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चिया, अलसी और सूरजमुखी के बीज कब खाने चाहिए? ये टाइमिंग बदल सकती है आपकी सेहत

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Chia Seeds Benefits: हेल्दी और फिट रहने के लिए डॉक्टर हमेशा संतुलित डाइट की सलाह देते हैं. इस डाइट में ड्राई फ्रूट्स और सीड्स यानी बीजों की खास जगह होती है. आजकल चिया सीड्स, अलसी, कद्दू और सूरजमुखी के बीज काफी ट्रेंड में हैं. ये छोटे-छोटे बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. इनमें फाइबर, प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, मिनरल्स और विटामिन्स पाए जाते हैं जो शरीर को एनर्जी देते हैं और कई बीमारियों से बचाते हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सीड्स को अगर सही समय पर खाया जाए तो इनके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं? चलिए जानते हैं कौन-सा सीड कब और कैसे खाना चाहिए.

1. चिया सीड्स
चिया सीड्स एनर्जी का बेहतरीन सोर्स हैं. इन्हें सुबह नाश्ते के साथ या एक्सरसाइज से 1 घंटे पहले खाना सबसे अच्छा रहता है.

फायदा: ये धीरे-धीरे एनर्जी देते हैं, ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखते हैं और पूरे दिन एक्टिव बनाए रखते हैं.

कैसे खाएं: 1–2 चम्मच चिया सीड्स को पानी, दूध या दही में 15–30 मिनट के लिए भिगो दें. इसे स्मूदी, ओट्स या लस्सी में मिलाकर भी खा सकते हैं.

2. अलसी के बीज
अलसी के बीज फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं.

कब खाएं: सुबह के नाश्ते या दोपहर के खाने के साथ.

फायदा: यह लंबे समय तक पेट भरा रखता है और दिल के लिए भी अच्छा है.

कैसे खाएं: 1–2 चम्मच ताजी पिसी अलसी को दाल, सब्जी, दलिया, सलाद या स्मूदी में डालकर खा सकते हैं.

3. कद्दू के बीज
कद्दू के बीज मैग्नीशियम, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स का अच्छा स्रोत हैं.

कब खाएं: दोपहर या शाम के समय स्नैक के रूप में.

फायदा: यह भूख कम करता है, शरीर को आराम देता है और स्ट्रेस कम करने में मदद करता है.

कैसे खाएं: 1–2 चम्मच बिना नमक के भुने कद्दू के बीज सीधे खा सकते हैं. एक्सरसाइज के बाद भी इन्हें खाना फायदेमंद रहता है.

4. सूरजमुखी के बीज
सूरजमुखी के बीज विटामिन E और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं.

कब खाएं: दोपहर के खाने के साथ या शाम 4 से 6 बजे के बीच.

फायदा: ये शरीर की रिकवरी में मदद करते हैं और एनर्जी बनाए रखते हैं.

कैसे खाएं: 1–2 चम्मच बिना नमक के भुने सूरजमुखी के बीज मिनी मील की तरह खाएं.


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Written by: Taushif

17 Oct 2025  ·  Published: 11:07 IST

शारदीय नवरात्रि में ट्राई करें यह खास रेसिपी, झटपट तैयार करें व्रत के लिए कच्चे केले की रेसिपी

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Navratri Vrat Recipe: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आज से शुरू हो चुका है. नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त व्रत रखते हैं. व्रत के दौरान हल्के और हेल्दी स्नैक्स की तलाश हर किसी को रहती है. ऐसा ही एक नाश्ता है कच्चे केले के कटलेट, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहतमंद भी है.

