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Detox Herbs: सुबह तक पेट और लिवर हो जाएंगे साफ, बस अपनाएं किचन के ये 4 पत्ते

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Detox Herbs: शरीर में जब गंदगी जमा होती है तो उसका असर सीधे डाइजेशन, स्किन और एनर्जी लेवल पर दिखने लगता है. थकान, मुंहासे , पेट में भारीपन या सुस्ती, ये सब इसी की निशानी हैं. डिटॉक्स के लिए लोग महंगे ग्रीन जूस या सप्लीमेंट्स लेते हैं, लेकिन असली सफाई तभी होती है जब आंतें और लिवर ठीक से काम करें. इसका आसान उपाय आपके किचन में ही छिपा है. चार ऐसे पत्तों में, जो शरीर को भीतर से साफ कर देते हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं ये 4 पत्ते और इस्तेमाल कैसे करें.

1. सेना पत्ता (Senna Leaf)
सेना पत्ता सबसे असरदार डिटॉक्स माना जाता है. यह आंतों की मसल्स को एक्टिव करता है और पुरानी जमा गंदगी को बाहर निकालता है. कब्ज या सख्त स्टूल की समस्या वाले लोगों के लिए यह बेहद फायदेमंद है. सबसे पहले आधा चम्मच सेना पाउडर में थोड़ा काला नमक मिलाकर रात को गर्म पानी के साथ लें. साथ ही इसका सेवन हफ्ते में 1-2 बार ही करें, क्योंकि ज्यादा लेने से आदत बन सकती है.

2. नीम की पत्तियां (Neem Leaves)
नीम की पत्तियां शरीर से बैक्टीरिया और टॉक्सिन्स को बाहर करती हैं. यह पेट में संक्रमण, माउथ अल्सर, फूड पॉइजनिंग और स्किन प्रॉब्लम्स में मददगार है. सबसे पहले सुबह खाली पेट कुछ नीम की पत्तियां चबाएं या नीम कैप्सूल लें. इसके बाद पेट की सफाई के साथ-साथ त्वचा भी साफ और चमकदार रहती है.

3. करी पत्ता (Curry Leaves)
करी पत्ता लिवर को एक्टिव करता है और बाइल प्रोडक्शन बढ़ाता है, जिससे पाचन बेहतर होता है. यह फैटी लिवर और पेट के आसपास जमा फैट को घटाने में मदद करता है. करी पत्ते को चबाकर या उसका पाउडर गर्म पानी के साथ रात को सोने से पहले लें.

4. पुदीना (Mint Leaves)
पुदीना पेट की मसल्स को रिलैक्स करता है, गैस और ब्लोटिंग को कम करता है और पेट की जलन को शांत करता है. यह इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याओं में भी असरदार है. सबसे पहले रात को सोने से पहले पुदीने की चाय पीएं. इसके बाद पेट ठंडा रहता है और नींद भी अच्छी आती है.


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Written by: Taushif

19 Oct 2025  ·  Published: 20:46 IST

प्रकृति का तोहफा: तोप के गोले सा दिखता है नागलिंग का फल, सेवन से मिलते हैं अनगिनत फायदे

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Nagalinga Fruit Benefits: कुदरत ने हमें कई कीमती दवाइयां दी हैं जो सेहतमंद ज़िंदगी जीने में मदद कर सकती हैं. ऐसी ही एक चीज़ है नागलिंग, जिसका फल तोप के गोले जैसा दिखता है. आयुर्वेद में नागलिंग के पेड़ को वरदान माना जाता है. भारत सरकार का आयुष मंत्रालय नागलिंग को अमृत जैसा बताता है और इसके गुणों के बारे में बताता है.

नागलिंग के पेड़ का साइंटिफिक नाम कौरौपिटा गुआनेंसिस है. इसे कैननबॉल ट्री के नाम से भी जाना जाता है. इस पेड़ की सबसे खास बातें इसके फूल और फल हैं. फूल इतने अनोखे होते हैं कि वे शिवलिंग पर अपना फन फैलाए सांप जैसे लगते हैं. इसी सुंदरता और आकार की वजह से इसे "नागलिंग" नाम मिला है. इसके फल गोल और भारी होते हैं, तोप के गोले जैसे. फूलों से बहुत तेज़ खुशबू आती है जो दूर-दूर तक फैलती है.

मंत्रालय के मुताबिक, नागलिंग का पेड़ कुदरत का दिया एक अनोखा तोहफा है. इसका हर हिस्सा दवाइयों के गुणों से भरा है. इसकी पत्तियों, छाल, फूलों और फलों से मिलने वाले अर्क में विटामिन E, स्टेरोल्स और ज़रूरी फैटी एसिड भरपूर होते हैं. साइंटिफिक रिसर्च से पता चलता है कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीफंगल, एंटीकैंसर और एंटीमलेरियल गुण होते हैं. आयुर्वेद में नागलिंग खाने के खास फायदे बताए गए हैं. यह हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और दर्द और सूजन से राहत देता है.

यह सर्दी, खांसी और पेट दर्द से राहत देता है. यह घाव भरने में मदद करता है और हेल्दी स्किन को बढ़ावा देता है. यह मलेरिया और दांत दर्द में भी बहुत असरदार है. इसके एंटीमाइक्रोबियल गुण इन्फेक्शन से बचाते हैं. नागलिंग पेड़ का हर हिस्सा सेहत का खजाना माना जाता है. इसका इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक दवा में किया जाता रहा है, और मॉडर्न रिसर्च भी इसके फायदों को कन्फर्म कर रही है.


