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Weight Loss Foods: आज के समय में मोटापा एक आम समस्या बन चुकी है, जो न सिर्फ हमारी पर्सनैलिटी को प्रभावित करता है बल्कि कई गंभीर बीमारियों की वजह भी बनता है. डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और थायराइड जैसी समस्याओं का सीधा संबंध बढ़ते वजन से जुड़ा होता है. ऐसे में अगर आप स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीना चाहते हैं, तो वजन को संतुलित रखना बेहद जरूरी है.
वजन कम करने के लिए सबसे अहम भूमिका आपकी डाइट और लाइफस्टाइल की होती है. सही खान-पान और नियमित दिनचर्या से न सिर्फ वजन घटाया जा सकता है, बल्कि शरीर को संपूर्ण पोषण भी दिया जा सकता है. आज हम आपको कुछ ऐसे सुपरफूड्स के बारे में बता रहे हैं जो वजन कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं. ये फूड्स कम कैलोरी वाले होते हैं लेकिन इनमें प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स की भरपूर मात्रा होती है, जिससे पेट ज्यादा देर तक भरा रहता है और बार-बार खाने की जरूरत महसूस नहीं होती.
1. अवोकाडो (Avocado)
हालांकि अवोकाडो में कैलोरी थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन ये कैलोरीज़ हेल्दी फैट्स से आती हैं. इसमें मौजूद मोनोसैचुरेटेड फैट्स और फाइबर न सिर्फ पाचन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि लंबे समय तक भूख भी नहीं लगने देते. यह पेट को भरा रखने के साथ-साथ दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद है.
2. बेरीज (Berries)
ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, रास्पबेरी जैसी बेरीज स्वाद में तो अच्छी होती ही हैं, साथ ही ये नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर का बेहतरीन स्रोत भी होती हैं. इनमें कैलोरी कम होती है, जिससे वजन बढ़ने की संभावना कम होती है. साथ ही मीठा खाने की इच्छा होने पर ये एक हेल्दी विकल्प बनती हैं.
3. ओट्स (Oats)
ओट्स को वजन घटाने के लिए सुपरफूड कहा जाता है. इसमें सॉल्युबल फाइबर होता है जो पेट में जाकर पानी के साथ मिलकर जेल जैसा बन जाता है. इससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है और बार-बार भूख नहीं लगती. अगर आप दिन की शुरुआत ओट्स से करते हैं तो यह आपके मेटाबॉलिज्म को भी एक्टिव करता है.
4. बीन्स और दालें (Beans and Lentils)
राजमा, छोले, मसूर और मूंग जैसी दालें प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती हैं. यह शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देती हैं और ब्लड शुगर लेवल को स्थिर बनाए रखने में मदद करती हैं. इनके सेवन से पेट जल्दी नहीं खाली होता, जिससे आप अनहेल्दी स्नैक्स से बच जाते हैं.
5. अंडे (Eggs)
अंडे प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत हैं और वजन कम करने वालों के लिए यह बहुत फायदेमंद हैं. खासतौर पर अगर आप नाश्ते में अंडा शामिल करते हैं, तो दिनभर एनर्जी बनी रहती है और बार-बार खाने की जरूरत नहीं पड़ती. यह मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और शरीर को पोषण देते हैं.
6. हरी पत्तेदार सब्जियां (Leafy Greens)
पालक, मेथी, केल, सरसों जैसी हरी सब्जियां फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का खजाना हैं. इनकी खासियत यह है कि इनमें कैलोरी बहुत कम होती है, लेकिन पोषण भरपूर मिलता है. इन्हें सलाद, सूप या सब्जी के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है.
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Causes of Wrinkles: जब भी झुर्रियों की बात होती है तो अक्सर हम उम्र बढ़ने, धूप में ज्यादा समय बिताने या स्किन के सूखने को जिम्मेदार मानते हैं लेकिन अमेरिका की बिंगहैमटन यूनिवर्सिटी की एक नई रिसर्च इस धारणा को पूरी तरह बदल सकती है. इस रिसर्च के अनुसार, झुर्रियों का मुख्य कारण स्किन की भौतिक (फिजिकल) स्थिति में आने वाला तनाव और खिंचाव है, न कि सिर्फ उम्र या सूरज की किरणें.
क्या है रिसर्च की खास बात?
रिसर्चर्स ने 16 से 91 साल के लोगों के स्किन सैंपल लेकर एक विशेष मशीन ‘टेंसोमीटर’ में उनकी टेस्टिंग की. यह मशीन बताती है कि स्किन कैसे खिंचती और सिकुड़ती है. नतीजों में सामने आया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, स्किन में इलास्टिसिटी (लचीलापन) कम होती जाती है. स्किन अब पहले की तरह सीधी और बराबर नहीं सिकुड़ती, बल्कि किनारों की तरफ ज्यादा खिंचती है और जब ये खिंचाव संतुलित नहीं होता तो झुर्रियां बन जाती हैं.
वैज्ञानिकों ने इस प्रोसेस को “बकलिंग” कहा है कि एक ऐसा फिजिकल रिएक्शन जिसमें सतह (जैसे स्किन) अंदर की ओर मुड़ जाती है, ठीक वैसे ही जैसे कागज को मोड़ने पर सिलवटें पड़ती हैं.
धूप और उम्र कैसे असर डालते हैं?
हालांकि रिसर्च कहती है कि फिजिक्स मुख्य कारण है, लेकिन उम्र बढ़ने और धूप से कोलेजन और इलास्टिन फाइबर पर पड़ने वाला असर इस प्रक्रिया को और तेज कर देता है. सूरज की UV किरणें स्किन के इन संरचनात्मक प्रोटीन को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे स्किन कमजोर और कम लचीली हो जाती है.
