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अखरोट को भिगोकर खाने के फायदे, दिमाग से लेकर दिल तक करता है हेल्दी

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फाइल फोटो

Walnut: कहा जाता है कि अगर शरीर और दिमाग को फिट रखना है तो डाइट पर खास ध्यान देना ज़रूरी है. सही खानपान न सिर्फ हमें बीमारियों से बचाता है बल्कि हमारी उम्रभर की सेहत की भी गारंटी बन सकता है. इन्हीं हेल्दी फूड्स में से एक है अखरोट (Walnut). इसे अक्सर सुपरफूड कहा जाता है, क्योंकि यह छोटे से आकार में पोषण का खजाना छुपाए बैठा है.

कई लोग अखरोट को ऐसे ही खा लेते हैं, लेकिन अगर इन्हें पानी में भिगोकर खाया जाए तो इसके फायदे और भी ज़्यादा बढ़ जाते हैं. दरअसल, अखरोट भिगोने से यह जल्दी पचता है और शरीर इसे आसानी से अवशोषित कर लेता है. आइए जानते हैं, भिगोए हुए अखरोट खाने के क्या-क्या फायदे हैं.

दिमाग को बनाता है तेज और शार्प

  • अखरोट को दिमागी सेहत के लिए बेस्ट माना जाता है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, ऐंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल्स पाए जाते हैं जो दिमाग की कोशिकाओं को मजबूत करते हैं.
  • यह याददाश्त बेहतर करने में मदद करता है.
  • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है, जिससे अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी बीमारियों से बचाव होता है.
  • बच्चों और स्टूडेंट्स के लिए तो यह ‘ब्रेन फूड’ साबित हो सकता है.

दिल को रखता है हेल्दी

  • आजकल दिल की बीमारियां बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं. ऐसे में रोज़ाना कुछ अखरोट खाना दिल के लिए फायदेमंद है.
  • अखरोट बुरे कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाते हैं.
  • इसमें मौजूद पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स और ओमेगा-3 शरीर की सूजन को कम करते हैं.
  • इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा कम होता है.

डाइजेशन और गट हेल्थ को मजबूत करता है?

  • कई लोगों को अखरोट खाने से गैस या पचने में दिक्कत होती है. यही वजह है कि इसे पानी में भिगोकर खाने की सलाह दी जाती है.
  • भिगोने से अखरोट में मौजूद फाइटिक एसिड और टैनीन कम हो जाते हैं.
  • इससे इसे पचाना आसान हो जाता है और शरीर ज़रूरी पोषक तत्व आसानी से सोख लेता है.
  • इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज जैसी समस्या से बचाता है.
  • गट हेल्थ अच्छी होने पर इम्यूनिटी भी मजबूत होती है.

वजन घटाने में मददगार

  • भले ही अखरोट में कैलोरी ज्यादा होती है, लेकिन ये वजन कंट्रोल करने में काफी असरदार साबित हो सकता है.
  • इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं.
  • इससे बार-बार स्नैकिंग की आदत कम होती है और कुल कैलोरी इनटेक घट जाता है.
  • अगर आप डाइटिंग कर रहे हैं, तो सुबह खाली पेट 2-3 भिगोए हुए अखरोट खाना आपके वजन घटाने की जर्नी को आसान बना सकता है.

स्किन को बनाए ग्लोइंग और हेल्दी

  • अखरोट केवल दिमाग और दिल के लिए ही नहीं, बल्कि आपकी स्किन के लिए भी बेस्ट सुपरफूड है.
  • इसमें मौजूद विटामिन E और ऐंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं.
  • इससे समय से पहले झुर्रियां और बुढ़ापे के लक्षण नहीं आते.
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड स्किन को हाइड्रेटेड और सॉफ्ट रखते हैं.
  • रोज़ाना अखरोट खाने से चेहरा हेल्दी और नेचुरली ग्लोइंग दिखता है.

कब और कैसे खाएं अखरोट?

