How to start Datacenter or Domain and hosting business ?
Top Digital Marketing Companies
Top Flutter App Development Companies
How to earn money Online ?
How to start Ecommerce business ?
इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
BBDS App Download
× Bindass Bol Home About News Contact Search

दोपहर की सुस्ती से परेशान हैं? अपनाएं ये 3 आसान आदतें, दिनभर बनी रहेगी एनर्जी

File

फाइल फोटो

Afternoon Energy Slump: दोपहर का समय अक्सर ऐसा होता है, जब शरीर में अचानक सुस्ती आने लगती है. खाना पच रहा होता है, दिमाग भारी-सा लगने लगता है और काम में मन नहीं लगता. Ayurveda के अनुसार दोपहर का समय “पित्त प्रधान समय” माना जाता है. इस समय पाचन शक्ति अच्छी होती है, लेकिन अगर सही आदतें न हों तो थकान जल्दी लगती है. अच्छी बात यह है कि कुछ छोटी-छोटी आदतों से आप दोपहर की सुस्ती को दूर कर सकते हैं और खुद को फिर से एक्टिव बना सकते हैं.

दोपहर का खाना हल्का और संतुलित रखें
दोपहर की एनर्जी सीधे आपके खाने से जुड़ी होती है. बहुत भारी, तला-भुना या ज्यादा मसालेदार खाना खाने से शरीर सुस्त हो जाता है. बेहतर है कि आप दाल, सब्जी, चावल या रोटी और थोड़ा-सा घी अपने भोजन में रखें. दही थोड़ी मात्रा में लेना फायदेमंद रहता है. कोशिश करें कि पेट को पूरा भरने की बजाय थोड़ा हल्का रखकर खाएं. खाने के तुरंत बाद मोबाइल चलाने या लेट जाने से बचें. शरीर को खाना पचाने का आरामदायक समय दें.

खाने के बाद 10–15 मिनट की हल्की वॉक करें
खाने के बाद थोड़ी देर टहलना बहुत फायदेमंद होता है. इसे आयुर्वेद में “भोजन पश्चात विहार” कहा गया है. तेज चलने की जरूरत नहीं, बस आराम से 10 से 15 मिनट पैदल चलें. इससे पाचन ठीक रहता है, पेट भारी नहीं होता और सुस्ती कम होती है. ऑफिस में हों तो गलियारे में ही थोड़ा टहल लें. वॉक के बाद 2–3 सिप पानी पी सकते हैं, लेकिन ज्यादा पानी न पिएं.

प्राकृतिक हर्बल एनर्जी बूस्टर अपनाएं
दोपहर की थकान में बार-बार चाय या कॉफी पीना सही आदत नहीं है. इसकी जगह आप जीरा-पानी या पुदीना मिला गुनगुना पानी पी सकते हैं. इससे पेट हल्का रहता है और शरीर एक्टिव बना रहता है. 2 मिनट गहरी सांस लेना भी एक शानदार तरीका है. इससे दिमाग तक ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचती है और नींद-सी नहीं आती. चाहें तो हल्का सा गर्म नींबू पानी भी ले सकते हैं. गर्दन और सिर की हल्की मालिश करने से भी आंखों की थकान और भारीपन कम होता है.

छोटे सुधार, बड़ा फायदा
अगर आप दोपहर में सही खाना खाएं, हल्की वॉक करें और प्राकृतिक एनर्जी बूस्टर अपनाएं, तो आपकी प्रोडक्टिविटी अपने आप बढ़ जाएगी. ये तीन छोटी आदतें दिन को थकाऊ होने से बचाती हैं और काम में फोकस बनाए रखती हैं.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

29 Nov 2025  ·  Published: 19:49 IST

बार-बार दस्त और पेट दर्द? हो सकता है अल्सरेटिव कोलाइटिस, जानें आयुर्वेदिक उपाय

File

फाइल फोटो

Ulcerative Colitis Ayurvedic Treatment: अल्सरेटिव कोलाइटिस एक ऐसा रोग है, जो अक्सर पेट की सामान्य समस्याओं की तरह नजर आता है, लेकिन इसके पीछे आंतों में क्रॉनिक सूजन छिपी होती है. यह बड़ी आंत और रेक्टम को प्रभावित करता है और बार-बार पतले दस्त, खून के साथ मल, पेट में मरोड़ या दर्द, वजन घटने, भूख न लगना, कमजोरी और कभी-कभी बुखार जैसे लक्षण दिखाता है.

