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सुबह का नाश्ता दिन की शुरुआत को तय करता है. अक्सर लोग जल्दीबाज़ी में ऐसे खाने की तलाश करते हैं जो झटपट तैयार हो जाए, पेट भी भर दे और शरीर को पोषण भी मिले. ऐसे में अंडे और टोस्ट नाश्ते का सबसे आसान और लोकप्रिय विकल्प माने जाते हैं. चाहे दफ्तर के लिए देर हो रही हो, बच्चे स्कूल जा रहे हों या फिर खाना बनाने का ज्यादा वक्त न हो, अंडा और टोस्ट तुरंत तैयार हो जाता है लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कॉम्बिनेशन सिर्फ पेट भरने तक ही सीमित है या फिर सेहत, खासकर ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए भी अच्छा है?
अंडे खाने से क्या फायदे होते हैं?
हैदराबाद स्थित केयर हॉस्पिटल्स की क्लिनिकल डाइटीशियन जी. सुषमा के अनुसार, अंडा-टोस्ट नाश्ते का क्लासिक कॉम्बिनेशन है. अंडे में प्रोटीन की मात्रा काफी ज्यादा होती है जो शरीर की मांसपेशियों की मरम्मत और विकास में मदद करता है. यही कारण है कि रोज़ाना फिजिकल एक्टिविटी करने वाले लोग अक्सर इसे नाश्ते में शामिल करते हैं.
अंडे में कई ज़रूरी विटामिन और मिनरल्स मौजूद होते हैं, जैसे – विटामिन A, D, E और B12 – आंखों, हड्डियों और इम्यूनिटी के लिए ज़रूरी. आयरन और जिंक – खून और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए ज़रूरी. कोलीन – दिमाग़ की हेल्थ और याददाश्त को दुरुस्त रखने में मददगार. अंडे खाने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती, यानी बार-बार स्नैक्स खाने की आदत भी कम हो जाती है. अगर इसे साबुत अनाज (Whole Grain) ब्रेड या खमीर (Sourdough) वाली ब्रेड के साथ खाया जाए तो इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं. साबुत अनाज वाली ब्रेड में फाइबर होता है, जो पाचन में मदद करता है और दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है.
ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए अंडा और टोस्ट कितना बेहतर?
यहां बात आती है ब्लड शुगर यानी शुगर लेवल पर इसके असर की. आमतौर पर सफेद ब्रेड (White Bread) जल्दी से ग्लूकोज में बदल जाती है. इसका मतलब है कि इसे खाने के बाद शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है और फिर थोड़ी देर बाद अचानक गिर भी जाता है. यही वजह है कि डायबिटीज़ के मरीजों या ब्लड शुगर पर नज़र रखने वालों को सफेद ब्रेड से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है. दूसरी तरफ, अंडों में कार्बोहाइड्रेट बहुत कम होता है और ये प्रोटीन और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं. यही कारण है कि अंडा खाने से शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है और शुगर लेवल अचानक से बढ़ता या घटता नहीं है. अगर सफेद टोस्ट की जगह साबुत अनाज या खमीर वाला टोस्ट लिया जाए और उसके साथ अंडा खाया जाए तो ब्लड शुगर पर इसका असर काफी स्थिर रहता है.
डायबिटीज़ और इंसुलिन रेसिस्टेंस वालों के लिए सलाह
अगर आप प्री-डायबिटिक हैं, डायबिटीज़ के मरीज हैं या फिर इंसुलिन रेसिस्टेंस से जूझ रहे हैं, तो नाश्ते में सिर्फ सफेद टोस्ट खाना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे ब्लड शुगर तुरंत बढ़ जाता है और थोड़ी ही देर में गिरने लगता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है. ऐसे लोगों के लिए बेहतर है कि अंडे को अपने नाश्ते में शामिल करें और टोस्ट चुनते समय साबुत अनाज या खमीर वाली ब्रेड का इस्तेमाल करें.
अंडा-टोस्ट को और हेल्दी कैसे बनाएं?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप अपने नाश्ते को और ज़्यादा पौष्टिक बनाना चाहते हैं तो कुछ चीज़ें अंडे और टोस्ट के साथ जोड़ सकते हैं.
हरी सब्जियां – जैसे पालक, शिमला मिर्च, टमाटर.
एवोकाडो – हेल्दी फैट्स और फाइबर का बेहतरीन स्रोत.
अलसी (Flax Seeds) – ओमेगा-3 फैटी एसिड्स से भरपूर.
मक्खन या पीनट बटर – अतिरिक्त ऊर्जा और स्वाद के लिए.
इन सबको अंडे और टोस्ट के साथ खाने से ब्लड शुगर स्थिर रहता है और शरीर को लंबे समय तक एनर्जी मिलती है.
