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वास्तु शास्त्र: हाथ से गिर जाएं ये खास चीजें तो बढ़ सकती हैं परेशानियां, जानें क्या हैं संकेत

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Vastu Shastra Tips for Home: वास्तु शास्त्र हमारी ज़िंदगी के हर पहलू में बैलेंस और पॉजिटिविटी लाता है. इस शास्त्र के अनुसार, हमारे घरों और ज़िंदगी में छोटी-छोटी चीज़ें भी अहम भूमिका निभाती हैं. कभी-कभी, गलती से हमारे हाथ से कुछ गिर जाना वास्तु के नज़रिए से एक बड़ा संकेत होता है. एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि आपके हाथ से कुछ चीज़ें गिरना आपकी ज़िंदगी में आने वाली परेशानियों और चुनौतियों का संकेत देता है.

दूध: वास्तु शास्त्र में हाथ से दूध गिरना अशुभ माना जाता है. दूध को ज़िंदगी में खुशहाली और धन का प्रतीक माना जाता है. अगर आपके हाथ से दूध गिर जाए, तो इसका मतलब है कि आपको जल्द ही पैसे की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. यह संकेत हमें पैसे के मामलों में सावधानी बरतने की याद दिलाता है.

काली मिर्च: काली मिर्च न सिर्फ़ खाने का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि इसे ज़िंदगी से नेगेटिव एनर्जी दूर करने वाली भी माना जाता है. अगर काली मिर्च आपके हाथ से गिरती या बिखरती है, तो इसका मतलब है कि आपकी ज़िंदगी में नेगेटिविटी और स्ट्रेस बढ़ सकता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसे समय में अपने घर को साफ़ रखना और पॉजिटिव सोच बनाए रखना बहुत ज़रूरी है.

खाना: खाना गिरना भी एक अशुभ संकेत माना जाता है. चाहे आप खाना खा रहे हों या किसी और को परोस रहे हों, उसका गिरना मतलब है कि गरीबी या मुश्किल आने वाली है. इससे आपके घर की शांति और खुशी पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए, वास्तु के अनुसार, ध्यान से खाना और खाने की चीज़ों का सम्मान करना बहुत ज़रूरी है.

नमक: वास्तु में नमक का गिरना भी बहुत अशुभ माना जाता है. नमक को जीवन में स्थिरता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. अगर यह आपके हाथ से गिर जाए, तो इसका मतलब है कि गंभीर समस्याएँ आने वाली हैं. ऐसे समय में, संयम बरतना और सोच-समझकर फ़ैसले लेना ज़रूरी है.
 


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Written by: Taushif

03 Dec 2025  ·  Published: 01:21 IST

यूरोप में बढ़ रहा है 'Sleep Divorce', लेकिन रिसर्च ने उठाए सवाल

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Sleep Divorce Trend: यूरोप के कई देशों में इन दिनों एक नया ट्रेंड काफी चर्चा में है, जिसे ‘स्लीप डिवोर्स’ कहा जा रहा है. स्वीडन, नॉर्वे और अन्य नॉर्डिक देशों में बड़ी संख्या में कपल्स अब बेहतर और आरामदायक नींद के लिए अपने साथी से अलग सोना पसंद कर रहे हैं. इस ट्रेंड में या तो अलग बिस्तर पर या कभी-कभी अलग कमरों में सोने की आदत शामिल है.

इस तरीके को स्कैंडिनेवियाई नींद संस्कृति भी कहा जा रहा है और माना जाता है कि यह नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है. बहुत से लोग खर्राटे, देर से सोना या बेचैनी जैसी आदतों से परेशान होकर यह कदम उठाते हैं.

क्या होता है स्लीप डिवोर्स?
स्लीप डिवोर्स का मतलब कपल्स का रात में अलग सोना है ताकि किसी की आदतें दूसरे की नींद खराब न करें. यह ट्रेंड खासकर उन लोगों में लोकप्रिय है जिनका पार्टनर खर्राटे लेता है या करवट बदलते समय दूसरे की नींद में खलल पड़ता है. हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि कपल्स के अलग सोने से उनके रिश्तों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि एक साथ सोना भी जुड़ाव और भावनात्मक नज़दीकी का हिस्सा माना जाता है.

नई रिसर्च ने क्या बताया?
ताइवान में शोधकर्ताओं ने 860 कपल्स पर एक स्टडी की, जिसे ‘BMC Public Health’ में प्रकाशित किया गया. इस रिसर्च में दोनों पार्टनर्स की मानसिक सेहत और नींद के पैटर्न का विश्लेषण किया गया. नतीजों में पाया गया कि जो वृद्ध कपल अलग कमरों में सोते थे, उनकी मानसिक सेहत उन कपल्स के मुकाबले कम थी जो साथ सोते थे. रिसर्च में खुशी, जीवन में संतुष्टि और मानसिक शांति जैसे पैमानों से मानसिक स्वास्थ्य को मापा गया था.

अलग सोना रिश्ते पर कैसे असर डालता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अलग सोना सिर्फ नींद की आदत नहीं बल्कि रिश्ते की स्थिति भी दर्शा सकता है. अगर पार्टनर अलग सोने लगें तो भावनात्मक दूरी बढ़ने का खतरा होता है. नींद और रिश्ते दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं और अच्छी नींद मानसिक सेहत का अहम हिस्सा है.


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Written by: Taushif

23 Nov 2025  ·  Published: 00:58 IST

पेट रहेगा स्वस्थ तो शरीर रहेगा तंदरुस्त, जानिए किन चीज़ों से मिलेगा फायदा

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Fermented Foods For Gut Health: अगर आप अपनी सेहत को लंबे समय तक अच्छा बनाए रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने गट यानी पाचन तंत्र की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. एक हेल्दी गट न सिर्फ पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है, बल्कि यह हार्मोन बैलेंस, इम्युनिटी बढ़ाने और स्किन ग्लो तक में अहम भूमिका निभाता है. रिसर्च से यह भी साबित हो चुका है कि हेल्दी गट हमारे मूड और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है.

