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Muscle Pain Relief: बिना दवा के ऐसे दूर होगा गर्दन व कंधे का दर्द, मिलेगा तुरंत आराम

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फाइल फोटो

Muscle Pain Relief: आज की तेज़ रफ्तार लाइफस्टाइल में गर्दन और कंधे के दर्द की समस्या बेहद आम हो चुकी है. खासकर मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल, लैपटॉप पर झुककर काम करना, गलत तरीके से सोना या शरीर में कमजोरी, यह सब मिलकर इस दर्द को और बढ़ा देते हैं. सर्दियों के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि ठंड के कारण मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और खिंचाव बढ़ जाता है.

अधिकतर लोग इस दर्द से राहत पाने के लिए पेन-किलर दवाइयों, स्प्रे या जेल का सहारा लेते हैं. हालांकि ये उपाय त्वरित राहत देते हैं, लेकिन लंबे समय तक फायदेमंद नहीं होते और बार-बार दवाइयां लेने से शरीर पर इसके दुष्प्रभाव भी पड़ सकते हैं. इन्हीं समस्याओं से बचने के लिए आयुर्वेद में प्राकृतिक और सुरक्षित उपचार बताए गए हैं.

इसी कड़ी में आचार्य बालकृष्ण ने हाल ही में एक घरेलू नुस्खा साझा किया है, जो गर्दन और कंधे के दर्द में काफी प्रभावी माना जा रहा है. यह नुस्खा न केवल आसान है, बल्कि बेहद कम लागत में घर पर ही तैयार किया जा सकता है.

आवश्यक सामग्री
अरंडी का तेल – 50 ml
लहसुन – 4 कलियां (हल्का कूटा हुआ)

तेल तैयार करने की विधि
एक छोटे पैन में अरंडी का तेल गर्म करें और इसमें कूटा हुआ लहसुन डालकर धीमी आंच पर पकने दें. जब लहसुन पूरी तरह काला होने लगे, गैस बंद कर दें. तेल ठंडा होने पर छानकर एक साफ शीशी में भर लें. यह तेल कई दिनों तक सुरक्षित रह सकता है.

यह तेल इतना असरदार क्यों है?
अरंडी का तेल गर्म तासीर वाला माना जाता है, जो मांसपेशियों की जकड़न को ढीला करता है और सूजन कम करता है. वहीं लहसुन में मौजूद सल्फर और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण दर्द को तेजी से शांत करते हैं. दोनों के मिल जाने से यह तेल मसल्स पेन, स्ट्रेन और स्टिफनेस में बेहद कारगर साबित होता है.

कैसे करें इस्तेमाल?
5–10 मिनट तक इस गुनगुने तेल से गर्दन और कंधों की हल्की मालिश करें. इसके बाद गर्म कपड़े या हॉट बैग से सेक करने पर प्रभाव तेजी से दिखता है. रोजाना रात को सोने से पहले यह प्रक्रिया अपनाने पर कुछ ही दिनों में दर्द में काफी कमी महसूस होती है.

किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा?
कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करने वालों को
सुबह उठते ही जकड़न महसूस करने वालों को
बैठे-बैठे काम करने वाले प्रोफेशनल्स को
यह नुस्खा सुरक्षित है और बिना दवा के प्राकृतिक तरीके से राहत देता है.


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Written by: Taushif

23 Nov 2025  ·  Published: 00:43 IST

रोज़ की इडली में लाएं हेल्दी ट्विस्ट, बनाएं चुकंदर इडली

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Beetroot Idli Recipe: इडली एक पारंपरिक साउथ इंडियन डिश है, जिसे आमतौर पर चावल और उड़द दाल के घोल को खमीर उठाकर बनाया जाता है. यह डिश हल्की, सुपाच्य और बहुत ही पौष्टिक मानी जाती है. अगर आप रोज़ की सिंपल इडली में थोड़ा बदलाव लाकर उसे और अधिक हेल्दी और रंगीन बनाना चाहते हैं, तो चुकंदर इडली आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है.

चुकंदर क्यों है फायदेमंद?
चुकंदर में आयरन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और खून की कमी को दूर करने में मदद करता है. साथ ही, इसका नेचुरल गुलाबी-लाल रंग खाने को आकर्षक भी बनाता है. जब इसे इडली जैसे नाश्ते में मिलाया जाए, तो यह स्वाद और सेहत दोनों में चार चांद लगा देता है.