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अगर आप खराब नींद से परेशान हैं, तो याद रखें, आप अकेले नहीं हैं. दुनिया भर में लाखों लोग क्रोनिक इंसोम्निया से परेशान हैं. लेकिन अब रिसर्च से पता चला है कि सोने से पहले हल्की-फुल्की एक्टिविटीज़ से नींद की क्वालिटी बेहतर हो सकती है. 2019 की एक स्टडी में पाया गया कि सोने से पहले किताब पढ़ने से दिमाग शांत होता है, ज़्यादा सोचने की आदत धीमी होती है, और शरीर और दिमाग को आराम मिलता है, जिससे दिमाग नींद के लिए तैयार होता है.
यह नतीजा 991 लोगों के एक ऑनलाइन रीडिंग ट्रायल से निकाला गया. दिसंबर 2019 में कुल 991 लोगों ने द रीडिंग ट्रायल में हिस्सा लिया, जिनमें से आधे (496) इंटरवेंशन ग्रुप (जिन्होंने ट्रायल में हिस्सा लिया था) में थे और आधे (495) कंट्रोल ग्रुप में थे. सभी ने ट्रायल पूरा नहीं किया: इंटरवेंशन ग्रुप में 127 और कंट्रोल ग्रुप में 90 ने हिस्सा नहीं लिया.
नतीजे पॉजिटिव थे. जिन लोगों ने रीडिंग ट्रायल में हिस्सा लिया, उनकी नींद में काफी सुधार हुआ. इसी तरह, ताई ची (चीनी मार्शल आर्ट)—एक धीमी, बैलेंस्ड, मेडिटेटिव एक्सरसाइज—भी नींद सुधारने के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुई है। 2025 में पब्लिश हुई एक स्टडी (अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ स्लीप मेडिसिन) में 50 साल और उससे ज़्यादा उम्र के 200 लोग शामिल थे, जिन्हें क्रोनिक इंसोम्निया था.
इसमें पाया गया कि ताई ची और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT-I) दोनों ने इंसोम्निया से राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. CBT-I शुरू में बेहतर लगा, लेकिन 15 महीने बाद, ताई ची ने नींद में लगभग उतना ही सुधार किया. इससे पता चला है कि ताई ची लंबे समय के लिए एक अच्छा ऑप्शन है. ताई ची के फायदे सिर्फ़ नींद तक ही सीमित नहीं हैं. यह एंग्जायटी, डिप्रेशन, थकान और दिन में नींद आने से भी राहत दिलाने में मदद करता है.
तो अगर आप अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के स्ट्रेस, लंबे काम के घंटों, स्क्रीन टाइम, आँखों और दिमाग की थकान, या बेचैन विचारों के साथ सोते हैं, तो सोने से पहले कुछ लाइनें पढ़ना और ताई ची की प्रैक्टिस करना आपकी नींद की क्वालिटी में फ़र्क ला सकता है और सबसे अच्छी बात इनमें दवा नहीं लगती, इनके कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होते और ये सस्ते भी होते हैं.
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How to Look Younger Naturally: आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग अपनी असली उम्र से छोटे और जवान दिखाई देते हैं, जबकि कई लोग उम्र से पहले ही बूढ़े दिखने लगते हैं. असल में यह सब हमारी जीवनशैली और आदतों पर निर्भर करता है. अगर आप चाहते हैं कि आपकी त्वचा लंबे समय तक जवान और सुंदर बनी रहे, तो आपको अपने खानपान, दिनचर्या और देखभाल पर ध्यान देना होगा. केवल क्रीम और कॉस्मेटिक चीज़ें ही नहीं, बल्कि आपकी रोज़मर्रा की आदतें भी आपकी उम्र को प्रभावित करती हैं.
1. फलों का सेवन बढ़ाएं
अगर आपको लगता है कि आपकी स्किन ढीली हो रही है या चेहरे पर झुर्रियां और फाइन लाइन्स दिखने लगी हैं, तो सबसे पहले अपनी डाइट पर ध्यान दें. फलों का सेवन बढ़ाना बेहद ज़रूरी है. फल विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो स्किन को पोषण देते हैं. ये त्वचा की इलास्टिसिटी यानी खिंचाव बनाए रखने में मदद करते हैं और स्किन को हेल्दी ग्लो देते हैं. खासकर संतरा, पपीता, सेब, बेरीज़ और अमरूद जैसे फल खाने से शरीर को भरपूर विटामिन सी मिलता है, जो कोलेजन बनाने में मदद करता है.
2. हरी सब्जियां खाएं
हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करने से शरीर को विटामिन ए, सी, के और फोलेट मिलता है. पालक, मेथी, सरसों और ब्रोकली जैसी सब्जियां त्वचा को डिटॉक्स करती हैं और उसे जवान बनाए रखती हैं. इनमें मौजूद पोषक तत्व स्किन सेल्स को रिपेयर करते हैं और चेहरे पर नेचुरल चमक लाते हैं.
