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Makhana farming UP: उत्तर प्रदेश के बागवानी, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार और कृषि निर्यात राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को लखनऊ में मखाना विकास योजना की औपचारिक घोषणा की. भारत सरकार द्वारा 2025 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन के बाद शुरू की गई यह योजना पहले चरण में उत्तर प्रदेश सहित 10 राज्यों में लागू की जा रही है.
इस योजना का संचालन उत्तर प्रदेश का बागवानी विभाग करेगा. केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कार्य योजना को मंजूरी दे दी है और 158 लाख रुपये जारी किए हैं, जिसके माध्यम से राज्य में मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए व्यापक कार्यक्रम चलाए जाएंगे.
इस फंड का उपयोग तालाबों के चयन और निर्माण, किसान प्रशिक्षण, फ्रंटलाइन प्रदर्शन, खरीदार-विक्रेता बैठकों, मखाना पवेलियन के माध्यम से प्रचार, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में निर्यातकों की भागीदारी और जिला और राज्य स्तरीय सेमिनारों के आयोजन के लिए किया जाएगा. मखाना के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का भी प्रस्ताव है. मंत्री सिंह ने कहा कि मखाना एक सुपरफूड है, जिसकी मांग देश और विदेश दोनों जगह तेजी से बढ़ रही है और उत्तर प्रदेश की जलवायु इसके उत्पादन के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है.
पूर्वांचल के कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, बलिया, महाराजगंज, वाराणसी और बस्ती जिलों को मखाना की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है. जहां भी सिंघाड़े की खेती सफल होती है, वहां मखाना आसानी से उगाया जा सकता है. सरकार अगले वित्तीय वर्ष में मखाना उत्पादन क्षेत्र का काफी विस्तार करने, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराने और प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है, ताकि मखाना किसानों को सीधे आर्थिक लाभ मिल सके.
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Fennel Water Benefits: आयुर्वेद में सौंफ को एक प्रभावशाली औषधि माना गया है, जो विशेष रूप से पाचन और शरीर की प्राकृतिक सफाई में सहायक मानी जाती है. अगर आप दिन की शुरुआत सौंफ का पानी पीकर करते हैं, तो यह न सिर्फ आपकी डाइजेस्टिव हेल्थ को सुधारता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को एक्टिव करता है और हार्मोन बैलेंस को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकता है.
1. पाचन तंत्र को मजबूत करता है
सौंफ में प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं, जो गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं. सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पीने से पाचन अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) को बल मिलता है, जिससे खाना बेहतर तरीके से पचता है और शरीर में टॉक्सिन जमा नहीं होते.
2. वजन घटाने में सहायक
सौंफ मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और अनावश्यक भूख को नियंत्रित करने में मदद करती है. यह शरीर से अतिरिक्त पानी (वॉटर रिटेंशन) को बाहर निकालने में भी उपयोगी है. नियमित सेवन से 2-3 हफ्तों में हल्का-फुल्का फर्क देखा जा सकता है.
3. महिलाओं के लिए वरदान
सौंफ में फाइटोएस्ट्रोजेन जैसे कंपाउंड होते हैं, जो हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं. यह पीरियड्स से जुड़ी ऐंठन, मूड स्विंग्स और ब्रेस्ट मिल्क की कमी जैसी स्थितियों में भी लाभकारी है. इसलिए इसे त्रिदोष शामक हर्ब कहा गया है, जो वात, पित्त और कफ-तीनों को संतुलित करता है.
4. डिटॉक्स और हाइड्रेशन में सहायक
सुबह इसका पानी पीने से शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से होती है. यह शरीर को हाइड्रेट करता है और दिनभर के लिए ऊर्जा देता है.
5. मॉडर्न रिसर्च का समर्थन
विज्ञान भी सौंफ के लाभों को मानता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे हार्ट डिजीज, डायबिटीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. यह आईबीएस (इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम) के लक्षणों में भी राहत देता है.
कैसे बनाएं सौंफ का पानी?
आप दो आसान तरीकों से सौंफ का पानी बना सकते हैं. एक या दो चम्मच सौंफ को एक गिलास पानी में रातभर भिगो दें. सुबह इसे छानकर खाली पेट पिए. दूसरा एक चम्मच सौंफ को हल्का क्रश करें और दो कप पानी में उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छानकर गुनगुना पीएं. वहीं, वजन घटाने के लिए इसे खाने से 30 मिनट पहले लेना असरदार हो सकता है.
सावधानी जरूरी है
हालांकि सौंफ अधिकतर लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन कुछ स्थितियों में इसके सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
1. प्रेग्नेंसी या ब्रेस्टफीडिंग
2. हार्मोनल समस्याएं
3. मिर्गी या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर
4. यदि आप ब्लड थिनर दवाएं ले रहे हों
बोनस टिप
सौंफ के साथ अगर आप जीरा और अजवाइन भी मिलाकर सेवन करते हैं, तो यह त्रिकटु जैसा प्रभाव देता है. पाचन और वजन घटाने में और भी अधिक मददगार.
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Pill Stuck in Esophagus: कई बार हम जल्दी-जल्दी पानी के साथ गोली निगल लेते हैं और थोड़ी देर में सीने या गले में तेज जलन, चुभन या दर्द महसूस होने लगता है. ऐसा लगता है कि दवा पेट तक नहीं पहुंची और अंदर ही कहीं अटक गई है. यही स्थिति आगे चलकर 'पिल- इंड्यूस्ड एसोफैगिटिस' बन सकती है, जिसका सामान्य सा अर्थ दवा की वजह से भोजन नली में सूजन है.
