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Yoga for Flexibility: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह उठते ही शरीर में अकड़न, थकान और कमजोरी महसूस होना आम बात है. लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर के सामने बैठना, नींद पूरी न होना और अनियमित खान-पान जैसी आदतें हमारी सेहत पर बुरा असर डालती हैं. ऐसे में अगर आप दिन की शुरुआत कुछ आसान योगासन से करें, तो शरीर और मन दोनों को राहत मिल सकती है.
आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग सिर्फ एक व्यायाम नहीं बल्कि जीवनशैली है, जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित रखती है. रोजाना योग करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, पाचन और हृदय क्रिया बेहतर होती है और मानसिक तनाव भी कम होता है. यहां जानिए तीन ऐसे आसान योगासन जो रोजाना करने से शरीर में लचीलापन और ताकत दोनों बढ़ती है.
पर्वतासन (Mountain Pose)
इस आसन में शरीर को सीधा और स्थिर रखा जाता है. जब आप हाथों को ऊपर उठाकर पूरे शरीर को खींचते हैं, तो कंधे और बाजुओं की मांसपेशियां स्ट्रेच होती हैं. इससे रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों की जकड़न दूर होती है. पर्वतासन से शरीर ऊर्जावान महसूस करता है और पूरे दिन थकान नहीं होती.
शलभासन (Locust Pose)
इस आसन में पेट के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाया जाता है. इससे रीढ़, कमर और पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं. लंबे समय तक बैठने या ऑफिस के काम के कारण जो पीठ दर्द या अकड़न होती है, उसमें यह आसन बहुत लाभकारी है. साथ ही यह रक्त प्रवाह और दिल की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है.
Boat Pose
नौकासन में शरीर को नाव के आकार में बनाया जाता है. इसमें आप हाथ और पैर दोनों को एक साथ ऊपर उठाते हैं. यह आसन पेट की मांसपेशियों को टोन करता है, पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और शरीर में ऊर्जा भरता है. नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन बेहतर होता है और चलने-फिरने में हल्कापन महसूस होता है.
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Low Ejection Fraction Heart: दिल की ताकत समझनी हो तो कभी भी इजेक्शन फ्रैक्शन (EF) को हल्के में नहीं लेना चाहिए. दिल हर धड़कन में जितना खून शरीर में भेजता है, उसी का प्रतिशत ईएफ कहलाता है. अगर दिल मजबूती से सिकुड़ता है तो पम्पिंग अच्छी रहती है और ईएफ नॉर्मल आता है, लेकिन जब दिल की मांसपेशियां थकने लगती हैं, जकड़न बढ़ने लगती है या दिल को जरूरी ताकत नहीं मिल पाती, तब ईएफ कम होने लगता है.
इसी वजह से डॉक्टर हार्ट मरीज का सबसे पहले ईएफ की रिपोर्ट चेक करते हैं. ईएफ मापने के लिए सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है इको टेस्ट. इसमें दिल की दीवारें साफ दिखाई देती हैं और पता चलता है कि दिल कितना खून पंप कर रहा है, वाल्व ठीक काम कर रहे हैं या नहीं और खून का फ्लो कैसा है. साल में कम से कम एक बार ये टेस्ट कराना अच्छा माना जाता है. ईएफ की रेंज भी बहुत कुछ बताती है. 55-70 नॉर्मल, 41-54 हल्की कमी, 31-40 मध्यम कमी और 30 से कम गंभीर स्थिति मानी जाती है.
ईएफ कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे पुराना हाई बीपी, हार्ट अटैक का इतिहास, ज्यादा तनाव, शराब का अधिक सेवन, अनकंट्रोल शुगर, ब्लॉकेज, थायरॉयड समस्या, स्मोकिंग और कुछ वायरल इंफेक्शन जो दिल की मांसपेशियों को कमजोर कर देते हैं. ईएफ कम होने के लक्षण भी अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं, जैसे सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, जल्दी थक जाना, धड़कन बढ़ना, पैरों में सूजन या रात में सांस लेने में परेशानी.
आयुर्वेद के मुताबिक, जब हृदय कमजोर होता है तो शरीर की शक्ति और प्राणवायु पर असर पड़ने लगता है. रसधातु की कमी, दोषों का असंतुलन और मानसिक तनाव इसे और बिगाड़ सकते हैं. अर्जुन, द्राक्ष, अश्वगंधा और पुष्करमूल जैसी औषधियां हृदय को पोषण देने वाली मानी जाती हैं. हल्की वॉक, संतुलित भोजन और मन को शांत रखकर भी काफी सुधार देखा गया है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ईएफ कम होने का मतलब है कि दिल की मांसपेशियां कमजोर या डैमेज हैं.
