फाइल फोटो
Kidney Disease Symptoms: किडनी हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी अंग है, जो शरीर से वेस्ट मटेरियल और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करती है. यह इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखती है और शरीर के मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करती है. लेकिन जब किडनी कमजोर होने लगती है, तो इसका असर सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहर भी दिखाई देता है. जैसे कि बालों का झड़ना, पतलापन या गंजापन.
किडनी खराब होने पर क्यों झड़ते हैं बाल
किडनी की खराबी से शरीर में यूरिया और क्रिएटिनिन जैसे अपशिष्ट पदार्थ खून में बढ़ जाते हैं. यह टॉक्सिन्स बालों की जड़ों यानी हेयर फॉलिकल्स को कमजोर कर देते हैं. जब पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ता है, तो बालों को जरूरी विटामिन और मिनरल नहीं मिल पाते, जिससे हेयर ग्रोथ रुक जाती है और बाल झड़ने लगते हैं.
एनीमिया और हार्मोनल असंतुलन भी वजह
किडनी की बीमारी से शरीर में एनीमिया (खून की कमी) हो जाती है, जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई बालों की जड़ों तक नहीं पहुंच पाती. इसके अलावा, विटामिन D, जिंक और पैराथाइरॉइड हार्मोन के स्तर में असंतुलन भी बालों को कमजोर कर देता है. कई बार क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित मरीजों को बालों के रूखेपन, टूटने या गंजेपन जैसी समस्याएं भी होती हैं.
डायलिसिस और दवाएं बढ़ा सकती हैं दिक्कत
किडनी रोगियों को दी जाने वाली कुछ दवाएं या डायलिसिस ट्रीटमेंट भी हेयर लॉस बढ़ा सकते हैं. डॉक्टर आमतौर पर ऐसे मरीजों को पोषक तत्वों की निगरानी और सॉफ्ट हेयर केयर रूटीन अपनाने की सलाह देते हैं.
टेलोजन एफ्लुवियम का खतरा
किडनी की बीमारी से शरीर पर पड़ने वाला तनाव एक और स्थिति टेलोजन एफ्लुवियम (Telogen Effluvium) को जन्म दे सकता है. इसमें बालों का एक बड़ा हिस्सा ग्रोथ साइकिल से बाहर हो जाता है, जिससे अचानक हेयरफॉल बढ़ जाता है.
बाल झड़ना हो सकता है बीमारी का संकेत
अगर किसी व्यक्ति के बाल अचानक बहुत झड़ने लगें, तो इसे केवल सामान्य हेयरफॉल समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए. यह किडनी या अन्य गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
फाइल फोटो
Strong Bones: हड्डियां हमारे शरीर की आधारशिला होती हैं। ये न केवल हमारे शरीर को आकार और सहारा देती हैं, बल्कि हमारे महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाती हैं. इसलिए हड्डियों को मजबूत बनाए रखना हर उम्र में ज़रूरी है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है, जिससे फ्रैक्चर और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन अच्छी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल से इन्हें मजबूत रखा जा सकता है.
1. कैल्शियम से भरपूर आहार अपनाएं
कैल्शियम हड्डियों की संरचना का प्रमुख हिस्सा है. यह हड्डियों के विकास और उन्हें मजबूत बनाए रखने में बेहद सहायक होता है. दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक, मेथी), फोर्टिफाइड अनाज, सोया उत्पाद और छोटी हड्डी वाली मछलियों में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. रोजाना कैल्शियम युक्त आहार लेने से हड्डियों का घनत्व बेहतर बना रहता है और टूटने की संभावना कम हो जाती है.
2. विटामिन D की कमी न होने दें
विटामिन D, कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है. अगर शरीर में इसकी कमी हो, तो चाहे कैल्शियम जितना भी ले लिया जाए, उसका असर नहीं दिखेगा. विटामिन D का सबसे अच्छा स्रोत सूरज की रोशनी है. इसके अलावा अंडे की ज़र्दी, फेटी फिश (जैसे साल्मन, टूना) और फोर्टिफाइड दूध/अनाज में भी यह पोषक तत्व मिलता है.
3. अन्य ज़रूरी पोषक तत्व
हड्डियों की मजबूती के लिए केवल कैल्शियम और विटामिन D ही नहीं, बल्कि मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, विटामिन K और प्रोटीन भी ज़रूरी हैं. ये पोषक तत्व हड्डियों की मजबूती बढ़ाने, उनके निर्माण और मरम्मत में मदद करते हैं. नट्स, बीज, साबुत अनाज और हरी सब्जियां इनका अच्छा स्रोत हैं.
4. नियमित एक्सरसाइज करें
व्यायाम न केवल हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ाता है. रोजाना वॉक करना, सीढ़ियां चढ़ना, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, डांस, टेनिस और बास्केटबॉल जैसे एक्टिविटीज़ हड्डियों पर सही दबाव डालती हैं, जिससे उनमें मजबूती आती है. वेट-बेयरिंग और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज मांसपेशियों को भी मजबूत करती हैं, जिससे हड्डियों पर तनाव कम होता है.