चुकंदर इडली बनाने के लिए सामग्री (Ingredients)

1.    इडली का तैयार घोल – 2 कप (खमीर उठा हुआ चावल और उड़द दाल का मिश्रण)
2.    चुकंदर – 1 मीडियम आकार का (कद्दूकस किया हुआ)
3.    अदरक – 1 छोटा चम्मच (कद्दूकस किया हुआ)
4.    हरी मिर्च – 1-2 बारीक कटी हुई (इच्छा अनुसार)
5.    नमक – स्वादानुसार
6.    तेल या घी – मोल्ड ग्रीस करने के लिए
7.    हरा धनिया – सजावट के लिए

बनाने की विधि (Steps)
1. चुकंदर की तैयारी
चुकंदर को अच्छी तरह धोकर छील लें और फिर कद्दूकस करें. एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें, उसमें कद्दूकस किया चुकंदर डालें और 2-3 मिनट तक हल्का भूनें ताकि उसका कच्चापन कम हो जाए. इसमें एक चुटकी नमक डालें ताकि स्वाद और नमी संतुलित रहे.

2. इडली घोल में मिलाना
भुने हुए चुकंदर को इडली के तैयार घोल में डालें. घोल को अच्छे से मिलाएं ताकि उसमें गुलाबी-लाल रंग आ जाए. अगर घोल ज्यादा गाढ़ा लगे तो थोड़ा पानी डालकर उसे सही टेक्सचर में लाएं.

3. स्टीमिंग की प्रक्रिया
इडली के मोल्ड्स को तेल या घी से अच्छी तरह ग्रीस करें. फिर हर मोल्ड में घोल को सावधानी से भरें. अब इन मोल्ड्स को इडली स्टीमर में रखें और मीडियम आंच पर 10-12 मिनट तक भाप में पकाएं.

4. पकने की जांच
इडली के पकने की जांच के लिए एक टूथपिक डालें. अगर वह साफ बाहर निकलती है तो समझिए इडली तैयार है.

5. परोसने का तरीका
इडली को मोल्ड से निकालें और ऊपर से हरे धनिए से सजाएं. इसे नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी या गरमागरम सांबर के साथ परोसें.


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Written by: Taushif

06 Aug 2025  ·  Published: 05:24 IST

किडनी सिस्ट बढ़ने से पहले पहचानें संकेत, अपनाएं ये आयुर्वेदिक उपाय

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Kidney Cyst Symptoms: बहुत से लोग किडनी सिस्ट से परेशान रहते हैं. ये छोटी, फ्लूइड से भरी थैलियां होती हैं. ज़्यादातर मामलों में ये हानिरहित होती हैं, लेकिन समस्या तब होती है जब सिस्ट का आकार बढ़ने लगता है, जिससे पेट या पीठ के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब करते समय जलन, बार-बार इन्फेक्शन या ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है.

आयुर्वेद के अनुसार, किडनी सिस्ट बनने का कारण शरीर में रुकावटें, कफ का जमा होना और लाइफस्टाइल में असंतुलन है. कई मामलों में शुरुआती स्टेज में हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर और कुछ पारंपरिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करके राहत मिल सकती है, हालांकि कोई भी उपाय आज़माने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है.

किडनी सिस्ट के कारण अक्सर हमारी रोज़ाना की आदतों में छिपे होते हैं, जैसे कम पानी पीना, रात को देर तक जागना, ज़्यादा नमक या मसालेदार खाना खाना, मीठा खाने की आदत, शरीर में सूजन बढ़ना, कब्ज़ या पाचन धीमा होना. ये छोटी-छोटी गलतियां धीरे-धीरे किडनी पर असर डालती हैं.

आयुर्वेद कुछ पारंपरिक उपाय बताता है, जिसमें गोक्षुर और एलोवेरा जूस का मिश्रण, वरुण चूर्ण, गिलोय सत्व, खीरा, पुदीना और धनिया से बना पानी, पुनर्नवा और अश्मभेद का काढ़ा, रात भर भिगोए हुए किशमिश, हल्का लौकी का पानी और रात को त्रिफला लेना शामिल है. कई लोग सूजन कम करने, हल्का महसूस करने और पाचन को संतुलित रखने के लिए इन उपायों का इस्तेमाल करते हैं.

