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एनीमिया क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

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Iron Deficiency Symptoms: आयरन हमारे शरीर के लिए एक बेहद ज़रूरी पोषक तत्व है. यह न सिर्फ खून बनाने में मदद करता है, बल्कि पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम भी करता है. अगर शरीर में आयरन की कमी हो जाए तो इसका सीधा असर हमारी ऊर्जा, रोग प्रतिरोधक क्षमता और अंगों के कामकाज पर पड़ता है. आयरन की कमी से सबसे ज्यादा एनीमिया नामक बीमारी होती है, जो आज के समय में बहुत आम हो चुकी है.

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की रिपोर्ट के मुताबिक, आयरन की कमी खासकर उन लोगों में देखी जाती है जो फोर्टिफाइड अनाज या आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों का कम सेवन करते हैं. फोर्टिफाइड अनाज में मौजूद पोषक तत्व रोज़ाना की ज़रूरत का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर सकते हैं. अगर इन्हें डाइट से हटा दिया जाए तो शरीर में धीरे-धीरे आयरन की कमी हो सकती है.

एनीमिया किन कारणों से होता है?


एनीमिया सिर्फ आयरन की कमी से नहीं होता, बल्कि इसके कई और भी कारण हैं:-

विटामिन की कमी – खासकर फोलेट और विटामिन बी12 की कमी

क्रॉनिक बीमारियां – लंबे समय तक चलने वाले रोग, जैसे किडनी या लिवर की समस्या

थैलेसीमिया और जेनेटिक रेड ब्लड सेल डिसऑर्डर – वंशानुगत बीमारियां

संक्रमण और ऑटो-इम्यून डिजीज़ – शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी दिक्कतें

कुछ दवाओं का असर

गर्भावस्था – इस दौरान महिलाओं को अतिरिक्त आयरन की ज़रूरत होती है

इन सब कारणों में सबसे कॉमन कारण आयरन की कमी है, जो धीरे-धीरे गंभीर समस्या का रूप ले सकती है.

आयरन की कमी के प्रमुख लक्षण

1. लगातार थकान रहना
थकान आयरन की कमी का सबसे आम लक्षण है. आयरन हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जो खून के जरिए शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाता है. अगर खून में आयरन की मात्रा कम हो जाती है तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और इंसान अक्सर थका हुआ महसूस करता है. हालांकि, थकान के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे – डिप्रेशन, ज्यादा तनाव, नींद की दिक्कत या स्लीप एप्निया. लेकिन अगर बिना किसी बड़ी वजह के लगातार थकान महसूस हो रही है तो आयरन की जांच करवाना जरूरी है.

2. हर वक्त ठंड लगना
आयरन की कमी की वजह से कुछ लोगों को हमेशा ठंड लगती रहती है. खासकर हाथ-पांव ठंडे रहने लगते हैं. 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में थायरॉइड हार्मोन की अहम भूमिका होती है. थायरॉइड का सही से काम करने के लिए आयरन बेहद जरूरी है. अगर शरीर में आयरन की कमी हो तो थायरॉइड प्रभावित हो सकता है और शरीर का तापमान असंतुलित हो सकता है.

3. सांस फूलना
अगर आप रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करते हैं और फिर भी आपको सांस लेने में दिक्कत होती है, तो यह भी आयरन की कमी का लक्षण हो सकता है. 2023 की एक स्टडी में बताया गया कि आयरन शरीर में ऑक्सीजन को हर सेल तक पहुंचाने का काम करता है. जब शरीर में आयरन कम हो जाता है तो मांसपेशियों और अंगों तक ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है. इसके चलते हल्की गतिविधि करने पर भी सांस फूलने लगती है.

आयरन की कमी क्यों खतरनाक है?
आयरन की मामूली कमी शुरुआत में सामान्य लग सकती है, लेकिन अगर इसे नज़रअंदाज कर दिया जाए तो यह गंभीर एनीमिया का कारण बन सकती है. इससे इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे बार-बार संक्रमण होता है. गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी से प्रीमैच्योर डिलीवरी और शिशु के कम वजन की समस्या हो सकती है. लंबे समय तक कमी रहने पर दिल और दिमाग पर असर पड़ सकता है.

आयरन की कमी से बचाव के उपाय

आहार में बदलाव

  • पालक, मेथी, चुकंदर, हरी पत्तेदार सब्जियां

  • सेब, अनार, किशमिश, खजूर

  • मसूर और चना जैसी दालें

  • मीट, मछली, अंडा (नॉन-वेज खाने वालों के लिए)

फोर्टिफाइड अनाज और खाद्य पदार्थ का सेवन
गेहूं, चावल और आटे में मिलने वाले फोर्टिफाइड प्रोडक्ट्स

विटामिन C का सेवन

संतरा, नींबू, अमरूद जैसे फलों के साथ आयरन लें, इससे शरीर आयरन को जल्दी अवशोषित करता है.

