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Superfoods for Women: आज के दौर में महिलाएं न सिर्फ घर और बाहर की जिम्मेदारियां संभालती हैं बल्कि उनका शरीर भी भीतर से कई अहम भूमिकाएं निभाता है. हार्मोन संतुलन बनाए रखना, हड्डियों को मजबूत करना, मानसिक शांति देना, मां बनने की तैयारी करना और उम्र के साथ होने वाले बदलावों को सहन करना. ये सब एक महिला का शरीर रोज़ करता है. इसके बावजूद कई महिलाएं थकान, तनाव, सूजन (इंफ्लेमेशन) और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं से जूझती हैं. इसका मुख्य कारण कमजोरी नहीं, बल्कि पोषण की कमी है. जब शरीर की जड़ों तक सही पोषण नहीं पहुंचता, तो असंतुलन और परेशानी महसूस होने लगती है.
आयुर्वेद में महिलाओं के शरीर को बेहद पवित्र और शक्तिशाली माना गया है. यही वजह है कि आयुर्वेद रोजाना पोषण और संतुलन पर ज़ोर देता है. अगर महिलाएं अपनी डाइट में कुछ विशेष सुपरफूड शामिल करें तो उनका स्वास्थ्य लंबे समय तक बेहतर रह सकता है. आइए जानते हैं ऐसे ही पांच सुपरफूड के बारे में...
1. शतावरी
शतावरी को आयुर्वेद में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए सबसे खास माना गया है. यह न केवल प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक शांति और हार्मोन संतुलन में भी मदद करता है. शतावरी शरीर को ठंडक देती है, जिससे पीरियड्स में ज्यादा रक्तस्राव, पेट में जलन या चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं से राहत मिलती है. इसे रात में गर्म दूध के साथ लेने से शरीर को गहरी नींद भी आती है और मन शांत रहता है.
2. काला तिल
काले तिल कैल्शियम, आयरन और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं. यह हड्डियों को मज़बूती देने के साथ-साथ हार्मोन को संतुलित करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. खासकर डिलीवरी के बाद और मेनोपॉज़ के समय यह महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद हैं. इन्हें सब्ज़ियों या चावल में भूनकर मसाले की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। नियमित सेवन से यह न केवल शरीर को ताकत देते हैं बल्कि बालों और त्वचा की सेहत भी बनाए रखते हैं.
3. आंवला
आंवला विटामिन C का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत माना जाता है. यह बाल, त्वचा, इम्यून सिस्टम और पाचन तंत्र के लिए वरदान है. एक्ने की समस्या हो या बालों का झड़ना, आंवला हर तरह से मदद करता है. सुबह आंवला जूस पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और स्किन ग्लो करने लगती है. आंवले को अचार, चटनी या मुरब्बे के रूप में भी डाइट में शामिल किया जा सकता है.
4. रागी
रागी को ‘कैल्शियम का पावरहाउस’ कहा जाता है. इसमें आयरन और अमीनो एसिड भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह न केवल हड्डियों की मज़बूती के लिए जरूरी है बल्कि नींद की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है. मेनोपॉज़ के बाद जब महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, उस समय रागी बेहद लाभकारी होती है. इसे खिचड़ी, रोटी या दलिया बनाकर आसानी से खाया जा सकता है.
5. घी
घी भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है और आयुर्वेद में इसे अमृत समान माना गया है. यह शरीर के ऊतकों को पोषण देता है, तनाव कम करता है और पाचन को मजबूत बनाता है. ड्राई स्किन की समस्या हो या नींद की कमी, घी दोनों में मदद करता है. रात को दूध में थोड़ा सा जायफल और घी मिलाकर पीने से नींद गहरी आती है और मन शांत रहता है.
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Winter Tea Side Effects: जैसे ही भारत में सर्दियां शुरू होती हैं, चाय की खपत अचानक कई गुना बढ़ जाती है. सुबह सबसे पहले चाय, नाश्ते के साथ चाय, ऑफिस ब्रेक के दौरान चाय, और फिर शाम को ठंड से बचने के लिए चाय - दिन में 4-6 कप चाय पीना आम बात है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह आदत सर्दियों के महीनों में एसिडिटी बढ़ने का एक बड़ा कारण है.
आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस दोनों के मुताबिक, ठंडे मौसम में ज़्यादा चाय पीने से पेट में एसिड का लेवल तेज़ी से बढ़ता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सर्दियों में हमारा डाइजेशन आम तौर पर मज़बूत होता है, लेकिन चाय में मौजूद कैफीन और टैनिन इस पर बुरा असर डालते हैं. इससे सीने में जलन, खट्टी डकारें, पेट में भारीपन या मतली जैसा महसूस होता है. खासकर खाली पेट चाय पीने से एसिड अटैक जैसा असर होता है. जो लोग सुबह सबसे पहले खाली पेट चाय पीते हैं, उन्हें यह समस्या ज़्यादा होती है.
दूध और चीनी से बनता है गैस
बार-बार चाय पीने से पेट की अंदरूनी परत भी कमज़ोर हो जाती है. टैनिन इस परत को सुखा देते हैं, जिससे पेट का एसिड आसानी से जलन पैदा कर सकता है. इसके अलावा, दूध और चीनी से बनी बहुत तेज़ चाय एसिडिटी को और बढ़ा देती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको चाय पूरी तरह से छोड़ देनी चाहिए. यह सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे, कब और कितनी मात्रा में पीते हैं. आयुर्वेद भी कहता है कि चीज़ खुद समस्या नहीं है, बल्कि गलत समय और गलत मात्रा समस्या है.
लौंग को बेअसर करता है एसिड
अब बात करते हैं कुछ आसान घरेलू उपायों की जो एसिडिटी से तुरंत राहत देते हैं. सबसे आसान उपाय है एक लौंग चबाना. यह पेट के एसिड को बेअसर करता है और मिनटों में राहत देता है. इसी तरह, एक चम्मच सौंफ के बीज और थोड़ी सी मिश्री खाने से गैस और खट्टी डकारें तुरंत शांत हो जाती हैं. गुनगुने पानी में एक बूंद देसी घी मिलाकर पीने से भी पेट की जलन कम होती है. अगर एसिडिटी ज़्यादा परेशान कर रही है, तो जीरा मिलाकर छाछ पीने से भी तुरंत आराम मिलता है.
मुलेठी का पानी
मुलेठी का पानी भी बहुत हल्का और आरामदायक माना जाता है, जो पेट की अंदरूनी परत को आराम देता है. अगर आपको चाय पीनी ही है, तो उसमें 1-2 इलायची के दाने डाल दें. इससे चाय की गर्मी कम हो जाती है. दिन में दो कप से ज़्यादा चाय न पिएं, और सुबह खाली पेट या रात के खाने के बाद चाय पीने से बचें. साथ ही, बहुत तेज़ या ज़्यादा उबली हुई चाय पीने से भी बचें.
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Navel Displacement Symptoms: पेट से जुड़ी ज्यादातर समस्या पाचन या गलत खानपान की वजह से होती है, जिसका पता आसानी से लगाया जा सकता है, लेकिन कई बार नाभि खिसकने की वजह से कई बार असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है. ज्यादातर लोग इसके लक्षणों को पहचान नहीं पाते हैं, लेकिन कुछ आसनों से इसमें राहत मिल सकती है.
आयुर्वेद में नाभि को बहुत जरूरी माना गया है, जो शरीर की 72,000 नाड़ियों से जुड़ी होती है. इसके खिसक जाने पर शरीर में कई तरह की परेशानियां होती हैं. यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है. ये अचानक ज्यादा भार उठाने की वजह से, चलते-चलते पैर मुड़ जाने की वजह से, सोते समय गलत करवट लेने से (जैसे पेट के बल सोना), पेट की मांसपेशियों के कमजोर होने से या गिर जाने या चोट लग जाने की वजह से हो सकती है.
