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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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अलास्का में ट्रम्प-पुतिन आमने-सामने; रेड कारपेट, गुप्त बातचीत और यूक्रेन युद्ध पर सौदे की सुगबुगाहट

अलास्का में पुतिन का स्वागत करते ट्रंप

अलास्का में पुतिन का स्वागत करते ट्रंप

Trump Putin Meeting in Alaska: अमेरिका के अलास्का राज्य में एक ऐतिहासिक और हाई-प्रोफाइल मुलाकात शुरू हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को आमने-सामने बैठे. यह बैठक अलास्का के सबसे बड़े शहर एंकरेज के जॉइंट बेस एलमेंडॉर्फ-रिचर्डसन में हो रही है, जो पुतिन की 10 साल बाद अमेरिका यात्रा का गवाह बन रहा है.

इस हाई-प्रोफाइल आयोजन के लिए जबरदस्त तैयारी की गई. एयरबेस पर "ALASKA 2025" का विशाल साइनबोर्ड लगाया गया, रेड कारपेट बिछाया गया और दोनों ओर लड़ाकू विमानों की कतार सजाई गई. अमेरिकी सेना और आयोजन टीम ने विमानों की पोजिशन से लेकर स्वागत मंच तक हर डिटेल का बारीकी से ध्यान रखा.

ट्रम्प ने प्लेन में बैठकर किया इंतजार
जानकारी के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प करीब आधे घंटे अपने विमान में बैठे रहे ताकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आगमन पर खुद उनका स्वागत कर सकें. पुतिन के रेड कारपेट पर आते ही ट्रम्प ने तालियां बजाईं और फिर दोनों नेता एक ही गाड़ी में बैठकर मीटिंग के लिए रवाना हो गए.

यह बैठक बंद कमरे में हो रही है और इसमें सिर्फ चुनिंदा अधिकारी मौजूद हैं. सुरक्षा को लेकर भी कड़े इंतजाम किए गए हैं. अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और रूसी सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं. एंकरेज में भारी संख्या में सैनिक और सुरक्षा कर्मी तैनात हैं.

यूक्रेन युद्ध पर फोकस
ट्रम्प ने बैठक से पहले बयान दिया कि वे चाहते हैं यूक्रेन युद्ध में "आज ही" सीजफायर हो जाए. हालांकि, इस मीटिंग में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और उनके यूरोपीय सहयोगियों को नहीं बुलाया गया है. इससे यूरोप में चिंता बढ़ गई है कि कहीं ट्रम्प रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी हिस्सों को अनौपचारिक मान्यता देने का रास्ता न खोल दें.

रूसी विदेश मंत्री के मुताबिक, बातचीत का एजेंडा सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं है बल्कि अमेरिका-रूस संबंधों के कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. उम्मीद है कि यह बैठक 6 से 7 घंटे तक चलेगी. दोनों देशों के बीच हालिया बयानबाजी के बाद सबकी नजरे पुतिन-टम्प की मुलाकात पर टिकी है.

मीटिंग की 5 बड़े अपडेट्स

पुतिन 10 साल बाद अमेरिका पहुंचे, एयरपोर्ट पर रेड कारपेट से हुआ स्वागत.

दोनों नेता एक ही कार में बैठकर मीटिंग के लिए निकले.

बैठक 6-7 घंटे चल सकती है, कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा.

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा, नतीजा अमेरिका के रुख पर निर्भर.

रूसी विदेश मंत्री ने अलास्का में USSR लिखी टी-शर्ट पहनकर एंट्री की.

यह मुलाकात इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि यह पुतिन की 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पहली पश्चिमी धरती पर यात्रा है. ट्रम्प को उम्मीद है कि अगर वे कोई शांति समझौता करा सके, तो उनकी छवि एक वैश्विक शांति दूत के रूप में उभर सकती है, और शायद वे नोबेल शांति पुरस्कार के दावेदार भी बन जाएं.

ये भी पढ़ें: सऊदी अरब में तिरंगे की गूंज, रियाद-जेद्दाह में धूमधाम से मनाया गया भारत का 79वां स्वतंत्रता दिवस


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Written by: Raihan

15 Aug 2025  ·  Published: 20:28 IST

केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी की बढ़ी मुश्किलें, 7 साल तक सजा का प्रावधान, जानें नियम?