कच्चे केले के कटलेट बनाने के लिए सामग्री

3-4 कच्चे केले
2-3 उबले आलू

स्वादानुसार नमक और काली मिर्च

2 बड़े चम्मच कटा हुआ ताजा हरा धनिया
2 हरी मिर्च (बारीक कटी)
तेल (ग्रीस करने और तलने के लिए)

बनाने का तरीका
सबसे पहले आलू को अच्छी तरह उबालकर छील लें और मैश करें. इसमें नमक, काली मिर्च, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाकर मसालेदार मिक्स तैयार कर लें. अब कच्चे केलों को उबालें. उबलने के बाद छीलकर मैश करें और स्वादानुसार नमक, काली मिर्च डालें. तेल लगे हाथों से आलू के मिक्स की छोटी-छोटी गोलियां बना लें.

मैश किए हुए केले का थोड़ा हिस्सा लें, उसे हल्का चपटा करें. बीच में आलू की गोली रखकर किनारे बंद कर टिक्की जैसा आकार दें. कड़ाही में तेल गरम करें और कटलेट को दोनों तरफ से गोल्डन और क्रिस्पी होने तक तलें. फिर एक्स्ट्रा तेल सोखने के लिए पेपर टॉवल पर रख दें. इन कटलेट्स को आप दही या हरी चटनी के साथ सर्व कर सकते हैं. व्रत में यह एक स्वादिष्ट और हेल्दी स्नैक है, जिसे बनाना बेहद आसान है.


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Written by: Taushif

22 Sep 2025  ·  Published: 11:18 IST

क्या आपकी डाइट में हैं ये गैस बनाने वाले फूड्स? तुरंत पहचानें

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Gas Problem: गैस बनना या गैस छोड़ना (फ्लैट्युलेंस) आमतौर पर लोगों के लिए शर्मिंदगी का कारण बनता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये हमारी अच्छी पाचन सेहत का संकेत भी हो सकता है? एक सामान्य इंसान दिन में लगभग 5 से 15 बार गैस छोड़ता है. अगर यह प्रक्रिया बहुत अधिक या बदबूदार न हो, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका पाचन तंत्र सक्रिय है और आप ऐसे खाद्य पदार्थ खा रहे हैं जो आपकी सेहत के लिए अच्छे हैं.

क्यों बनती है गैस?
गैस बनने की सबसे आम वजह है कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और फाइबर से भरपूर भोजन. ये खाद्य पदार्थ पूरी तरह पच नहीं पाते और आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया इन्हें तोड़ते हैं. इस प्रक्रिया में गैस बनती है. आइए जानते हैं कि कौन-कौन से खाद्य पदार्थ ज्यादा गैस बनाते हैं?

1. वसा युक्त और चर्बी वाला मीट
चिकनाई वाला भोजन पाचन को धीमा कर देता है। इससे आंतों में फर्मेंटेशन शुरू हो जाता है, जिससे बदबूदार गैस बन सकती है. खासतौर पर लाल मांस (रेड मीट) में मेथियोनीन नामक अमीनो एसिड पाया जाता है, जो सल्फर से भरपूर होता है. यह हाइड्रोजन सल्फाइड में बदलता है और गैस में सड़े अंडे जैसी बदबू लाता है.

2. बीन्स और दालें
राजमा, लोबिया, चना जैसी दालों में रेफिनोज़ नामक शुगर होती है जिसे शरीर पूरी तरह नहीं तोड़ पाता. यह आंतों में जाकर गैस पैदा करती है.

3. अंडा
अंडा सीधे तौर पर गैस नहीं बनाता, लेकिन इसमें भी मेथियोनीन होता है. अगर इसे बीन्स या मीट के साथ खाया जाए, तो बदबूदार गैस बनने की संभावना बढ़ जाती है.

4. प्याज, लहसुन, हरा प्याज
इनमें फ्रक्टेन नामक कार्बोहाइड्रेट होता है जो पेट फूलने और गैस बनाने का कारण बन सकता है.

5. दूध और डेयरी प्रोडक्ट
गाय और बकरी के दूध में लैक्टोज होता है. दुनिया की करीब 65% आबादी लैक्टोज इन्टॉलरेंट होती है, यानी उनका शरीर दूध की शुगर को नहीं पचा पाता, जिससे गैस और सूजन होती है.

