Panchayat season 4
पंचायत वेब सीरीज का सीजन 4 अपने धमाकेदार एंट्री के लिए तैयार हैं। जल्द ही 24 जून को इसे अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज कर दिया जाएगा. आइए विस्तार से इस वेब सीरीज के बारे में जानते हैं
अमेजन प्राइम की हिट वेब सीरीज में से एक पंचायत अपने चौथे सीजन को भी हिट करने के लिए तैयार हो गई है। वेब सीरीज के निर्देशक ने इसकी रिलीज की तारीख 2 जुलाई से अब 24 जून कर दी है, जिसके साथ ही फैंस में उत्साह और बढ़ गया है. इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताएंगे कि इस ग्रामीण इलाके और ग्रामीण लोगों की समस्याओं से ताल्लुक रखने वाली पंचायत वेब सीरीज में आखिर ऐसा क्या खास है, जिसके वजह से इससे इतना पसंद किया जा रहा है।
आखिर क्यों खास है ये सीरीज
पंचायत वेब सीरीज में गांव में आम जिंदगी जीने वाले लोगों की परेशानियों के बारे में दिखाया गया है। इसके साथ ही इसमें प्रधान चुनाव के समय होने वाली राजनीति और चुनाव जीतने के अजीबो गरीब तरीकों को भी दिखाया गया हैं। इस सीरीज में जिस भाषा और डायलॉग का इस्तेमाल किया गया है, वहां भी दर्शकों को काफी पसंद आई है। पंचायत के चारों सीजन में आकर्षक करने वाली खड़ी बोली का इस्तेमाल किया गया है।
इस सीरीज से ग्रामीण लोग भावात्मक तरीके से जुड़े हुए हैं। इसमें ग्रामीण लोगों की परेशानी, चुनाव के समय जीतने के लिए अपनाए जाने वाले तरीके और एक पंचायत सचिव की परेशानियों को बारीकी और भावात्मक जुड़ाव के साथ दिखाया गया है। इसके साथ ही इसमें एक्टिंग करने वाले तमाम कलाकारों के अभिनय भी एक दम जबरदस्त है, जिसके वजह से लोग इस वेब सीरीज को ज्यादा पसंद करते है।
सीजन– 4 में क्या हो सकता है..?
पंचायत सीजन 4 का ट्रेलर लॉन्च हो चुका हैं, जिसको देख कर ऐसे क्याश लगाए जा रहे है कि इसमें अभिषेक और रिंकी की प्रेम कहानी आगे बढ़ती नजर आएगी और इसके साथ ही मंजू देवी का प्रधान बनने का सपना भी कामयाब होता नजर आएगा..
फेमस डायलॉग
कीजिए मीटिंग मीटिंग… खेलिए मीटिंग मीटिंग… करते रहिए मीटिंग मीटिंग… पंचायत वेब सीरीज का यह डायलॉग काफी फेमस हुआ था। हर बच्चे और युवा की जुबान पर कुछ वक्त तक ज्यादातर थी डायलॉग इस्तेमाल किया जा रहा था और साथ ही इसपर कई मेम्स भी बने है। इसके अलावा देख रहे हो विनोद… प्रधान जी गुस्सा दिखा रहे हैं, यह डायलॉग भी काफी फेमस हुआ था।
फाइल फोटो
Khai Ke Paan Banaras Wala Story: अमिताभ बच्चन की 1978 में आई फिल्म 'डॉन' को आज भी बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है. इस फिल्म का गाना ‘खइके पान बनारस वाला’ जब भी बजता है, लोग खुद को थिरकने से नहीं रोक पाते लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सुपरहिट गाने के पीछे एक दिलचस्प कहानी छुपी हुई है? हाल ही में मशहूर गीतकार समीर ने बीबीसी हिंदी को दिए इंटरव्यू में इस गाने से जुड़ा एक खास किस्सा शेयर किया है. उन्होंने बताया कि यह गाना फिल्म का हिस्सा ही नहीं था और किशोर कुमार ने इसे गाने से पहले इनकार कर दिया था.
गाने की शुरुआत कैसे हुई?
समीर के मुताबिक, जब मनोज कुमार और जावेद अख्तर ने फिल्म ‘डॉन’ का पहला वर्जन देखा, तो उन्हें लगा कि फिल्म का दूसरा भाग बहुत एक्शन से भरा हुआ और थका देने वाला है. दोनों ने सलाह दी कि फिल्म में थोड़ी राहत के लिए एक मजेदार गाना होना चाहिए. इसके बाद निर्माता-निर्देशक ने समीर के पिता और प्रसिद्ध गीतकार अंजान को बुलाया. अंजान के पास पहले से ही ऐसा ही एक गाना ‘ये है बंबई नगरिया’ था, जो पहले हिट हो चुका था. उन्होंने कुछ वैसा ही एक नया गाना बनाने का फैसला किया, और यहीं से ‘खइके पान बनारस वाला’ का जन्म हुआ.
पहले देव आनंद ने किया था इनकार
ये जानकर आपको हैरानी होगी कि ये गाना पहले देव आनंद की फिल्म ‘बनारसी बाबू’ (1973) के लिए लिखा गया था लेकिन देव आनंद को गाना पसंद नहीं आया, इसलिए इसे ड्रॉप कर दिया गया. बाद में यही गाना ‘डॉन’ में शामिल किया गया और हिट हो गया.
