एमपी का खनियाधाना थाना
पुलिस थाना नाम सुनते ही अक्सर लोगों के चेहरे पर तनाव और डर साफ दिखने लगता है, लेकिन अब एक ऐसा थाना सामने आया है, जहां माहौल बिल्कुल अलग है. यहां शिकायत दर्ज कराने आए लोग पहले मुस्कुराते हैं, सेल्फी लेते हैं और फिर FIR दर्ज कराते हैं. एमपी पुलिस की इस अनोखी पहल ने न सिर्फ लोगों का डर कम किया है, बल्कि पुलिस–जनता के रिश्ते को भी नया आयाम दिया है.
मध्य प्रदेश का एक थाना इन दिनों ऐसी वजह से सुर्खियों में है जिसकी कल्पना भी कम ही लोगों ने की होगी. यहां लोग शिकायत दर्ज कराने से पहले सेल्फी खिंचवाने पहुंचते हैं. यह थाना स्थानीय लोगों के लिए अब एक आकर्षण का केंद्र और सेल्फी प्वाइंट बन चुका है, जहां रोजाना भीड़ लगी रहती है.
थाने की खूबसूरती ने खींची लोगों की भीड़
शिवपुरी के खनियाधाना थाने पर शिकायतकर्ता जब इस थाने पर अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने आते हैं, तो उनसे पहले उनका ध्यान थाने के परिसर में लगे सुंदर फूलों और पेड़ों की ओर चला जाता है. लोग शिकायत से पहले ही यहां सेल्फी लेने में व्यस्त हो जाते हैं. आपने शायद कम ही ऐसे थाने देखे होंगे जहां परिसर में इतने फलदार, फूलदार और छायादार पेड़-पौधे लगे हों. इस थाने को सुंदर बनाने के पीछे एक संदेश भी छिपा है.
थाने में लगे हैं गुलाब के फूल
गुलाब का फूल प्रेम और सौहार्द का प्रतीक होता है. जिस तरह गुलाब अपनी खुशबू से वातावरण को महकाता है, उसी तरह पुलिस-जन संबंध भी मधुर और विश्वासपूर्ण होने चाहिए. इसी सोच के साथ थाने में बड़ी संख्या में गुलाब के पौधे लगाए गए हैं. इसके अलावा, थाना परिसर में जिस तरह फलदार और छायादार वृक्ष लगाए गए हैं, वे किसी भी व्यक्ति का मन मोह लेते हैं. यही वजह है कि आसपास के लोग यहां लोग टाइम स्पेंड करने पहुंचते हैं.
खनियाधाना थाने को देखकर ऐसा लगता है कि यह कोई थाना नहीं, बल्कि घूमने के लिए बना एक आकर्षक स्थल हो. बताया जाता है कि थाने परिसर में जिस तरह फलदार और छायादार वृक्ष लगाए गए हैं, वे किसी भी व्यक्ति का मन मोह लेते हैं. यही कारण है कि आसपास के क्षेत्रों के लोग यहां लोग टाइम स्पेंड करने पहुंचते हैं.
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुतक्की
भारत आए अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी का दौरा अब धार्मिक और सांस्कृतिक आयाम भी लेने जा रहा है.वह शनिवार (11 अक्टूबर, 2025) को विश्वविख्यात इस्लामी शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद पहुंचेंगे, जहां उनका भव्य स्वागत किया जाएगा. दौरे के दौरान वे मदरसे के शैक्षणिक और धार्मिक ढांचे को करीब से समझेंगे और भारतीय उलेमा से संवाद करेंगे. मुतक्की देवबंद के दारुल उलूम पहुंचकर मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात करेंगे. इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
कार्यक्रम दो चरणों में विभाजित किया गया है. पहले चरण में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक मुत्तकी दारुल उलूम परिसर का भ्रमण करेंगे. इस दौरान वे शिक्षकों से मुलाकात करेंगे और संस्था के वरिष्ठ शिक्षक व जमीअत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी से भी विशेष भेंट करेंगे.
