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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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हार्मोन बैलेंस से पाचन सुधार तक, सौंफ के पानी का कमाल

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Fennel Water Benefits: सुबह का दिन अगर हेल्दी शुरुआत के साथ हो, तो पूरे दिन शरीर और दिमाग बेहतर महसूस करता है. आयुर्वेद में एक आसान लेकिन असरदार आदत बताई गई है. सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पीना. यह न सिर्फ पाचन और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करता है, बल्कि शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में भी मदद करता है, जैसे शरीर खुद को डिटॉक्स कर रहा हो.

सौंफ की तासीर

ज़्यादातर लोग सौंफ को ठंडी तासीर वाली मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक इसकी तासीर गर्म होती है. इसका मतलब यह पाचन अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) को बढ़ाती है, जबकि शरीर के बाहरी हिस्से को ठंडक देती है. यही वजह है कि लोग इसे ठंडा मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह पाचन सुधारने और डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करती है.

पेट के लिए फायदेमंद

सौंफ गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी और कब्ज के लिए रामबाण है. इसे खाने के बाद चबाने या सुबह खाली पेट पानी के रूप में पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर से हानिकारक तत्व (टॉक्सिन्स) बाहर निकलते हैं.

वजन घटाने में मदद

आयुर्वेद के मुताबिक सौंफ वजन कम करने में भी फायदेमंद है. यह मेटाबॉलिज्म को तेज करती है, भूख पर कंट्रोल रखती है और ब्लोटिंग कम करती है. अगर आप इसे रोजाना लें, तो 2-3 हफ्तों में असर दिख सकता है.

महिलाओं के लिए खास

सौंफ महिलाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद है. यह ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने, पीरियड्स के दर्द में राहत देने और हार्मोन बैलेंस बनाए रखने में मदद करती है. इसे त्रिदोषिक हर्ब कहा जाता है, यानी यह शरीर के तीनों दोष, वात, पित्त और कफ को संतुलित रखती है.

मॉडर्न साइंस की पुष्टि

वैज्ञानिक शोध भी सौंफ के फायदे मानते हैं. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं, जिससे कोशिकाओं को नुकसान से बचाया जा सकता है. इससे डायबिटीज, हार्ट डिजीज और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी घटता है. यह आईबीएस (इर्रेगुलर बाउल सिंड्रोम) के मरीजों के लिए भी राहतदायक है.

सौंफ का पानी बनाने के दो आसान तरीके

भिगोकर पीना – रात में 1-2 चम्मच सौंफ पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट पिएं.

उबालकर पीना – सौंफ को हल्का कूटकर 2 कप पानी में उबालें, आधा रह जाने पर छानकर गर्म पी लें.

सुबह खाली पेट पीना सबसे बेहतर है, क्योंकि यह हाइड्रेशन बढ़ाता है, पाचन अग्नि को तेज करता है और टॉक्सिन्स निकालता है.

सावधानियां

  1. प्रेग्नेंसी में
  2. हार्मोनल इंबैलेंस की समस्या में
  3. मिर्गी के मरीजों को
  4. ब्लड थिनर दवाइयां लेने वालों को

इन स्थितियों में सौंफ का पानी पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

 

 


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Written by: Taushif

13 Aug 2025  ·  Published: 06:50 IST

उम्र बढ़ने पर हड्डियों को कैसे रखें मजबूत? जानिए आसान उपाय

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Strong Bones: हड्डियां हमारे शरीर की आधारशिला होती हैं। ये न केवल हमारे शरीर को आकार और सहारा देती हैं, बल्कि हमारे महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाती हैं. इसलिए हड्डियों को मजबूत बनाए रखना हर उम्र में ज़रूरी है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है, जिससे फ्रैक्चर और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन अच्छी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल से इन्हें मजबूत रखा जा सकता है.

1. कैल्शियम से भरपूर आहार अपनाएं
कैल्शियम हड्डियों की संरचना का प्रमुख हिस्सा है. यह हड्डियों के विकास और उन्हें मजबूत बनाए रखने में बेहद सहायक होता है. दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक, मेथी), फोर्टिफाइड अनाज, सोया उत्पाद और छोटी हड्डी वाली मछलियों में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. रोजाना कैल्शियम युक्त आहार लेने से हड्डियों का घनत्व बेहतर बना रहता है और टूटने की संभावना कम हो जाती है.

2. विटामिन D की कमी न होने दें
विटामिन D, कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है. अगर शरीर में इसकी कमी हो, तो चाहे कैल्शियम जितना भी ले लिया जाए, उसका असर नहीं दिखेगा. विटामिन D का सबसे अच्छा स्रोत सूरज की रोशनी है. इसके अलावा अंडे की ज़र्दी, फेटी फिश (जैसे साल्मन, टूना) और फोर्टिफाइड दूध/अनाज में भी यह पोषक तत्व मिलता है.

3. अन्य ज़रूरी पोषक तत्व
हड्डियों की मजबूती के लिए केवल कैल्शियम और विटामिन D ही नहीं, बल्कि मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, विटामिन K और प्रोटीन भी ज़रूरी हैं. ये पोषक तत्व हड्डियों की मजबूती बढ़ाने, उनके निर्माण और मरम्मत में मदद करते हैं. नट्स, बीज, साबुत अनाज और हरी सब्जियां इनका अच्छा स्रोत हैं.

