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Bihar Domicile Rule 2025: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में एक अहम घोषणा की है, जो सीधे तौर पर राज्य के युवाओं और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से जुड़ी है. उन्होंने शिक्षकों की भर्ती में डोमिसाइल नीति लागू करने का ऐलान किया है. यानी अब शिक्षक भर्ती में बिहार के निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी. यह नियम TRE-4 (Teacher Recruitment Exam-4) से लागू होगा.
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार 2005 से ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए काम कर रही है. अब भर्ती प्रक्रिया में बिहार के निवासियों को वरीयता देने के लिए शिक्षा विभाग को नियमों में संशोधन करने का निर्देश दे दिया गया है.
डोमिसाइल नीति क्या है?
डोमिसाइल नीति का मतलब है कि किसी राज्य में सरकारी नौकरी के लिए वही व्यक्ति आवेदन कर सकेगा जो उस राज्य का निवासी हो. यानी, बिहार में शिक्षक बनने के लिए अब बिहार का निवासी होना जरूरी होगा. इस नीति के अंतर्गत माता-पिता के बिहार निवासी होने, या पति/पत्नी के बिहार निवासी होने की स्थिति में भी लाभ मिल सकता है. यह नीति पहले भी 2020 में लागू की गई थी, लेकिन 2023 में इसे खत्म कर दिया गया था. उस समय सरकार का कहना था कि गणित और विज्ञान जैसे विषयों के लिए योग्य शिक्षक बिहार में नहीं मिल पा रहे थे. उस वक्त तेजस्वी यादव भी सरकार का हिस्सा थे.
चुनावी मौसम और घोषणाओं की बाढ़
अब जब बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, तो एक बार फिर सरकार ने डोमिसाइल नीति को बहाल कर दिया है. इस पर विपक्ष ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है. तेजस्वी यादव ने कहा कि यह उनकी पुरानी मांग रही है, जिसे NDA सरकार ने पहले खारिज कर दिया था. अब जब चुनाव पास हैं, तो वही मांगों को नकल करके लागू किया जा रहा है.
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि नीतीश सरकार ने हर वर्ग को साधने के लिए एक के बाद एक घोषणाएं की हैं, ताकि चुनाव से पहले सभी वोट बैंक खुश किए जा सकें. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली की फ्री यूनिट, सरकारी नौकरी, रसोइयों-रात्रि प्रहरियों और स्वास्थ्य अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी, युवा आयोग का गठन-ये सब हमारी योजनाओं की नकल हैं.”
नीतीश कुमार की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नीतीश कुमार अब चाणक्य वाली राजनीति नहीं, बल्कि 'सुशासन बाबू' वाली छवि को सामने रखकर चुनाव लड़ना चाहते हैं. पाला बदलने का विकल्प अब सीमित है, इसलिए सीधे जनता को साधना ही उनका प्रमुख रास्ता बचा है. जुलाई 2025 में नीतीश कुमार ने वादा किया था कि सरकार आने वाले 5 सालों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी या रोजगार देगी. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक 10 लाख लोगों को सरकारी नौकरी और 39 लाख को रोजगार मिल चुका है.
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CJI BR Gavai: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स को लेकर मज़ाकिया लेकिन सटीक टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “आजकल क्लाइंट को बहुत जल्दी बुरा लग जाता है, आपके मुवक्किल बहुत नाराज़ हो जाते हैं.”
दरअसल, कोर्ट में एक केस की सुनवाई चल रही थी जिसमें न्यायिक सेवा (Judicial Service) में पदोन्नति के सीमित अवसरों से जुड़े मुद्दे पर बहस हो रही थी. इस मामले की सुनवाई CJI बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच कर रही थी. सुनवाई के दौरान जब जस्टिस चंद्रन को कुछ निजी तौर पर कहना था, तो उन्होंने कुछ सेकंड के लिए कोर्ट रूम का माइक म्यूट (Mute) कर दिया. इसके बाद उन्होंने CJI गवई से कुछ बात की जो पब्लिक ऑडियो में नहीं आई.