नाभि खिसकने से पेट फूलने, खाना खाने के तुरंत बाद भी वॉशरूम जाने, हर समय पेट में हल्का-हल्का दर्द और कमर में दर्द की समस्याएं सामने आ सकती हैं. ऐसी स्थिति में योगासन और कुछ एक्सरसाइज से नाभि को ठीक किया जा सकता है. हालांकि, ज्यादा दर्द है तो इसके लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह ली जाती है.
मंडूकासन, सेतुबंधासन, पवनमुक्तासन, नौकासन और कपालभाति प्राणायाम और अनुलोम-विलोम करने से राहत मिल सकती है. ये सभी आसन पेट से जुड़े हैं और पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक करने में मदद करते हैं. इसके अलावा, किसी भी तेल को गर्म करके नाभि के आसपास मालिश की जा सकती है। हल्के हाथ से मालिश करें, अगर मालिश करते वक्त भी ज्यादा दर्द हो रहा है, तो तुरंत आयुर्वेदिक चिकित्सक को दिखाएं.
नाभि खिसकने की समस्या होने पर पैरों के तलवे और पिंडलियों की मालिश करें. माना जाता है कि ऐसा करने से दर्द में आराम मिलता है. साथ ही नाभि में हल्के गर्म सरसों के तेल की बूंदें भी डाली जा सकती हैं. त्रिफला चूर्ण भी नाभि खिसकने में होने वाले दर्द में राहत देता है. ऐसे में सुबह और शाम आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण हल्के गुनगुने पानी के साथ लें. इससे पेट में होने वाले दर्द से राहत मिलेगी.
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मिस्र में गाजा शांति वार्ता के दौरान विश्व नेताओं की बैठक में एक दिलचस्प पल देखने को मिला. इस मुलाकात में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे. इसी दौरान एर्दोगन और मेलोनी के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.
वीडियो में एर्दोगन मुस्कुराते हुए मेलोनी से कहते हैं, “मैंने तुम्हें विमान से उतरते देखा, तुम बहुत अच्छी लग रही हो, लेकिन मुझे तुम्हारा धूम्रपान बंद करवाना होगा.” तभी बगल में खड़े मैक्रों तुरंत मजाक में कहते हैं, “यह नामुमकिन है.” यह सुनकर मेलोनी जोर से हंस पड़ती हैं और कहती हैं, “मुझे पता है, लेकिन अगर मैंने सिगरेट छोड़ दी तो मैं कम मिलनसार हो जाऊंगी. मैं किसी को मारना नहीं चाहती.”
यह मजाकिया बातचीत भले ही हल्के-फुल्के अंदाज़ में हुई हो, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर संदेश छिपा है. स्मोकिंग की बढ़ती आदत और उससे होने वाले खतरे.
दरअसल, जॉर्जिया मेलोनी ने एक किताब में बताया था कि उन्होंने 13 साल तक सिगरेट छोड़ रखी थी, लेकिन कुछ समय पहले फिर से शुरू कर दी. उनका कहना था कि सिगरेट पीना कभी-कभी बातचीत और कूटनीतिक रिश्ते सुधारने का जरिया बन जाता है. हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोच बेहद गलत और खतरनाक है. आज स्मोकिंग युवाओं में फैशन सिंबल बन चुकी है. कई टीनेजर्स और युवा मानते हैं कि सिगरेट पीना उन्हें ज्यादा परिपक्व या कूल दिखाता है. फिल्मों और सोशल मीडिया पर इसे ग्लैमरस अंदाज़ में दिखाया जाता है, जिससे भ्रम और बढ़ता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि पीयर प्रेशर यानी दोस्तों के दबाव में आकर और तनाव से राहत पाने की गलत सोच के कारण युवा स्मोकिंग की लत में फंसते जा रहे हैं. सिगरेट में मौजूद निकोटीन कुछ देर के लिए शांति का एहसास देता है, लेकिन बाद में बेचैनी और तनाव को और बढ़ा देता है. लंबे समय तक इसका सेवन कैंसर, फेफड़ों और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है.