भारत की नेपाल की दो टूक (फाइल फोटो)
Mobile Recharge price Hike Jio Airtel VI News: अब मोबाइल पर इंटरनेट इस्तेमाल करना जेब पर और भारी पड़ने वाला है. देश की दो बड़ी टेलीकॉम कंपनियां रिलायंस जियो (Reliance Jio) और भारती एयरटेल (Bharti Airtel) ने अपने एंट्री-लेवल प्रीपेड प्लान्स बंद कर दिए हैं. इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि अब सस्ते रिचार्ज की सुविधा खत्म हो चुकी है.
टेलीकॉम कंपनियों का यह फैसला औसत राजस्व (ARPU) बढ़ाने के लिहाज से तो सही माना जा रहा है, लेकिन ग्राहकों के लिए इंटरनेट डेटा पहले से महंगा हो जाएगा. खासकर वे लोग जो हर महीने बेसिक पैक से गुजारा कर रहे थे, उन्हें अब ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. कामकाजी लोग जिनकी रोजी रोटी मोबाइल फोन के डेटा पर टिकी है, उनका महाना बजट बिगड़ सकता है.
जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के मौजूदा प्लान्स
अब देखते हैं कि तीनों बड़ी कंपनियां कौन-कौन से कम से कम 1GB डेटा रोजाना वाले प्रीपेड पैक ऑफर कर रही हैं, जिनकी वैधता 28 दिन है.
रिलायंस जियो
₹299 प्लान: 1.5 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
₹349 प्लान: 2 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
भारती एयरटेल
₹349 प्लान: 1.5 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
₹361 प्लान: 50 GB प्रति माह, वैधता 30 दिन
वोडाफोन-आइडिया (Vi)
₹299 प्लान: 1 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
₹349 प्लान: 1.5 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
₹408 प्लान: 2 GB डेटा रोजाना, वैधता 28 दिन
टेलीकॉम मार्केट में बढ़ा मुकाबला
जियो और एयरटेल का यह कदम सीधी टक्कर को और तेज कर देगा, क्योंकि दोनों कंपनियां भारत की नंबर 1 टेलीकॉम ऑपरेटर बनने की जंग लड़ रही हैं. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 में रिलायंस जियो ने 19 लाख (1.9 मिलियन) नए यूजर्स जोड़े.
वहीं भारती एयरटेल ने 7.6 लाख (763,482) ग्राहक बढ़ाए. दूसरी तरफ वोडाफोन-आइडिया (Vi) की हालत और खराब हो गई और कंपनी ने करीब 2.17 लाख (217,816) यूजर्स खो दिए.
क्या मतलब है आम उपभोक्ता के लिए?
इस फैसले से साफ है कि मोबाइल डेटा अब सस्ता नहीं रहेगा. आम ग्राहक को महीनेभर की इंटरनेट जरूरत पूरी करने के लिए कम से कम ₹299 से ₹349 खर्च करने होंगे. पहले जहां कम पैसों में बेसिक रिचार्ज से काम चल जाता था, अब वही खर्च बढ़कर दोगुना हो जाएगा. कुल मिलाकर, जियो और एयरटेल का यह कदम कंपनियों के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन आम जनता की जेब पर सीधा बोझ डालने वाला है.
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भारत में बनी E-Vitara विदेश में दिखायेगी जलवा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के हंसलपुर में मारुति की पहली इलेक्ट्रिक कार ई-विटारा को एक्सपोर्ट के लिए हरी झंडी दिखा दी. अब भारत में बनी यह इलेक्ट्रिक एसयूवी 100 से ज्यादा देशों की सड़कों पर दौड़ती नजर आएगी और उस पर गर्व से लिखा होगा Made in India. कार के शौकीन इस गाड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को गुजरात के हंसलपुर में मारुति की पहली इलेक्ट्रिक कार ई-विटारा को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक्सपोर्ट के लिए फ्लैग ऑफ किया. ये गाड़ी पूरी तरह से भारत में बनी है और इसे यूरोप, जापान समेत 100 से ज्यादा देशों में भेजा जाएगा. इसे देश में मेक इन इंडिया के एक और मजबूत कदम के रूप में देखा जा रहा है. पीएम मोदी ने कहा, "अब विदेशों में चलने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर भी Made in India लिखा होगा. ये आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग है."
