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अल्सर को एसिडिटी समझकर न करें नजरअंदाज़, शुरुआती लक्षण पहचानें और सही खानपान से पाएं राहत

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Ulcer Early Symptoms: अक्सर लोग पेट में जलन या खट्टी डकारों को साधारण एसिडिटी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लक्षण आगे चलकर अल्सर का कारण बन सकते हैं. बार-बार जलन, गैस, पेट दर्द, भूख कम लगना या वजन घटना जैसे संकेतों को हल्का नहीं लेना चाहिए. अल्सर शरीर के कई हिस्सों, जैसे मुंह, पेट या आंतों में बन सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा इसके मामले आमाशय और आंतों में पाए जाते हैं.

जब पेट में बनने वाला तेज़ अम्ल पेट की भीतरी दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है, तो वहां घाव बन जाता है। यह एसिड इतना प्रबल होता है कि लोहे की ब्लेड को भी गलाने की क्षमता रखता है, इसलिए यह पेट के ऊतकों पर गंभीर असर डाल सकता है.

अल्सर क्यों होता है?
गलत खानपान अल्सर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. ज्यादा चाय-कॉफी, तला-भुना और मसालेदार खाना, शराब, खट्टे खाद्य पदार्थ और तनाव, गुस्सा व चिंता शरीर में अम्ल बढ़ाते हैं. जब पेट में एसिड आवश्यकता से अधिक बनने लगता है, तो यह पेट की दीवारों को नुकसान पहुँचाकर अल्सर बना देता है. शुरुआती चरण में पेट में जलन, गैस, खट्टी डकारें और दर्द दिखाई देता है. स्थिति बिगड़ने पर छाती में जलन, उल्टी, पाचन गड़बड़ होना और कई बार मल में खून आने तक की समस्या हो सकती है. समय पर ध्यान न दिया जाए तो रोग गंभीर हो सकता है.

कैसे करें अल्सर से राहत?
अल्सर सही आहार और जीवनशैली अपनाने से काफी हद तक ठीक हो सकता है. कुछ प्राकृतिक उपाय पेट की जलन और घाव भरने में बेहद कारगर हैं. पत्ता गोभी और गाजर का जूस पेट की सूजन कम करता है, जबकि गाय का दूध और घी अम्लता को शांत करते हैं. हल्दी वाला दूध, बादाम का दूध और नारियल पानी पेट को आराम देते हैं. मुलेठी पेट की परत की सुरक्षा और हीलिंग में मदद करती है. अल्सर में छाछ, हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन, कच्चे केले की सब्जी, पालक और जवारों का रस बेहद लाभकारी है. इन्हें नियमित आहार में शामिल करना फायदेमंद रहता है.

इन चीजों से बचें
अल्सर से बचने और उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ चीजों से दूर रहना बेहद जरूरी है. मैदा, जंक फूड, चाय-कॉफी, सोडा और शराब पेट में अम्ल बढ़ाते हैं और अल्सर को और खराब कर सकते हैं. इनका सेवन पूरी तरह से सीमित या बंद करना चाहिए. बेहतर पाचन के लिए हर दो घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाना फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे पेट पर दबाव कम पड़ता है. इसके साथ ही तनाव कम करना, समय पर भोजन लेना और पूरी नींद लेना अल्सर के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सही दिनचर्या अपनाने से पेट की सेहत तेजी से सुधरती है.
 


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Written by: Taushif

19 Nov 2025  ·  Published: 14:51 IST

पैर में झनझनाहट हो तो सावधान! यह हो सकता है गंभीर बीमारी का लक्षण

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Health News: अगर आपके पैरों में बार-बार सुई चुभने जैसी सनसनी या झनझनाहट महसूस होती है, तो इसे हल्के में न लें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह लक्षण सिर्फ सामान्य थकान नहीं, बल्कि किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

पैर में झनझनाहट की सबसे आम वजह लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना या पैर दबा कर बैठना होता है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है और रक्त संचार प्रभावित होता है। हालांकि लगातार झनझनाहट रहना कई बार डायबिटीज, विटामिन B12 की कमी, या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का संकेत भी हो सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटिक न्यूरोपैथी, साइयाटिका, या थायरॉइड संबंधी गड़बड़ियों के मरीजों में यह लक्षण आम है। साथ ही अत्यधिक शराब और धूम्रपान करने वालों में भी नसों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है जिससे झनझनाहट हो सकती है।

