होगी. अगर विपक्ष एकजुट होकर मैदान में उतरा तो यह मुकाबला काफी रोचक हो सकता है. साथ ही, विपक्ष इस नाम को "संविधान बचाने" और "न्यायिक मूल्यों की रक्षा" जैसे बड़े मुद्दों से भी जोड़ सकता है.