हमारी भोजन नली एक पतली सी ट्यूब है जो मुंह को पेट से जोड़ती है. जब गोली सही तरीके से नीचे नहीं जाती और पेट से मिलने वाले हिस्से के पास फंस जाती है, तो वहीं घुलकर जलन या घाव बना सकती है. इसलिए निगलने में दिक्कत, आवाज बैठना, या ऐसा महसूस होना कि कुछ अटका हुआ है आम संकेत हैं.
यूके की 'लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी' में एनाटॉमी के प्रोफेसर एडम टेलर ने पिछले हफ्ते कन्वर्सेशन में लिखा, "हालांकि यह बहुत ज्यादा देखने वाली समस्या नहीं है, फिर भी हर साल लगभग 1 लाख में 4 लोग इससे प्रभावित पाए जाते हैं. संख्या और ज्यादा हो सकती है, क्योंकि छोटे-मोटे मामले अक्सर बिना इलाज के ठीक हो जाते हैं."
कुछ लोगों में इसका जोखिम भी अधिक होता है. अधेड़ उम्र की महिलाओं को सजग रहने की जरूरत है क्योंकि उम्र के साथ दिक्कतें बढ़ती हैं तो दवाओं की फ्रीक्वेंसी भी बढ़ जाती है. बुजुर्गों में उम्र के साथ भोजन नली की ताकत कम हो जाती है. इनके अलावा जिनका दिल या थायरॉयड बड़ा हो उनमें निगलने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.
शोध में माना गया कि कोई भी गोली नुकसान कर सकती है, लेकिन एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक, आयरन वाली गोलियां और हड्डियों के इलाज की दवाएं अधिक नुकसान पहुंचा सकती हैं. अधिकतर मामलों में यह तकलीफ कुछ दिनों में ठीक हो सकती है, लेकिन सावधानी जरूरी है. गोली हमेशा भरपूर पानी के साथ निगलें और दवा लेते ही लेटें नहीं. अगर दर्द बढ़ता जाए या निगलना मुश्किल हो, तो डॉक्टर को तुरंत बताएं.
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Ulcer Early Symptoms: अक्सर लोग पेट में जलन या खट्टी डकारों को साधारण एसिडिटी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लक्षण आगे चलकर अल्सर का कारण बन सकते हैं. बार-बार जलन, गैस, पेट दर्द, भूख कम लगना या वजन घटना जैसे संकेतों को हल्का नहीं लेना चाहिए. अल्सर शरीर के कई हिस्सों, जैसे मुंह, पेट या आंतों में बन सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा इसके मामले आमाशय और आंतों में पाए जाते हैं.
जब पेट में बनने वाला तेज़ अम्ल पेट की भीतरी दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है, तो वहां घाव बन जाता है। यह एसिड इतना प्रबल होता है कि लोहे की ब्लेड को भी गलाने की क्षमता रखता है, इसलिए यह पेट के ऊतकों पर गंभीर असर डाल सकता है.
अल्सर क्यों होता है?
गलत खानपान अल्सर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. ज्यादा चाय-कॉफी, तला-भुना और मसालेदार खाना, शराब, खट्टे खाद्य पदार्थ और तनाव, गुस्सा व चिंता शरीर में अम्ल बढ़ाते हैं. जब पेट में एसिड आवश्यकता से अधिक बनने लगता है, तो यह पेट की दीवारों को नुकसान पहुँचाकर अल्सर बना देता है. शुरुआती चरण में पेट में जलन, गैस, खट्टी डकारें और दर्द दिखाई देता है. स्थिति बिगड़ने पर छाती में जलन, उल्टी, पाचन गड़बड़ होना और कई बार मल में खून आने तक की समस्या हो सकती है. समय पर ध्यान न दिया जाए तो रोग गंभीर हो सकता है.
कैसे करें अल्सर से राहत?
अल्सर सही आहार और जीवनशैली अपनाने से काफी हद तक ठीक हो सकता है. कुछ प्राकृतिक उपाय पेट की जलन और घाव भरने में बेहद कारगर हैं. पत्ता गोभी और गाजर का जूस पेट की सूजन कम करता है, जबकि गाय का दूध और घी अम्लता को शांत करते हैं. हल्दी वाला दूध, बादाम का दूध और नारियल पानी पेट को आराम देते हैं. मुलेठी पेट की परत की सुरक्षा और हीलिंग में मदद करती है. अल्सर में छाछ, हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन, कच्चे केले की सब्जी, पालक और जवारों का रस बेहद लाभकारी है. इन्हें नियमित आहार में शामिल करना फायदेमंद रहता है.
इन चीजों से बचें
अल्सर से बचने और उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ चीजों से दूर रहना बेहद जरूरी है. मैदा, जंक फूड, चाय-कॉफी, सोडा और शराब पेट में अम्ल बढ़ाते हैं और अल्सर को और खराब कर सकते हैं. इनका सेवन पूरी तरह से सीमित या बंद करना चाहिए. बेहतर पाचन के लिए हर दो घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाना फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे पेट पर दबाव कम पड़ता है. इसके साथ ही तनाव कम करना, समय पर भोजन लेना और पूरी नींद लेना अल्सर के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सही दिनचर्या अपनाने से पेट की सेहत तेजी से सुधरती है.