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बार-बार होती है नाभि खिसकने गिरने की समस्या, इस आसनों से दूर हो सकता है पेट दर्द

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फाइल फोटो

Navel Displacement Symptoms: पेट से जुड़ी ज्यादातर समस्या पाचन या गलत खानपान की वजह से होती है, जिसका पता आसानी से लगाया जा सकता है, लेकिन कई बार नाभि खिसकने की वजह से कई बार असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है. ज्यादातर लोग इसके लक्षणों को पहचान नहीं पाते हैं, लेकिन कुछ आसनों से इसमें राहत मिल सकती है. 

आयुर्वेद में नाभि को बहुत जरूरी माना गया है, जो शरीर की 72,000 नाड़ियों से जुड़ी होती है. इसके खिसक जाने पर शरीर में कई तरह की परेशानियां होती हैं. यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है. ये अचानक ज्यादा भार उठाने की वजह से, चलते-चलते पैर मुड़ जाने की वजह से, सोते समय गलत करवट लेने से (जैसे पेट के बल सोना), पेट की मांसपेशियों के कमजोर होने से या गिर जाने या चोट लग जाने की वजह से हो सकती है.

नाभि खिसकने से पेट फूलने, खाना खाने के तुरंत बाद भी वॉशरूम जाने, हर समय पेट में हल्का-हल्का दर्द और कमर में दर्द की समस्याएं सामने आ सकती हैं. ऐसी स्थिति में योगासन और कुछ एक्सरसाइज से नाभि को ठीक किया जा सकता है. हालांकि, ज्यादा दर्द है तो इसके लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह ली जाती है.

मंडूकासन, सेतुबंधासन, पवनमुक्तासन, नौकासन और कपालभाति प्राणायाम और अनुलोम-विलोम करने से राहत मिल सकती है. ये सभी आसन पेट से जुड़े हैं और पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक करने में मदद करते हैं. इसके अलावा, किसी भी तेल को गर्म करके नाभि के आसपास मालिश की जा सकती है। हल्के हाथ से मालिश करें, अगर मालिश करते वक्त भी ज्यादा दर्द हो रहा है, तो तुरंत आयुर्वेदिक चिकित्सक को दिखाएं.

नाभि खिसकने की समस्या होने पर पैरों के तलवे और पिंडलियों की मालिश करें. माना जाता है कि ऐसा करने से दर्द में आराम मिलता है. साथ ही नाभि में हल्के गर्म सरसों के तेल की बूंदें भी डाली जा सकती हैं. त्रिफला चूर्ण भी नाभि खिसकने में होने वाले दर्द में राहत देता है. ऐसे में सुबह और शाम आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण हल्के गुनगुने पानी के साथ लें. इससे पेट में होने वाले दर्द से राहत मिलेगी.


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Written by: Taushif

28 Oct 2025  ·  Published: 14:49 IST

झुर्रियों और ढीली स्किन से हैं परेशान? ये 5 फूड्स खाने के बाद दिखने लगेगा कमसिन

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

Premature Aging Foods: बुढ़ापा एक ऐसा दौर है जिसे कोई नहीं रोक सकता, लेकिन कई बार लोगों के चेहरे पर इसकी झलक समय से पहले ही दिखने लगती है। जैसे स्किन का ढीला पड़ जाना, झुर्रियों का आना और चेहरे की चमक कम हो जाना। इसकी बड़ी वजह हमारी खराब डाइट, तनावभरी लाइफस्टाइल, पानी कम पीना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी है। अगर आप चाहते हैं कि आप अपनी उम्र से छोटे दिखें और लंबे समय तक यंग नजर आएं, तो आपको अपनी दिनचर्या और खानपान में कुछ जरूरी बदलाव करने होंगे।

डाइट में फलों को शामिल करें
संतरा, मौसमी, कीवी, सेब और कीनू जैसे फल विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं। ये त्वचा को चमकदार बनाते हैं और कोलेजन बनाने में मदद करते हैं, जिससे स्किन टाइट और हेल्दी रहती है। ये फ्री रेडिकल्स से भी लड़ते हैं, जो स्किन की उम्र बढ़ाने का काम करते हैं।

हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं
पालक, मेथी, ब्रोकली जैसी हरी सब्जियां शरीर को जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स देती हैं। ये स्किन के हेल्थ को भी सुधारती हैं और समय से पहले झुर्रियां या ढीलापन आने से रोकती हैं।

ड्राई फ्रूट्स, नट्स और सीड्स खाएं
बादाम, अखरोट, चिया सीड्स, अलसी जैसे नट्स और सीड्स में हेल्दी फैट्स और विटामिन E पाया जाता है। ये स्किन को पोषण देते हैं और लंबे समय तक जवान बनाए रखने में मदद करते हैं। खासकर महिलाओं को 30 की उम्र के बाद इसे डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

