'जनता का नेता' लालू की कहानी
कभी एक छोटे से गांव से निकला एक युवक...आज देश की राजनीति का ऐसा नाम है जिसे भुलाना आसान नहीं, नाम है — लालू प्रसाद यादव, गरीबों की बात करना, वंचितों के लिए लड़ना और जनता की भाषा में बोलना — यही उनकी पहचान बनी, उन्होंने राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, बदलाव का औज़ार बनाया। देखिए हमारी रिपोर्ट
फाइल फोटो
Elvish Yadav firing case: बिग बॉस ओटीटी विजेता, यूट्यूबर और एक्टर एल्विश यादव के घर पर शनिवार तड़के एक बड़ी वारदात हुई. सुबह करीब 5:30 से 6 बजे के बीच सेक्टर-57 स्थित उनके घर पर बाइक सवार तीन अज्ञात बदमाशों ने धावा बोला और करीब 20 से 25 राउंड फायरिंग की. फायरिंग के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए. घटना के समय एल्विश यादव घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन परिवार के अन्य सदस्य नींद में थे. इस वारदात ने न सिर्फ इलाके में हड़कंप मचा दिया बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
घटना कैसे हुई?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तीन हमलावर बाइक पर सवार होकर एल्विश यादव के घर के पास पहुंचे. घर के बाहर आकर उन्होंने अचानक गोलियां चलानी शुरू कर दीं. बताया जा रहा है कि 20 से 25 राउंड फायरिंग हुई. गोलियों की आवाज से पूरा इलाका दहशत में आ गया. घर के अंदर मौजूद परिवारजन इस दौरान सो रहे थे. गोलीबारी की आवाज सुनकर जब लोग बाहर आए तो बदमाश फरार हो चुके थे.
एल्विश के पिता ने क्या कहा?
फायरिंग की घटना के बाद एल्विश यादव के पिता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि घटना के समय उनका बेटा घर पर नहीं था लेकिन पूरा परिवार अंदर मौजूद था. परिवारजन नींद में थे और अचानक गोलियों की आवाज से सभी सहम गए. उन्होंने यह भी कहा कि इस वारदात से पहले परिवार या एल्विश को किसी तरह की धमकी नहीं मिली थी.
पुलिस की जांच
फायरिंग की जानकारी मिलते ही गुरुग्राम पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे. घर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है. फुटेज में घर के गेट के बाहर दो संदिग्ध बदमाश दिखाई दे रहे हैं. पुलिस का मानना है कि यह हमला किसी गैंग द्वारा रंगदारी वसूलने या धमकाने के मकसद से करवाया गया हो सकता है.
इससे पहले भी हो चुका हमला
एल्विश यादव से पहले हरियाणवी और बॉलीवुड सिंगर राहुल फाजिलपुरिया पर भी इसी तरह के हमले की कोशिश हुई थी. 14 जुलाई 2025 को शाम 5:50 बजे गुरुग्राम के एसपीआर रोड पर फाजिलपुरिया की कार पर अज्ञात बदमाशों ने फायरिंग की थी. हालांकि बाद में पुलिस ने उस घटना को नकार दिया था. फाजिलपुरिया और एल्विश यादव करीबी दोस्त माने जाते हैं और दोनों का नाम कुछ मामलों में एक साथ भी आ चुका है.
गैंगस्टर का कनेक्शन?
जानकारों का मानना है कि इस तरह की वारदातें अक्सर गैंगस्टर द्वारा मैसेज देने के लिए की जाती है. फाजिलपुरिया पर हमले और एक फाइनेंसर की हत्या की जिम्मेदारी पहले एक गैंगस्टर ने सोशल मीडिया पर ली थी. अब एल्विश यादव के घर पर हुई फायरिंग भी कहीं न कहीं उसी पैटर्न की ओर इशारा करती है. पुलिस फिलहाल इस एंगल से भी जांच कर रही है.
फाइल फोटो
CJI BR Gavai: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स को लेकर मज़ाकिया लेकिन सटीक टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “आजकल क्लाइंट को बहुत जल्दी बुरा लग जाता है, आपके मुवक्किल बहुत नाराज़ हो जाते हैं.”