CJI ने क्या कहा?
इस पर CJI ने मुस्कराते हुए कहा, “मेरे भाई (जस्टिस चंद्रन) को कुछ कहना था, लेकिन हमें नहीं पता कि इसकी रिपोर्टिंग कैसे की जाएगी, इसलिए उन्होंने बात सिर्फ मुझसे की.” इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स पर व्यंग्य किया और कहा, “आजकल सोशल मीडिया पर हमें नहीं पता होता कि कौन सी बात कैसे रिपोर्ट होगी. हो सकता है कि आपका क्लाइंट बहुत नाराज़ हो जाए.”
CJI के टिप्पणी के क्या है मायने
CJI की यह टिप्पणी अदालत में मौजूद लोगों को हल्के-फुल्के अंदाज़ में हंसाने वाली थी, लेकिन इसमें एक गंभीर संदेश भी छिपा था कि अब सोशल मीडिया पर न्यायालय की हर छोटी बात तुरंत वायरल हो जाती है और कई बार उसका गलत अर्थ निकाला जाता है. यह टिप्पणी उस घटना के एक दिन बाद आई जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने CJI पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. वकील, CJI की एक टिप्पणी से नाराज़ था और उसने अदालत में ही गुस्से का इज़हार किया था. हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्थिति को संभाल लिया था.
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Punjab MLA Escape: पंजाब की राजनीति में सोमवार को बड़ा हंगामा खड़ा हो गया जब सनौर से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा पुलिस हिरासत से फरार हो गए. उन्हें एक पुराने रेप केस के मामले में हरियाणा के कुरुक्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था लेकिन पुलिस कस्टडी से थाने लाते समय उन्होंने और उनके साथियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया और भाग निकले. इस दौरान एक पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल हो गया.
कैसे हुई घटना?
जानकारी के मुताबिक, पठानमाजरा को पुलिस टीम कुरुक्षेत्र से गिरफ्तार कर पटियाला के सिविल लाइंस थाने ला रही थी. इसी बीच, रास्ते में विधायक और उनके समर्थकों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी. गोलीबारी में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया. इसके बाद विधायक और उनके साथी एक स्कॉर्पियो और एक फॉर्च्यूनर गाड़ी से फरार हो गए. पुलिस ने पीछा करते हुए फॉर्च्यूनर को पकड़ लिया, लेकिन विधायक स्कॉर्पियो कार में फरार हो गए. पुलिस की टीम लगातार उनका पीछा कर रही है और पंजाब-हरियाणा में जगह-जगह नाकाबंदी कर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.
विधायक का बयान
फरारी के बाद हरमीत सिंह पठानमाजरा ने फेसबुक लाइव वीडियो जारी किया. इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली से आई AAP टीम पंजाब पर राज कर रही है और उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने राज्य सरकार की बाढ़ राहत व्यवस्था की आलोचना की थी, जिसके बाद उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई. विधायक का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक साजिश है.
मामला क्या है?
हरमीत सिंह पठानमाजरा की पूर्व पत्नी ने उनके खिलाफ बलात्कार और धोखाधड़ी (धारा 376 और 420) का केस दर्ज कराया था. यह FIR पटियाला के सिविल लाइंस थाने में दर्ज है. पुलिस का कहना है कि इसी मामले में विधायक को गिरफ्तार किया गया था. वहीं, विधायक के वकील सिमरनजीत सिंह सग्गू का कहना है कि यह केस पूरी तरह से राजनीतिक दबाव का नतीजा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में यह मामला पहले ही उठ चुका है और अदालत ने डीआईजी रोपड़ रेंज को जांच के लिए नियुक्त किया था. वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता खुद स्वीकार कर चुकी है कि वह विधायक के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में थी और रिश्ता सुधरने पर उसे जारी रखने को तैयार थी. ऐसे में धारा 376 (बलात्कार) और 420 (धोखाधड़ी) लगाना कानून के खिलाफ है.