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Written by: Taushif

04 Dec 2025  ·  Published: 11:26 IST

परफ्यूम कलाई, गर्दन या कान के पीछे ही क्यों लगाया जाता है? जानिए आसान वजह

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हम में से ज्यादातर लोग परफ्यूम का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि परफ्यूम हमेशा कलाई, गर्दन या कान के पीछे ही क्यों लगाया जाता है? दरअसल, इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण छिपा है. शरीर के जिन हिस्सों पर रक्त की नलिकाएं त्वचा के सबसे पास होती हैं, वहां शरीर की गर्मी ज्यादा होती है. इन्हीं हिस्सों को पल्स पॉइंट्स कहा जाता है. जैसे कलाई, गर्दन, कान के पीछे, कोहनी के अंदर का हिस्सा और छाती के पास.

इन जगहों की गर्मी से परफ्यूम के मॉलिक्यूल्स जल्दी वाष्पित होते हैं, जिससे खुशबू धीरे-धीरे फैलती रहती है और लंबे समय तक टिकी रहती है. अगर आप परफ्यूम को कपड़ों पर लगाते हैं, तो वहां इतनी गर्मी नहीं होती, इसलिए खुशबू जल्दी उड़ जाती है. लेकिन जब इसे पल्स पॉइंट्स पर लगाया जाता है, तो खुशबू पूरे दिन नेचुरल तरीके से आपके साथ बनी रहती है.

असल में परफ्यूम लगाने का मजा सिर्फ खुशबू में नहीं, बल्कि उस एहसास में भी है जो आपके शरीर की धड़कनों के साथ चलती है. जब आपका पल्स परफ्यूम को रिलीज करता है, तो खुशबू मानो आपके शरीर की रिदम के साथ बहने लगती है. आज के समय में परफ्यूम सिर्फ दूसरों को आकर्षित करने का ज़रिया नहीं, बल्कि एक तरह का सेल्फ-केयर रिचुअल बन चुका है. जो आपके कॉन्फिडेंस और मूड दोनों को बेहतर करता है.
 


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Written by: Taushif

12 Nov 2025  ·  Published: 11:49 IST

सिर्फ 5 मिनट का भुजंगासन, पेट की चर्बी गायब और पाचन बेहतर!

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Bhujangasana Benefits: व्यस्तता, कामकाजी, ट्रैफिक और घरेलू जिम्मेदारियों में फंसे लोगों के शरीर में तनाव, थकान, पेट की जिद्दी चर्बी और कब्ज जैसी समस्याएं घर कर जाती हैं, लेकिन ऐसे में योग करना एक प्रभावी उपाय हो सकता है. इन्ही में से एक है भुजंगासन.

आयुष मंत्रालय के मुताबिक, यह आसन तनाव घटाने, पेट की जिद्दी चर्बी पिघलाने और कब्ज जैसी पाचन परेशानियों को जड़ से खत्म करने में मददगार हो सकता है. पीठ दर्द, साइटिका और श्वसन तंत्र की दिक्कतों से छुटकारा दिलाने वाला यह योग हर उम्र के लिए वरदान है.

'भुजंगासन' को 'कोबरा पोज' या फिर 'सर्पासन' के नाम से भी जाना जाता है. इसे सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में से आठवां स्थान प्राप्त है. आयुष मंत्रालय ने भी 'भुजंगासन' पर विशेष जानकारी दी, जिसमें बताया गया है कि 'भुजंग' शब्द का अर्थ होता है 'सर्प' या 'नाग'. इस आसन में शरीर की आकृति सर्प के फन की तरह ऊपर उठती है, इसलिए इसे भुजंगासन कहा जाता है. यह आसन तनाव को कम करने, चर्बी घटाने और कब्ज दूर करने में सहायक है. साथ ही, यह पीठ दर्द व श्वसन नली से संबंधित समस्याओं को दूर करता है.

'भुजंगासन' को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं और अपनी दोनों हथेलियों को जांघों के पास जमीन की तरफ करके रखें और इस बात का ध्यान रखें कि आपके दोनों टखने एक-दूसरे को छूते रहें. इसके बाद दोनों हाथों को कंधे के बराबर लेकर आएं और साथ ही दोनों हथेलियों को जमीन की तरफ रखें. अब शरीर का वजन हथेलियों पर डालें और धीरे-धीरे सांस भीतर की ओर खींचे और सिर को उठाते हुए पीठ की तरफ खींचें. 

ध्यान दें कि इस वक्त तक आपकी कुहनी मुड़ी हुई है और फिर सिर को पीछे की तरफ ले जाएं और साथ ही अपनी छाती को आगे की तरफ निकालें. फिर पुन: वाली अवस्था में आ जाएं और अपनी क्षमता के अनुसार इस प्रक्रिया को दोहराएं. पीठ दर्द, हाल की सर्जरी, रीढ़ की गंभीर समस्या या मासिक धर्म के दौरान यह आसन न करें. डॉक्टर से सलाह लें। योग अपनाकर हम स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं.


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Written by: Taushif

01 Nov 2025  ·  Published: 09:57 IST