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Pigmentation Home Remedies: आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी, गलत खान-पान और प्रदूषित वातावरण के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं आम होती जा रही हैं। इनमें पिगमेंटेशन सबसे आम समस्या है। यह सिर्फ़ असमान रंगत या काले धब्बों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास को भी प्रभावित करती है। हालाँकि, कुछ घरेलू उपायों से आप धीरे-धीरे इस समस्या को कम कर सकते हैं और अपनी त्वचा को फिर से चमकदार बना सकते हैं।
1. अलसी का जेल
अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती है और इसमें सूजन-रोधी गुण होते हैं। यह त्वचा को अंदर से शांत करके पिगमेंटेशन को हल्का करने में मदद करती है।
बनाने की विधि: 2 बड़े चम्मच अलसी को 1.5 कप पानी में उबालें। जब यह जेल जैसा हो जाए, तो इसे छान लें। इसे ठंडा करके एक जार में भर लें और रोज़ रात त्वचा पर लगाएँ। 20 मिनट बाद धो लें या रात भर लगा रहने दें।
2. चंदन, हल्दी और शहद का मास्क
यह मास्क त्वचा में निखार लाता है और दाग-धब्बों को हल्का करता है।
सामग्री: 1 छोटा चम्मच चंदन पाउडर, एक चुटकी हल्दी, 1 छोटा चम्मच कच्चा शहद और गुलाब जल की कुछ बूँदें।
कैसे लगाएँ: पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह पर लगाएँ। सूखने पर ठंडे पानी से धो लें। इसे हफ़्ते में दो बार लगाने से फ़ायदा होगा।
3. मुलेठी और एलोवेरा जेल
मुलेठी मेलेनिन के उत्पादन को रोकती है और त्वचा की रंगत निखारती है।
विधि: 1 छोटा चम्मच मुलेठी पाउडर और 2 छोटे चम्मच ताज़ा एलोवेरा जेल मिलाएँ। इसे पिगमेंटेड जगह पर लगाएँ और 20 मिनट बाद धो लें।
4. आलू और नींबू का दाग-धब्बों का उपचार
आलू में मौजूद एंजाइम और नींबू के प्राकृतिक ब्लीचिंग एजेंट मिलकर ज़िद्दी दागों को हल्का करते हैं।
विधि: एक छोटे आलू को कद्दूकस करके उसका रस निकालें और उसमें नींबू की कुछ बूँदें मिलाएँ। इसे प्रभावित जगह पर लगाएँ और 10 मिनट बाद धो लें। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इससे बचना चाहिए और हफ़्ते में दो बार से ज़्यादा इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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बर्ड फ्लू: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के एक पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू (H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा) के मामले सामने आने के बाद पूरे राज्य में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं. बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के साथ-साथ अब बर्ड फ्लू ने भी चिंता बढ़ा दी है.
क्या अंडे खाना बर्ड फ्लू में सुरक्षित है?
बर्ड फ्लू मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करने वाला वायरस है, लेकिन कभी-कभी यह इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है. हैदराबाद के मेडिकल एडवाइजर और टेलीमेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मुरली भास्कर एम (MBBS, FDM) के मुताबिक, संक्रमित मुर्गियों के अंडों में भी यह वायरस मौजूद हो सकता है, लेकिन इसकी संभावना बहुत कम होती है. डॉ. भास्कर का कहना है कि अगर अंडों को सही तरीके से पकाया जाए, तो वायरस पूरी तरह नष्ट हो जाता है और उन्हें खाना सुरक्षित हो जाता है.
अंडे को सुरक्षित तरीके से पकाने के टिप्स
1. अंडे अच्छी तरह पकाएं – अंडे का योक (पीला हिस्सा) लिक्विड नहीं, बल्कि पूरी तरह सॉलिड होना चाहिए। वायरस और बैक्टीरिया को मारने के लिए तापमान कम से कम 74°C (165°F) होना चाहिए.
2. हाथ धोएं – कच्चे अंडे को छूने के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोएं.
3. बर्तनों की सफाई करें – जिन बर्तनों, चम्मच या सतह पर कच्चे अंडे रखे गए हों, उन्हें तुरंत गर्म पानी और साबुन से साफ करें.
4. अलग रखें – कच्चे अंडों को फलों, सब्जियों और पके हुए खाने से अलग रखें ताकि संक्रमण का खतरा न हो.
5. अलग बर्तन इस्तेमाल करें – चिकन और अंडों के लिए अलग कटिंग बोर्ड और चाकू का इस्तेमाल करें.
रिसर्च में सामने आया नया खतरा
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के बायोकेमिस्ट्री विभाग के डॉ. केशवर्धन सन्नुला की टीम ने H5N1 वायरस के 2.3.4.4b क्लेड पर अध्ययन किया है. यह स्ट्रेन वर्तमान में दुनिया के कई देशों में फैल रहा है और पक्षियों की कई प्रजातियों को संक्रमित कर चुका है. रिसर्च में पाया गया कि इस स्ट्रेन में ऐसे जेनेटिक म्यूटेशन हैं, जो पहले महामारी फैला चुके फ्लू वायरसों में देखे गए थे. इन बदलावों के कारण यह वायरस इंसानों को अधिक आसानी से संक्रमित कर सकता है.
बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय
1. पोल्ट्री फार्म या पक्षियों के संपर्क से बचें, खासकर बर्ड फ्लू प्रभावित इलाकों में.
2. कच्चा या अधपका मांस और अंडे न खाएं.