मदरसे की लाइब्रेरी में होगा कार्यक्रम
इसके बाद लंच का आयोजन होगा, जिसमें दारुल उलूम के प्रमुख मौलवियों के साथ-साथ अफगान प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी शामिल होंगे. कार्यक्रम का दूसरा चरण दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक मदरसे की लाइब्रेरी में आयोजित किया जाएगा. इस सत्र में मुतक्की दारुल उलूम की कक्षाओं का दौरा करेंगे और कुरान और हदीस पढ़ाने की परंपरागत शैली का अवलोकन करेंगे.
इसके साथ ही वह एक कक्षा में बैठकर छात्रों की पढ़ाई की व्यवस्था को भी देखेंगे. लाइब्रेरी में आयोजित विशेष सभा में दारुल उलूम और आसपास के अन्य मदरसों से आए उलेमा और शिक्षक शामिल होंगे. इस सभा को पहले मौलाना अरशद मदनी संबोधित करेंगे, जिनका भाषण लगभग 30 मिनट का होगा.
सांस्कृतिक रिश्तों पर करेंगे बात
इसके बाद अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुतक्की भी सभा को संबोधित करेंगे और अफगानिस्तान में इस्लामी शिक्षा व्यवस्था, मदरसों की भूमिका और भारत-अफगान सांस्कृतिक रिश्तों पर अपनी बात रखेंगे.
दारुल उलूम प्रबंधन के अनुसार, इस कार्यक्रम में देवबंद और आसपास के 40 से अधिक मदरसों के मौलवियों को आमंत्रित किया गया है. यह दौरा भारत-अफगानिस्तान के धार्मिक और शैक्षिक रिश्तों को एक नई दिशा देने की पहल माना जा रहा है.
डीके शिवकुमार के समर्थक पहुंचे दिल्ली, सिद्धारमैया को हटाने की तैयारी
बिहार विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद कर्नाटक की राजनीति में फिर घमासान शुरू हो गया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच चल रहे पावर बैलेंस विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. डीके शिवकुमार खेमे के कई विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और कांग्रेस हाईकमान से अपनी बात रखने की तैयारी में हैं. इस हलचल के बाद प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेजी से उठने लगी हैं.
सूत्रों के मुताबिक शिवकुमार के करीबी मंत्री एन. चलुवरायसामी और विधायक इकबाल हुसैन, एच.सी. बालकृष्ण, एस.आर. श्रीनिवास और टी.डी. राजेगौड़ा दिल्ली पहुंच चुके हैं. यहां ये नेता पार्टी हाईकमान से मुलाकात करने वाले हैं.
शिवकुमार गुट ने वेणुगोपाल से की मुलाकात
डीके शिवकुमार समर्थक विधायक टीडी राजेगौड़ा ने कांग्रेस के संगठन महासचिव वेणुगोपाल से की मुलाकात की. डीके शिवकुमार गुट इस बात पर जोर दे रहा है कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार के ढाई साल पूरे हो गए और तय समझौते के तहत अब शिवकुमार को सीएम बनाया जाए. दिल्ली पहुंचे सभी नेता कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिलकर इस समझौते पर बात करेंगे.
वचन निभाएंगे सिद्धारमैया!
डीके शिवकुमार के भाई और बेंगलुरू ग्रामीण के पूर्व लोकसभा सांसद डीके सुरेश ने गुरुवार (20 नवंबर 2025) को कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ढाई साल को लेकर किए गए अपने वचन को निभाएंगे. सीएम सिद्धारमैया का कहना है कि ढाई साल बाद कैबिनेट फेरबदल की बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि वह अगले साल अपना रिकॉर्ड 17वां बजट पेश करेंगे.
चामराजनगर का दौरा क्यों नहीं करते सीएम
कर्नाटक के सीएम ने कहा, "मेरी सत्ता अभी और भविष्य में सुरक्षित है. जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए जा रहा हूं. यह एक अंधविश्वास है कि अगर मैं चामराजनगर आया तो मैं सत्ता खो दूंगा. मैं चामराजनगर जाता हूं क्योंकि मैं अंधविश्वासों और अफवाहों में विश्वास नहीं करता. मैं राज्य के सभी जिलों को समान मानता हूं और सभी जिलों का दौरा करता हूं."
यह पूछे जाने पर कि क्या वह 5 साल तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे इस पर सिद्धारमैया ने कहा, "यह एक अनावश्यक बहस है. ढाई साल बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की बात कहने के बाद ही मुख्यमंत्री बदलने का मुद्दा सामने आया है. पार्टी नेताओं को मंत्रिमंडल फेरबदल पर फैसला लेने की जरूरत है. कुल 34 मंत्री पद हैं, जिनमें से दो पद खाली हैं. ये रिक्त मंत्री पद कैबिनेट फेरबदल के दौरान भरे जाएंगे."
सीएम नीतीश कुमार
बिहार का विधानसभा चुनाव देश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला संग्राम माना जाता है. केंद्र की राजनीति हो या विपक्ष की रणनीति, बिहार का जनादेश हर बार भारतीय राजनीति को नया संदेश देता है. यही वजह है कि बिहार विधानसभा चुनाव को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज 'लिटमस टेस्ट' की तरह होता है.
फिर इस बार बिहार का चुनाव ऑपरेशन सिंदूर के बार हो रहा है. महाराष्ट्र में भाषाई विवाद चरम पर है. ईसी का चुनाव सुधार प्रक्रिया के तहत इस हर हाल में वोटिंग कराने पर उतारू है. पूरा विपक्ष इसी के इस फैसले के खिलाफ आंदोलन के मूड में है. चुनाव आयोग के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. ये मसले प्रदेश के साथ पूरे देश की राजनीति से जुड़े हैं.
इन राज्यों के चुनाव पर दिखेगा इसका असर
बिहार में नवंबर 2025 में चुनाव संपन्न होने के बाद मई 2026 में पश्चिम बंगाल, असम, पुद्दूचेरी, तमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनाव होंगे. तय है बिहार चुनाव का असर इन सभी राज्यों के चुनावों पर देखने को मिलेगा.
बिहार चुनाव देश को देते आए हैं वैचारिक मोड़
इमरजेंसी के खिलाफ जेपी आंदोलन, आरक्षण को लेकर मंडल आंदोलन या राम मंदिर आंदोलन या जाति जनगणना की बात, बिहार की जनता ने हर मसले का समाधान पहले बैलेट पेपर डालकर और अब बटन दबाकर देश को वैचारिक मोड़ दिए हैं. यही वजह है कि बिहार विधानसभा चुनाव को देश की राजनीति के लिए काफी अहम माना जाता है. अगर केंद्र में बैठी सरकार को बिहार में हार मिलती है, तो उसका असर आगामी लोकसभा चुनावों तक देखा जाता है. वहीं, अगर जीत मिलती है, तो उसे राष्ट्रीय समर्थन का संकेत माना जाता है.
जातीय जनगणना के लिहाज से बनेगा 'ट्रेंडसेटर'
बिहार का चुनाव जातीय समीकरणों से शुरू होता है और उसी के हित को ध्यान में रखकर संपन्न होता है. देश में आने वाले दिनों में केंद्र सरकार जातीय जनगणना कराएगी. बिहार चुनाव प्रचार के दौरान इस सियासी बवाल मचना तय है. ऐसे में अगर बिहार में कोई पार्टी जातीय समीकरण की बाधाओं को तोड़कर विकास के एजेंडे पर चुनाव जीतती है, तो यह राष्ट्रीय राजनीति में ट्रेंडसेटर बन जाता है.