पुलिस का रुख
पटियाला के पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने बताया कि पठानमाजरा की फरारी के बाद उन पर अलग से केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने कहा कि विधायक और उनके साथियों द्वारा पुलिस पर गोली चलाना और गाड़ी चढ़ाने की कोशिश करना गंभीर अपराध है. पुलिस ने उनकी तलाश तेज कर दी है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
राजनीतिक साजिश या अपराध?
इस पूरे मामले ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है. एक तरफ विधायक और उनके वकील इसे राजनीतिक साजिश और नेताओं-नौकरशाही के बीच रस्साकशी बता रहे हैं, तो वहीं पुलिस का कहना है कि यह गंभीर आपराधिक मामला है. AAP विधायक का पुलिस कस्टडी से इस तरह फरार होना कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. घटना ने प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक दबाव की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
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ICICI Bank Minimum Balance Rules: ग्राहकों की नाराज़गी के बाद आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) ने बचत खातों के लिए न्यूनतम बैलेंस की नई और बढ़ी हुई शर्तें वापस ले ली हैं. बैंक ने अब फिर से वही पुराने नियम लागू कर दिए हैं, जो पहले से लागू थे. यानी अब ग्राहकों को पहले जितना ही औसत मासिक बैलेंस (Minimum Average Balance) बनाए रखना होगा.
क्या था विवाद?
हाल ही में ICICI बैंक ने अपने न्यूनतम बैलेंस के नियमों में बदलाव करते हुए मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में बचत खाता धारकों के लिए औसत मासिक बैलेंस 50,000 रुपये करने का ऐलान किया था. इसी तरह अर्ध-शहरी शाखाओं में यह सीमा 25,000 रुपये और ग्रामीण शाखाओं में 10,000 रुपये तय की गई थी. यह बदलाव 1 अगस्त से लागू होना था.
हालांकि, ICICI बैंक के जरिये जारी औसत मासिक बैलेंस की खबर जैसे ही सामने आई, सोशल मीडिया पर ग्राहकों ने बैंक के इस फैसले की कड़ी आलोचना की. कई लोगों ने इसे आम ग्राहकों पर बोझ डालने वाला कदम बताया. आलोचना बढ़ने के बाद बैंक ने यह बढ़ोतरी वापस लेने का फैसला किया.
अब क्या है नया नियम?
ICICI बैंक ने बयान जारी कर बताया कि 1 अगस्त से नए बचत खातों के लिए मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम बैलेंस 15,000 रुपये, अर्ध-शहरी क्षेत्रों में 7,500 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 2,500 रुपये ही रहेगा. बैंक के मुताबिक, अगर ग्राहक अपने खाते में निर्धारित न्यूनतम बैलेंस नहीं रखते, तो उनके खाते से 6 फीसदी या 500 रुपये (जो भी कम हो) का जुर्माना काटा जाएगा.
किन्हें नहीं रखना होगा न्यूनतम बैलेंस?
बैंक ने साफ किया है कि वेतन खाते (Salary Accounts), पेंशनभोगी खाते, छात्र बचत खाते, पीएम जन धन योजना (PMJDY) और अन्य विशेष खाते इस नियम से मुक्त रहेंगे. इसके अलावा जिन ग्राहकों के बचत और फिक्स्ड डिपॉजिट में कुल 2 लाख रुपये हैं, उन्हें भी न्यूनतम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होगी.
आरबीआई का क्या कहना है?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वाणिज्यिक बैंक अपने बचत खातों के लिए न्यूनतम बैलेंस खुद तय करने के लिए स्वतंत्र हैं. यह निर्णय नियामक दायरे में नहीं आता. ICICI बैंक का यह कदम ग्राहकों के लिए राहत की खबर है, खासकर उन लोगों के लिए जो बढ़े हुए न्यूनतम बैलेंस के बोझ से परेशान थे.
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