फुल चार्च पर दौड़ेगी 500 किमी से ज्यादा
यह कार कई खूबियों से लैस है. इसकी सबसे खास बात है बैट्री बैकअप और गाड़ी का माइलेज. मारुति ई-विटारा दो पावरफुल बैटरी पैक ऑप्शन 49kWh और 61kWh में लॉन्च की जाएगी. कंपनी का दावा है कि यह इलेक्ट्रिक SUV एक बार फुल चार्ज होने पर 500 किलोमीटर से भी ज्यादा की दूरी आसानी से तय कर सकेगी, जो इसे लॉन्ग ड्राइव और डे-टू-डे यूज दोनों के लिए बेहतरीन विकल्प बनाता है. इसका उत्पादन फरवरी 2025 से गुजरात के हंसलपुर स्थित सुजुकी मोटर प्लांट में शुरू हो चुका है, जो मारुति की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है.
कितनी होगी कीमत?
मारुति ई-विटारा को तीन वेरिएंट्स में पेश किया जाएगा. 49kWh बैटरी वाले बेस मॉडल की कीमत करीब 20 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी जा सकती है, जबकि 61kWh बैटरी पैक वाले मॉडल की कीमत 25 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जा सकती है. वहीं, इसका पावरफुल ई-ऑलग्रिप AWD वर्जन 30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) में उपलब्ध हो सकता है. भारतीय बाजार में इस इलेक्ट्रिक SUV का सीधा मुकाबला MG ZS EV, Tata Curvv EV, Hyundai Creta EV और Mahindra BE05 जैसी प्रीमियम इलेक्ट्रिक गाड़ियों से होगा.
एक्सटीरियर और इंटीरियर बनाते हैं खास
मारुति ई-विटारा को हार्टेक्ट-ई प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है, जिसे कंपनी ने टोयोटा के साथ मिलकर डेवलप किया है. इसका एक्सटीरियर डिजाइन काफी आकर्षक और फ्यूचरिस्टिक है. सामने की ओर पतली LED हेडलाइट्स और वाई-शेप्ड DRL इसे शार्प लुक देती हैं, वहीं स्टाइलिश बंपर में इंटीग्रेटेड फॉग लाइट्स इसे और भी बोल्ड बनाती हैं.
साइड प्रोफाइल में 19-इंच के ब्लैक अलॉय व्हील्स और बॉडी क्लैडिंग इसे मस्क्युलर अपील देते हैं. ऊपर की तरफ रूफ-माउंटेड इलेक्ट्रिक सनरूफ और पीछे की ओर कनेक्टेड LED टेल लाइट्स इसका प्रीमियम लुक पूरा करती हैं. कुल मिलाकर, ई-विटारा का लुक एक परफेक्ट मिड-साइज इलेक्ट्रिक SUV जैसा है, जो स्टाइल और परफॉर्मेंस दोनों का संतुलन पेश करता है.
ई-विटारा का केबिन ब्लैक और ऑरेंज ड्यूल-टोन थीम में डिजाइन किया गया है, जो इसे एक स्पोर्टी और प्रीमियम लुक देता है. अंदर की तरफ फ्लैट-बॉटम 2-स्पोक स्टीयरिंग व्हील और फ्लोटिंग इंफोटेनमेंट स्क्रीन के साथ डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले मौजूद है, जो केबिन को मॉडर्न टच देता है.
सुरक्षा के लिहाज से इसमें 6 एयरबैग स्टैंडर्ड, 360 डिग्री कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसके अलावा इसमें ऑटोमैटिक AC, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स और वायरलेस मोबाइल चार्जर जैसे प्रीमियम फीचर्स मिलने की भी उम्मीद है, जो इसे अपने सेगमेंट में और भी प्रतिस्पर्धी बनाते हैं.