4. नियमित एक्सरसाइज करें
व्यायाम न केवल हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ाता है. रोजाना वॉक करना, सीढ़ियां चढ़ना, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, डांस, टेनिस और बास्केटबॉल जैसे एक्टिविटीज़ हड्डियों पर सही दबाव डालती हैं, जिससे उनमें मजबूती आती है. वेट-बेयरिंग और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज मांसपेशियों को भी मजबूत करती हैं, जिससे हड्डियों पर तनाव कम होता है.
 


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Written by: Taushif

08 Aug 2025  ·  Published: 06:34 IST

दिल की धमनियों को खोलने में मददगार हैं ये 3 सब्जियां, डॉक्टर भी दे रहे सलाह

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आजकल दिल की बीमारियां सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवा और मिड-एज लोग भी हार्ट ब्लॉकेज जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजहें हैं – खराब खानपान, भागदौड़ भरी ज़िंदगी और बढ़ता तनाव लेकिन अच्छी खबर ये है कि अगर आप कुछ जरूरी सब्जियों को अपनी रोजमर्रा की डाइट में शामिल करें, तो दिल को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

गाजियाबाद के जिला अस्पताल में कार्यरत डायटिशियन डॉ. अनामिका सिंह कहती हैं कि कुछ सब्जियां दिल की धमनियों को साफ रखने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. खासतौर पर लहसुन, ब्रोकली और पालक. आइए जानते हैं कैसे...

लहसुन (Garlic)

लहसुन में पाया जाने वाला तत्व ऐलिसिन (Allicin) शरीर में कोलेस्ट्रॉल कम करता है, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में लाता है और धमनियों में जमा फैट को धीरे-धीरे साफ करता है. रोज सुबह खाली पेट 1-2 कली कच्चे लहसुन चबाकर खाने से ब्लॉकेज और हार्ट अटैक का खतरा कम हो सकता है.

ब्रोकली (Broccoli)

ब्रोकली में फाइबर, विटामिन C और K, और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं जो धमनियों की दीवारों को मजबूत बनाते हैं और सूजन कम करते हैं. यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और दिल को हेल्दी बनाए रखता है. इसे भाप में हल्का पकाकर या सलाद में मिलाकर खा सकते हैं.

पालक (Spinach)

पालक में नाइट्रेट, फोलिक एसिड और आयरन की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर में जाकर नाइट्रिक ऑक्साइड बनाता है. यह ब्लड फ्लो को बेहतर करता है और धमनियों को खोलने में मदद करता है. पालक की सब्जी, सूप या जूस के रूप में नियमित सेवन करें.

डॉक्टर की सलाह

सिर्फ खाने से ही नहीं, बल्कि तनाव को कम करना, नियमित व्यायाम करना, और समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना भी जरूरी है. जंक फूड से दूरी और नींद पूरी करना भी दिल को हेल्दी रखने में मदद करता है.


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Written by: Taushif

28 Jul 2025  ·  Published: 05:48 IST

बाल हो गए सफेद और कमजोर? आयुर्वेद की दो बूंदों में छिपा है काले-घने बालों का राज

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Ayurvedic Hair Oil for Grey Hair: बढ़ते प्रदूषण की समस्या हो या तनाव और अनिद्रा, बालों का असमय सफेद होना और झड़ना एक बड़ी समस्या बन चुके हैं. ऐसे में कई उपाय भी अपना कमाल नहीं दिखा पाते, लेकिन आयुर्वेद के पास इसका समाधान है. क्या आप जानते हैं? आयुर्वेद में कुछ प्राकृतिक उपचार और दैनिक अभ्यास समय से पहले बालों को सफेद होने से रोकने, बालों का झड़ना कम करने और आरामदायक नींद को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं.

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने नास्या थेरेपी को इसका सरल और प्रभावी तरीका बताया है. इसमें नाक में हर्बल तेल की बूंदें डालकर तन और मन दोनों को लाभ पहुंचाया जाता है. मंत्रालय के अनुसार, नास्या पंचकर्मा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें नाक को औषधीय तेल या हर्बल द्रव्यों से उपचारित किया जाता है.

नाक को शरीर का ऐसा 'द्वार' माना जाता है, जो सीधे मस्तिष्क से जुड़ा होता है. अनु तेल (एक विशेष आयुर्वेदिक तेल) की 2 बूंदें दोनों नासिका छिद्रों में डालने से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं. इसे सुबह या रात को सोने से पहले करना बेहतर होता है. दो बूंद अनु तेल नाक में डालने के अनगिनत लाभ मिलते हैं. नास्या से सिर की नसें और रक्त संचार सुधरता है, जिससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं. 

समय से पहले सफेद होने की प्रक्रिया रुकती है और प्राकृतिक कालापन बना रहता है. तनाव, पोषण की कमी और हार्मोनल असंतुलन से बाल झड़ते हैं. नास्या मस्तिष्क को शांत कर तनाव कम करता है, जिससे बालों का झड़ना नियंत्रित होता है. यह थेरेपी मन को शांत करती है और चिंता और अनिद्रा दूर करती है. रात में नास्या करने से नींद गहरी और बिना रुकावट वाली आती है.

नाक के मार्ग साफ होते हैं, साइनसाइटिस में आराम मिलता है और चेहरे की चमक बढ़ती है. इससे सिर दर्द, साइनस और त्वचा की समस्याओं में राहत मिलती है. मंत्रालय सलाह देता है कि नास्या थेरेपी को आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में करना चाहिए.
 


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Written by: Taushif

09 Nov 2025  ·  Published: 10:00 IST