लद्दाख में आंदोलन ने लिया हिंसक रुप
Ladakh Violent Protest: लद्दाख में बुधवार (24 सितंबर) को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर जारी आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया. सड़कों पर आगजनी और झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई और कम से कम 80 लोग घायल हुए, जिनमें 40 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. अधिकारियों के मुताबिक, कई घायलों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है. हिंसा के बीच 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया.
वांगचुक ने कहा कि युवा हिंसा को रोकें और आंदोलन को अहिंसक बनाएं. उन्होंने प्रशासन से अपील की कि आंसू गैस के गोले न चलाए जाएं और सरकार उनकी शांति की आवाज़ को सुने. वांगचुक ने कहा कि यह लद्दाख और उनके लिए बेहद दुखद दिन है क्योंकि पिछले पांच वर्षों से आंदोलन शांतिपूर्ण रहा है.
प्रदर्शन और हिंसा
सुबह लद्दाख की राजधानी में पूर्ण बंद रहा. सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए, भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ हुई और कई वाहनों में आग लगी. पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. प्रशासन ने लेह जिले में निषेधाज्ञा लागू कर पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई.
कांग्रेस नेता फुंटसोग स्टैनजिन त्सेपाग पर कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने का मामला दर्ज किया गया. लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) की युवा शाखा ने प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया. 10 सितंबर से 35 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे 15 में से दो प्रदर्शनकारी की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया.
वांगचुक का संदेश
वांगचुक ने कहा कि हिंसा आंदोलन के उद्देश्य को नुकसान पहुंचाती है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के लिए आवाज उठाएं. उन्होंने कहा कि लद्दाख में बेरोजगारी और छठी अनुसूची की अनुपालना न होने के कारण युवा हताश हैं.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि लद्दाख में हुई हिंसा कुछ भड़काऊ बयानों के कारण बढ़ी और कुछ लोग राजनीति प्रेरित रूप से स्थिति बिगाड़ना चाहते थे. मंत्रालय ने सभी से पुराने वीडियो और भड़काऊ सामग्री साझा न करने की अपील की. उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि हिंसा फैलाने वालों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी.
क्या है मांगें?
वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारी चार सूत्री मांगों के समर्थन में हैं. उनकी पहली मांग लद्दाख को राज्य का दर्जा देना है. दूसरी मांग छठी अनुसूची का विस्तार है, जिससे स्थानीय जनजातीय आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. तीसरी मांग लेह और कारगिल के लिए अलग लोकसभा सीटें बनाने की है. चौथी और अंतिम मांग नौकरियों में आरक्षण सुनिश्चित करने की है, ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें.
केंद्र और एलएबी और केडीए के बीच 6 अक्टूबर को वार्ता का नया दौर तय किया गया है. पिछले चार सालों से ये संगठन लगातार आंदोलनरत हैं और कई दौर की वार्ता कर चुके हैं. प्रदर्शनकारियों ने लेह शहर में बंद किया और एनडीएस स्मारक मैदान से शहर की सड़कों तक मार्च निकाला. कुछ युवाओं ने भाजपा और हिल काउंसिल मुख्यालय पर पथराव किया. प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और आगजनी रोकने का प्रयास किया.
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में स्विटजरलैंड को जमकर सुनाया.
भारत ने 10 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में स्विटजरलैंड को जमकर सुनाया. स्विट्जरलैंड द्वारा भारत के अल्पसंख्यकों के बारे में की गई टिप्पणियों को आश्चर्यजनक और गलत जानकारी पर आधारित बताते हुए भारत ने कहा है कि भारत पर टिप्पणी के बजाय खुद उनके देश में नस्लवाद, भेदभाव और विदेशी लोगों के प्रति घृणा जैसी चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए. इससे पहले स्विस प्रतिनिधि ने बैठक में कहा था कि स्विट्जरलैंड भारत सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने और अभिव्यक्ति और मीडिया की स्वतंत्रता के अधिकारों को बरकरार रखने की अपील करता है.
जिनेवा स्थित भारत के स्थायी मिशन में सलाहकार क्षितिज त्यागी ने मानवाधिकार परिषद के 60वें सत्र में बहस के दौरान कहा, "हम अपने घनिष्ठ मित्र और साझेदार स्विट्जरलैंड द्वारा की गई आश्चर्यजनक और गलत जानकारी पर आधारित टिप्पणियों का भी जवाब देना चाहेंगे."
'परिषद का समय बर्बाद ना करें'
क्षितिज त्यागी ने कहा, "अध्यक्ष के तौर पर स्विट्जरलैंड के लिए यह और भी जरूरी है कि ऐसे झूठे, सतही और भारत की वास्तविकता के साथ संबंध ना रखने वाले बयान देकर वह परिषद का समय बर्बाद ना करें." त्यागी ने आगे कहा, "इसके बजाय स्विट्जरलैंड को नस्लवाद, व्यवस्थित भेदभाव और विदेशी-घृणा जैसी अपनी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. दुनिया के सबसे बड़े, सबसे विविध और जीवंत लोकतंत्र के रूप में भारत स्विट्जरलैंड की इन चिंताओं को दूर करने में मदद के लिए तैयार है."
