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Chia Seeds Benefits for Skin: चिया के बीज यानी चिया सीड्स इन दिनों हेल्थ के साथ-साथ स्किन केयर की दुनिया में भी खूब चर्चा में हैं. ये छोटे-छोटे बीज दिखने में भले ही मामूली लगें, लेकिन इनके फायदे बहुत बड़े हैं. इनमें ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो न सिर्फ शरीर को मजबूत बनाते हैं बल्कि स्किन को भी हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने में मदद करते हैं.
चिया सीड्स में प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स जैसे तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा की देखभाल में अहम भूमिका निभाते हैं. आइए जानते हैं कि ये बीज त्वचा के लिए कैसे काम करते हैं और इनका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है.
चिया सीड्स में मौजूद विटामिन E त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों (UV rays) से बचाने में मदद करता है. यह स्किन की ऊपरी परत में जाकर UV किरणों को अवशोषित करता है और सनबर्न या टैनिंग जैसी समस्याओं को कम करता है. साथ ही, विटामिन E त्वचा की नमी को भी बनाए रखता है जिससे त्वचा को सन डैमेज से बचाव मिलता है.
चिया सीड्स में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है जो कोलेजन बनाने में मदद करता है. कोलेजन एक ऐसा प्रोटीन है जो त्वचा को टाइट और लचीला बनाए रखता है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, कोलेजन की मात्रा कम होने लगती है जिससे झुर्रियां और ढीलापन आने लगता है. चिया सीड्स को नियमित खाने से एजिंग की प्रक्रिया धीमी होती है और त्वचा लंबे समय तक जवां और चमकदार बनी रहती है.
चिया सीड्स में एक खास गुण होता है. ये हाइड्रोफिलिक होते हैं, यानी पानी को सोखने और बनाए रखने की क्षमता रखते हैं. जब आप इन्हें पानी में भिगोते हैं, तो ये एक जेल जैसा रूप ले लेते हैं. यही जेल शरीर और त्वचा दोनों को अंदर से हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है. अगर आपकी त्वचा रूखी, बेजान या पपड़ीदार हो रही है, तो चिया सीड्स का सेवन इसे ठीक करने में मददगार हो सकता है.
चिया के बीजों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्वचा में सूजन, जलन या रैशेज को कम करने में मदद करते हैं. ये स्किन को ठंडक देते हैं और स्किन की बाहरी परत को शांत करते हैं.
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Exercise After 50 for Women: अगर आपने 50 की उम्र से पहले एक्सरसाइज नहीं की है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि आप 50 के बाद भी फिजिकल एक्टिविटी शुरू करें तो इसके फायदे तुरंत मिलने लगते हैं. महिलाओं के लिए यह और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि इस उम्र में मेनोपॉज के लक्षण दिखने लगते हैं, जैसे कि गर्मी लगना, नींद की परेशानी, मूड में बदलाव और जोड़ों का दर्द. ऐसे में एक्सरसाइज न सिर्फ इन लक्षणों को कम करती है बल्कि आपकी पूरी सेहत को बेहतर बनाती है.
क्यों जरूरी है एक्सरसाइज?
50 की उम्र के बाद हृदय रोग, डायबिटीज और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन नियमित व्यायाम से इनका जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है. एक्सरसाइज करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है, वजन नियंत्रित रहता है और पेट की चर्बी भी घटती है. खास बात यह है कि फिट रहने से आपकी जैविक उम्र यानी बायोलॉजिकल एज कम हो जाती है. यानी 55 की उम्र में भी आप 35 जैसी एनर्जी महसूस कर सकती हैं.
कौन-कौन सी एक्सरसाइज करें?
एरोबिक एक्सरसाइज
जैसे तेज़ चलना (ब्रिस्क वॉक), जॉगिंग, तैराकी और डांस. ये व्यायाम आपके दिल को मजबूत बनाते हैं और वजन घटाने में मदद करते हैं.
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
हफ्ते में दो बार हल्के वेट उठाने या शरीर के वजन से व्यायाम करने से हड्डियाँ मजबूत होती हैं और मांसपेशियाँ टोन होती हैं.
स्ट्रेचिंग और योग
इससे जोड़ों में लचीलापन बढ़ता है और चोट लगने का खतरा कम होता है. योग और पिलेट्स इस उम्र में बहुत फायदेमंद होते हैं.
एक्सरसाइज शुरू करने से पहले…
अगर आपको ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, डायबिटीज या कोई अन्य पुरानी बीमारी है, तो किसी डॉक्टर से सलाह जरूर लें. उसके बाद ही किसी फिटनेस रूटीन की शुरुआत करें.