इसी तरह, मत्स्यासन, भुजंगासन और मकरासन जैसे हल्के योगासन किडनी के एरिया में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. कुछ लोग सुबह तांबे के बर्तन में रखा पानी भी पीते हैं, जिसे पारंपरिक रूप से पाचन और सफाई के लिए फायदेमंद माना जाता है. किडनी सिस्ट वाले लोगों को भारी, ज़्यादा नमकीन या प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना चाहिए.

आयुर्वेदिक नज़रिए से लौकी, खीरा, नारियल पानी, गाजर और हल्की दालें जैसे हल्के और पानी वाले खाद्य पदार्थ बेहतर माने जाते हैं. साथ ही, 7-8 गिलास पानी पीना, समय पर सोना, नमक का सेवन सीमित करना, रोज़ 30 मिनट चलना और अपनी क्षमता के अनुसार प्रोटीन का सेवन करना फायदेमंद होता है.


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Written by: Taushif

06 Dec 2025  ·  Published: 11:10 IST

हर दिन बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, अकेले हैं तो जानिए कैसे बचा सकते हैं अपनी जान

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Heart attack symptoms: आजकल हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा एक आम बीमारी बनती जा रही है. पहले यह समस्या उम्रदराज़ लोगों में ही दिखती थी, लेकिन अब 30-35 साल के युवाओं को भी इसका शिकार होते देखा जा रहा है. आंकड़े डराने वाले हैं — WHO के मुताबिक, साल 2019 में दुनियाभर में 1.79 करोड़ लोगों की मौत दिल और ब्लड वेसल्स से जुड़ी बीमारियों के कारण हुई, जिनमें 85% की जान हार्ट अटैक या स्ट्रोक ने ली.

हार्ट अटैक कई बार बिना किसी चेतावनी के आता है. इसलिए ऐसे वक्त पर हर एक सेकेंड कीमती होता है, खासकर अगर आप उस समय अकेले हों. 25 साल का अनुभव रखने वाले मशहूर हार्ट सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने बताया है कि ऐसी स्थिति में कुछ आसान से कदम आपकी जान बचा सकते हैं.

सबसे पहले इमरजेंसी हेल्प को कॉल करें

अगर आपको छाती में तेज दर्द, सांस लेने में दिक्कत या शरीर के बाएं हिस्से में कमजोरी महसूस हो रही हो, तो बिना देर किए एम्बुलेंस या इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें. कॉल पर बने रहें और अपने लक्षण साफ-साफ बताएं. देर करना जानलेवा हो सकता है.

घर को इमरजेंसी के लिए तैयार करें

जब तक मदद आ रही है, अपने घर का मुख्य दरवाजा खोल दें. अगर रात का समय है, तो बाहर की लाइट जला दें ताकि मेडिकल टीम आसानी से आपका घर पहचान सके. इससे समय की बचत होगी.

आराम करें और हिलने-डुलने से बचें

अपने शरीर की एनर्जी बचाएं. बिस्तर या सोफे पर लेट जाएं और पैरों को थोड़ा ऊपर रखें, ताकि ब्लड फ्लो बना रहे. अगर लेटना मुमकिन न हो, तो कुर्सी पर आराम से बैठें और शांत रहें. ज्यादा हिलने-डुलने से बेहोशी या गिरने का खतरा बढ़ सकता है.

किसी करीबी को फोन करें

इमरजेंसी सेवा को कॉल करने के बाद, अपने किसी परिवार के सदस्य या दोस्त को फोन करें. उन्हें बताएं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं और एम्बुलेंस आ रही है. वे अस्पताल में पहुंचकर डॉक्टरों को आपकी मेडिकल हिस्ट्री बता सकते हैं.

ऐसे रखें ध्यान

  1. हार्ट अटैक कभी भी, किसी को भी आ सकता है.
  2. समय पर मदद मिलना जान बचा सकता है.
  3. खुद को शांत और स्थिर रखना बहुत ज़रूरी है.


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Written by: Taushif

28 Jul 2025  ·  Published: 05:18 IST