फाइल फोटो
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में आज यानी गुरुवार को वोटिंग हो रही है. इस चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर 1314 उम्मीदवारों की किस्मत EVM में कैद होगी. इस बार की सबसे चर्चित सीटों में से एक मोकामा विधानसभा सीट है, जहां बाहुबली नेताओं के बीच सीधी टक्कर है.
मोकामा सीट
मोकामा सीट पर जेडीयू के अनंत सिंह और आरजेडी की वीणा देवी आमने-सामने हैं. वीणा देवी, बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी हैं. हाल ही में दुलारचंद यादव की हत्या के बाद यह सीट सुर्खियों में आई है. हत्या का आरोप अनंत सिंह पर लगा है और वे फिलहाल जेल में हैं. अनंत सिंह चार बार से विधायक रह चुके हैं, जबकि वीणा देवी अपने पति के पुराने सियासी असर को वोट में बदलने की कोशिश कर रही हैं.
धूमल सिंह बनाम श्रीकांत यादव
सारण जिले की एकमा सीट पर जेडीयू के बाहुबली मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह फिर मैदान में हैं. उनका मुकाबला आरजेडी के श्रीकांत यादव से है, जिन्होंने पिछली बार उन्हें हराया था. यहां जन सुराज पार्टी के देव कुमार सिंह और बसपा के लक्ष्मण मांझी भी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है.
कुचायकोट सीट
गोपालगंज जिले की कुचायकोट सीट पर जेडीयू के बाहुबली अमरेंद्र पांडे उर्फ पप्पू पांडे का मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार हरिनारायण सिंह कुशवाहा से है, जो दुबई के कारोबारी हैं. पप्पू पांडे लगातार तीन बार जीत चुके हैं, लेकिन उन पर हत्या, रंगदारी और लूट जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं. इस बार उनका सामना “क्लीन इमेज” वाले उद्योगपति से है.
दानापुर सीट
पटना की दानापुर सीट पर आरजेडी के बाहुबली रीतलाल यादव और बीजेपी के रामकृपाल यादव आमने-सामने हैं. रीतलाल इस समय जेल में हैं, जबकि रामकृपाल कभी लालू यादव के करीबी हुआ करते थे. यह सीट लालू परिवार की प्रतिष्ठा से जुड़ी है क्योंकि यह मीसा भारती के लोकसभा क्षेत्र पाटलिपुत्र में आती है.
शहाबुद्दीन की विरासत
सीवान जिले की रघुनाथपुर सीट पर दिवंगत बाहुबली शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब आरजेडी टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. उनका मुकाबला जेडीयू के जीशु सिंह और जन सुराज पार्टी के राहुल कुमार सिंह से है. शहाबुद्दीन की राजनीतिक विरासत को बचाना ओसामा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.
मांझी सीट
सारण जिले की मांझी सीट पर बाहुबली प्रभुनाथ सिंह के बेटे रणधीर सिंह जेडीयू से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके सामने महागठबंधन के सीपीआई(एम) उम्मीदवार सत्येंद्र यादव हैं, जो मौजूदा विधायक हैं. प्रभुनाथ सिंह फिलहाल हत्या के मामले में जेल में हैं, ऐसे में रणधीर सिंह के लिए यह चुनाव सियासी प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है.
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
असम में अब एक से अधिक शादी करने पर सजा तय हो गई है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार ने बहुविवाह पर रोक लगाने वाले कानून को मंजूरी दे दी है. सरकार ने कहा कि यह कानून समाज में समानता और महिलाओं की सुरक्षा के उद्देश्य से लाया गया है. इस कानून के लागू होते ही असम देश का पहला राज्य बन गया है, जहां एक से अधिक विवाह को आपराधिक कृत्य माना जाएगा.
मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने गुवाहाटी में मंत्रिमंडल के बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार बहुविवाह पीड़ित महिलाओं को मुआवजा देने के लिए एक नया कोष भी बनाएगी. ताकि उन्हें अपना जीवन जीने में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, ‘असम मंत्रिमंडल ने आज रविवार (9 नवंबर, 2025) बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है. इस विधेयक का नाम 'असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025' होगा. इसे 25 नवंबर, 2025 को विधानसभा में पेश किया जाएगा.’
उन्होंने कहा, ‘अगर किसी आरोपी पर बहुविवाह का आरोप साबित होता है, तो उसे सात साल तक की कठोर कारावास की सजा हो सकती है. नए विधेयक में इस अपराध (पॉलिगैमी) को नॉन-कोगनिजिबल (non-cognizable) अपराध बनाया गया है और इसके तहत गिरफ्तार व्यक्ति को तुरंत जमानत नहीं मिलेगी. इसके अलावा, हमने पीड़ित महिलाओं को मुआवजा देने के लिए एक कोष बनाने का भी फैसला किया है. सरकार जरूरी मामलों में आर्थिक मदद करेगी, ताकि किसी भी महिला को जिंदगी में मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़े.’
कौन-कौन से जिले कानून से होंगे बाहर?
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि असम की जनजातीय समुदायों, जो अपनी परंपराओं का पालन करते हैं और करबी आंगलोंग और दीमा हसाओ जैसे पहाड़ी जिले (जो संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं), साथ ही बोडो टेरिटोरियल रीजन (BTR) के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों को इस नए कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा.