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Gujarat News: गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के एक बड़े मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में चार संदिग्धों – मोहम्मद फैक, मोहम्मद फरदीन, सेफुल्लाह कुरैशी और जीशान अली – को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी आतंकी संगठन की विचारधारा फैलाने और फेक करेंसी के जरिए फंड जुटाने में लगे थे।
ATS की जांच में खुलासा हुआ कि आतंकियों के पास ऐसे मोबाइल ऐप थे, जिनसे संदेश अपने-आप डिलीट हो जाते हैं। एजेंसियों का मानना है कि यह मॉड्यूल गुजरात को खास निशाना बना रहा था। इससे पहले असम में भी इसी तरह का एक मॉड्यूल सामने आया था, जहां आतंकियों के बांग्लादेशी आतंकी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम से संपर्क होने के प्रमाण मिले हैं।
सूत्र ने किया बड़ा दावा
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI "ऑपरेशन सिंदूर" के जवाब में AQIS के जरिए भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है। AQIS की स्थापना 2014 में अयमान अल-जवाहिरी ने की थी और इसका नेतृत्व भारतीय मूल का असीम मुनीर कर रहा था। यह संगठन अब जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और गुजरात में सक्रियता बढ़ा रहा है।
भगवा शासन के पीछे कौन
खतरनाक बात यह है कि AQIS ने अपने एक बयान में भारतीय मुसलमानों से 'भगवा शासन' के खिलाफ जिहाद छेड़ने की अपील की थी। यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आया, जिससे साफ है कि यह संगठन पाकिस्तान के हितों को भारत में लागू करना चाहता है।
AQIS क्या है?
इतिहास में भी AQIS भारत के खिलाफ सक्रिय रहा है। मुंबई हमलों से पहले डेविड हेडली ने इस संगठन से मिलकर गुजरात और यूपी जैसे राज्यों में हमले की योजना बनाई थी। हाल ही में प्रत्यर्पित आतंकी तहव्वुर राणा भी देश के कई हिस्सों की यात्रा कर चुका था।
कौन चला रहा है गजवा-ए-हिंद मिशन?
अब AQIS भारत में ‘गजवा-ए-हिंद’ नाम से मिशन चला रहा है और ‘नवा-ए-गजवा-ए-हिंद’ नाम की उर्दू मैगजीन भी निकाल रहा है। एजेंसियों के अनुसार, यह संगठन सोशल मीडिया और धार्मिक कट्टरता के जरिए भारत में युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
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Supreme Court on Dog Bite Cases: दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर शेल्टर होम्स में रखने के फैसले पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई पूरी कर ली और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. यह मामला उन लोगों और संगठनों के बीच बहस का केंद्र बन गया है जो जानवरों के अधिकारों की रक्षा करते हैं, और उन लोगों के बीच जो सड़कों पर बढ़ती कुत्तों की संख्या और उससे जुड़े खतरों को लेकर चिंतित हैं.
एनजीओ और वकीलों की आपत्तियां
इस मामले में कई गैर-सरकारी संगठनों (NGO) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इन संगठनों की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि कोर्ट के 11 अगस्त के आदेश के उस हिस्से को रोका जाए जिसमें आवारा कुत्तों को शेल्टर होम्स में डालने का निर्देश दिया गया है.
सिब्बल ने कहा कि कोर्ट के आदेश में कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने की बात का पालन होना चाहिए, लेकिन उन्हें पकड़कर स्थायी रूप से वहां रखना उचित नहीं है. उन्होंने पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 (Animal Birth Control Rules 2023) का हवाला देते हुए बताया कि इन नियमों के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी की जानी चाहिए और फिर उन्हें उनके मूल स्थान पर छोड़ा जाना चाहिए.
सिब्बल ने सवाल उठाया, "नगर निगम ने इतने सालों में इस दिशा में क्या किया? क्या उन्होंने पर्याप्त शेल्टर होम्स बनाए?" उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि यह आदेश लागू किया गया तो बड़ी संख्या में कुत्तों को मारना पड़ सकता है.
अन्य पक्षों की राय
सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी सिब्बल का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि अगर पहले से पर्याप्त शेल्टर होम होते, तो इस निर्देश पर किसी को आपत्ति नहीं होती, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह आदेश व्यावहारिक नहीं है. वहीं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अलग दृष्टिकोण रखा. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जानवरों का मुद्दा नहीं है, बल्कि जन सुरक्षा का भी मामला है. उनके अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में कुत्तों के काटने और रेबीज़ से मौतों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक है.
मेहता ने तर्क दिया, "कोई भी जानवरों से नफरत नहीं करता, लेकिन इस मुद्दे पर मुखर रहने वाला एक छोटा समूह, उस बड़े वर्ग की पीड़ा को नजरअंदाज नहीं कर सकता जो इस समस्या से प्रभावित है."
कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि संसद ने इस मुद्दे को लेकर नियम और कानून बनाए हैं, लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं हुआ. कोर्ट ने संकेत दिया कि समस्या का समाधान केवल आदेश देने से नहीं, बल्कि नियमों के सख्त क्रियान्वयन से ही संभव है.
क्या है पूरा मामला
दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय से आवारा कुत्तों की संख्या और उनके हमलों को लेकर बहस होती रही है. कई जगहों से कुत्तों के काटने और बच्चों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं. दूसरी तरफ, पशु अधिकार कार्यकर्ता इन कुत्तों को मारने या स्थायी रूप से बंद करने के खिलाफ हैं, और मानते हैं कि नसबंदी व वैक्सीनेशन ही सही समाधान है.
