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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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बरसात के मौसम में क्यों बढ़ जाता है स्किन इंफेक्शंस का खतरा? जानें इनसे बचने का तरीका

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

Monsoon Skin Problems: मानसून अपने साथ सुहावनी बारिश और ठंडी हवाएँ लेकर आता है, लेकिन इस मौसम में स्किन संबंधी कई गंभीर समस्याएँ भी तेज़ी से बढ़ने लगती हैं। बढ़ती नमी और गीले कपड़े शरीर को बैक्टीरिया और फंगस के लिए आदर्श स्थान बना देते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मानसून में स्किन संक्रमण के मामले 40 फीसद तक बढ़ जाते हैं। सबसे आम समस्याएँ हैं. एथलीट फुट, दाद, एरिथ्रास्मा, फॉलिकुलिटिस और घमौरियाँ।

एथलीट फुट एक फंगल संक्रमण है जो गीले मोज़े या बंद जूते पहनने से होता है। इससे खुजली, स्किन फटना और पैर की उंगलियों के बीच जलन हो सकती है। इससे बचने के लिए, पैरों को हमेशा साफ़ और सूखा रखें और एंटीफंगल पाउडर लगाएँ।

दाद एक और आम फंगल संक्रमण है जो त्वचा पर गोल आकार के लाल चकत्ते के रूप में दिखाई देता है। इससे तेज़ खुजली होती है। दाद से बचने के लिए, ढीले सूती कपड़े पहनें, शरीर को सूखा रखें और संक्रमण होने पर एंटीफंगल क्रीम का इस्तेमाल करें।

एरिथ्रास्मा एक जीवाणु संक्रमण है जो बगल, कमर या उंगलियों के बीच भूरे या गुलाबी धब्बों के रूप में दिखाई देता है। इससे बचने के लिए, रोज़ाना एंटीबैक्टीरियल साबुन से नहाएँ और त्वचा की नमी को सूखने न दें।

फॉलिकुलिटिस पसीने और घर्षण के कारण बालों की जड़ों में सूजन और लाल फुंसियाँ पैदा करता है। इससे बचने के लिए एलोवेरा जेल या हल्के स्क्रब का इस्तेमाल करें।

स्किन के बंद रोमछिद्रों में पसीने के फंस जाने से घमौरियाँ होती हैं। गर्दन, छाती और पीठ पर छोटे-छोटे लाल या सफेद फुंसियाँ निकल आती हैं। इससे बचने के लिए, ढीले कपड़े पहनें, ठंडे पानी से नहाएँ और कैलामाइन लोशन लगाएँ।

नोट- अगर संक्रमण 7-14 दिनों में ठीक न हो, दर्द हो या दाने फैलने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लें। अगर आपको मधुमेह या कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता है, तो विशेष ध्यान रखें।


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Written by: Taushif

21 Jul 2025  ·  Published: 05:28 IST

फैटी लिवर से बचने के लिए इन 5 सब्जियों को डाइट में करें शामिल

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फाइल फोटो

Fatty Liver Diet: आजकल बदलती लाइफस्टाइल और खराब खानपान के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है. फैटी लिवर तब होता है जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है. शुरूआती समय में इसके लक्षण हल्के रहते हैं जैसे थकान, कमजोरी, पेट में भारीपन या हल्का दर्द. आमतौर पर लोग इन संकेतों को गंभीरता से नहीं लेते और समस्या बढ़ने पर ही डॉक्टर के पास जाते हैं. अगर लंबे समय तक इसे अनदेखा किया जाए तो यह लिवर सिरोसिस, डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

अच्छी बात यह है कि संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर फैटी लिवर को शुरुआती अवस्था में ही काबू किया जा सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि अपनी रोजमर्रा की डाइट में कुछ खास सब्जियां शामिल करने से तीन महीनों में ही लिवर की सेहत में सुधार दिखाई देने लगता है.

1. पालक
पालक विटामिन E, विटामिन C और फाइबर का अच्छा स्रोत है. ये तत्व लिवर को नुकसान और सूजन से बचाते हैं. रोजाना पालक खाने से इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है और लिवर में फैट जमा नहीं होता. साथ ही यह पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है जिससे अतिरिक्त चर्बी लिवर में जमा नहीं हो पाती.

2. ब्रोकोली
फैटी लिवर के मरीजों को ब्रोकोली जरूर खानी चाहिए. इसमें मौजूद ग्लूकोसिनोलेट्स लिवर को डिटॉक्स करने और फैट घटाने में मदद करते हैं. यह लिवर की सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा भी घटाता है.

3. ब्रसेल्स स्प्राउट्स
ब्रसेल्स स्प्राउट्स में इंडोल नामक तत्व पाया जाता है जो लिवर में फैट स्टोर होने से रोकता है. यह लिवर की डिटॉक्स प्रक्रिया को तेज करता है और लिवर एंजाइम्स को संतुलित रखता है. नियमित रूप से इसे खाने से लिवर को होने वाला नुकसान कम होता है और फैटी लिवर का खतरा घट जाता है.

4. केल
एंटीऑक्सीडेंट और मैग्नीशियम से भरपूर केल भी फैटी लिवर के लिए फायदेमंद है. इसे खाने से लिवर एंजाइम्स सामान्य रहते हैं और फैट जमा होना कम होता है. इसमें मौजूद नाइट्रेट्स ब्लड फ्लो सुधारते हैं और लिवर की सूजन घटाते हैं.