21 हजार करोड़ का भारी भरकम निवेश
दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मारुति सुजुकी ने अपने हंसलपुर स्थित आधुनिक विनिर्माण प्लांट में 21,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया है. यह प्लांट कंपनी की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इस प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 7.5 लाख यूनिट्स तक की है, जो इसे भारत के सबसे बड़े और उन्नत ऑटोमोबाइल निर्माण केंद्रों में से एक बनाता है.
कंपनी ने शुरुआत में वित्त वर्ष 2026 तक ई-विटारा की लगभग 67,000 यूनिट्स बनाने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन इस महत्वाकांक्षी योजना को हाल ही में चीन की ओर से रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर लगाई गई पाबंदियों के कारण झटका लग सकता है. रेयर अर्थ मैग्नेट्स इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी और मोटर निर्माण में एक अहम भूमिका निभाते हैं और इनकी कमी से उत्पादन की गति प्रभावित हो सकती है.
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
New GST Slab 2025-26: नई दिल्ली में बुधवार (3 सितंबर) को हुई वस्तु एवं सेवा कर (GST) काउंसिल की 56वीं बैठक में आम जनता, उद्योगों और किसानों के लिए कई अहम फैसले लिए गए. बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की. इस बैठक के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि जीएसटी प्रणाली को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. अब देश में सिर्फ दो प्रमुख जीएसटी स्लैब- 5 फीसदी और 18 फीसदी रहेंगे. इसके अलावा विलासिता और हानिकारक वस्तुओं के लिए अलग से 40 फीसदी का एक विशेष टैक्स स्लैब रखा गया है.
12% और 28% स्लैब को किया गया समाप्त
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि 12 फीसदी और 28 फीसदी वाले टैक्स स्लैब को खत्म कर दिया गया है. इन स्लैब्स में पहले कई जरूरी वस्तुएं आती थीं. अब इनकी दरों को या तो घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है या फिर इन्हें 18 फीसदी में समाहित किया गया है. इसके साथ ही कई दैनिक उपयोग की वस्तुएं और आवश्यक उत्पाद ऐसे भी हैं, जिन पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा. यह नई कर संरचना पूरे देश में 22 सितंबर 2025 से लागू होगी.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में जीएसटी सुधार को प्राथमिकता दी गई. उन्होंने यह भी बताया कि जीएसटी में बदलाव को लेकर सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों ने समर्थन दिया, जिससे यह फैसला सर्वसम्मति से लिया जा सका.
आम आदमी को राहत देने वाला निर्णय
निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह पूरा सुधार आम जनता को ध्यान में रखकर किया गया है. दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स की व्यापक समीक्षा की गई और ज्यादातर मामलों में दरों में भारी कटौती की गई है. खासकर मध्यम वर्ग और गरीब तबके को राहत देने के लिए कई जरूरी सामानों को 5 फीसदी या शून्य टैक्स के दायरे में लाया गया है.
किन वस्तुओं पर कितना जीएसटी लगेगा?
5 फीसदी GST वाले उत्पाद
अब 5 फीसदी जीएसटी के अंतर्गत वे सभी वस्तुएं शामिल की गई हैं जो आम आदमी के दैनिक जीवन में उपयोग होती हैं. इनमें हेयर ऑयल, टॉयलेट सोप, साबुन की टिकिया, शैंपू, टूथब्रश और टूथपेस्ट जैसे व्यक्तिगत देखभाल के उत्पाद शामिल हैं. इसके अलावा साइकिल, टेबलवेयर, किचनवेयर और अन्य घरेलू सामान भी इस श्रेणी में रखे गए हैं.
