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ब्रिटेन में सिख महिला से रेप, 48 घंटे बाद भी नेताओं की चुप्पी

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फाइल फोटो

ब्रिटेन के ओल्डबरी (Oldbury) इलाके से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे टेम रोड (Tame Road) के पास 20 साल की महिला के साथ बलात्कार किया गया. पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया कि दो लोगों ने उस पर हमला किया.

वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस ने इस घटना को “नस्लीय उकसावे वाला हमला” बताया है. पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि हमले के दौरान हमलावरों ने नस्लवादी टिप्पणियां भी कीं. इससे यह साफ होता है कि यह सिर्फ यौन हिंसा का मामला नहीं, बल्कि नस्लीय भेदभाव से जुड़ा अपराध भी है.

पुलिस इस मामले में तेजी से जांच कर रही है. चीफ सुपरिंटेंडेंट किम मैडिल ने कहा, “हम जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक सबूत और अन्य जांच तेजी से चल रही है. हम गवाहों से अपील करते हैं कि वे सामने आएं और जांच में मदद करें.”

घटना के बाद स्थानीय और प्रवासी समुदाय में गुस्सा और डर का माहौल है. यूके की सिख फेडरेशन के दबिंदरजीत सिंह ने इस हमले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा, “यह हमला व्यस्त सड़क पर, दिन के उजाले में हुआ है. यह घटना बताती है कि महिलाएं और अल्पसंख्यक किस तरह खतरे में हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को ऐसे हिंसक और नस्लवादी हमलों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए. हम इस क्रूर नस्लवादी और यौन हमले की सभी नेताओं द्वारा सार्वजनिक निंदा का इंतजार कर रहे हैं. 48 घंटे से अधिक समय हो चुके हैं और अब तक किसी बड़े नेता की प्रतिक्रिया नहीं आई है.”

दबिंदरजीत सिंह ने यह भी बताया कि पीड़ित महिला सिख समुदाय से है और उसके साथ दिनदहाड़े क्रूरता की गई. उन्होंने कहा, “यह घटना न केवल पीड़िता के लिए, बल्कि पूरे समुदाय के लिए सदमे जैसी है. सरकार और पुलिस को इसे गंभीरता से लेकर अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करना चाहिए.”

फिलहाल पुलिस ने पीड़िता को सुरक्षा और सहयोग देने का भरोसा दिया है. जांच टीम आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और इलाके में गवाहों से संपर्क कर रही है. अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि जो भी घटना के समय वहां मौजूद था या कुछ संदिग्ध देखा है, वह तुरंत पुलिस से संपर्क करे. यह मामला ब्रिटेन में नस्लीय भेदभाव और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के बढ़ते खतरे को उजागर करता है. स्थानीय संगठनों का कहना है कि सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.


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Written by: Taushif

13 Sep 2025  ·  Published: 16:38 IST

यूरिक एसिड क्यों बढ़ता है? जानिए कारण, लक्षण और इलाज

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यूरिक एसिड एक केमिकल होता है जो शरीर में प्यूरिन (Purine) नामक तत्व के टूटने से बनता है। प्यूरिन हमें उन चीज़ों से मिलता है जो हम खाते हैं — जैसे रेड मीट, समुद्री भोजन, दालें, बियर, शराब आदि। जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा ज़रूरत से ज़्यादा हो जाती है और किडनी उसे फिल्टर करके बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह खून में जमा होने लगता है और हाइपरयूरिसीमिया (Hyperuricemia) की स्थिति बनती है।

यूरिक एसिड बढ़ने के प्रमुख कारण:-

1. खानपान में गड़बड़ी
अधिक मात्रा में रेड मीट, सी-फूड, दालें, राजमा, मटर, मशरूम, बीयर और शराब जैसी चीज़ें यूरिक एसिड बढ़ा सकती हैं।

2. कम पानी पीना
जब शरीर में पानी की कमी होती है तो किडनी सही से फिल्टरिंग नहीं कर पाती और यूरिक एसिड शरीर में जमा हो जाता है।

3. मोटापा और लाइफस्टाइल
निष्क्रिय जीवनशैली, अधिक वजन और कम शारीरिक गतिविधि भी यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा देती है।

4. शुगर और ब्लड प्रेशर की दवाएं
कुछ दवाएं, जैसे डाइयूरेटिक्स (पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं), भी यूरिक एसिड बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं।

5. अनुवांशिक कारण
अगर परिवार में किसी को यह समस्या है, तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है।

लक्षण:-

जोड़ों में तेज दर्द, खासकर पैर के अंगूठे में

जोड़ों में सूजन और लाली

चलने-फिरने में परेशानी

थकावट और बेचैनी

बचाव और उपाय:-

प्यूरिन युक्त चीज़ों से परहेज करें

खूब पानी पिएं (दिन में 2.5–3 लीटर)

वजन नियंत्रित रखें और नियमित व्यायाम करें

विटामिन-C युक्त फल (नींबू, संतरा) और हाई-फाइबर फूड्स लें

शराब और बीयर से दूरी बनाएं


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Written by: Taushif

24 Jul 2025  ·  Published: 06:24 IST

बार-बार दस्त और पेट दर्द? हो सकता है अल्सरेटिव कोलाइटिस, जानें आयुर्वेदिक उपाय

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फाइल फोटो

Ulcerative Colitis Ayurvedic Treatment: अल्सरेटिव कोलाइटिस एक ऐसा रोग है, जो अक्सर पेट की सामान्य समस्याओं की तरह नजर आता है, लेकिन इसके पीछे आंतों में क्रॉनिक सूजन छिपी होती है. यह बड़ी आंत और रेक्टम को प्रभावित करता है और बार-बार पतले दस्त, खून के साथ मल, पेट में मरोड़ या दर्द, वजन घटने, भूख न लगना, कमजोरी और कभी-कभी बुखार जैसे लक्षण दिखाता है.