3. रसोई में साफ-सफाई का खास ध्यान रखें.
4. बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
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Dussehra 2025: भारत में हर त्योहार अपनी परंपराओं और खास व्यंजनों के लिए जाना जाता है. चाहे वह दिवाली हो, होली हो या फिर दशहरा बिना पकवानों के कोई भी त्योहार अधूरा लगता है. परिवार और रिश्तेदारों के साथ बैठकर बने-बनाए पकवान खाने का मजा ही कुछ और होता है. इस साल दशहरा (विजयादशमी) 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा और हर राज्य में इस दिन अलग-अलग पारंपरिक डिशेज बनाई जाएंगी. आइए जानते हैं देशभर में दशहरे पर बनने वाले खास व्यंजनों के बारे में....
उत्तर प्रदेश में दशहरा पर दाल पराठा और खीर बनाने की परंपरा है. चना दाल और मसालों से बने पराठे के साथ दूध-चावल से तैयार खीर खाने से त्योहार का स्वाद और भी खास हो जाता है. मान्यता है कि इन्हें खाने से घर में सौभाग्य और खुशहाली आती है.
मोतीचूर के लड्डू
दशहरे पर भगवान हनुमान को मोतीचूर के लड्डू चढ़ाने की परंपरा है. छोटे-छोटे बूंदी के दानों और देसी घी से बने ये लड्डू जीवन में मिठास और आनंद का प्रतीक माने जाते हैं.
कर्नाटक
कर्नाटक में दशहरा मीठे डोसे के बिना अधूरा है. इसे चावल का आटा, गेहूं का आटा, गुड़ और नारियल मिलाकर बनाया जाता है. यह डिश प्रसाद के रूप में भी चढ़ाई जाती है और सेहतमंद व स्वादिष्ट मानी जाती है.
पान – यूपी और बिहार की परंपरा
उत्तर प्रदेश और बिहार में दशहरे पर पान खाने और भगवान हनुमान को अर्पित करने की परंपरा है. यह प्रेम और सम्मान का प्रतीक माना जाता है और अच्छाई की जीत का संदेश देता है.
ओडिशा – दही और चावल का भोग
ओडिशा में दशहरे के मौके पर महिलाएं रावण दहन से पहले देवी दुर्गा को दही और भिगोए हुए चावल का भोग चढ़ाती हैं. भारत के कई हिस्सों में नया काम शुरू करने से पहले दही-चीनी खाने की परंपरा भी है.
पश्चिम बंगाल – रसगुल्ला
बंगाल में दशहरा रसगुल्ले के बिना अधूरा है. छेना और चाशनी से बने नरम रसगुले सौभाग्य और मिठास का प्रतीक माने जाते हैं. त्योहार पर इन्हें अलग-अलग फ्लेवर में खाया जाता है.
गुजरात – जलेबी और फाफड़ा
गुजरात में दशहरे का असली आनंद जलेबी और फाफड़े के बिना नहीं आता. मान्यता है कि भगवान राम को भी जलेबी पसंद थी और विजय के दिन उन्होंने इसका स्वाद लिया था. बेसन से बने फाफड़े के साथ जलेबी खाने से समृद्धि आती है.
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Natarajasana Benefits: हमारे शरीर की हर गतिविधि चलना, उठना-बैठना, वजन उठाना या बैलेंस बनाए रखना, सब कुछ मांसपेशियों पर निर्भर करता है. इसलिए मांसपेशियों का मजबूत होना और उनका स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है. योग में ऐसे कई आसन हैं जो रोजाना कुछ मिनटों के अभ्यास से मांसपेशियों को मजबूत, लचीला और एक्टिव रखते हैं. इन्हीं में से एक बेहद महत्वपूर्ण आसन है नटराजासन, जिसकी जानकारी मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा भी देता है.
संस्कृत में "नट" का अर्थ है नर्तक और "राज" का अर्थ है राजा. यह आसन भगवान शिव के नटराज स्वरूप से प्रेरित है. शिव के इस रूप में शरीर एक पैर पर संतुलन बनाते हुए नृत्य की सुंदर मुद्रा में दिखाई देता है. नटराजासन भी इसी मुद्रा का अभ्यास है, जो शरीर को संतुलन, एकाग्रता और लचीलापन प्रदान करता है.
नटराजासन से शरीर के कई हिस्सों पर विशेष लाभ मिलता है. कूल्हे, जांघें, टखने, कंधे और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है. यह आसन पेट की मांसपेशियों को टोन करता है और पूरे शरीर में खिंचाव लाकर ऊर्जा बढ़ाता है. नियमित अभ्यास से मन शांत होता है और तनाव में कमी आती है.
नटराजासन कैसे करें?
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, इस आसन को करना आसान है.
सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और संतुलन बनाएं.
पूरा भार बाएं पैर पर डालें.
दाएं पैर को घुटने से मोड़कर पीछे उठाएं.
दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर पीछे की तरफ ले जाएं और दाएं पैर के टखने या पंजे को पकड़ें.
नजरें सामने किसी एक बिंदु पर स्थिर रखें और सामान्य सांस लेते रहें.
कुछ सेकंड रुककर धीरे-धीरे वापस आएं.
यही प्रक्रिया बाएं पैर से दोहराएं.
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
योग विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भवती महिलाएं, गंभीर कमर या घुटने के दर्द वाले व्यक्ति, हाई ब्लड प्रेशर के मरीज को ये आसान नहीं करना चाहिए.