लक्षणों में पैरों में सुन्नपन, जलन, चलने में परेशानी और कमजोरी शामिल हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि यह समस्या अक्सर हो रही है, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

उपचार के तौर पर संतुलित आहार, विटामिन B12 युक्त भोजन (जैसे अंडा, दूध, पत्तेदार सब्ज़ियां), और नियमित व्यायाम को जरूरी बताया गया है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह एक बढ़ती हुई आम समस्या बनती जा रही है, जिसे नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर रूप ले सकता है।


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Written by: Taushif

24 Jul 2025  ·  Published: 06:12 IST

अंडा-टोस्ट: नाश्ते में हेल्दी कॉम्बिनेशन, ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए कितना सही?

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सुबह का नाश्ता दिन की शुरुआत को तय करता है. अक्सर लोग जल्दीबाज़ी में ऐसे खाने की तलाश करते हैं जो झटपट तैयार हो जाए, पेट भी भर दे और शरीर को पोषण भी मिले. ऐसे में अंडे और टोस्ट नाश्ते का सबसे आसान और लोकप्रिय विकल्प माने जाते हैं. चाहे दफ्तर के लिए देर हो रही हो, बच्चे स्कूल जा रहे हों या फिर खाना बनाने का ज्यादा वक्त न हो, अंडा और टोस्ट तुरंत तैयार हो जाता है लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कॉम्बिनेशन सिर्फ पेट भरने तक ही सीमित है या फिर सेहत, खासकर ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए भी अच्छा है?

अंडे खाने से क्या फायदे होते हैं?
हैदराबाद स्थित केयर हॉस्पिटल्स की क्लिनिकल डाइटीशियन जी. सुषमा के अनुसार, अंडा-टोस्ट नाश्ते का क्लासिक कॉम्बिनेशन है. अंडे में प्रोटीन की मात्रा काफी ज्यादा होती है जो शरीर की मांसपेशियों की मरम्मत और विकास में मदद करता है. यही कारण है कि रोज़ाना फिजिकल एक्टिविटी करने वाले लोग अक्सर इसे नाश्ते में शामिल करते हैं.

अंडे में कई ज़रूरी विटामिन और मिनरल्स मौजूद होते हैं, जैसे – विटामिन A, D, E और B12 – आंखों, हड्डियों और इम्यूनिटी के लिए ज़रूरी. आयरन और जिंक – खून और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए ज़रूरी. कोलीन – दिमाग़ की हेल्थ और याददाश्त को दुरुस्त रखने में मददगार. अंडे खाने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती, यानी बार-बार स्नैक्स खाने की आदत भी कम हो जाती है. अगर इसे साबुत अनाज (Whole Grain) ब्रेड या खमीर (Sourdough) वाली ब्रेड के साथ खाया जाए तो इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं. साबुत अनाज वाली ब्रेड में फाइबर होता है, जो पाचन में मदद करता है और दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है.

ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए अंडा और टोस्ट कितना बेहतर?
यहां बात आती है ब्लड शुगर यानी शुगर लेवल पर इसके असर की. आमतौर पर सफेद ब्रेड (White Bread) जल्दी से ग्लूकोज में बदल जाती है. इसका मतलब है कि इसे खाने के बाद शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है और फिर थोड़ी देर बाद अचानक गिर भी जाता है. यही वजह है कि डायबिटीज़ के मरीजों या ब्लड शुगर पर नज़र रखने वालों को सफेद ब्रेड से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है. दूसरी तरफ, अंडों में कार्बोहाइड्रेट बहुत कम होता है और ये प्रोटीन और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं. यही कारण है कि अंडा खाने से शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है और शुगर लेवल अचानक से बढ़ता या घटता नहीं है. अगर सफेद टोस्ट की जगह साबुत अनाज या खमीर वाला टोस्ट लिया जाए और उसके साथ अंडा खाया जाए तो ब्लड शुगर पर इसका असर काफी स्थिर रहता है.

डायबिटीज़ और इंसुलिन रेसिस्टेंस वालों के लिए सलाह
अगर आप प्री-डायबिटिक हैं, डायबिटीज़ के मरीज हैं या फिर इंसुलिन रेसिस्टेंस से जूझ रहे हैं, तो नाश्ते में सिर्फ सफेद टोस्ट खाना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे ब्लड शुगर तुरंत बढ़ जाता है और थोड़ी ही देर में गिरने लगता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है. ऐसे लोगों के लिए बेहतर है कि अंडे को अपने नाश्ते में शामिल करें और टोस्ट चुनते समय साबुत अनाज या खमीर वाली ब्रेड का इस्तेमाल करें.