दरअसल, कोर्ट में एक केस की सुनवाई चल रही थी जिसमें न्यायिक सेवा (Judicial Service) में पदोन्नति के सीमित अवसरों से जुड़े मुद्दे पर बहस हो रही थी. इस मामले की सुनवाई CJI बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच कर रही थी. सुनवाई के दौरान जब जस्टिस चंद्रन को कुछ निजी तौर पर कहना था, तो उन्होंने कुछ सेकंड के लिए कोर्ट रूम का माइक म्यूट (Mute) कर दिया. इसके बाद उन्होंने CJI गवई से कुछ बात की जो पब्लिक ऑडियो में नहीं आई.
CJI ने क्या कहा?
इस पर CJI ने मुस्कराते हुए कहा, “मेरे भाई (जस्टिस चंद्रन) को कुछ कहना था, लेकिन हमें नहीं पता कि इसकी रिपोर्टिंग कैसे की जाएगी, इसलिए उन्होंने बात सिर्फ मुझसे की.” इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स पर व्यंग्य किया और कहा, “आजकल सोशल मीडिया पर हमें नहीं पता होता कि कौन सी बात कैसे रिपोर्ट होगी. हो सकता है कि आपका क्लाइंट बहुत नाराज़ हो जाए.”
CJI के टिप्पणी के क्या है मायने
CJI की यह टिप्पणी अदालत में मौजूद लोगों को हल्के-फुल्के अंदाज़ में हंसाने वाली थी, लेकिन इसमें एक गंभीर संदेश भी छिपा था कि अब सोशल मीडिया पर न्यायालय की हर छोटी बात तुरंत वायरल हो जाती है और कई बार उसका गलत अर्थ निकाला जाता है. यह टिप्पणी उस घटना के एक दिन बाद आई जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने CJI पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. वकील, CJI की एक टिप्पणी से नाराज़ था और उसने अदालत में ही गुस्से का इज़हार किया था. हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्थिति को संभाल लिया था.
दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता (फाइल फोटो)
Delhi News Today: देशभर में हाल के वर्षों में रेलवे स्टेशनों और ऐतिहासिक स्थलों के नाम बदलने का सिलसिला जारी है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मुगलसराय स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन किया, जबकि हबीबगंज स्टेशन को रानी कमलापति स्टेशन नाम मिला. अब दिल्ली से भी एक ऐसा ही प्रस्ताव सामने आया है.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्र सरकार से राजधानी के सबसे पुराने रेलवे स्टेशन में से एक पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग की है. उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर स्टेशन का नाम 'महाराजा अग्रसेन रेलवे स्टेशन' करने की गुजारिश की है.
दिल्ली सीएम ने लिखा पत्र
रेखा गुप्ता ने अपने 19 जून को लिखे पत्र में कहा कि यह नाम परिवर्तन महान समाज सुधारक महाराजा अग्रसेन को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जो अहिंसा, सामाजिक न्याय और आर्थिक समरसता के प्रतीक माने जाते हैं. उन्होंने पत्र में लिखा कि "महाराजा अग्रसेन का योगदान दिल्ली और भारत के सामाजिक-आर्थिक ढांचे पर गहरा प्रभाव डालता है. उनके वंशज आज भी दिल्ली के व्यापार, समाज और संस्कृति में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं."
मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगे लिखा कि "पुरानी दिल्ली स्टेशन का नाम बदलकर महाराजा अग्रसेन रेलवे स्टेशन करना न सिर्फ ऐतिहासिक दृष्टि से उचित होगा, बल्कि यह दिल्लीवासियों की भावनाओं से भी गहराई से जुड़ता है. मैं आशा करती हूं कि मंत्रालय इस प्रस्ताव पर सकारात्मक और शीघ्र निर्णय लेगा."
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का इतिहास
केंद्रीय राजधानी दिल्ली की चांदनी चौक क्षेत्र में स्थित यह रेलवे स्टेशन 1864 में बना था और इसे दिल्ली जंक्शन भी कहा जाता है. इसकी इमारत को लाल किले की स्थापत्य शैली में तैयार किया गया था. यह स्टेशन दिल्ली के व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक है, जहां 18 प्लेटफॉर्म हैं. दो प्लेटफॉर्म पर एक साथ 24-कोच की दो ट्रेनें खड़ी की जा सकती हैं. अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है, लेकिन नाम बदलने की यह मांग राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस को जरूर जन्म दे सकती है.