सुरेश गोपी

सुरेश गोपी

केरल से केंद्रीय मंत्री और अभिनेता सुरेश गोपी गले में तेंदुए के दांत वाला एक लॉकेट पहनने से विवादों में आ गए हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने से बवाल मच गया था. यह मामला इतना बढ़ा गया कि वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को इसकी जांच शुरू करनी पड़ी है. शिकायतकर्ता का कहना है कि केंद्रीय मंत्री द्वारा तेंदुए के दांत वाला पेंडेंड पहनना सीधे वन्‍यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आता है.अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या यह लॉकेट कानून तोड़ता है? अगर हां तो क्या सुरेश गोपी पर इसकी गाज गिरेगी? 

अब केरल वन विभाग ने उन आरोपों की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है जिनमें कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री और अभिनेता सुरेश गोपी ने एक ऐसा पेंडेंट पहना था, जिसमें तेंदुए का दांत होने का संदेह है, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित वस्तु है. इसकी शिकायत पुलिस ने INTUC युवा शाखा के नेता एए मोहम्मद हाशिम ने थी. अब इस मामले में  21 जुलाई को पट्टिक्कड़ रेंज के वन अधिकारी ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है.


दरअसल, एए मोहम्मद हाशिम कहा था कि केंद्रीय मंत्री और अभिनेता सुरेश गोपी ने एक ऐसा हार पहना था, जिसमें तेंदुए का दांत होने का संदेह है. जबकि यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित वस्तु है. मोहम्मद हाशिम इसको लेकर 29 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई थी. 

एए मोहम्मद हाशिम ने दावा किया है कि उनके पास दृश्य प्रमाण हैं और उन्होंने शुरुआत में राज्य पुलिस प्रमुख को शिकायत सौंपी थी, जिन्होंने बाद में इसे वन विभाग को भेज दिया.
हाशिम कर अरोप है कि मंत्री का कथित कृत्य वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन करता है, जिसके तहत तेंदुओं को अनुसूची I में सूचीबद्ध किया गया है, जो उन्हें सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है और उनके शरीर के किसी भी अंग को रखने पर प्रतिबंध लगाता है.


इस साल की शुरुआत में राज्य पुलिस प्रमुख को हाशिम की औपचारिक शिकायत के बाद गोपी द्वारा तेंदुए के दांत या पंजों जैसा दिखने वाला पेंडेंट पहने हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं. हाशिम ने अपनी शिकायत में बताया था कि यह घटना 13 जून 2024 को गोपी के कन्नूर स्थित मामानिक्कुन्नू मंदिर के दर्शन के दौरान हुई थी. उन्होंने कहा, "बाद में त्रिशूर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्हें वही पेंडेंट पहने देखा. हमने उसी समय इसके सबूत राज्य पुलिस प्रमुख को सौंप दिए हैं."

हाशिम का आरोप है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम कड़ा है. अभी तक कोई मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया? क्या केंद्रीय मंत्रियों के लिए कोई अलग कानून है? हाशिम ने आगे कहा कि हालांकि, उन्होंने सीधे वन विभाग से संपर्क नहीं किया था, लेकिन पुलिस को उनकी शिकायत के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए थी.

भारत में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए "वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 लागू किया गया था. इसका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है. इसका मकसद विलुप्त हो रहे जीवों की रक्षा करना है. इसका उल्लंघन करने पर दो स्तरों पर सजा का प्रावधान है.

इन अधिनियमों का किया उल्लंघन 

यदि कोई व्यक्ति किसी संरक्षित वन्यजीव का शिकार करता है, उसे मारता है, फंसाता है, या उसका अंग-प्रत्यंग रखता या बेचता है या ऐसे उत्पाद पहनता तो पहली बार अपराध करने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना और 25 हजार रुपये आर्थिक दंड का प्रावधान है. दूसरी बार अपराध करने पर 6 साल तक की जेल की सजा या अधिक जुर्माना
या दोनों हो  सकता है. 
 अधिनियम की अनुसूची-1 का उल्लंघन ज्यादा गंभीर अपराध माना जाता है. इस नियम के तहत न्यूनतम 3 साल की सजा अनिवार्य है, जो बढ़कर 7 साल तक हो सकती है.  न्यूनतम जुर्माना 10 हजार रुपये है. यह एक गैर-जमानती अपराध है. 

 वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन करना एक गंभीर अपराध है. सरकार ने इस कानून को कठोर इसलिए बनाया है क्योंकि भारत जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है. यदि इस जैव विविधता को संरक्षित नहीं किया गया, तो कई प्रजातियां जल्द ही विलुप्त हो सकती हैं.


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Written by: Dhirendra Mishra

14 Jul 2025  ·  Published: 00:59 IST

बिहार में क्यों पड़ गई 'जा​ति' की डोर कमजोर! क्या इस बार भी दिखेगा असर?

बिहार चुनाव

बिहार चुनाव

क्या बिहार मतदाताओं का एक ऐसा वर्ग तैयार कर सकता है जो केवल जाति के आधार पर वोट न करे? क्या राज्य की जाति-आधारित राजनीति में कोई जाति-तटस्थ निर्वाचन क्षेत्र है या हो सकता है? क्या बिहार के मतदाता उन जातिगत सीमाओं को लांघने के लिए तैयार हैं? फिलहाल, इसका जवाब ये है कि बिहार के मतदाताओं के एक वर्ग में एक मंथन हो रहा है जो केवल जातिगत कारणों से किसी पार्टी से बंधे नहीं रहना चाहते.

ये मतदाता प्रदर्शन और ईमानदारी के आधार पर विकल्पों को तलाशना चाहते हैं. इस तरह के मतदाता सोच-समझकर मतदान करना पसंद करेंगे. इस से मतदान के पैटर्न में कोई बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से पार्टियों को अपने उम्मीदवारों का चयन ज्यादा सावधानी से करने और अपने मुद्दों को ज्यादा जिम्मेदारी से व्यक्त करने के लिए प्रेरित कर सकता है.

महिला मतदाता ट्रेंडसेटर्स 

पिछले कई चुनावों में बिहारी महिला मतदाता सबसे ज़्यादा चर्चा का विषय रही हैं। वह, जो अक्सर घर और खेतों की देखभाल के लिए पीछे छूट जाती हैं, जबकि पुरुष गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली आदि दूरदराज के इलाकों में 'कमाई' के लिए चले जाते हैं, ने बड़ी संख्या में मतदान करके और कभी-कभी प्रचलित रुझान को बदलकर अपनी राजनीतिक कुशलता का प्रदर्शन किया है. बिहार की बदहाल राजनीति में, सबसे खूंखार बाहुबली भी अब अपने गुंडों पर लगाम लगाने को मजबूर हैं, कहीं ऐसा न हो कि इससे महिला मतदाता नाराज़ हो जाएं.

कुल संख्या के हिसाब से, बिहार में 7.64 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 4 करोड़ पुरुष और 3.64 करोड़ महिलाएं हैं, लेकिन महिला मतदाताओं की संख्या बढ़ रही है. 2020 के विधानसभा चुनावों में पंजीकृत कुल पुरुषों में पुरुष मतदाता 54.6 प्रतिशत थे जबकि महिला मतदाता 59.7 प्रतिशत थीं. 2015 में भी पुरुषों के लिए मतदान प्रतिशत 51.1 प्रतिशत और महिलाओं के लिए कहीं अधिक 60.4 प्रतिशत था.

यूथ फैक्टर 

इनमें से लगभग 9 लाख 18-19 आयु वर्ग के हैं। ये युवा अपनी जातिगत पहचान से अनभिज्ञ नहीं हैं. इनमें से कई गर्व से अपने जातिगत इतिहास और ऐतिहासिक हस्तियों से 'जुड़ते' हैं. लेकिन वे अपने क्षेत्र के बेहतर विकास, अपने घरों के पास रोज़गार के अवसरों और एक उज्जवल भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं. ये महत्वाकांक्षी युवा केवल उम्मीदवार की जाति से संतुष्ट नहीं हैं. भारत निर्वाचन आयोग का एक सर्वेक्षण भी इसकी पुष्टि करता है. केवल 4.2 प्रतिशत मतदाताओं ने केवल उम्मीदवार की जातिगत पृष्ठभूमि के आधार पर मतदान किया. कम से कम 32.2 प्रतिशत ने दावा किया कि उनकी जाति या पार्टी का कोई निश्चित विकल्प नहीं था. उन्होंने केवल उम्मीदवार के आधार पर ही निर्णय लिया.

जन सुराज प्रयोग

चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित राजनीतिक दल, जन सुराज, इस क्षेत्र में एक साहसिक और नया चेहरा है. उनकी पार्टी ने खुद को जाति-निरपेक्ष दिखाने की कोशिश की है और लोगों को जाति और समुदाय की वफादारी में फंसने के बजाय बुनियादी मानवीय सम्मान और नागरिक सुविधाओं की मांग करने के लिए प्रेरित किया है.

रूपौली भी एक पहेली है क्योंकि शंकर सिंह एक बाहुबली हैं जो एक स्थानीय मिलिशिया का नेतृत्व करते हैं। हालाँकि, उन्होंने स्थानीय कॉलेज, नदी तटीय क्षेत्रों में पुल और अन्य सुविधाओं का वादा किया। उनकी जीत यह भी दर्शाती है कि बिहार के चुनावी रणक्षेत्र में अभी भी सही रास्ते पर चलने के लिए ताकत की ज़रूरत है।

बदलाव ऊपर से आएगा या नीचे से

तेजस्वी यादव पिछले कुछ सालों से अपनी पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं. वह पूर्व उप-मुख्यमंत्री हैं. चिराग पासवान अपने पिता द्वारा स्थापित पार्टी की पूरी कमान संभाल रहे हैं. नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार हाल ही में काफ़ी सक्रिय हुए हैं और जल्द ही पार्टी का नेतृत्व भी कर सकते हैं. इन तीनों के पास जाति-निष्ठ वोट बैंक है, जिस पर वे भरोसा कर सकते हैं, लेकिन क्या वे राज्य के मतदाताओं को एक उज्जवल भविष्य की ओर ले जाने का साहस और कल्पनाशीलता दिखाएंगे, जो ज़रूरी नहीं कि उनकी जातियों से ही परिभाषित हो?


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Written by: Dhirendra Mishra

16 Aug 2025  ·  Published: 00:42 IST

ट्रंप के करीबी चार्ली किर्क का हत्यारा कौन? अमेरिका में सियासी हत्या के मामले कब-कब आये सामने

मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के सक्रिय एक्टिविस्ट चार्ली किर्क

मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के सक्रिय एक्टिविस्ट चार्ली किर्क

टर्निंग प्वाइंट यूएसए के संस्थापक (MAGA) और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के सक्रिय एक्टिविस्ट चार्ली किर्क कंजरवेटिव पार्टी की राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं. 10 सितंबर को यूटा वैली यूनिवर्सिटी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उनकी हत्या मारकर हुई हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. पिछले कुछ सालों से सियासी ध्रुवीकरण और चुनावी तनाव से गुजर रहे अमेरिका में इस घटना ने सियासी हिंसा के खतरे को फिर से सामने ला दिया है. सवाल यह भी है कि क्या यह हमला अकेली घटना है या फिर लंबे समय से जारी राजनीतिक टकराव की कड़ी का एक हिस्सा है?

 चार्ली किर्क की हत्या ऐसे वक्त में हुई है, जब अमेरिका के दो प्रांतों में गवर्नर और न्यूयॉर्क सिटी में मेयर चुनाव होना है. उससे पहले किर्क की हत्या ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है. डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन बनाम डेमोक्रेट्स की जंग चरम पर पहुंच गया है. इस चुनाव की वजह से MAGA समर्थकों और विरोधियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आने लगी हैं. ऐसे में यह घटना सिर्फ व्यक्तिगत हमला नहीं बल्कि राजनीतिक हिंसा की बड़ी चेतावनी भी हो सकती है.

चार्ली किर्क कौन थे?

चार्ली किर्क अमेरिकी रूढ़िवादी राजनीतिक कार्यकर्ता, प्रचारक और वक्ता थे. उन्होंने Turning Point USA नामक संगठन की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य कॉलेज परिसरों (campuses) और युवा वर्ग में रूढ़िवादी विचारों को बढ़ावा देना है. इसके अलावा, उन्होंने Turning Point Action की भी स्थापना की, जो राजनीतिक उम्मीदवार का समर्थन करने, चुनाव अभियानों और रूढ़िवादी एजेंडों के लिए सक्रियता दिखाने का काम करती है. 

ट्रंप से क्या था उनका  रिश्ता? 

चार्ली किर्क और डोनाल्ड ट्रंप राजनीतिक साथी और समर्थक थे. किर्क ने ट्रंप के पहले राष्ट्रपति अभियान (2016) से जुड़े थे. उन्होंने ट्रंप का समर्थन किया था. हालांकि, शुरुआत में वह ट्रंप के बहुत बड़े प्रशंसक नहीं थे, लेकिन उन्होंने ट्रंप के चुनावी अभियान में मीडिया  मैनेजमेंट और फंडिंग का काम किया था. वह चुनाव अभियानों में युवा मतदाताओं और विश्वविद्यालयों में ट्रंप की अपील बढ़ाने का काम करते रहे हैं. किर्क सोशल मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से ट्रंप के MAGA (Make America Great Again) आंदोलन के भी प्रमुख चेहरा बने. उन्होंने ट्रंप के पक्ष में 'You're Being Brainwashed' टूर जैसे कार्यक्रम चलाए. ताकि युवा वर्ग में ट्रंप-समर्थक विचारों को बढ़ावा मिले. 