  • रात में सोने से पहले 3-4 अखरोट पानी में भिगो दें.
  • सुबह खाली पेट इन्हें खाएं.
  • चाहें तो इन्हें शहद के साथ भी ले सकते हैं.
  • दिनभर में 4-5 अखरोट से ज्यादा खाने की ज़रूरत नहीं है.

किन्हें नहीं खाना चाहिए अखरोट?

  • जिन्हें नट्स से एलर्जी है, वे अखरोट से परहेज़ करें.
  • डायबिटीज़ और ब्लड प्रेशर के मरीज डॉक्टर से सलाह लेकर ही इन्हें डाइट में शामिल करें.
  • ज़्यादा मात्रा में खाने से गैस या अपच हो सकता है.

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Written by: Taushif

25 Aug 2025  ·  Published: 12:25 IST

जिम जाने का टाइम नहीं? घर बैठे करें ये 5 पिलाटे एक्सरसाइज, मिलेगी सेलेब जैसी फिटनेस

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Home Pilates Workout: आजकल लोग इतने व्यस्त हो गए हैं कि उनके पास जिम जाने का समय ही नहीं बचता. कभी ऑफिस की डेडलाइंस, कभी घर की जिम्मेदारियां और दिनभर का हंगामा जिम तक पहुंचना मुश्किल बना देता है. अगर आप भी ऐसी ही लाइफस्टाइल जी रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है.

फिट रहने के लिए न तो महंगी जिम मेंबरशिप चाहिए और न भारी-भरकम मशीनें. दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट और कैटरीना कैफ जैसी सेलेब्स की ट्रेनर यास्मीन कराचीवाला ने हाल ही में 5 पिलाटे वर्कआउट शेयर किए हैं, जिन्हें आप घर पर सिर्फ 10 मिनट में कर सकते हैं और शरीर को फ्लेक्सिबल बना सकते हैं.

1. रोल डाउन टू प्लैंक
सीधे खड़े होकर धीरे-धीरे झुकें, हाथों को जमीन तक लाएं और आगे बढ़ाकर प्लैंक पोज में आएं. कुछ सेकंड रुकें और फिर धीरे-धीरे वापस खड़े हो जाएं.

फायदा: पेट, पीठ और कंधे मजबूत होते हैं और बैलेंस बेहतर होता है.

2. लेग पुल फ्रंट
प्लैंक पोज में आएं और एक-एक करके पैर को ऊपर उठाएं. कूल्हे और कमर स्थिर रखें.

फायदा: पेट, हिप्स और पैरों की मसल्स टोन होती हैं, बैलेंस सुधरता है.

3. सीटिंग स्पाइन ट्विस्ट
पैर फैलाकर सीधे बैठें, पंजे ऊपर की ओर रखें. दोनों हाथ कंधे की ऊंचाई पर फैलाएं और कमर से शरीर को एक तरफ घुमाएं, सांस छोड़ें. फिर दूसरी तरफ यही करें.

फायदा: रीढ़ की हड्डी लचीली होती है और साइड पेट की मसल्स मजबूत होती हैं.

4. स्विमिंग की हंड्रेड्स
पीठ के बल लेटें, पैर और कंधे मैट से ऊपर उठाएं. दोनों हाथ तेजी से ऊपर-नीचे करें. पांच बार सांस अंदर और पांच बार बाहर छोड़ें. 100 बीट्स तक करें.

फायदा: पेट की मसल्स एक्टिव होती हैं, ब्लड फ्लो और सांस बेहतर होती है.

5. गेंद की तरह लुढ़कना
घुटनों को छाती से लगाकर बैठें, पीठ को C-शेप में करें. सांस लें और पीछे की ओर कंधों तक लुढ़कें. सांस छोड़ते हुए बिना पैर या सिर जमीन पर टिकाए आगे आएं.

फायदा: रीढ़ की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है, कोर मजबूत होता है और कोऑर्डिनेशन बेहतर होता है.

इन पांच पिलाटे एक्सरसाइज को रोज 10 मिनट करने से आप बिना जिम जाए भी फिट और फ्लेक्सिबल बॉडी पा सकते हैं.