सही मेडिसिन और लाइफस्टाइल सुधार मिलकर कई मरीजों में ईएफ को 10-15 प्रतिशत तक बढ़ा देते हैं. कम नमक, हल्का खाना, सुबह टहलना, बीपी–शुगर कंट्रोल, तनाव कम करना और समय पर सोना-जागना दिल को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, लेकिन अगर अचानक सांस रुकने लगे, तेज सीने में दर्द हो या धड़कन बहुत तेज महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
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Raw Onion Benefits: अक्सर लोग सलाद में कच्चा प्याज खाते हैं, लेकिन इसके फायदों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान, दोनों ही कच्चे प्याज को स्वास्थ्यवर्धक और लाभकारी मानते हैं। इसे "गरीबों की दवा" भी कहा जाता है, क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध है, सस्ता है और शरीर को कई लाभ पहुँचाता है।
प्याज का क्या है महत्व
आयुर्वेद के अनुसार, प्याज वात संबंधी रोगों में लाभकारी है। यह शरीर की शक्ति बढ़ाता है, तनाव कम करता है और जोड़ों के दर्द से राहत देता है। इसके रोजाना सेवन से पाचन शक्ति मजबूत होती है और पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या भी बढ़ती है। कान में दर्द होने पर ताज़ा प्याज का रस आराम देता है। घी में भुना हुआ प्याज खांसी, जुकाम और अस्थमा में फायदेमंद होता है। प्याज का रस गर्मियों में नाक से खून आना बंद करने में मदद करता है।
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है प्याज
प्याज में मौजूद क्वेरसेटिन और सल्फर यौगिक जैसे एंटीऑक्सीडेंट शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। यह रक्तचाप को नियंत्रित करता है, शरीर में सूजन को कम करता है और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है।
प्याज में है एंथोसायनिन
इसके अलावा, प्याज में मौजूद फ्लेवोनोइड्स और एंथोसायनिन कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं, खासकर स्तन और पेट के कैंसर के मामलों में। प्याज मधुमेह रोगियों के लिए भी अच्छा है क्योंकि यह इंसुलिन संवेदनशीलता और लीवर में शर्करा के चयापचय में सुधार करता है।
पेट के लिए है फायदेमंद
प्याज पेट के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि इसमें प्रीबायोटिक फाइबर होता है, जो अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। इसके अलावा, प्याज हड्डियों को मजबूत बनाता है और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करता है। इसमें मौजूद सल्फर यौगिक प्राकृतिक एंटीबायोटिक के रूप में कार्य करते हैं, जो शरीर को संक्रमणों से बचाते हैं।
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Post Diwali Health Tips: दीवाली के बाद दिल्ली और एनसीआर की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है. स्मॉग और धुएं के बीच सांस लेना तक मुश्किल हो गया है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए. ऐसे समय में अपने फेफड़ों की सफाई और देखभाल बेहद जरूरी है. इसके लिए आप कुछ आसान आयुर्वेदिक डिटॉक्स ड्रिंक्स आजमा सकते हैं, जो नेचुरली फेफड़ों को साफ करने के साथ इम्यूनिटी भी बढ़ाते हैं.
1. अदरक-नींबू चाय
अदरक और नींबू की यह चाय शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करती है. नींबू में विटामिन C और अदरक में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फेफड़ों को साफ और मजबूत बनाते हैं. सुबह खाली पेट इसका सेवन सबसे बेहतर माना जाता है.
2. गाजर-चुकंदर जूस
यह जूस विटामिन A और C से भरपूर होता है, जो ब्लड सर्कुलेशन सुधारता है और थकान कम करता है. इसके नियमित सेवन से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और शरीर को ऊर्जा मिलती है.
3. नींबू-शहद पानी (Lemon-Honey Water)
यह ड्रिंक शरीर से गंदगी निकालने के साथ इम्यूनिटी भी बढ़ाता है. सुबह गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीने से शरीर डिटॉक्स होता है और त्वचा में निखार आता है.
4. हल्दी वाला दूध (Turmeric Milk)
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन सूजन और इन्फेक्शन को कम करता है. रात में हल्दी दूध पीने से फेफड़ों को राहत मिलती है और गले में जलन या खराश से भी आराम मिलता है.
5. मुलेठी की चाय (Licorice Tea)
मुलेठी की चाय गले की खराश और खांसी में बहुत फायदेमंद होती है. यह सांस की नली को शांत करती है और प्रदूषण से हुए नुकसान को कम करती है.
अगर आप रोजाना इन ड्रिंक्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं, तो यह आपके फेफड़ों को मजबूत बनाएंगे और प्रदूषण से होने वाली परेशानियों से बचाएंगे. हालांकि, इसके साथ धूम्रपान से दूर रहें, धूल-मिट्टी से बचें और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं. क्योंकि सेहत सिर्फ ड्रिंक्स से नहीं, बल्कि संतुलित दिनचर्या से भी बनती है.