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नींद नहीं आती? इन छोटे बदलावों से मिलेगा गहरी और सुकून भरी नींद

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Deep Sleep Tips: हमारे जीवन में नींद उतनी ही ज़रूरी है जितनी कि पानी और खाना. अगर सही नींद न मिले तो शरीर और दिमाग दोनों पर बुरा असर पड़ता है. नींद के दौरान ही शरीर खुद को रिपेयर करता है और ऊर्जा को फिर से भरता है. लेकिन आजकल भागदौड़ और तनाव भरी ज़िंदगी में कई लोग रातभर करवटें बदलते रहते हैं और सुबह थकान महसूस करते हैं.

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया, बर्कले के मशहूर न्यूरोसाइंटिस्ट और साइकोलॉजिस्ट डॉ. मैथ्यू वॉकर ने अपनी किताब Why We Sleep और रिसर्च के जरिए नींद को बेहतर बनाने के 6 खास उपाय बताए हैं. ये टिप्स खासकर उन लोगों के लिए हैं जिन्हें नींद आने में दिक्कत होती है या जो अनिद्रा से परेशान रहते हैं.

1. नींद न आए तो बिस्तर से उठ जाएं
डॉ. वॉकर का कहना है कि अगर आप 30 मिनट तक बिस्तर पर लेटे रहने के बाद भी सो नहीं पा रहे हैं, तो बिस्तर से उठ जाना चाहिए. किसी और कमरे में जाकर हल्की किताब पढ़ें या पॉडकास्ट सुनें। लेकिन इस दौरान मोबाइल या टीवी स्क्रीन से दूर रहें और न ही कुछ खाएं, क्योंकि इससे दिमाग और ज़्यादा सक्रिय हो जाता है और नींद आने की संभावना और कम हो जाती है.

2. ध्यान (Meditation) करें
अगर आधी रात को बिस्तर छोड़ना मुश्किल लगता है, तो ध्यान करना एक बेहतरीन उपाय है. रिसर्च से साबित हुआ है कि मेडिटेशन दिमाग को शांत करता है और तनाव को घटाता है, जिससे नींद जल्दी और बेहतर आती है. डॉ. वॉकर कहते हैं कि मैं वैज्ञानिक हूं लेकिन ध्यान पर मौजूद डेटा इतना प्रभावशाली है कि इसे नज़रअंदाज़ करना नामुमकिन है.

3. रोज़ एक ही समय पर सोएं और उठें
नींद को लेकर सबसे अहम बात है – नियमितता. यानी रोज़ एक ही समय पर सोना और उठना। चाहे वर्किंग डे हो या वीकेंड, एक ही रूटीन बनाए रखना नींद की क्वालिटी को बेहतर करता है. हमारा दिमाग तयशुदा पैटर्न में सबसे बेहतर तरीके से काम करता है.

4. सोने से पहले घर को अंधेरा करें
अंधेरा माहौल नींद के लिए ज़रूरी है. वॉकर के अनुसार, सोने से लगभग एक घंटे पहले अपने कमरे की रोशनी कम कर दें या ज्यादातर लाइट्स बंद कर दें. यह वातावरण शरीर को संकेत देता है कि अब आराम करने का समय है और नींद जल्दी आने लगती है.

5. कमरे का तापमान ठंडा रखें
ठंडा माहौल नींद को बढ़ावा देता है. रिसर्च के मुताबिक, सोने से पहले शरीर का तापमान लगभग 1 डिग्री कम होना चाहिए। डॉ. वॉकर सलाह देते हैं कि सोने के कमरे का तापमान 18 से 18.5 डिग्री सेल्सियस रखना नींद के लिए सबसे उपयुक्त है.

6. सोने से पहले शराब से बचें
कई लोग नींद लाने के लिए शराब का सहारा लेते हैं, लेकिन यह नुकसानदायक है. वॉकर कहते हैं कि शराब नींद की गुणवत्ता को बर्बाद कर देती है। यह आपको तुरंत बेहोश तो कर देती है, लेकिन गहरी और सुकूनभरी नींद नहीं आने देती. नतीजा यह होता है कि सुबह उठने पर थकान और चिड़चिड़ापन महसूस होता है.


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Written by: Taushif

06 Sep 2025  ·  Published: 11:34 IST

इन लोगों को कभी नहीं खाना चाहिए आंवला, बढ़ सकती है सेहत की समस्या

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Amla: आंवला यानि इंडियन गूजबेरी को हम सब सुपरफूड मानते हैं. यह विटामिन C, एंटीऑक्सिडेंट और कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है. यही वजह है कि लोग इसे जूस, अचार, पाउडर या सप्लीमेंट के रूप में आसानी से इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि आंवला हर किसी के लिए अच्छा नहीं होता. कुछ लोगों में यह फायदा पहुंचाने के बजाय परेशानी बढ़ा सकता है.

दरअसल, शोधों में पाया गया है कि आंवले में मौजूद कुछ नेचुरल कंपाउंड्स संवेदनशील लोगों में एलर्जी, खुजली, सूजन या पेट से जुड़ी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं. इसके अलावा कुछ मेडिकल स्थितियों में आंवला लेने से हालत और भी खराब हो सकती है. इसलिए इसे खाने से पहले अपनी हेल्थ कंडीशन समझना जरूरी है.

1. जिनका शुगर लेवल बहुत कम रहता है
आंवला ब्लड शुगर को तेजी से नीचे ले आता है. अगर आपका शुगर लेवल पहले से ही लो रहता है या आपको चक्कर, कमजोरी की समस्या होती है, तो बिना डॉक्टर की सलाह आंवला न लें. इससे हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ सकता है.

2. जिन्हें एसिडिटी या गैस की समस्या है
आंवला काफी खट्टा और एसिडिक होता है. संवेदनशील पेट वाले लोगों में यह गैस, एसिडिटी, सीने में जलन और पेट दर्द बढ़ा सकता है. अगर आपको अल्सर, गैस्ट्राइटिस या एसिड रिफ्लक्स है, तो खाली पेट या कच्चा आंवला बिल्कुल न लें.

3. जो ब्लड थिनिंग दवाएं ले रहे हैं
आंवला खून को पतला करने वाले गुण रखता है. ऐसे लोग जो वॉरफरिन, एस्पिरिन या क्लोपिडोग्रेल जैसी दवाएं लेते हैं, उन्हें ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है. ब्लीडिंग डिसऑर्डर वाले लोग भी इसे सावधानी से लें.

4. जिनको किडनी की समस्या या पथरी है
आंवले में मौजूद ज्यादा विटामिन C शरीर में जाकर ऑक्सालेट बनाता है, जो किडनी स्टोन बढ़ाने का कारण बन सकता है. अगर पहले कभी पथरी हुई है तो आंवले का ज्यादा सेवन नुकसान पहुंचा सकता है.

5. प्रेग्नेंट या ब्रेस्टफीडिंग महिलाएं
थोड़ी मात्रा सुरक्षित है, लेकिन ज्यादा आंवला पेट दर्द, दस्त और ऐंठन बढ़ा सकता है. विशेष रूप से सप्लीमेंट रूप में इसे डॉक्टर की सलाह के बिना न लें.

6. जिन्हें एलर्जी होती है
कुछ लोग आंवला खाने के बाद खुजली, रैश, सूजन या मतली महसूस करते हैं. ऐसे में तुरंत इसका सेवन बंद कर दें. आंवला फायदेमंद है, लेकिन हर शरीर के लिए नहीं. अगर ऊपर बताई गई कोई भी स्थिति आप पर लागू होती है, तो आंवला लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.


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Written by: Taushif

17 Nov 2025  ·  Published: 12:06 IST

जिम जाने से पहले कराएं ये 5 टेस्ट, 50 साल से कम उम्र वालों में भी बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा

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Gym Heart Attack Risk: पिछले कुछ समय से जिम या वर्कआउट के दौरान अचानक हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खास बात यह है कि इनमें अधिकतर लोग 50 साल से कम उम्र के रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, बदलती जीवनशैली, तनाव, अनुचित आहार और आनुवंशिक कारणों के चलते हृदय रोग का खतरा अब युवाओं तक पहुंच चुका है. ऐसे में जिम शुरू करने से पहले सावधानी बरतना और जरूरी स्वास्थ्य जांच करवाना बेहद जरूरी है.

अंग्रेज़ी वेबसाइट ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑर्थोपैथ और स्पोर्ट्स सर्जन डॉ. ओबैदुर रहमान ने इंस्टाग्राम पर एक संदेश साझा कर बताया कि जिम शुरू करने से पहले दिल की सेहत का आकलन करने के लिए 5 महत्वपूर्ण टेस्ट करवाना जीवन रक्षक साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि सुंदर दिखने या फिट बॉडी पाने की दौड़ में अक्सर लोग सबसे अहम अंग, ‘दिल’ को नजरअंदाज कर देते हैं.

डॉ. रहमान के मुताबिक, ये टेस्ट्स महंगे नहीं हैं बल्कि आपके स्वास्थ्य निवेश की तरह हैं. विशेषकर 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों, जिनके परिवार में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग का इतिहास रहा है, उन्हें इन जांचों को जरूर करवाना चाहिए. इससे दिल की मौजूदा स्थिति का पता चलता है और जोखिम कम करने में मदद मिलती है.

