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Healthy Liver Diet: आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और खराब खान-पान और बढ़ते तनाव का सीधा असर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक, लिवर पर पड़ता है। लिवर न सिर्फ़ पाचन में मदद करता है, बल्कि शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने, पोषक तत्वों को संग्रहित करने और मेटाबॉलिज़्म को नियंत्रित करने में भी बेहद अहम है। अगर लिवर कमज़ोर हो जाए, तो शरीर कई बीमारियों का घर बन सकता है। इसलिए, लिवर को स्वस्थ रखने के लिए अपनी जीवनशैली में कुछ खास खान-पान की आदतों को शामिल करना बेहद ज़रूरी है।
1. हरी सब्ज़ियां और फाइबर युक्त आहार
ब्रोकोली, पालक, बीन्स और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ फाइबर से भरपूर होती हैं जो लिवर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करती हैं। फाइबर शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है और लिवर पर भार कम करता है। क्रूसिफेरस सब्ज़ियाँ (ब्रोकोली, फूलगोभी) ख़ास तौर पर लिवर में एंजाइम्स को सक्रिय करती हैं जो विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं।
2. हल्दी और अदरक का सेवन
हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन लिवर की सूजन को कम करने में कारगर है। यह एक प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर के रूप में काम करता है। रोज़ाना गुनगुने पानी में एक चुटकी हल्दी और थोड़ा सा अदरक मिलाकर पीने से लिवर की कार्यक्षमता में सुधार होता है।
3. कॉफ़ी (संतुलित मात्रा में)
शोध से पता चला है कि कॉफ़ी लिवर के लिए फायदेमंद हो सकती है, बशर्ते इसे सीमित मात्रा में (दिन में 1-2 कप) पिया जाए। यह लिवर में जमा वसा और सूजन को कम करने में मदद करती है और लिवर सिरोसिस जैसी बीमारियों से बचाती है।
4. एवोकाडो, मेवे और स्वस्थ वसा
एवोकाडो, अखरोट, बादाम जैसे खाद्य पदार्थों में मौजूद स्वस्थ फैटी एसिड लिवर की सूजन को कम करते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं। ये लिवर की कोशिकाओं की मरम्मत और उन्हें मज़बूत बनाने में मददगार होते हैं।
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चुकंदर को हेल्थ और स्किन दोनों के लिए सुपरफूड माना जाता है. यही वजह है कि आजकल कई लोग सुबह खाली पेट Beetroot Juice पीकर दिन की शुरुआत करना पसंद करते हैं. कहा जाता है कि इससे स्टैमिना बढ़ता है, ब्लड फ्लो बेहतर होता है और स्किन पर नैचुरल ग्लो आता है. लेकिन क्या खाली पेट इसे पीना सभी के लिए फायदेमंद है? इस सवाल का जवाब न्यूट्रिशनिस्ट राशी चहल ने एक इंटरव्यू में दिया.
खाली पेट चुकंदर का जूस पीने के फायदे
न्यूट्रिशनिस्ट के मुताबिक, अगर आपका पाचन ठीक है तो खाली पेट चुकंदर का जूस पीना बेहद फायदेमंद हो सकता है.
आयरन और विटामिन का बेहतर अवशोषण: खाली पेट पीने पर शरीर बीटरूट में मौजूद आयरन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स को जल्दी और बेहतर तरीके से अवशोषित करता है.
न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि इसे सुबह नाश्ते से करीब 30 मिनट पहले या वर्कआउट से पहले नींबू का रस मिलाकर पिएं, इससे असर दोगुना हो जाता है.
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
चुकंदर का जूस हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है, खासकर जिन लोगों को पेट से जुड़ी कोई समस्या है, उन्हें इसे खाली पेट नहीं पीना चाहिए.
न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह
राशी चहल कहती हैं कि खाली पेट बीटरूट जूस पीना फायदेमंद है, लेकिन सीमित मात्रा में. अगर आपको लो ब्लड प्रेशर, किडनी स्टोन या पेट की समस्या है, तो इसे डॉक्टर की सलाह के बिना न पिएं. ऐसे लोगों के लिए बेहतर है कि चुकंदर का जूस अन्य फूड्स के साथ मिलाकर पिया जाए.