किशोर कुमार का इनकार और फिर जादू
गाने को फिल्म में जोड़ने के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी किशोर कुमार से इसे गवाना. जब वे रिकॉर्डिंग के लिए आए, तो उन्होंने गाने के कुछ शब्दों जैसे ‘चकाचक’ और ‘खइके’ को लेकर आपत्ति जताई. वे चाहते थे कि ‘खइके’ को ‘खाके’ कहा जाए. अंजान ने उनसे बहुत विनती की और समझाया कि ये शब्द बनारस की बोली का हिस्सा हैं और गाने की आत्मा हैं. आखिरकार किशोर कुमार मान गए. उन्होंने पान खाया, पीकदान मंगवाया और कहा, "मैं बस एक टेक दूंगा." जब उन्होंने वो टेक दिया, तो ऐसा लगा जैसे गाने में सचमुच बनारस का कोई देसी लड़का गा रहा हो.
सुपरहिट बन गया गाना
इस एक टेक ने इतिहास रच दिया। ‘खइके पान बनारस वाला’ आज भी लोगों की जुबान पर है और हर किसी को झूमने पर मजबूर कर देता है। अमिताभ बच्चन ने भी साल 2018 में ट्वीट कर कहा था, "ये गाना बाद में फिल्म में जोड़ा गया था, डॉन पहले ही पूरी हो चुकी थी."
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Pawan Singh Jyoti Singh Controversy: भोजपुरी सिनेमा के मशहूर स्टार पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच चल रहा निजी विवाद अब पूरी तरह सार्वजनिक हो चुका है. दोनों के बीच चल रही तनातनी अब सामाजिक मुद्दा बनती जा रही है. इस मामले में अब करणी सेना भारत ने भी खुलकर हस्तक्षेप किया है और पवन सिंह को चेतावनी दी है कि वे जल्द से जल्द अपनी पत्नी ज्योति सिंह के साथ मतभेदों को सुलझाएं.
करणी सेना भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीर प्रताप सिंह ने खुद ज्योति सिंह से फोन पर बात की है और उनसे मुलाकात भी की. वीर प्रताप ने कहा कि अगर ज्योति के साथ अन्याय हुआ है, तो यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं रहेगी, बल्कि पूरा समाज उनके साथ खड़ा होगा. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई ज्योति को परेशान करता है, तो करणी सेना उसके खिलाफ सख्त कदम उठाएगी.
वीर प्रताप सिंह ने अपनी इंस्टाग्राम और फेसबुक पोस्ट में ज्योति से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग और तस्वीरें भी साझा कीं. उन्होंने लिखा कि “अगर मुलाकात के बाद लगा कि इस बिटिया के साथ गलत हुआ है, तो अब ये लड़ाई समाज की होगी, किसी एक की नहीं.” फोन कॉल के दौरान ज्योति सिंह ने भावुक होकर कहा कि “मैं पूरी तरह टूट चुकी हूं. मेरे पापा बीमार हैं, घर में कोई मेरा सहारा नहीं है. जब मैं मिलने गई तो मेरे पति ने घर पर पुलिस बुला ली. पुलिस ने मेरा हाथ पकड़कर घर से बाहर निकाला. क्या यही रिश्ता है?” इस पर वीर प्रताप ने जवाब दिया कि “आप हमारी बहन हैं, और करणी सेना आपके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है. अगर आप चाहेंगी, तो हम हर स्तर पर जाकर आपके लिए लड़ाई लड़ेंगे.”
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, रविवार को ज्योति सिंह पवन सिंह से मिलने लखनऊ स्थित उनके घर पहुंची थीं, लेकिन पवन ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया और पुलिस को बुला लिया. इस घटना का वीडियो ज्योति ने अपने इंस्टाग्राम पर लाइव किया था, जो तेजी से वायरल हो गया. बाद में पवन सिंह ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने ज्योति से डेढ़ घंटे बात की थी, जिसमें वह सिर्फ चुनाव की बातें कर रही थीं. हालांकि ज्योति ने इस दावे को गलत बताया और जनता से न्याय की गुहार लगाई है.
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Sushmita Sen: पूर्व मिस यूनिवर्स और बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन हमेशा अपने फैसलों और बेबाक अंदाज़ के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने समाज की परंपराओं को तोड़ते हुए 21 साल की उम्र में अपनी बड़ी बेटी रेनी को गोद लेने का फैसला किया जब वो खुद अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं.
सुष्मिता ने बताया कि रेनी को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया तीन साल तक चली. उस दौरान रेनी उनके पास फोस्टर केयर में थी, लेकिन हमेशा डर बना रहता था कि अगर कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसला दिया, तो बेटी उनसे छिन जाएगी. उन्होंने बताया कि उस वक्त उन्होंने अपने पिता से कहा था, “अगर कोर्ट ने इंकार किया, तो आप कार लेकर रेनी को लेकर निकल जाना.”
सुष्मिता के पिता ने उन्हें हर कदम पर साथ दिया. कोर्ट ने उनसे आर्थिक स्थिति और संपत्ति के कागज़ मांगे. इस पर उन्होंने कहा, “मैं बहुत अमीर नहीं हूं, पर जो भी है, सब अपनी बेटी के नाम कर दूंगा.” अदालत ने चेताया कि सुष्मिता को “पति नहीं मिलेगा” अगर वो सिंगल मदर बनीं, तो उनके पिता ने जवाब दिया, “मैंने अपनी बेटी को किसी की पत्नी बनने के लिए नहीं पाला.”
सुष्मिता कहती हैं कि रेनी को गोद लेने का सफर कठिन था, मगर उसी अनुभव ने रास्ता आसान किया जब उन्होंने दूसरी बेटी अलीशा को गोद लिया. आज सुष्मिता न सिर्फ दो बेटियों की मजबूत मां हैं, बल्कि उन महिलाओं के लिए प्रेरणा भी, जो अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना चाहती हैं.