5. गाजर
गाजर में बीटा-कैरोटीन होता है जो विटामिन A में बदलकर लिवर की कोशिकाओं की मरम्मत करता है. गाजर का फाइबर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है और लिवर में जमा फैट धीरे-धीरे घटाता है. इसके नियमित सेवन से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और वजन कम करने में भी मदद मिलती है.


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Written by: Taushif

17 Sep 2025  ·  Published: 11:37 IST

एर्दोगन ने मेलोनी को सिगरेट छोड़ने की सलाह दी, मैक्रों ने कहा– ये नामुमकिन है, वायरल हुआ वीडियो

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फाइल फोटो

मिस्र में गाजा शांति वार्ता के दौरान विश्व नेताओं की बैठक में एक दिलचस्प पल देखने को मिला. इस मुलाकात में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे. इसी दौरान एर्दोगन और मेलोनी के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

वीडियो में एर्दोगन मुस्कुराते हुए मेलोनी से कहते हैं, “मैंने तुम्हें विमान से उतरते देखा, तुम बहुत अच्छी लग रही हो, लेकिन मुझे तुम्हारा धूम्रपान बंद करवाना होगा.” तभी बगल में खड़े मैक्रों तुरंत मजाक में कहते हैं, “यह नामुमकिन है.” यह सुनकर मेलोनी जोर से हंस पड़ती हैं और कहती हैं, “मुझे पता है, लेकिन अगर मैंने सिगरेट छोड़ दी तो मैं कम मिलनसार हो जाऊंगी. मैं किसी को मारना नहीं चाहती.”

यह मजाकिया बातचीत भले ही हल्के-फुल्के अंदाज़ में हुई हो, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर संदेश छिपा है. स्मोकिंग की बढ़ती आदत और उससे होने वाले खतरे.

दरअसल, जॉर्जिया मेलोनी ने एक किताब में बताया था कि उन्होंने 13 साल तक सिगरेट छोड़ रखी थी, लेकिन कुछ समय पहले फिर से शुरू कर दी. उनका कहना था कि सिगरेट पीना कभी-कभी बातचीत और कूटनीतिक रिश्ते सुधारने का जरिया बन जाता है. हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोच बेहद गलत और खतरनाक है. आज स्मोकिंग युवाओं में फैशन सिंबल बन चुकी है. कई टीनेजर्स और युवा मानते हैं कि सिगरेट पीना उन्हें ज्यादा परिपक्व या कूल दिखाता है. फिल्मों और सोशल मीडिया पर इसे ग्लैमरस अंदाज़ में दिखाया जाता है, जिससे भ्रम और बढ़ता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि पीयर प्रेशर यानी दोस्तों के दबाव में आकर और तनाव से राहत पाने की गलत सोच के कारण युवा स्मोकिंग की लत में फंसते जा रहे हैं. सिगरेट में मौजूद निकोटीन कुछ देर के लिए शांति का एहसास देता है, लेकिन बाद में बेचैनी और तनाव को और बढ़ा देता है. लंबे समय तक इसका सेवन कैंसर, फेफड़ों और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है.


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Written by: Taushif

15 Oct 2025  ·  Published: 11:10 IST

अच्छी नींद की कीमत रिश्ते में दूरी? कपल्स में बढ़ा स्लीप डिवोर्स का चलन

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फाइल फोटो

यूरोप के कई देशों में इन दिनों ‘स्लीप डिवोर्स’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. यानी पति-पत्नी एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग बिस्तर या कमरों में सोते हैं ताकि नींद बेहतर हो सके. स्वीडन, नॉर्वे जैसे नॉर्डिक देशों में यह तरीका काफी लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि लोग मानते हैं कि इससे खर्राटे, देर तक जागने या एक-दूसरे की नींद में खलल जैसी दिक्कतें कम होती हैं.

लेकिन ताइवान के वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च में इस ट्रेंड को लेकर चिंता जताई गई है. ‘बीएमसी पब्लिक हेल्थ’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, अलग सोने से कपल्स की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ सकता है. इस रिसर्च में उत्तरी ताइवान के 860 जोड़ों पर सर्वे किया गया, जिसमें उनकी नींद की आदतों और मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण किया गया. इसमें पाया गया कि जो कपल्स अलग-अलग कमरों में सोते हैं, खासकर बुजुर्ग जोड़े, उनकी मेंटल हेल्थ साथ सोने वालों की तुलना में कमजोर पाई गई.

वैज्ञानिकों का मानना है कि नींद की व्यवस्था सिर्फ एक फिजिकल फैक्टर नहीं है, बल्कि यह रिश्ते की इमोशनल बॉन्डिंग से भी जुड़ी होती है. यानी साथ सोने से भले नींद थोड़ी डिस्टर्ब हो, लेकिन मानसिक जुड़ाव मजबूत रहता है. अमेरिकी वैज्ञानिक वेंडी ट्रॉक्सेल, जो किताब ‘Sharing the Covers: Every Couple’s Guide to Better Sleep’ की लेखिका हैं, ने भी कहा कि अलग-अलग सोना कई बार रिश्ते में दूरी का संकेत हो सकता है. 

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर जोड़े की जरूरत अलग होती है, इसलिए नींद और रिश्ते के बीच सही संतुलन बनाना जरूरी है. अंत में शोधकर्ताओं का निष्कर्ष यह रहा कि अगर कपल्स चाहते हैं कि उनका रिश्ता और मानसिक स्वास्थ्य दोनों मजबूत रहें, तो उन्हें नींद की गुणवत्ता के साथ-साथ भावनात्मक नजदीकी पर भी ध्यान देना चाहिए.


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Written by: Taushif

04 Nov 2025  ·  Published: 22:16 IST