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Cinnamon Tea for Diabetes: डायबिटीज ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती जाती है. लेकिन भारतीय रसोई में मौजूद कई मसाले इस बीमारी को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं. इन्हीं में से एक है दालचीनी, जिसे आयुष मंत्रालय ने डायबिटीज मरीजों के लिए खास फायदेमंद बताया है.
भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में आयुष मंत्रालय प्राकृतिक और घरेलू उपाय अपनाने की सलाह देता है. दालचीनी की चाय न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करती है. दालचीनी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं, जिससे शरीर ग्लूकोज को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाता है.
नियमित रूप से दालचीनी की चाय पीने से ब्लड शुगर का लेवल स्थिर रहता है और अचानक बढ़ने-घटने की समस्या कम होती है. यह चाय कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करने में भी मदद करती है. खराब कोलेस्ट्रॉल कम होने से दिल की बीमारियों का जोखिम घटता है, जो डायबिटीज मरीजों में आम समस्या है. दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो शरीर में सूजन कम करते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं.
दालचीनी की चाय बनाने का आसान तरीका
सबसे पहले एक कप पानी लें और इसमें आधा चम्मच दालचीनी पाउडर या एक छोटी दालचीनी की स्टिक डालें. इसके बाद 5–10 मिनट तक उबालें, छानकर गर्म-गर्म पिएं. साथ ही चाहें तो थोड़ा शहद या नींबू मिला सकते हैं.
नोट
दालचीनी फायदेमंद है, लेकिन यह दवा का विकल्प नहीं है। शुगर मरीजों को अपनी दवा, डाइट और एक्सरसाइज जारी रखना जरूरी है. दालचीनी की चाय का सेवन डॉक्टर की सलाह के साथ ही करना चाहिए. गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज इसे लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.
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Peanuts Health Benefits in Winter: सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और इन्फेक्शन से बचाने के लिए गर्म और पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाने की सलाह दी जाती है. सर्दियों में शरीर के लिए गर्मी, ताकत और अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन ज़रूरी है और ये तीनों चीज़ें मूंगफली में पाई जाती हैं. मूंगफली एक सस्ती, आसान और बहुत ज़्यादा पौष्टिक सुपरफूड है जो सर्दियों में शरीर को फायदा पहुंचाती है. मूंगफली खाने से शरीर को अनगिनत फायदे होते हैं. जिस तरह से इन्हें खाया जाता है, उससे ये फायदे और भी बढ़ सकते हैं.
आयुर्वेद में मूंगफली को एक ऐसी दवा माना जाता है जो शरीर को बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार करती है. मूंगफली वात दोष को बैलेंस करती है, हड्डियों और मांसपेशियों की मरम्मत में मदद करती है, दिल के लिए फायदेमंद है, कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करती है, सूजन कम करती है और पाचन को बेहतर बनाती है. कुल मिलाकर, मूंगफली में कई छिपे हुए गुण होते हैं जो शरीर को एनर्जी और पोषण देते हैं। ये प्रोटीन का एक अच्छा और सस्ता सोर्स भी हैं.
मूंगफली में विटामिन E और मोनोअनसैचुरेटेड फैट होते हैं, जो दिल को मज़बूत बनाते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं. खराब कोलेस्ट्रॉल दिल में ब्लॉकेज पैदा कर सकता है. इसके अलावा, मूंगफली डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी अच्छी होती है. इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है. इसलिए, डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए मूंगफली खाना फायदेमंद है.
मूंगफली वज़न बढ़ाने और घटाने दोनों में मददगार है. इनमें प्रोटीन और अच्छे फैट ज़्यादा होते हैं, जो वज़न बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन अगर इन्हें सीमित मात्रा में और सही समय पर खाया जाए, तो ये वज़न कम करने में भी मदद कर सकते हैं. मूंगफली पेट भरने वाली होती है; थोड़ी सी मूंगफली खाने से आपको लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है.
इसके अलावा, ये त्वचा और दिमाग के लिए भी फायदेमंद हैं. मूंगफली में मौजूद विटामिन B-12 और अच्छे फैट दिमाग को पूरा पोषण देते हैं. अब सवाल यह उठता है कि मूंगफली खाने का सही समय क्या है? मूंगफली सुबह 10 से 11 बजे के बीच खाई जा सकती है. रात में मूंगफली खाने से बचें। गुड़ या शहद के साथ मूंगफली खाने से इसके फायदे दोगुने हो जाते हैं. इसके अलावा, आप मूंगफली से बनी मीठी डिश (चूरमा) बना सकते हैं, जिसमें आटा और तिल ज़रूर डालें.