अंडा-टोस्ट को और हेल्दी कैसे बनाएं?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप अपने नाश्ते को और ज़्यादा पौष्टिक बनाना चाहते हैं तो कुछ चीज़ें अंडे और टोस्ट के साथ जोड़ सकते हैं. 

हरी सब्जियां – जैसे पालक, शिमला मिर्च, टमाटर.
एवोकाडो – हेल्दी फैट्स और फाइबर का बेहतरीन स्रोत.
अलसी (Flax Seeds) – ओमेगा-3 फैटी एसिड्स से भरपूर.
मक्खन या पीनट बटर – अतिरिक्त ऊर्जा और स्वाद के लिए.
इन सबको अंडे और टोस्ट के साथ खाने से ब्लड शुगर स्थिर रहता है और शरीर को लंबे समय तक एनर्जी मिलती है.


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Written by: Taushif

24 Aug 2025  ·  Published: 11:10 IST

ऑयली स्किन से लेकर ड्राई स्किन तक, हर पुरुष के लिए स्किन केयर टिप्स

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Men Skincare Routine: अक्सर स्किन केयर को केवल महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है लेकिन यह धारणा अब बदलने का समय आ गया है. स्किन की देखभाल पुरुषों के लिए भी उतनी ही ज़रूरी है, जितनी महिलाओं के लिए भी है. दरअसल, पुरुषों की त्वचा महिलाओं की तुलना में थोड़ी मोटी और ऑयली होती है, जिससे उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत पड़ती है.

क्यों ज़रूरी है पुरुषों के लिए स्किन केयर?
पुरुषों की स्किन में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की अधिकता के कारण ऑयल ग्लैंड्स ज्यादा सक्रिय रहते हैं, जिससे चेहरा जल्दी ऑयली हो जाता है और पिंपल्स या एक्ने की समस्या बढ़ जाती है. इसके अलावा, ज़्यादातर पुरुषों को लंबे समय तक बाहर रहकर धूप, धूल और प्रदूषण का सामना करना पड़ता है, जो त्वचा की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी त्वचा साफ, स्वस्थ और जवां दिखे, तो आपको भी एक सिंपल लेकिन असरदार स्किन केयर रूटीन को अपनाना चाहिए.

बेसिक स्किन केयर रूटीन, हर पुरुष के लिए ज़रूरी
हर दिन की शुरुआत और अंत में यह तीन स्टेप्स ज़रूर अपनाएं.

क्लीनिंग (साफ-सफाई): दिन में दो बार किसी अच्छे फेस वॉश से चेहरा धोएं, जिससे चेहरे पर जमी गंदगी और अतिरिक्त तेल साफ हो जाए.
⦁    नॉरिशमेंट- चेहरा धोने के बाद स्किन को मॉइश्चराइज़ करें ताकि त्वचा हाइड्रेटेड और स्मूद बनी रहे.
⦁    प्रोटेक्शन- धूप में बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना न भूलें. SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन आपकी त्वचा को UV किरणों से बचाता है.
⦁    एडवांस स्किन केयर- अपनी स्किन टाइप के अनुसार करें देखभाल.

हर आदमी की स्किन एक जैसी नहीं होती. इसलिए अपनी त्वचा के प्रकार को पहचानना और उसी के अनुसार प्रोडक्ट्स चुनना फायदेमंद होता है.
⦁    ऑयली स्किन- इस प्रकार की स्किन वालों को सेलिसिलिक एसिड बेस्ड फेस वॉश और लाइटवेट, ऑयल-फ्री मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल करना चाहिए.
⦁    ड्राई स्किन- अगर त्वचा रूखी रहती है, तो हाइड्रेटिंग फेस वॉश और हेवी क्रीम-बेस्ड मॉइश्चराइज़र का चुनाव करें.
⦁    कॉम्बिनेशन स्किन- एक ऐसी स्किन जिसमें कुछ हिस्से ऑयली और कुछ ड्राई हों, उनके लिए बैलेंस्ड क्रीमी फेस वॉश और हल्का मॉइश्चराइज़र अच्छा रहेगा.
 


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Written by: Taushif

10 Aug 2025  ·  Published: 07:42 IST