गट हेल्थ सुधारने में फर्मेंटेड फूड्स (Fermented Foods) की अहम भूमिका होती है. ये फूड्स प्रोबायोटिक्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन से भरपूर होते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं और शरीर में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं. आइए जानते हैं ऐसे कुछ बेहतरीन फर्मेंटेड फूड्स के बारे में जो आपके गट के लिए रामबाण की तरह काम कर सकते हैं.

1. घर का बना दही
दही भारतीय रसोई में रोज़मर्रा का हिस्सा है और यह सबसे लोकप्रिय प्रोबायोटिक फूड है. यह अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है, सूजन कम करता है और पाचन शक्ति मजबूत बनाता है.

2. सॉरक्रॉट (Sauerkraut)
यह फर्मेंटेड पत्ता गोभी से बनाया जाता है. इसमें फाइबर, विटामिन C और प्रोबायोटिक्स भरपूर मात्रा में होते हैं. यह गट के बैक्टीरियल बैलेंस को सुधारने में मदद करता है.

3. इडली और डोसा
इडली और डोसा भी फर्मेंटेड फूड की श्रेणी में आते हैं. ये चावल और उड़द दाल को भिगोकर और फर्मेंट करके बनाए जाते हैं, जिससे पाचन में आसानी होती है.

4. कोम्बुचा
कोम्बुचा एक फर्मेंटेड चाय है जो प्रोबायोटिक्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होती है। यह डाइजेशन, डिटॉक्स और एनर्जी बूस्ट के लिए बहुत लाभकारी मानी जाती है.

5. फर्मेंटेड चावल
बचे हुए चावल को रात भर पानी में भिगोकर सुबह छाछ या दही के साथ खाने से यह एक बेहतरीन प्रोबायोटिक फूड बन जाता है. यह शरीर को ठंडक देता है और गट हेल्थ को सपोर्ट करता है.

6. किमची और मिसो (वैकल्पिक विदेशी विकल्प)
कोरियन डिश किमची और जापानी मिसो भी बेहतरीन फर्मेंटेड फूड्स हैं. हालांकि ये हर जगह आसानी से नहीं मिलते, लेकिन जहां उपलब्ध हों वहां ये गट हेल्थ के लिए बहुत लाभकारी हैं.


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Written by: Taushif

31 Jul 2025  ·  Published: 05:05 IST

रात में क्यों बढ़ जाती है खांसी? कफ सिरप नहीं, अपनाएं ये 5 घरेलू नुस्खे

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राजस्थान और मध्यप्रदेश से हाल ही में आई खबरों ने पूरे देश को झकझोर दिया है. दोनों राज्यों में कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं. इस घटना के बाद से लोगों में डर और गुस्सा दोनों है. जिस कंपनी का ये सिरप था, उस पर जांच चल रही है कि आखिर इन मौतों की असली वजह क्या थी.

कफ सिरप हर घर में आम दवा मानी जाती है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हर खांसी में सिरप पीना जरूरी नहीं होता, बल्कि गलत तरीके से लिया गया सिरप नुकसान भी पहुंचा सकता है. आइए जानते हैं कि खांसी के कितने प्रकार होते हैं और कब कफ सिरप से परहेज करना चाहिए.

खांसी क्यों होती है?
खांसी हमारे शरीर की एक प्राकृतिक रक्षा प्रणाली (Natural Defense System) है. जब गले या फेफड़ों में धूल, गंदगी या कोई बाहरी चीज जाती है, तो शरीर उसे बाहर निकालने के लिए खांसी करता है. यानी खांसी हमेशा बुरी नहीं होती यह शरीर को साफ रखने का तरीका भी है.

खांसी के प्रकार

  1. गीली खांसी (Wet Cough): इसमें कफ या बलगम निकलता है. यह फेफड़ों की सफाई में मदद करती है.
  2. सूखी खांसी (Dry Cough): इसमें बलगम नहीं होता, लेकिन गले में जलन होती है.
  3. क्रूप खांसी: बच्चों में पाई जाने वाली वायरल खांसी जिसमें आवाज भारी या भौंकने जैसी हो जाती है.
  4. पुरानी खांसी: जो कई हफ्तों तक बनी रहती है और किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है.

कफ सिरप हर बार क्यों नहीं पीना चाहिए?
गलत सिरप नुकसानदायक होता है. हर सिरप अलग तरह की खांसी के लिए बनाया जाता है. गलत सिरप असर नहीं करता, बल्कि साइड इफेक्ट दे सकता है.

गीली खांसी में नुकसान: जब शरीर बलगम निकालने की कोशिश करता है, तब सिरप खांसी को दबा देता है, जिससे बलगम अंदर रह जाता है.

बच्चों के लिए खतरा: कई सिरप में अल्कोहल या स्लीपिंग एजेंट होते हैं, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं.

बार-बार सिरप पीने से शरीर की नैचुरल सफाई प्रक्रिया कमजोर हो जाती है.

खांसी में क्या करें?
गुनगुना पानी या तुलसी-अदरक वाला काढ़ा पिएं.

नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें.

भाप लें और हवा में नमी बनाए रखें.

सिर थोड़ा ऊंचा रखकर सोएं ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो.

डॉक्टर के पास कब जाएं?
अगर खांसते समय खून आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है, खांसी तीन हफ्ते से ज्यादा चल रही है या सीने में दर्द है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.


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Written by: Taushif

07 Oct 2025  ·  Published: 14:28 IST