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Late Night Hunger Remedies: रात में अक्सर लोगों को भूख लगती है और पेट से अजीब सी आवाज़ आने लगती है। ऐसे में लोग झट से चिप्स, कुकीज़ या मिठाइयाँ खा लेते हैं, लेकिन ये आदत सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकती है। खासतौर पर ये ब्लड शुगर को बढ़ा सकती है और आपकी नींद को भी खराब कर सकती है।
इसका बेहतर समाधान ये है कि आप कुछ ऐसा हल्का और हेल्दी खाएं, जो आपकी भूख भी मिटाए और शुगर लेवल को भी न बढ़ाए। ऐसे ही कुछ लो-ग्लाइसेमिक और न्यूट्रिशन से भरपूर स्नैक्स हैं, जो रात में खाने के लिए बेहतरीन माने जाते हैं:
चिया पुडिंग
चिया सीड्स, बिना शक्कर वाला दूध और थोड़ी दालचीनी मिलाकर रातभर फ्रिज में रखें। ये फाइबर और गुड फैट्स से भरपूर है।
पनीर क्यूब्स
हाई प्रोटीन और लो कार्ब्स से भरपूर, जो पेट भी भरे और शुगर भी कंट्रोल करे।
बादाम
हेल्दी फैट्स, फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर नींद को भी बेहतर बनाते हैं।
प्लेन ग्रीक योगर्ट
हाई प्रोटीन और लो शुगर, स्वादिष्ट और पेट भरने वाला।
उबला अंडा
इसमें ट्रिप्टोफैन होता है जो मेलाटोनिन बनाने में मदद करता है यानी बेहतर नींद के लिए फ़ायदेमंद।
मूंग दाल का सूप
हल्का, गर्म और आसानी से पचने वाला, एनर्जी भी देगा और शुगर भी कंट्रोल करेगा।
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Kidney Cyst Symptoms: बहुत से लोग किडनी सिस्ट से परेशान रहते हैं. ये छोटी, फ्लूइड से भरी थैलियां होती हैं. ज़्यादातर मामलों में ये हानिरहित होती हैं, लेकिन समस्या तब होती है जब सिस्ट का आकार बढ़ने लगता है, जिससे पेट या पीठ के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब करते समय जलन, बार-बार इन्फेक्शन या ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है.
आयुर्वेद के अनुसार, किडनी सिस्ट बनने का कारण शरीर में रुकावटें, कफ का जमा होना और लाइफस्टाइल में असंतुलन है. कई मामलों में शुरुआती स्टेज में हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर और कुछ पारंपरिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करके राहत मिल सकती है, हालांकि कोई भी उपाय आज़माने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है.
किडनी सिस्ट के कारण अक्सर हमारी रोज़ाना की आदतों में छिपे होते हैं, जैसे कम पानी पीना, रात को देर तक जागना, ज़्यादा नमक या मसालेदार खाना खाना, मीठा खाने की आदत, शरीर में सूजन बढ़ना, कब्ज़ या पाचन धीमा होना. ये छोटी-छोटी गलतियां धीरे-धीरे किडनी पर असर डालती हैं.
आयुर्वेद कुछ पारंपरिक उपाय बताता है, जिसमें गोक्षुर और एलोवेरा जूस का मिश्रण, वरुण चूर्ण, गिलोय सत्व, खीरा, पुदीना और धनिया से बना पानी, पुनर्नवा और अश्मभेद का काढ़ा, रात भर भिगोए हुए किशमिश, हल्का लौकी का पानी और रात को त्रिफला लेना शामिल है. कई लोग सूजन कम करने, हल्का महसूस करने और पाचन को संतुलित रखने के लिए इन उपायों का इस्तेमाल करते हैं.
इसी तरह, मत्स्यासन, भुजंगासन और मकरासन जैसे हल्के योगासन किडनी के एरिया में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. कुछ लोग सुबह तांबे के बर्तन में रखा पानी भी पीते हैं, जिसे पारंपरिक रूप से पाचन और सफाई के लिए फायदेमंद माना जाता है. किडनी सिस्ट वाले लोगों को भारी, ज़्यादा नमकीन या प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना चाहिए.
आयुर्वेदिक नज़रिए से लौकी, खीरा, नारियल पानी, गाजर और हल्की दालें जैसे हल्के और पानी वाले खाद्य पदार्थ बेहतर माने जाते हैं. साथ ही, 7-8 गिलास पानी पीना, समय पर सोना, नमक का सेवन सीमित करना, रोज़ 30 मिनट चलना और अपनी क्षमता के अनुसार प्रोटीन का सेवन करना फायदेमंद होता है.