3. सूरज की हानिकारक किरणों से बचें
धूप से निकलने वाली पराबैंगनी (UV) किरणें त्वचा की सबसे बड़ी दुश्मन होती हैं. ये किरणें त्वचा पर समय से पहले बुढ़ापा लाने का मुख्य कारण मानी जाती हैं. अगर आप ज्यादा देर धूप में रहते हैं, तो झुर्रियां, डार्क स्पॉट्स और पिगमेंटेशन की समस्या जल्दी आने लगती है. इससे बचने के लिए बाहर निकलते समय स्किन को ढककर रखें और रोज़ाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन आपकी स्किन को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है.
4. शरीर को हाइड्रेटेड रखें
पानी पीना न केवल शरीर बल्कि त्वचा के लिए भी बेहद ज़रूरी है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से स्किन कोमल और मुलायम रहती है. डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी से त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है. इसलिए दिनभर में कम से कम 8–10 गिलास पानी ज़रूर पिएं. नारियल पानी, नींबू पानी और फ्रूट जूस भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं.
5. तनाव से दूरी बनाएं
तनाव यानी स्ट्रेस आपकी त्वचा पर जल्दी असर डालता है. लगातार तनाव में रहने से चेहरे पर थकान, डार्क सर्कल्स और झुर्रियां आने लगती हैं. तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन, योग और प्राणायाम बेहद फायदेमंद हैं. इसके अलावा, अपनी हॉबीज़ और पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालें, जिससे मानसिक शांति मिले और त्वचा पर सकारात्मक असर दिखे.
6. भरपूर नींद लें
नींद आपकी त्वचा की सबसे अच्छी दोस्त है. जब आप सोते हैं तो आपका शरीर और त्वचा खुद को रिपेयर करते हैं. नींद की कमी से चेहरा थका हुआ और बूढ़ा दिखने लगता है. रोजाना कम से कम 7–8 घंटे की गहरी नींद लेना बहुत जरूरी है. नींद पूरी होने पर चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है और आंखों के नीचे काले घेरे भी नहीं पड़ते.
7. संतुलित जीवनशैली अपनाएं
फास्ट फूड, तैलीय और जंक फूड से दूरी बनाएं. ये चीजें स्किन पर मुंहासे और ऑयलीनेस लाती हैं. इसकी जगह पौष्टिक आहार, ताजे फल-सब्जियां और पर्याप्त प्रोटीन का सेवन करें. साथ ही रोज़ाना हल्का व्यायाम करें. वॉकिंग, योग या जॉगिंग से खून का संचार बेहतर होता है और चेहरा ताजा दिखाई देता है.
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Navratri Vrat Breaking Tips: नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ उपवास भी रखते हैं. इस दौरान लोग हल्का, सात्विक और फलाहार वाला भोजन करते हैं. चूंकि कई दिनों तक शरीर हल्का खाना खाता है, इसलिए मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है. ऐसे में व्रत खत्म होने के तुरंत बाद भारी, तैलीय या मसालेदार खाना खाने से डाइजेशन पर असर पड़ सकता है. इससे गैस, एसिडिटी, पेट फूलना या कमजोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि व्रत को सही तरीके से तोड़ा जाए और धीरे-धीरे सामान्य डाइट पर लौटा जाए.
हल्का और सिंपल खाना खाएं
उपवास के तुरंत बाद तली-भुनी चीजों से परहेज करें. शुरुआत फल, छाछ, नारियल पानी या खिचड़ी जैसे हल्के भोजन से करें. इससे पेट पर दबाव नहीं पड़ता और शरीर आराम से सामान्य खानपान की ओर लौट पाता है.
पानी और लिक्विड का सेवन करें
व्रत के दौरान अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इसलिए पहले पानी या लिक्विड जरूर लें. नींबू पानी, हर्बल टी या वेजिटेबल सूप लेना बेहतर रहेगा. ये शरीर को हाइड्रेट करते हैं और डाइजेशन को खाने के लिए तैयार करते हैं.
धीरे-धीरे सामान्य खाना शुरू करें
पहले उबला या स्टीम्ड खाना खाएं. अचानक पूरी, पराठा या भारी सब्जियां खाने से बचें. 1–2 दिन में धीरे-धीरे सामान्य डाइट पर लौटें.
स्पाइसी, ऑयली और मीठे से दूरी बनाएं
उपवास के बाद मन लजीज खाने की ओर जाता है, लेकिन तुरंत मसालेदार, तैलीय या ज्यादा मीठा खाना पेट को नुकसान पहुंचा सकता है. पकौड़ी, समोसा, पूरी या बहुत ज्यादा मिठाइयां तुरंत खाने से बचें.
छोटे-छोटे हिस्सों में खाएं
एक बार में ज्यादा खाने के बजाय दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना सही रहता है. इससे डाइजेशन पर दबाव नहीं पड़ता और शरीर धीरे-धीरे नॉर्मल रूटीन में ढल जाता है.
प्रोबायोटिक्स और फाइबर लें
पेट की सेहत बनाए रखने के लिए दही, छाछ, सलाद, खीरा और गाजर जैसी चीजें खाएं. ये डाइजेशन को बेहतर बनाते हैं और शरीर को एनर्जी देते हैं.