डॉ. रहमान द्वारा सुझाए गए 5 जरूरी टेस्ट्स

  • ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) – यह टेस्ट दिल की बेसलाइन रिदम और इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी की जांच करता है. इससे किसी भी अनियमित धड़कन या शुरुआती समस्या का पता चलता है.
  • 2डी इको (2D Echocardiography) – यह दिल की संरचना और कार्यप्रणाली को दर्शाता है. इससे स्ट्रक्चरल हार्ट डिज़ीज़, वाल्व या पंपिंग क्षमता जैसी समस्याओं की पहचान होती है.
  • टीएमटी (ट्रेडमिल टेस्ट) – यह स्ट्रेस टेस्ट दिल की क्षमता और तनाव में उसके प्रदर्शन को जांचने के लिए किया जाता है. वर्कआउट के दौरान दिल पर पड़ने वाले दबाव का आकलन करने के लिए यह बेहद अहम है.
  • हाई सेंसिटिविटी ट्रोपोनिन + एनटी-प्रोबीएनपी (HS-Troponin + NT-ProBNP) – ये ब्लड मार्कर्स दिल की छुपी हुई थकान (Silent Cardiac Strain) और शुरुआती डैमेज का संकेत देते हैं. साथ ही, HSCRP और ESR जैसी जांचें शरीर में सूजन और कार्डियोवस्कुलर रिस्क का पता लगाने में मदद करती हैं.
  • लिपिड प्रोफाइल + HbA1C – यह टेस्ट कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और ब्लड शुगर लेवल का आकलन कर मेटाबॉलिक रेड फ्लैग्स को पहचानने में मदद करता है.
     

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Written by: Taushif

15 Sep 2025  ·  Published: 12:11 IST

देश में मौसमी इन्फ्लूएंजा सहित श्वसन संबंधी बीमारियों की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

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Seasonal influenza in India: सर्दियों के मौसम में इन्फ्लूएंजा को फैलने से रोकने के लिए की गई तैयारियों का रिव्यू करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और केमिकल्स और फर्टिलाइजर मंत्री, जे.पी. नड्डा की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग हुई. कर्तव्य भवन 1 में हुई मीटिंग के दौरान, सेक्रेटरी (हेल्थ) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि भारत में आमतौर पर इन्फ्लूएंजा के दो सीज़नल पीक होते हैं. 

अगस्त-अक्टूबर (मॉनसून पीक) और जनवरी-मार्च (सर्दियों का पीक). 2014-15 के दौरान सीज़नल इन्फ्लूएंजा के मामलों में हुई काफ़ी बढ़ोतरी को याद करते हुए, नड्डा ने मौजूदा स्थिति पर अपडेट मांगा और पूछा कि क्या अभी चल रहे वायरस स्ट्रेन पुराने ट्रेंड से कोई बदलाव दिखाते हैं. नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (NCDC) और इंटीग्रेटेड डिज़ीज़ सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि दुनिया भर में और भारत में इन्फ्लूएंजा की एक्टिविटी कम बनी हुई है.

सर्विलांस से पता चलता है कि सर्कुलेटिंग स्ट्रेन आम मौसमी वेरिएंट – H3N2 और इन्फ्लूएंजा B (विक्टोरिया) ही हैं, जिनमें H1N1 का थोड़ा हिस्सा है. मंत्री को नियर-रियल-टाइम सर्विलांस मैकेनिज्म के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसमें IDSP का इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (ILI) और गंभीर एक्यूट रेस्पिरेटरी बीमारी (SARI) सर्विलांस नेटवर्क, मीडिया स्कैनिंग के ज़रिए AI से चलने वाला इवेंट-बेस्ड सर्विलांस, और रेस्पिरेटरी पैथोजन्स के लिए ICMR का सेंटिनल सर्विलांस शामिल है. सभी सिस्टम में अभी इन्फ्लूएंजा के मामलों में किसी असामान्य बढ़ोतरी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं.

NCDC के डायरेक्टर प्रोफेसर (डॉ.) रंजन दास ने यह भी बताया कि NCDC इस महीने के आखिर में इन्फ्लूएंजा पर दो दिन का नेशनल चिंतन शिविर आयोजित करेगा, जिसमें मुख्य मंत्रालय, डिपार्टमेंट और राज्य सरकारें शामिल होंगी, ताकि इन्फ्लूएंजा की तैयारियों का पूरी तरह से रिव्यू किया जा सके और भविष्य के लिए प्लान बनाया जा सके. नड्डा ने चल रही तैयारियों की तारीफ़ की और सभी राज्य नोडल अधिकारियों को इन्फ्लूएंजा की तैयारियों का रिव्यू करने और सभी केंद्र सरकार के अस्पतालों की तैयारी पक्का करने का निर्देश दिया.

उन्होंने निर्देश दिया कि सभी ज़िला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में तैयारियों का रिव्यू अगले दो हफ़्ते में पूरा कर लिया जाए. मंत्री ने इस बारे में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक एडवाइज़री जारी करने और हेल्थ सेंटर्स पर रेगुलर मॉक ड्रिल करने की भी सलाह दी. मीटिंग में यूनियन हेल्थ एंड फ़ैमिली वेलफ़ेयर सेक्रेटरी पुण्य सलिला श्रीवास्तव, यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री की हेल्थ सर्विसेज़ (DGHS) की डायरेक्टर जनरल डॉ. सुनीता शर्मा, जॉइंट सेक्रेटरी (पब्लिक हेल्थ) वंदना जैन, नेशनल सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (NCDC) के डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) रंजन दास, और डिज़ास्टर मैनेजमेंट (DM) सेल और इंटीग्रेटेड डिज़ीज़ सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के एक्सपर्ट्स शामिल हुए.
 


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Written by: Taushif

04 Dec 2025  ·  Published: 11:09 IST