हाइड्रेशन का रखें ध्यान
पर्याप्त पानी पीना स्किन को हाइड्रेटेड रखता है, जिससे स्किन ग्लो करती है और बुढ़ापा दूर रहता है। दिनभर में 8-10 गिलास पानी पीने की आदत डालें।

तनाव कम करें और अच्छी नींद लें
तनाव और नींद की कमी भी स्किन को जल्दी बूढ़ा बना देती है। इसलिए रोज़ाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें और योग या मेडिटेशन से तनाव कम करें।


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Written by: Taushif

20 Jul 2025  ·  Published: 05:35 IST

सर्दी-जुकाम, कमजोरी और थकान को कहें अलविदा, रोजाना लें एक चम्मच च्यवनप्राश

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Chyawanprash Benefits: च्यवनप्राश भारत में सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा एक पारंपरिक आयुर्वेदिक फॉर्मूला है. इसका नाम ऋषि च्यवन के नाम पर रखा गया, जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने अपनी उम्र, ताकत और स्वास्थ्य सुधारने के लिए इस औषधीय मिश्रण का उपयोग किया था. आज भी कई लोग इसे रोज़ाना लेते हैं, क्योंकि यह शरीर की ताकत, ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है.

च्यवनप्राश का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि यह इम्युनिटी मजबूत करता है. विशेषकर सर्दियों में लोग इसे ठंड, खांसी और जुकाम जैसी छोटी लेकिन परेशान करने वाली समस्याओं से बचने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह अपनाते हैं. इसका मुख्य घटक आंवला है, जो विटामिन-सी का समृद्ध स्रोत माना जाता है. यह शरीर में एंटीऑक्सीडेंट बढ़ाकर ऊर्जा, त्वचा और पाचन के लिए भी लाभकारी होता है.

च्यवनप्राश में शामिल ब्रह्मी और शंखपुष्पी मस्तिष्क को शांत रखने और याददाश्त सुधारने के लिए जानी जाती हैं. वहीं गिलोय और पिप्पली जैसी जड़ी-बूटियां फेफड़ों और श्वसन तंत्र को मजबूत करने में मदद करती हैं और कफ को संतुलित करती हैं. इसके अलावा, इसमें मौजूद अश्वगंधा और विदारीकंद शरीर में ताकत और स्टैमिना बढ़ाने में मदद करते हैं. इन्हें अक्सर थकान, कमजोरी और उम्र से जुड़े बदलावों को धीमा करने में सहायक माना जाता है.

नियमित सेवन से लोग अक्सर त्वचा में निखार, बालों में मजबूती और सेहत में सुधार महसूस होने की बात कहते हैं. आमतौर पर इसे सुबह खाली पेट या दूध के साथ 1–2 चम्मच लिया जाता है, जबकि बच्चों के लिए आधा चम्मच पर्याप्त माना जाता है. हालांकि, डायबिटीज वाले लोग च्यवनप्राश का शुगर-फ्री या शहद रहित विकल्प चुनें. साथ ही, किसी भी आयुर्वेदिक दवा को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है.


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Written by: Taushif

24 Nov 2025  ·  Published: 11:48 IST

डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद दालचीनी की चाय, ऐसे बनाएं

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Cinnamon Tea for Diabetes: डायबिटीज ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती जाती है. लेकिन भारतीय रसोई में मौजूद कई मसाले इस बीमारी को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं. इन्हीं में से एक है दालचीनी, जिसे आयुष मंत्रालय ने डायबिटीज मरीजों के लिए खास फायदेमंद बताया है.

भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में आयुष मंत्रालय प्राकृतिक और घरेलू उपाय अपनाने की सलाह देता है. दालचीनी की चाय न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करती है. दालचीनी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं, जिससे शरीर ग्लूकोज को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाता है.

नियमित रूप से दालचीनी की चाय पीने से ब्लड शुगर का लेवल स्थिर रहता है और अचानक बढ़ने-घटने की समस्या कम होती है. यह चाय कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करने में भी मदद करती है. खराब कोलेस्ट्रॉल कम होने से दिल की बीमारियों का जोखिम घटता है, जो डायबिटीज मरीजों में आम समस्या है. दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो शरीर में सूजन कम करते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं.

दालचीनी की चाय बनाने का आसान तरीका
सबसे पहले एक कप पानी लें और इसमें आधा चम्मच दालचीनी पाउडर या एक छोटी दालचीनी की स्टिक डालें. इसके बाद  5–10 मिनट तक उबालें, छानकर गर्म-गर्म पिएं. साथ ही चाहें तो थोड़ा शहद या नींबू मिला सकते हैं.

नोट
दालचीनी फायदेमंद है, लेकिन यह दवा का विकल्प नहीं है। शुगर मरीजों को अपनी दवा, डाइट और एक्सरसाइज जारी रखना जरूरी है. दालचीनी की चाय का सेवन डॉक्टर की सलाह के साथ ही करना चाहिए. गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज इसे लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.


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Written by: Taushif

15 Nov 2025  ·  Published: 12:26 IST