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Written by: Taushif

24 Sep 2025  ·  Published: 11:38 IST

नींद न आना, मूड खराब और बढ़ता वजन, चेक करें कहीं शरीर में इस विटामिन की कमी तो नहीं

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Vitamin D Deficiency: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग घंटों स्क्रीन के सामने काम करते रहते हैं. यही वजह है कि कई लोगों में एक आम समस्या देखने को मिल रही है और वह है वजन बढ़ना. बहुत से लोग डाइटिंग और एक्सरसाइज करने के बावजूद वजन घटा नहीं पाते. इसका कारण सिर्फ खानपान या लाइफस्टाइल नहीं, बल्कि शरीर में बेहद जरूरी पोषक तत्व विटामिन डी की कमी भी हो सकती है.

आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही मानते हैं कि शरीर का संतुलन तभी बना रहता है जब उसमें सूर्य की ऊर्जा सही मात्रा में पहुंचती है. विटामिन डी दरअसल उसी ऊर्जा का एक रूप है, जो हमारे शरीर को सूरज की रोशनी से मिलता है. इसे 'सनशाइन विटामिन' भी कहा जाता है, क्योंकि यह हमारी त्वचा पर पड़ने वाली धूप से बनता है.

जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो सिर्फ हड्डियां ही नहीं, बल्कि पूरा मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. यह कमी धीरे-धीरे वजन बढ़ने, थकान, नींद में कमी और बार-बार खाने की इच्छा जैसी समस्याओं का कारण बन जाती है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो विटामिन डी शरीर में सेरोटोनिन नामक हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करता है. सेरोटोनिन हमारे मूड और भूख दोनों पर असर डालता है. जब इसकी मात्रा घटती है, तो नींद ठीक से नहीं आती, मूड बार-बार बदलता है और व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खाने लगता है. यही ओवरईटिंग धीरे-धीरे मोटापे का कारण बनती है. इसके अलावा विटामिन डी की कमी से इंसुलिन का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे शरीर में फैट जमा होने लगता है और वजन कम करना और मुश्किल हो जाता है.

आयुर्वेद के मुताबिक, जब शरीर में 'अग्नि' यानी पाचन शक्ति, कमजोर होती है, तो विषैले तत्व बनते हैं जो शरीर में जमा होकर मोटापा और आलस्य बढ़ाते हैं. सूर्य की रोशनी इस 'अग्नि' को प्रज्वलित करती है यानी धूप हमारे शरीर की नैसर्गिक ऊर्जा को जगाती है. यही कारण है कि प्राचीन वैद्य सुबह-सुबह सूर्य स्नान करने की सलाह देते थे. सूरज की हल्की किरणें न सिर्फ शरीर में विटामिन डी बढ़ाती हैं, बल्कि मानसिक स्फूर्ति भी देती हैं.

अगर शरीर में विटामिन डी की कमी बढ़ जाए, तो इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं. लगातार थकान महसूस होना, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द रहना, बालों का झड़ना या बार-बार मूड बदलना, ये सभी संकेत हो सकते हैं कि शरीर धूप से मिलने वाली इस ऊर्जा से वंचित है. कई बार लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और सोचते हैं कि यह सिर्फ तनाव या नींद की कमी की वजह से है, जबकि असली कारण विटामिन डी की कमी हो सकती है.

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस कमी को दूर कैसे किया जाए? धूप में कुछ देर रहना सबसे आसान तरीका है, लेकिन सिर्फ यही पर्याप्त नहीं। शरीर को यह विटामिन बनाने के लिए सही खानपान भी जरूरी है. संतरे का जूस और ओट्स जैसे अनाज भी विटामिन डी के अच्छे स्रोत हैं. आयुर्वेद में इसके साथ ही तिल का तेल, आंवला और अश्वगंधा जैसे औषधीय पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है.
 