सुप्रीम कोर्ट ने रखा सुरक्षित फैसला
अब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट मानव सुरक्षा और पशु अधिकार के बीच किस तरह संतुलन बनाता है. फैसले से न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर बल्कि पूरे देश में आवारा कुत्तों से जुड़े नियमों और नीतियों पर असर पड़ सकता है.
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ICICI Bank Minimum Balance Rules: ग्राहकों की नाराज़गी के बाद आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) ने बचत खातों के लिए न्यूनतम बैलेंस की नई और बढ़ी हुई शर्तें वापस ले ली हैं. बैंक ने अब फिर से वही पुराने नियम लागू कर दिए हैं, जो पहले से लागू थे. यानी अब ग्राहकों को पहले जितना ही औसत मासिक बैलेंस (Minimum Average Balance) बनाए रखना होगा.
क्या था विवाद?
हाल ही में ICICI बैंक ने अपने न्यूनतम बैलेंस के नियमों में बदलाव करते हुए मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में बचत खाता धारकों के लिए औसत मासिक बैलेंस 50,000 रुपये करने का ऐलान किया था. इसी तरह अर्ध-शहरी शाखाओं में यह सीमा 25,000 रुपये और ग्रामीण शाखाओं में 10,000 रुपये तय की गई थी. यह बदलाव 1 अगस्त से लागू होना था.
हालांकि, ICICI बैंक के जरिये जारी औसत मासिक बैलेंस की खबर जैसे ही सामने आई, सोशल मीडिया पर ग्राहकों ने बैंक के इस फैसले की कड़ी आलोचना की. कई लोगों ने इसे आम ग्राहकों पर बोझ डालने वाला कदम बताया. आलोचना बढ़ने के बाद बैंक ने यह बढ़ोतरी वापस लेने का फैसला किया.
अब क्या है नया नियम?
ICICI बैंक ने बयान जारी कर बताया कि 1 अगस्त से नए बचत खातों के लिए मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम बैलेंस 15,000 रुपये, अर्ध-शहरी क्षेत्रों में 7,500 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 2,500 रुपये ही रहेगा. बैंक के मुताबिक, अगर ग्राहक अपने खाते में निर्धारित न्यूनतम बैलेंस नहीं रखते, तो उनके खाते से 6 फीसदी या 500 रुपये (जो भी कम हो) का जुर्माना काटा जाएगा.
किन्हें नहीं रखना होगा न्यूनतम बैलेंस?
बैंक ने साफ किया है कि वेतन खाते (Salary Accounts), पेंशनभोगी खाते, छात्र बचत खाते, पीएम जन धन योजना (PMJDY) और अन्य विशेष खाते इस नियम से मुक्त रहेंगे. इसके अलावा जिन ग्राहकों के बचत और फिक्स्ड डिपॉजिट में कुल 2 लाख रुपये हैं, उन्हें भी न्यूनतम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होगी.
आरबीआई का क्या कहना है?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वाणिज्यिक बैंक अपने बचत खातों के लिए न्यूनतम बैलेंस खुद तय करने के लिए स्वतंत्र हैं. यह निर्णय नियामक दायरे में नहीं आता. ICICI बैंक का यह कदम ग्राहकों के लिए राहत की खबर है, खासकर उन लोगों के लिए जो बढ़े हुए न्यूनतम बैलेंस के बोझ से परेशान थे.
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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी
Rahul Gandhi News: प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या (29 जनवरी) को मची भगदड़ में काफी संख्या में लोगों की मौतें हुई थी. इस हादसे को लेकर यूपी सरकार ने कोई आधिकारिक बयान अभी तक जारी नहीं किए. अब बीबीसी ने अपनी एक पड़ताल में बड़ा खुलासा किया है. बीबीसी का दावा है कि भगदड़ में 82 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. वहीं, राहुल गांधी ने इस रिपोर्ट को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है.
कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने एक्स पर कहा, "BBC की रिपोर्ट बताती है कि कुंभ मेले की भगदड़ में हुई मौतों के आंकड़े योगी सरकार ने छुपाए. जैसे COVID में गरीबों की लाशें आंकड़ों से मिटा दी गई थी. जैसे हर बड़े रेल हादसे के बाद सच्चाई दबा दी जाती है.
यही तो BJP मॉडल है. मोदी सरकार के दौर में गरीबों की कोई गिनती नहीं, तो जिम्मेदारी भी नहीं."
योगी सरकार की नजर में 37 लोगों की हुई भगदड़ से मौत
दरअसल, प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या को मची भगदड़ में बीबीसी ने अपने एक पड़ताल के आधार पर दावा किया है कि उस समय यूपी सरकार ने 37 लोगों के मरने की बात स्वीकार की थी, लेकिन उससे कई गुना ज्यादा लोग मरे थे.
100 अधिक परिवारों से मिला बीबीसी का प्रतिनिधिमंडल
बीबीसी के मुताबिक हजारों किलोमीटर का सफर, 11 राज्य और 50 से अधिक जिलों का दौरा करने के बाद 100 से अधिक परिवारों से पीड़ित के लोगों से उनका प्रतिनिधि मिला. पड़ताल के मुताबिक कुंभ भगदड़ में मारे गए लोगों की तादाद उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों से कहीं अधिक हैं.
बीबीसी ने दावा किया कि कुंभ के दौरान भगदड़ में 82 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. बीबीसी के प्रतिनिधि ने पड़ताल के दौरान 82 से ज्यादा मृतकों के परिजनों से सीधा संपर्क किया. 82 लोगों में उन लोगों नाम शामिल नहीं हैं, जो मौत का सबूत नहीं दे सके, लेकिन उनके परिजनों की मौत भगदड़ में हुई. ऐसा पीड़ितों ने दावा किया.