साल 2024 के चुनाव में चार्ली किर्क और उनके संगठन Turning Point USA व Turning Point Action ने ट्रंप को युवा मतदाताओं और उन समूहों से समर्थन दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. ट्रंप भी समय समय पर किर्क की सक्रियता और उनकी भूमिका की सराहना कर चुके हैं. 

मार्च 2025 में ट्रंप ने चार्ली किर्क को U.S. Air Force Academy Board of Visitors के एक सदस्य के रूप में नामित किया. यह एक औपचारिक भूमिका है, जहां ये बोर्ड शिक्षा कार्यक्रमों, पाठ्यक्रम आदि पर नजर रखते हैं. 
हत्या की वजह 

मीडिया रिपोर्ट अमेरिकी विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि किर्क की हत्या अमेरिका में बढ़ते सियासी ध्रुवीकरण, सोशल मीडिया पर नफरती भाषण और हथियारों की आसान उपलब्धता यूएस को लगातार हिंसा की ओर धकेल रही है. अगर इस प्रवृत्ति पर काबू नहीं पाया गया तो लोकतंत्र के लिए यह गंभीर खतरा साबित हो सकता है.

चार्ली किर्क की हत्या के पीछे मोटिव क्या था, इसका अभी खुलासा नहीं हो पाया है. पुलिस और अन्य एजेंसियां इस मामले की जांच में जुटी हैं. अमेरिका के कुछ लोग इसे 'सियासी हत्या' मान रहे हैं. इसके पीछे तर्क यह है कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के केवल फाइनेंस हैं बल्कि उनके करीबी लोगों में से एक हैं. उन्होंने बतौर राजनेता एक प्रभावी वक्ता भी माना जाता है. उनकी कही बातें अधिकांश मौकों पर अमेरिका में सियासी चर्चा का विषय बनती थी.

अमेरिका में सियासी मर्डर का इतिहास 

1881: राष्ट्रपति जेम्स गारफील्ड की हत्या चार्ल्स जूलियस गुइटो 2 जुलाई को की थी. गुइटो ने उन्हें गोली मारी थी. गोली लगने के कुछ दिनों बाद गारफील्ड की मौत हुई थी.
1901: न्यूयॉर्क के बफेलो में पैन-अमेरिकन प्रदर्शनी के दौरान राष्ट्रपति मैककिनले जब हाथ मिला रहे थे, तभी अराजकतावादी लियोन चोल्गोज ने उन्हें गोली मारी थी. राष्ट्रपति विलियम मैककिनले की मृत्यु 14 सितंबर घावों की जटिलताओं के कारण हुई थी. 
1933: शिकागो के मेयर एंटोन सेरमक रूजवेल्ट को निशाना बनाकर चलाई गई गोली से घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई. 
1967: अमेरिकी नव नाजी राजनीतिक कार्यकर्ता जॉर्ज लिंकन रॉकवेल की हत्या   नेशनल सोशलिस्ट व्हाइट पीपल्स पार्टी के एक निष्कासित सदस्य जॉन पैटलर ने की थी. यह मामला राजनीतिक उग्रवाद से जुड़ा हुआ था. 
1968: डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के प्रत्यशी रॉबर्ट एफ. कैनेडी की लॉस एंजिल्स के एम्बेसडर होटल में कैलिफोर्निया प्राइमरी चुनाव के बाद विजय भाषण देने के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. 
2011: गैब्रिएल गिफोर्ड्स एरिजोना में सामूहिक गोलीबारी में गोली लगी थी. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद बच गईं थी. 
2017: स्टीव स्कैलिस कांग्रेस बेसबॉल टीम के अभ्यास के दौरान उन्हें एक आतंकवादी ने गोली मार दी थी. इस हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी वह बच गईं थीं. अगस्त 2023 में मल्टीपल मायलोमा की वजह से मोत हुई थी. 


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Written by: Dhirendra Mishra

12 Sep 2025  ·  Published: 06:06 IST