आयुर्वेद के मुताबिक, इस रोग का मुख्य कारण पित्त और वात दोष की वृद्धि है. पाचन शक्ति कमजोर होने से आंतों में सूजन और घाव बनते हैं. इसे संतुलित करने के लिए शीतल, पौष्टिक और दोष शांत करने वाले आहार की सलाह दी जाती है. कुछ आयुर्वेदिक औषधियां जैसे कुटजघन वटी, एलोवेरा रस, बेल फल, ईसबगोल, मुस्ता, सूतशेखर रस और कमदुधा रस आंतों की सूजन और दर्द कम करने में मदद करती हैं.

घरेलू उपाय भी काफी लाभकारी हैं. सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच ईसबगोल, रोज बेल का शरबत या पल्प, छाछ में पुदीना और सेंधा नमक और दिन में दो बार एलोवेरा और आंवला रस मिलाकर पीना बहुत फायदेमंद होता है. मसालेदार, खट्टे या बहुत गर्म भोजन से बचना चाहिए. आहार में दलिया, मूंग दाल खिचड़ी, उबली सब्जियां, नारियल पानी, छाछ और बेल शरबत शामिल करना चाहिए.

इसके साथ ही अपनी जीवनशैली में भी सुधार करें. नियमित योग और हल्की एक्सरसाइज जैसे वज्रासन, पवनमुक्तासन और भुजंगासन करें. साथ ही, तनाव कम लें, पर्याप्त नींद लें और सुबह हल्की सैर करें, क्योंकि किसी भी बीमारी या समस्या से छुटकारा पाने के लिए जीवनशैली में संतुलन बनाकर रखना बहुत जरूरी है.

वैज्ञानिक दृष्टि से अल्सरेटिव कोलाइटिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही आंतों की सेल्स पर हमला करती है. इससे आंतों में क्रॉनिक सूजन और धीरे-धीरे अल्सर बन जाते हैं. लेकिन सही समय पर उपचार, संतुलित आहार, आयुर्वेदिक औषधि और जीवनशैली परिवर्तन से यह पूरी तरह नियंत्रित रखा जा सकता है.


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Written by: Taushif

21 Nov 2025  ·  Published: 22:01 IST

जिम जाने से पहले कराएं ये 5 टेस्ट, 50 साल से कम उम्र वालों में भी बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा

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फाइल फोटो

Gym Heart Attack Risk: पिछले कुछ समय से जिम या वर्कआउट के दौरान अचानक हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खास बात यह है कि इनमें अधिकतर लोग 50 साल से कम उम्र के रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, बदलती जीवनशैली, तनाव, अनुचित आहार और आनुवंशिक कारणों के चलते हृदय रोग का खतरा अब युवाओं तक पहुंच चुका है. ऐसे में जिम शुरू करने से पहले सावधानी बरतना और जरूरी स्वास्थ्य जांच करवाना बेहद जरूरी है.

अंग्रेज़ी वेबसाइट ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑर्थोपैथ और स्पोर्ट्स सर्जन डॉ. ओबैदुर रहमान ने इंस्टाग्राम पर एक संदेश साझा कर बताया कि जिम शुरू करने से पहले दिल की सेहत का आकलन करने के लिए 5 महत्वपूर्ण टेस्ट करवाना जीवन रक्षक साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि सुंदर दिखने या फिट बॉडी पाने की दौड़ में अक्सर लोग सबसे अहम अंग, ‘दिल’ को नजरअंदाज कर देते हैं.

डॉ. रहमान के मुताबिक, ये टेस्ट्स महंगे नहीं हैं बल्कि आपके स्वास्थ्य निवेश की तरह हैं. विशेषकर 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों, जिनके परिवार में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग का इतिहास रहा है, उन्हें इन जांचों को जरूर करवाना चाहिए. इससे दिल की मौजूदा स्थिति का पता चलता है और जोखिम कम करने में मदद मिलती है.

डॉ. रहमान द्वारा सुझाए गए 5 जरूरी टेस्ट्स

  • ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) – यह टेस्ट दिल की बेसलाइन रिदम और इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी की जांच करता है. इससे किसी भी अनियमित धड़कन या शुरुआती समस्या का पता चलता है.
  • 2डी इको (2D Echocardiography) – यह दिल की संरचना और कार्यप्रणाली को दर्शाता है. इससे स्ट्रक्चरल हार्ट डिज़ीज़, वाल्व या पंपिंग क्षमता जैसी समस्याओं की पहचान होती है.
  • टीएमटी (ट्रेडमिल टेस्ट) – यह स्ट्रेस टेस्ट दिल की क्षमता और तनाव में उसके प्रदर्शन को जांचने के लिए किया जाता है. वर्कआउट के दौरान दिल पर पड़ने वाले दबाव का आकलन करने के लिए यह बेहद अहम है.
  • हाई सेंसिटिविटी ट्रोपोनिन + एनटी-प्रोबीएनपी (HS-Troponin + NT-ProBNP) – ये ब्लड मार्कर्स दिल की छुपी हुई थकान (Silent Cardiac Strain) और शुरुआती डैमेज का संकेत देते हैं. साथ ही, HSCRP और ESR जैसी जांचें शरीर में सूजन और कार्डियोवस्कुलर रिस्क का पता लगाने में मदद करती हैं.
  • लिपिड प्रोफाइल + HbA1C – यह टेस्ट कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और ब्लड शुगर लेवल का आकलन कर मेटाबॉलिक रेड फ्लैग्स को पहचानने में मदद करता है.
     

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Written by: Taushif

15 Sep 2025  ·  Published: 12:11 IST