डॉक्टर से नियमित जांच

अगर लगातार थकान, ठंड या सांस फूलने की समस्या है तो खून की जांच जरूर करवाएं.


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Written by: Taushif

08 Sep 2025  ·  Published: 12:38 IST

गैस और एसिडिटी से निजात पाने के आसान घरेलू उपाय

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Health News: गैस और एसिडिटी आम समस्याएँ हैं जो आजकल की भागदौड़ भरी और अनियमित जीवनशैली के कारण लगभग सभी को समय-समय पर परेशान करती हैं। देर से या भारी भोजन करना, तनाव और समय पर भोजन न करना इसके कुछ मुख्य कारण हैं। इससे पेट में जलन, पेट फूलना, डकार आना और बेचैनी हो सकती है। दवाइयाँ अस्थायी राहत देती हैं, लेकिन अगर आप स्थायी समाधान चाहते हैं, तो कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय बेहद कारगर हो सकते हैं।

1. धनिया, सौंफ और जीरे की हर्बल चाय

ये तीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ पाचन में मदद करती हैं और पेट की सूजन व जलन को कम करती हैं। एक चम्मच जीरा, धनिया और सौंफ को दो कप पानी में 5-7 मिनट तक उबालें। इसे छानकर खाने के बाद गरमागरम पिएँ। यह चाय गैस और एसिडिटी से राहत दिलाने में बेहद कारगर है।

2. त्रिफला का सेवन

त्रिफला तीन औषधीय फलों - आंवला, बिबिटकी और हरीतकी से बनता है। यह पेट की सूजन, एसिड से होने वाले नुकसान और खराब पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसे रोज़ाना रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ 10-15 दिनों तक लेने से पाचन तंत्र मज़बूत होता है और एसिडिटी से राहत मिलती है।

3. सोंठ और गुड़

अदरक पाचन अग्नि को बढ़ाता है और गैस से राहत देता है, जबकि गुड़ पाचक एंजाइमों को सक्रिय करता है। एक चम्मच सोंठ पाउडर, एक बड़ा चम्मच गुड़ और एक छोटा चम्मच घी मिलाकर रोज़ाना सेवन करें। इससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और गैस व एसिडिटी से राहत मिलती है।

जीवनशैली में ज़रूरी बदलाव

  1. रोज़ाना समय पर खाना खाएँ और चबाकर खाएँ।
  2. तेलयुक्त और भारी भोजन से बचें।
  3. खाने के बाद थोड़ी देर टहलें और तुरंत लेटें नहीं।
  4. दिन भर पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएँ।
  5. योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

इन आसान और कारगर उपायों को अपनाकर आप गैस और एसिडिटी की समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं।


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Written by: Taushif

26 Jul 2025  ·  Published: 05:21 IST

अल्सर को एसिडिटी समझकर न करें नजरअंदाज़, शुरुआती लक्षण पहचानें और सही खानपान से पाएं राहत

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Ulcer Early Symptoms: अक्सर लोग पेट में जलन या खट्टी डकारों को साधारण एसिडिटी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लक्षण आगे चलकर अल्सर का कारण बन सकते हैं. बार-बार जलन, गैस, पेट दर्द, भूख कम लगना या वजन घटना जैसे संकेतों को हल्का नहीं लेना चाहिए. अल्सर शरीर के कई हिस्सों, जैसे मुंह, पेट या आंतों में बन सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा इसके मामले आमाशय और आंतों में पाए जाते हैं.

जब पेट में बनने वाला तेज़ अम्ल पेट की भीतरी दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है, तो वहां घाव बन जाता है। यह एसिड इतना प्रबल होता है कि लोहे की ब्लेड को भी गलाने की क्षमता रखता है, इसलिए यह पेट के ऊतकों पर गंभीर असर डाल सकता है.

अल्सर क्यों होता है?
गलत खानपान अल्सर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. ज्यादा चाय-कॉफी, तला-भुना और मसालेदार खाना, शराब, खट्टे खाद्य पदार्थ और तनाव, गुस्सा व चिंता शरीर में अम्ल बढ़ाते हैं. जब पेट में एसिड आवश्यकता से अधिक बनने लगता है, तो यह पेट की दीवारों को नुकसान पहुँचाकर अल्सर बना देता है. शुरुआती चरण में पेट में जलन, गैस, खट्टी डकारें और दर्द दिखाई देता है. स्थिति बिगड़ने पर छाती में जलन, उल्टी, पाचन गड़बड़ होना और कई बार मल में खून आने तक की समस्या हो सकती है. समय पर ध्यान न दिया जाए तो रोग गंभीर हो सकता है.