खाद्य पदार्थों की बात करें तो नमकीन, भुजिया, सॉस, पास्ता, इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, कॉफी, संरक्षित मांस, कॉर्नफ्लेक्स, मक्खन और घी जैसे रोजमर्रा के उपभोग वाले उत्पादों पर भी अब केवल 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। इन बदलावों से आम उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है.
शून्य फीसदी GST वाले उत्पाद
शून्य फीसदी जीएसटी के दायरे में अब वे वस्तुएं शामिल कर दी गई हैं जो आमतौर पर हर घर की जरूरत होती हैं. इनमें दूध, ब्रेड, छेना और पनीर जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थ प्रमुख हैं. इसके अलावा सभी प्रकार की भारतीय रोटियों को भी पूरी तरह से जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है। चाहे वह सादी रोटी हो, पराठा हो या अन्य कोई प्रकार, अब इन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इस निर्णय से विशेष रूप से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी रसोई पर खर्च कम होगा.
18 फीसदी स्लैब में शामिल हैं ये उत्पाद
जीएसटी दरों में किए गए बदलाव के तहत अब कई महंगे उपकरणों और वाहनों को 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी स्लैब में लाया गया है. इनमें एयर कंडीशनर, टीवी और डिशवॉशर जैसी घरेलू उपयोग की मशीनें शामिल हैं, जो पहले 28 फीसदी जीएसटी के अंतर्गत आती थीं. इसके अलावा छोटी कारें और मोटरसाइकिलें भी अब 18 फीसदी जीएसटी स्लैब में रखी गई हैं. इस बदलाव से उपभोक्ताओं को इन वस्तुओं की खरीद पर सीधी लागत में कमी का फायदा मिलेगा, जिससे इनकी मांग बढ़ने की संभावना है.
हेल्थ सेक्टर में बड़ी राहत
स्वास्थ्य क्षेत्र में आम जनता को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने 33 जीवन रक्षक दवाओं पर लगने वाला जीएसटी पूरी तरह से समाप्त कर दिया है. पहले इन दवाओं पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी वसूला जाता था, जो अब शून्य कर दिया गया है. इस फैसले से गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी, साथ ही आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और वहनयोग्यता भी बेहतर होगी.
किसानों को क्या मिलेगा?
कृषि और किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने कई कृषि उपकरणों पर जीएसटी दर को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है. इसमें ट्रैक्टर, खेत की मिट्टी तैयार करने वाली मशीनें, कटाई और थ्रेशिंग मशीनें शामिल हैं. इसके अलावा पुआल बेलर, घास काटने की मशीन और खाद बनाने की मशीन जैसे उपकरण भी अब कम जीएसटी दर के अंतर्गत आएंगे। इस फैसले से किसानों की खेती-किसानी से जुड़ी लागत में कमी आएगी और आधुनिक कृषि उपकरणों की खरीद उनके लिए और अधिक सुलभ हो सकेगी.
जैव-कीटनाशकों पर छूट
सरकार ने पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने और किसानों को राहत देने के उद्देश्य से 12 विशेष प्रकार के जैव-कीटनाशकों पर जीएसटी दर को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है. इस निर्णय से जैविक और सतत खेती को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही किसानों की उत्पादन लागत में भी कमी आएगी. जैव-कीटनाशकों के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और फसलों की पैदावार पर भी सकारात्मक असर पड़ता है, जिससे दीर्घकालिक रूप से कृषि क्षेत्र को लाभ होगा.
अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि श्रम प्रधान उद्योगों, कृषि क्षेत्र और स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष रूप से ध्यान में रखते हुए ये बदलाव किए गए हैं. इससे देश की आर्थिक गति को भी बल मिलेगा. साथ ही, मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति को सुधारने की दिशा में यह एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है.