झुर्रियों के इलाज के नए रास्ते
यह स्टडी अब स्किनकेयर के क्षेत्र में भी नए बदलाव ला सकती है. परंपरागत क्रीम और लोशन केवल कोलेजन बढ़ाने या स्किन को हाइड्रेटेड रखने पर ध्यान देते हैं, लेकिन इस रिसर्च के बाद वैज्ञानिक माइक्रोमेश पैच और पेप्टाइड्स पर काम कर रहे हैं.
माइक्रोमेश पैच स्किन के तनाव को बराबर करने में मदद कर सकते हैं, जबकि कुछ विशेष पेप्टाइड्स स्किन सेल्स को फिर से संगठित करते हैं ताकि इलास्टिसिटी और मजबूती लौटाई जा सके.
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सर्दी की शुरुआत और दिवाली के बाद लगभग हर राज्य में वायु की गुणवत्ता में गिरावट आती है और प्रदूषण, कोहरे के साथ मिलकर लोगों को बीमार करने लगता है. ऐसे में खुद को स्वस्थ रखने के लिए आप घर में मौजूद मूंगफली के दानों और गुड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं.
सर्दी में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों में श्वसन संबंधी रोग, बुखार, सर्दी-जुकाम, त्वचा संबंधी रोग, हेपेटाइटिस ए और हृदय रोग की समस्या बढ़ जाती है. ऐसे मौसम में मधुमेह और अस्थमा से पीड़ित लोगों को घर से न निकलने की सलाह दी जाती है.
प्रदूषण की वजह से बच्चों से लेकर बड़े तक प्रभावित होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रदूषण की हल्की सर्दी का मौसम रोग प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर डालता है और बार-बार बीमार होने का कारण बनता है, लेकिन घर में मौजूद मूंगफली और गुड़ प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से बचाव के साथ-साथ सर्दी से होने वाली बीमारियों से भी बचाएंगे. इसके लिए सुबह की शुरुआत मूंगफली के नाश्ते से करें.
इसे बनाने के लिए भुनी हुई मूंगफली, गुड़ और इलायची को मिलाकर छोटे-छोटे लड्डू बना लें और रोज सुबह इनका सेवन करें. मूंगफली में प्रोटीन, वसा, फाइबर, विटामिन और खनिज होते हैं, जो हृदय का संचालन अच्छे से करते हैं, शरीर को गर्म रखते हैं, और पाचन प्रबंधन में मदद करते हैं. गुड़ में मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन बी 6 होता है, जो पाचन को अच्छा रखते हैं, रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत बनाते हैं, शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने में मदद करते हैं और शरीर में खून की कमी को पूरा करते हैं.
इलायची में एंटीऑक्सीडेंट, जिंक और सेलेनियम, कैल्शियम, पोटैशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो नींद लाने में सहायक होते हैं, पाचन को अच्छा बनाते हैं, पेट की गर्मी को शांत करते हैं, दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं और संक्रमण से भी बचाते हैं.
मूंगफली का नाश्ता (वेरकादलाई उरुंडई) दक्षिण भारत का नाश्ता है, जिसे सर्दी की शुरुआत में ही खाया जाता है. ये एक पारंपरिक मीठी डिश है, जिसे दक्षिण में दवा की तरह भी प्रयोग किया जाता है. खास बात ये है कि व्यंजन को बड़े से लेकर बच्चे तक खा सकते हैं. बच्चों के लिए लड्डू की मात्रा कम रखें, जबकि बड़े ज्यादा मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं. लड्डू का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें सफेद तिल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.
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Chia Seeds: चिया सीड्स को आजकल सुपरफूड कहा जाता है, और इसकी वजह है इनमें मौजूद ढेर सारे पोषक तत्व. ये छोटे-छोटे बीज न सिर्फ आपकी सेहत के लिए अच्छे होते हैं, बल्कि स्किन की देखभाल में भी बेहद फायदेमंद हैं. ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन से भरपूर चिया सीड्स आपकी त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और उसे स्वस्थ बनाते हैं.
स्किन के लिए चिया सीड्स क्यों फायदेमंद हैं?
चिया सीड्स में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड स्किन में नमी बनाए रखने में मदद करते हैं. साथ ही, इनमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और उम्र के असर को कम करते हैं. इनके नियमित सेवन या स्किन पर इस्तेमाल से त्वचा कोमल, मुलायम और चमकदार बनती है.
घर पर बनाएं चिया सीड्स फेस मास्क
चिया सीड्स से बना फेस मास्क स्किन को गहराई से पोषण देता है. इसके लिए रातभर 1-2 चम्मच चिया सीड्स को पानी में भिगो दें. अगले दिन ये जेल जैसी बनावट में बदल जाते हैं. इस जेल को आप 1 चम्मच शहद या 1 चम्मच दही के साथ मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं. 15-20 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें. यह मास्क स्किन को हाइड्रेट करता है, जिससे चेहरा तरोताजा और निखरा हुआ दिखता है.
DIY मॉइस्चराइजिंग मास्क
अगर आपकी त्वचा बहुत रूखी है, तो भीगे हुए चिया बीजों में मसला हुआ केला या एवोकाडो मिलाकर एक और असरदार फेस मास्क बना सकते हैं. केले और एवोकाडो में विटामिन A, C और E होते हैं, जो स्किन को मुलायम और ग्लोइंग बनाते हैं.
चिया सीड्स को फेस स्क्रब की तरह कैसे इस्तेमाल करें?
चिया सीड्स एक बेहतरीन नेचुरल एक्सफोलिएटर भी हैं. आप पिसे हुए चिया बीजों को नारियल तेल या जैतून तेल में मिलाकर हल्के हाथों से चेहरे पर मालिश करें. इससे डेड स्किन हटती है और त्वचा साफ और फ्रेश लगती है.