आयुर्वेद के मुताबिक, इस रोग का मुख्य कारण पित्त और वात दोष की वृद्धि है. पाचन शक्ति कमजोर होने से आंतों में सूजन और घाव बनते हैं. इसे संतुलित करने के लिए शीतल, पौष्टिक और दोष शांत करने वाले आहार की सलाह दी जाती है. कुछ आयुर्वेदिक औषधियां जैसे कुटजघन वटी, एलोवेरा रस, बेल फल, ईसबगोल, मुस्ता, सूतशेखर रस और कमदुधा रस आंतों की सूजन और दर्द कम करने में मदद करती हैं.

घरेलू उपाय भी काफी लाभकारी हैं. सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच ईसबगोल, रोज बेल का शरबत या पल्प, छाछ में पुदीना और सेंधा नमक और दिन में दो बार एलोवेरा और आंवला रस मिलाकर पीना बहुत फायदेमंद होता है. मसालेदार, खट्टे या बहुत गर्म भोजन से बचना चाहिए. आहार में दलिया, मूंग दाल खिचड़ी, उबली सब्जियां, नारियल पानी, छाछ और बेल शरबत शामिल करना चाहिए.

इसके साथ ही अपनी जीवनशैली में भी सुधार करें. नियमित योग और हल्की एक्सरसाइज जैसे वज्रासन, पवनमुक्तासन और भुजंगासन करें. साथ ही, तनाव कम लें, पर्याप्त नींद लें और सुबह हल्की सैर करें, क्योंकि किसी भी बीमारी या समस्या से छुटकारा पाने के लिए जीवनशैली में संतुलन बनाकर रखना बहुत जरूरी है.

वैज्ञानिक दृष्टि से अल्सरेटिव कोलाइटिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही आंतों की सेल्स पर हमला करती है. इससे आंतों में क्रॉनिक सूजन और धीरे-धीरे अल्सर बन जाते हैं. लेकिन सही समय पर उपचार, संतुलित आहार, आयुर्वेदिक औषधि और जीवनशैली परिवर्तन से यह पूरी तरह नियंत्रित रखा जा सकता है.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

21 Nov 2025  ·  Published: 22:01 IST

सेल्फ केयर सिर्फ शरीर नहीं, मन और आत्मा के लिए भी जरूरी; ऐसे रखें ख्याल

File

फाइल फोटो

हर साल 24 जुलाई को इंटरनेशनल सेल्फ केयर डे के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 2011 में इंटरनेशनल सेल्फ केयर फाउंडेशन (ISF) ने की थी। इस दिन का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि खुद की देखभाल सिर्फ एक दिन की बात नहीं, बल्कि 24 घंटे और 7 दिन की जरूरत है। इसी सोच के तहत 24/7 के प्रतीक के रूप में 24 जुलाई की तारीख तय की गई।

सेल्फ केयर क्या है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सेल्फ केयर का मतलब है – व्यक्ति, परिवार या समुदाय द्वारा खुद की फिजिकल, मेंटल और इमोशनल हेल्थ का ध्यान रखना, चाहे वह मेडिकल मदद से हो या बिना उसके। इसका मकसद बीमारी से बचाव और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना होता है।

सेल्फ केयर जरूरी क्यों है?

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी, बदलती जीवनशैली और मानसिक दबाव के बीच सेल्फ केयर आपको न केवल स्वस्थ रखता है, बल्कि आपको मानसिक रूप से भी सशक्त बनाता है। यह स्वास्थ्य एजेंसियों पर दबाव को भी कम करता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।

कैसे करें सेल्फ केयर?