जीएसटी काउंसिल की यह 56वीं बैठक ऐतिहासिक साबित हुई, क्योंकि इसमें टैक्स प्रणाली को सरल बनाकर आम आदमी, किसान, और उद्योग जगत को राहत देने वाले निर्णय लिए गए. टैक्स स्लैब्स की संख्या घटाकर दो करना, टैक्स दरों में कमी और आवश्यक वस्तुओं पर शून्य जीएसटी लगाना इस बात का संकेत है कि सरकार आम जनजीवन को आर्थिक रूप से सहज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. आगामी 22 सितंबर 2025 से ये सभी बदलाव लागू हो जाएंगे, जिसका सीधा फायदा देश के हर नागरिक को मिलेगा.
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(फाइल फोटो)
GST Tax Slab on Mobile Purchase: मोबाइल फोन अब महज एक लग्जरी नहीं बल्कि भारत के 90 करोड़ से ज्यादा लोगों की डिजिटल दुनिया से जुड़ने की बुनियादी जरूरत बन चुका है. ऐसे में मोबाइल पर 18 फीसदी GST को "पिछड़ा कदम" करार देते हुए इंडस्ट्री बॉडी ने सरकार से अपील की है कि इसे 5 फीसदी जीएसटी स्लैब में लाया जाए, आगामी जीएसटी सुधारों से पहले यह मांग और तेज हो गई है.
भारत में मोबाइल फोन पर लगने वाला 18 फीसदी वस्तु एवं सेवा कर (GST) अब विवाद का विषय बन गया है. मोबाइल उद्योग से जुड़ी संस्था इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि आगामी जीएसटी सुधारों में मोबाइल फोन और संबंधित उत्पादों को 5 फीसदी टैक्स स्लैब में लाया जाए.
मोबाइल के लिए 5% GST स्लैब की मांग
ICEA का कहना है कि मोबाइल फोन अब सिर्फ "आकांक्षात्मक" (aspirational) चीज नहीं रही, बल्कि जरूरी डिजिटल उपकरण बन गई है, खासकर उन 90 करोड़ भारतीयों के लिए जिनकी डिजिटल दुनिया का एकमात्र जरिया मोबाइल है. ICEA के चेयरमैन पंकज मोहिंदरू ने बयान में कहा, "मोबाइल फोन अब एक अत्यावश्यक वस्तु है. इसे 5 फीसदी जीएसटी स्लैब में रखा जाना चाहिए, ताकि पीएम मोदी के 500 बिलियन डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम के लक्ष्य को हासिल किया जा सके."
ICEA के चेयरमैन पंकज मोहिंदरू ने आगे कहा कि अगर मोबाइल फोन आम लोगों के लिए महंगे बने रहते हैं, तो डिजिटल इंडिया का सपना अधूरा रह जाएगा. "कम टैक्स से मोबाइल की कीमतें घटेंगी, मांग बढ़ेगी और हर भारतीय को डिजिटल एक्सेस मिल सकेगा."
जीएसटी बढ़ा तो बिक्री घटी
ICEA के मुताबिक, जब 2020 में मोबाइल पर GST 12 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी किया गया, तभी से देश में मोबाइल की सालाना बिक्री 300 मिलियन यूनिट से घटकर 220 मिलियन यूनिट पर आ गई. इसका मतलब है कि लोग मोबाइल बदलने में ज्यादा वक्त लगा रहे हैं, यानी रीप्लेसमेंट साइकल धीमा हो गया है.
मैन्युफैक्चरिंग में उछाल, घरेलू बाज़ार में सुस्ती
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मोबाइल निर्माण का आंकड़ा 2015 के ₹18,900 करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹5.45 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन चुका है और मोबाइल का निर्यात ₹2 लाख करोड़ के पार चला गया है.
लेकिन इसके उलट घरेलू बाज़ार की हालत कमजोर होती जा रही है. ICEA ने बताया कि जीएसटी लागू होने से पहले ज्यादातर राज्यों में मोबाइल फोन पर सिर्फ 5 फीसदी वैट लगता था, क्योंकि इसे अनिवार्य वस्तु माना गया था. 2017 में जब जीएसटी आया, तो इसे 12 फीसदी टैक्स स्लैब में रखा गया था, जिसे 2020 में बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया गया.
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