फाइल फोटो
मानसून का मौसम हरियाली, ठंडक और सुकून का एहसास लेकर आता है. यह मौसम जहाँ मन को सुकून देता है, वहीं आपकी त्वचा के लिए कई समस्याएँ भी पैदा कर सकता है. इस मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे त्वचा तैलीय हो जाती है और रोमछिद्र बंद हो सकते हैं. इससे मुहांसे, फंगल इन्फेक्शन, खुजली और त्वचा में जलन जैसी समस्याएँ होती हैं.
ऐसे में मानसून में त्वचा का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है. यहाँ कुछ आसान और असरदार स्किनकेयर टिप्स दिए गए हैं जो मानसून के मौसम में भी आपकी त्वचा को स्वस्थ और तरोताज़ा रखेंगे.
हाइड्रेटेड रहें
बारिश के मौसम में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए पर्याप्त पानी पीना ज़रूरी है. रोज़ाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएँ. यह न सिर्फ़ शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, बल्कि त्वचा को अंदर से चमकदार भी बनाता है.
त्वचा की सफ़ाई का ध्यान रखें
मानसून के दौरान त्वचा पर गंदगी, पसीना और बैक्टीरिया जल्दी जमा हो जाते हैं. ऐसे में दिन में दो बार माइल्ड फेसवॉश से चेहरा साफ़ करें. नहाने के बाद, फंगल इन्फेक्शन से बचने के लिए अंडरआर्म्स, पैर की उंगलियों और घुटनों को अच्छी तरह सुखाना न भूलें.
हल्के और सूती कपड़े पहनें
मौसम में नमी के कारण, टाइट और सिंथेटिक कपड़े पहनने से त्वचा पर रैशेज़ और जलन हो सकती है। हमेशा हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें जो पसीना सोख लें और त्वचा को सांस लेने दें.
त्वचा के अनुकूल मॉइस्चराइज़र लगाएँ
मानसून में तैलीय त्वचा के लिए तेल-मुक्त और पानी-आधारित मॉइस्चराइज़र का प्रयोग करें. इससे त्वचा मुलायम रहेगी और मुहांसे भी नहीं निकलेंगे.
स्वस्थ और संतुलित आहार लें
मानसून में तले हुए, मसालेदार और किण्वित खाद्य पदार्थों से बचें. इसके बजाय, मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन बढ़ाएँ, जो त्वचा को पोषण देते हैं और शरीर की आंतरिक प्रणाली को भी संतुलित रखते हैं.
फाइल फोटो
Winter Diet Tips: सर्दियों में शरीर को गर्म, मजबूत और सेहतमंद बनाए रखना बेहद ज़रूरी होता है. ठंड के मौसम में शरीर की इम्यूनिटी कमज़ोर पड़ जाती है, जिससे सर्दी-जुकाम, जोड़ों का दर्द और त्वचा की रूखापन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में अगर आप रोज़ की रोटियों को थोड़ा हेल्दी बना लें, तो ये सर्दी में एक तरह की प्राकृतिक औषधि का काम कर सकती हैं. रोटियां हर घर की थाली का हिस्सा होती हैं, और अगर इन्हीं में कुछ खास चीजें मिला दी जाएं, तो स्वाद और सेहत दोनों के फायदे मिलते हैं.
सोंठ पाउडर (सूखा अदरक)
सर्दियों में सोंठ का सेवन बेहद फायदेमंद माना गया है. इसमें मौजूद जिंजरोल और शोगोल जैसे तत्व शरीर में गर्माहट बनाए रखते हैं और सर्दी-जुकाम से बचाते हैं. इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं. अगर आप रोज़ के आटे में आधा या एक चम्मच सोंठ पाउडर मिला लें, तो रोटियां हल्की मसालेदार होने के साथ शरीर को अंदर से गर्म रखती हैं.
मेथी पाउडर
सर्दियों में मेथी का सेवन जोड़ों के दर्द और गठिया की समस्या में बहुत असरदार होता है. मेथी में मौजूद सैपोनिन और फ्लेवोनॉयड्स शरीर की सूजन को कम करते हैं. साथ ही, यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और पाचन को सुधारने में मदद करती है. आटे में 1-2 चम्मच मेथी पाउडर मिलाने से रोटियां थोड़ी कड़वी लग सकती हैं, लेकिन यही कड़वाहट शरीर को गर्मी और ऊर्जा देती है.
अजवाइन पाउडर
ठंड में गैस और पेट फूलने की समस्या आम है. अजवाइन इसमें राहत देती है. इसमें मौजूद थाइमोल नामक तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है, जिससे खाना जल्दी पचता है और पेट की परेशानी दूर होती है. आटे में एक चम्मच अजवाइन पाउडर मिलाने से रोटियां स्वादिष्ट और पेट के लिए फायदेमंद बनती हैं.
तिल पाउडर
तिल को सर्दियों का सुपरफूड कहा जाता है. इसमें कैल्शियम, आयरन, जिंक और हेल्दी फैट्स होते हैं जो हड्डियों और त्वचा के लिए फायदेमंद हैं. तिल में मौजूद सेसमोलिन और सेसामोलिन तत्व एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं और ठंड से बचाते हैं. आटे में 2-3 चम्मच तिल का पाउडर डालकर रोटियां बनाना बेहद फायदेमंद होता है.