  1. सिर्फ शरीर नहीं, मन और भावना की भी देखभाल करें। तीनों पहलुओं का संतुलन बेहद जरूरी है।
  2.  
  3. पोषक आहार लें। फलों, सब्जियों और विटामिन्स से भरपूर भोजन शरीर को ऊर्जा देता है।
  4.  
  5. 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है। चाहे वह वॉक हो, रनिंग, जॉगिंग या योग।
  6.  
  7. मेडिटेशन करें। यह मन को शांत रखने और फोकस बढ़ाने में मदद करता है।
  8.  
  9. अच्छी किताबें पढ़ें। यह मानसिक रूप से सुकून और आत्मविकास दोनों देती हैं।
  10.  
  11. कोई क्रिएटिव या मजेदार एक्टिविटी अपनाएं। जैसे डांस, म्यूजिक, आर्ट आदि।
  12.  
  13. प्रकृति के करीब जाएं। पार्क में बिना हेडफोन के टहलें, खुद को वातावरण से जोड़ें।


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

24 Jul 2025  ·  Published: 04:40 IST

दिवाली के बाद थकान और भारीपन? इन 6 आसान आदतों से करें पूरा डिटॉक्स

File

फाइल फोटो

Post Diwali Detox Tips: दिवाली के दौरान खूब मिठाइयां, नमकीन और तले-भुने पकवान खाने का मज़ा तो सबको आता है, लेकिन उसके बाद शरीर का थका हुआ और भारी महसूस करना आम बात है. मिठाइयों और मसालेदार खाने से शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ जाते हैं, जिससे थकान, ब्लोटिंग और पाचन की समस्या होती है. अगर आपको भी दिवाली के बाद सुस्ती और भारीपन महसूस हो रहा है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं. कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर आप अपने शरीर को फिर से एक्टिव, हल्का और एनर्जेटिक बना सकते हैं.

1. सुबह पिएं नींबू-शहद वाला पानी
सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू और एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं. यह शरीर से टॉक्सिन्स को निकालने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है. साथ ही मेटाबॉलिज्म को तेज करके वजन घटाने में भी फायदेमंद होता है.

2. शुगर से लें ब्रेक
त्योहारों के दौरान खाई गई मिठाइयों का असर शरीर पर लंबे समय तक रहता है. ऐसे में 2–3 हफ्तों तक चीनी से परहेज करें. इसके बजाय गुड़, खजूर या शहद का सीमित इस्तेमाल करें. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है और थकान कम करता है.

3. फाइबर से भरपूर डाइट लें
फाइबर शरीर के लिए नेचुरल डिटॉक्स एजेंट की तरह काम करता है. इसलिए अपने खाने में सलाद, अंकुरित अनाज, ओट्स, फल और हरी सब्जियां ज़रूर शामिल करें. ये पाचन को दुरुस्त रखते हैं और पेट की सूजन को घटाते हैं.

4. खूब पानी पिएं
पर्याप्त पानी पीना डिटॉक्स प्रक्रिया का सबसे ज़रूरी हिस्सा है. दिनभर में कम से कम 8–10 गिलास पानी ज़रूर पिएं. चाहें तो डिटॉक्स वॉटर (नींबू, पुदीना और खीरे के साथ) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

5. हल्की एक्सरसाइज करें
त्योहारों के बाद शरीर को फिर से सक्रिय करने के लिए योग, स्ट्रेचिंग या मॉर्निंग वॉक करें. इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और सुस्ती दूर होती है.

6. पूरी नींद लें
त्योहारों के दौरान नींद की कमी आम है. अब कोशिश करें कि हर दिन 7–8 घंटे की नींद लें ताकि शरीर खुद को रिपेयर कर सके और एनर्जी लेवल बढ़ सके. इन आसान आदतों को अपनाकर आप दिवाली के बाद भी अपनी सेहत और एनर्जी दोनों को वापस पा सकते हैं. 


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

23 Oct 2025  ·  Published: 20:23 IST