6. गेहूं और साबुत अनाज
गेहूं, ओट्स और ब्रेड जैसे उत्पादों में फ्रक्टेन और ग्लूटेन पाए जाते हैं. जिन लोगों को ग्लूटेन इन्टॉलरेंस है, उन्हें इनसे गैस और पेट फूलने की दिक्कत हो सकती है.

7. ब्रोकोली, फूलगोभी और पत्तागोभी
ये सब्ज़ियां बहुत फाइबर युक्त होती हैं और इनमें सल्फर भी पाया जाता है. यह बदबूदार गैस बनने का एक और कारण है. हालांकि ये सब्जियां पोषक होती हैं, लेकिन इनका सेवन सीमित मात्रा में करें.

8. कुछ फल जैसे सेब, नाशपाती, आम
इन फलों में फ्रक्टोज़ और फाइबर की मात्रा अधिक होती है. कुछ लोगों का शरीर फ्रक्टोज़ को ठीक से पचा नहीं पाता, जिससे गैस बनती है. हालांकि, यह स्थिति लैक्टोज इन्टॉलरेंस की तुलना में कम आम है.


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Written by: Taushif

07 Aug 2025  ·  Published: 06:59 IST

सर्दी-जुकाम के साथ-साथ चेहरे पर ब्यूटी क्रीम की तरह काम करती है भाप, जानें अनगिनत फायदे

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भाप लेना यानी स्टीम थेरेपी एक बहुत पुरानी और असरदार घरेलू प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल लोग सर्दी-जुकाम से राहत पाने के लिए करते आए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भाप लेना सिर्फ सर्दी में नहीं, बल्कि चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने, तनाव कम करने और शरीर को डिटॉक्स करने में भी बहुत मददगार है?

आयुर्वेद में इसे “स्वेदन कर्म” कहा गया है. इसका मतलब है शरीर में जमा आम (टॉक्सिन) को बाहर निकालना और शरीर की शुद्धि करना. भाप लेने से शरीर के अंदर की नमी और गर्मी संतुलित रहती है, जिससे वात और कफ दोष दोनों नियंत्रित रहते हैं. यही वजह है कि ठंड के मौसम में भाप लेना शरीर के लिए औषधि जैसा काम करता है.

चेहरे के लिए भाप के फायदे
भाप लेने से चेहरे के रोमछिद्र खुल जाते हैं, और उनके अंदर जमा गंदगी व तेल बाहर निकल जाते हैं. इससे त्वचा साफ, मुलायम और चमकदार हो जाती है. अगर आप पानी में गुलाब जल और ग्लिसरीन की कुछ बूंदें डालकर भाप लें, तो यह न सिर्फ चेहरे की नमी बनाए रखता है, बल्कि रंगत भी निखारता है.

तनाव और सिर दर्द के लिए भाप
अगर आपको सिर भारी लगता है या तनाव महसूस हो रहा है, तो पानी में चंदन के तेल और लैवेंडर ऑयल की कुछ बूंदें डालकर भाप लें. इससे मानसिक शांति मिलती है, सिर दर्द में आराम होता है और नींद भी बेहतर आती है. लैवेंडर ऑयल दिमाग को शांत करने में बहुत फायदेमंद माना जाता है.

गले की खराश और खांसी में भाप का असर
जब गला बैठ जाए या खांसी-बलगम ज्यादा हो, तो पानी में मुलेठी और हल्दी डालकर भाप लेना बहुत फायदेमंद होता है. इससे गले के अंदर का संक्रमण कम होता है और सांस लेने में राहत मिलती है.

सर्दी-जुकाम और जकड़न में भाप का जादू
सर्दी-जुकाम या शरीर में अकड़न होने पर पानी में तुलसी की पत्तियां, लौंग और अजवाइन डालकर उबाल लें और फिर उस भाप को लें. इससे छाती में जमी बलगम निकल जाती है और शरीर हल्का महसूस होता है.


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Written by: Taushif

13 Nov 2025  ·  Published: 22:52 IST