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Written by: Taushif

28 Oct 2025  ·  Published: 14:41 IST

बरसात में डेंगू-मलेरिया के साथ बर्ड फ्लू का कहर, अंडा खाने से कितना खतरा? जानिए एक्सपर्ट की राय

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

मॉनसून के दिनों में बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. जहां एक ओर मच्छरों से होने वाले डेंगू और मलेरिया जैसे बुखार लोगों को परेशान करते हैं, वहीं दूसरी ओर एच-5 एवियन इन्फ्लुएंजा, जिसे आमतौर पर बर्ड फ्लू कहा जाता है, भी खतरे की घंटी बजा देता है. यह बीमारी ज़्यादातर पक्षियों में पाई जाती है, लेकिन कुछ मामलों में इंसानों को भी प्रभावित कर सकती है.

ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से सामने आया है, जहां एक पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों को सतर्क रहने और रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

क्या अंडे से फैल सकता है बर्ड फ्लू?
यह सवाल फिलहाल आम लोगों में चर्चा का विषय है, खासकर उन लोगों में जो रोजाना अंडा खाते हैं.
हैदराबाद के चिकित्सक और टेलीमेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मुरली भास्कर एम के अनुसार:-
बर्ड फ्लू का वायरस सामान्यतः मुर्गियों को संक्रमित करता है. संक्रमित पक्षी के अंडे में वायरस मौजूद होने की संभावना बहुत कम होती है. अगर अंडा पूरी तरह पका हुआ हो, तो वायरस नष्ट हो जाता है और अंडा खाने के लिए सुरक्षित होता है. 

अंडे को सुरक्षित तरीके से खाने के उपाय
बर्ड फ्लू के दौरान अंडा खाते समय कुछ सावधानियां अपनाना ज़रूरी है. अंडे को अच्छी तरह पकाएं-योक (पीला हिस्सा) पूरी तरह सख्त होना चाहिए. वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए अंडे का तापमान कम से कम 74°C (165°F) तक पहुंचना चाहिए.

हाथ धोना न भूलें - कच्चे अंडे को छूने के बाद साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं. रसोई की सतह और बर्तन साफ रखें. अंडा तोड़ने या छूने के बाद इस्तेमाल किए गए बर्तन और सतह को अच्छी तरह धो लें. कच्चे अंडे को बाकी खाने से अलग रखें, ताकि संक्रमण का खतरा न बढ़े. अलग उपकरण का इस्तेमाल करें. अगर आप चिकन और अंडे दोनों पका रहे हैं, तो दोनों के लिए अलग चाकू और कटिंग बोर्ड इस्तेमाल करें.

नई रिसर्च में सामने आया बड़ा खतरा
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के वैज्ञानिकों ने एक ताज़ा अध्ययन में बर्ड फ्लू के वायरस में ऐसे बदलाव (म्यूटेशन) पाए हैं, जो इंसानों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. शोधकर्ताओं ने H5N1 वायरस के 2.3.4.4b नामक क्लेड का अध्ययन किया. यह वायरस दुनिया के कई हिस्सों में पक्षियों को संक्रमित कर रहा है. इसमें ऐसे जेनेटिक बदलाव पाए गए हैं, जो इसे इंसानों को आसानी से संक्रमित करने में सक्षम बना सकते हैं.

म्यूटेशन क्यों है चिंता का कारण?
अध्ययन का नेतृत्व करने वाले डॉ. केशवर्धन सन्नुला के मुताबिक, H5N1 स्ट्रेन में पाए गए जेनेटिक म्यूटेशन पहले भी कई महामारी फैलाने वाले फ्लू वायरसों में देखे गए हैं. इसका मतलब यह है कि अगर ये बदलाव और विकसित हुए तो यह वायरस मानव से मानव में फैल सकता है, जो महामारी का रूप भी ले सकता है.

सावधानी ही बचाव है
अंडे और चिकन को हमेशा अच्छी तरह पकाकर खाएं. पोल्ट्री फार्म या बीमार पक्षियों के संपर्क से बचें. किसी भी तरह के फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. सरकारी और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें.


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Written by: Taushif

14 Aug 2025  ·  Published: 06:27 IST