कैसे करें अल्सर से राहत?
अल्सर सही आहार और जीवनशैली अपनाने से काफी हद तक ठीक हो सकता है. कुछ प्राकृतिक उपाय पेट की जलन और घाव भरने में बेहद कारगर हैं. पत्ता गोभी और गाजर का जूस पेट की सूजन कम करता है, जबकि गाय का दूध और घी अम्लता को शांत करते हैं. हल्दी वाला दूध, बादाम का दूध और नारियल पानी पेट को आराम देते हैं. मुलेठी पेट की परत की सुरक्षा और हीलिंग में मदद करती है. अल्सर में छाछ, हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन, कच्चे केले की सब्जी, पालक और जवारों का रस बेहद लाभकारी है. इन्हें नियमित आहार में शामिल करना फायदेमंद रहता है.

इन चीजों से बचें
अल्सर से बचने और उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ चीजों से दूर रहना बेहद जरूरी है. मैदा, जंक फूड, चाय-कॉफी, सोडा और शराब पेट में अम्ल बढ़ाते हैं और अल्सर को और खराब कर सकते हैं. इनका सेवन पूरी तरह से सीमित या बंद करना चाहिए. बेहतर पाचन के लिए हर दो घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाना फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे पेट पर दबाव कम पड़ता है. इसके साथ ही तनाव कम करना, समय पर भोजन लेना और पूरी नींद लेना अल्सर के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सही दिनचर्या अपनाने से पेट की सेहत तेजी से सुधरती है.
 


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Written by: Taushif

19 Nov 2025  ·  Published: 14:51 IST

डायबिटीज से लेकर पाचन तक, हरे धनिये में छिपा है इन बड़ी बीमारियों का इलाज

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Health benefits of Coriander leaves: दाल और सब्जी धनिया के बिना अधूरी है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि हरा धनिया सिर्फ गार्निश नहीं है, यह हमारी थाली में एक नेचुरल दवा है. सर्दी हो या गर्मी, हर मौसम में धनिया खाने के अपने अलग फायदे हैं. आयुर्वेद इसे त्रिदोष बैलेंसर, पाचन बढ़ाने वाला और खून साफ ​​करने वाला मानता है. मॉडर्न साइंस इसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर एक सुपर हर्ब कहता है.

धनिया का एक छोटा सा पत्ता विटामिन A, C, K, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और कई तरह के एंजाइम्स से भरा होता है. इसके अलावा, एक मुट्ठी धनिया एक सेब जितने एंटीऑक्सीडेंट्स देता है. यह शरीर को साफ करने और सेल्स को बचाने में बहुत असरदार है. इसलिए, भारतीय किचन में इसे थाली के लिए एक रिफ्रेशिंग टॉनिक माना जाता है.

अब सवाल यह है कि इसे हर दाल और सब्जी में क्यों डाला जाता है? इसका मुख्य कारण थर्मोरेगुलेशन है. पकी हुई सब्जियां शरीर में थोड़ी गर्मी पैदा करती हैं, जबकि धनिया ठंडा होता है. ये दोनों मिलकर डाइजेशन को आसान बनाते हैं, जिससे खाना भारी नहीं लगता.

इसके अलावा, धनिया शरीर से टॉक्सिन, हेवी मेटल और नुकसानदायक चीज़ों को निकालने में मदद करता है. इसे नैचुरल कीलेटिंग एजेंट माना जाता है. यह शरीर को साफ़ करने का एक आसान तरीका है. धनिए की खास खुशबू सिर्फ़ खुशबू नहीं है. इसे सूंघने से दिमाग में डाइजेस्टिव एंजाइम तुरंत एक्टिवेट हो जाते हैं, जिससे भूख बढ़ती है और डाइजेशन तेज़ होता है.

धनिए को लिवर का डिटॉक्स स्विच भी कहा जाता है. इसके एंजाइम लिवर की सफ़ाई की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं. धनिए का जूस सिर्फ़ 15 मिनट में सीने की जलन या गैस से राहत देता है. यह उन लोगों के लिए खास तौर पर फ़ायदेमंद है जो ज़्यादा सोडियम लेते हैं या हाई ब्लड प्रेशर में हैं क्योंकि यह ब्लड सोडियम लेवल को कम करने में मदद करता है. तीन दोषों (वात, पित्त और कफ) को बैलेंस करने वाली खाने की चीज़ें बहुत कम मिलती हैं, लेकिन धनिया उनमें से एक है.

धनिए का पानी यूरिक एसिड और ज़्यादा नमक को बाहर निकालकर किडनी को काम करने में मदद करता है. इसलिए, बहुत से लोग इसे सुबह खाली पेट पीते हैं. लेकिन अगर सही तरीके से लिया जाए तो इसके फायदे दोगुने हो जाते हैं, जैसे कि धनिया के बीज पकाने के बाद डालें, न कि आंच बंद करने के बाद ताकि विटामिन C और उसके एसेंशियल ऑयल्स खराब न हों. नींबू के साथ यह और भी असरदार होता है, क्योंकि नींबू आयरन एब्जॉर्प्शन को बढ़ाता है.
 


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Written by: Taushif

03 Dec 2025  ·  Published: 01:27 IST