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आजकल हेल्दी और फिट रहने की चाहत हर किसी को है, लेकिन हमारी डाइट में अक्सर प्रोटीन की कमी रह जाती है. प्रोटीन न सिर्फ मसल्स बनाने में मदद करता है, बल्कि इम्यूनिटी बढ़ाने, एनर्जी बनाए रखने और शरीर को सही तरीके से काम करने में भी अहम भूमिका निभाता है. न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर, जो करीना कपूर जैसी बॉलीवुड हस्तियों की डाइटीशियन रह चुकी हैं, ने बताया कि रोजाना के खाने में थोड़े-थोड़े बदलाव करके हम प्रोटीन की कमी को आसानी से पूरा कर सकते हैं. उन्होंने पांच ऐसे नेचुरल सोर्स बताए हैं जिन्हें डाइट में शामिल करने से शरीर को पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है.
1. स्प्राउट्स के साथ कार्बोहाइड्रेट भी जरूरी
रुजुता दिवेकर के अनुसार, लोग स्प्राउट्स पर तो ध्यान देते हैं लेकिन रोटी, चावल जैसे कार्बोहाइड्रेट से बचने लगते हैं. ऐसा करने से शरीर को जरूरी अमिनो एसिड नहीं मिल पाते और प्रोटीन की कमी रह जाती है. इसलिए स्प्राउट्स के साथ-साथ रोटी और चावल जैसे कार्बोहाइड्रेट फूड्स को भी रोजाना की डाइट में शामिल करना जरूरी है.
2. दाल – भारतीय खाने का अहम हिस्सा
भारतीय खाना दाल के बिना अधूरा माना जाता है, लेकिन आजकल इसे ज्यादातर लोग सिर्फ कभी-कभार करी के रूप में ही खाते हैं. रुजुता का कहना है कि दाल को रोजाना के खाने का हिस्सा बनाना चाहिए. इसमें प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हेल्दी शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं.
3. ड्राई फ्रूट्स और लेग्यूम्स का सेवन
ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, अखरोट और बीज जैसे चिया व फ्लैक्स सीड्स के साथ-साथ चना और मूंगफली को भी डाइट में शामिल करना चाहिए. ये शाम के समय हेल्दी स्नैक के तौर पर बेहतरीन विकल्प हैं. ये न केवल प्रोटीन देते हैं, बल्कि हेल्दी फैट्स और मिनरल्स का भी अच्छा स्रोत हैं.
4. दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स
दूध और इससे बने प्रोडक्ट्स जैसे दही, पनीर या छाछ प्रोटीन से भरपूर होते हैं. रुजुता का सुझाव है कि दिन में कम से कम एक बार दूध या कोई भी डेयरी प्रोडक्ट जरूर लें. चाहे सुबह दूध पीना हो या दोपहर में दही-चावल खाना, इसे रोज की डाइट का हिस्सा बनाना न भूलें.
5. नॉन-वेज खाने वालों के लिए मांस, मछली और अंडे
अगर आप नॉन-वेज खाते हैं तो अपनी डाइट में मांस, मछली या अंडे को शामिल कर सकते हैं. ये न सिर्फ शरीर को आवश्यक प्रोटीन देते हैं, बल्कि मसल्स बनाने, इम्यूनिटी बढ़ाने और एनर्जी बनाए रखने में भी मदद करते हैं.
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दिवाली का त्योहार आने वाला है और चारों तरफ रौनक दिखाई देने लगी है. बाजारों में मिठाइयों की खुशबू और घरों में बनने वाले पकवानों का दौर शुरू हो चुका है. ऐसे में फिटनेस लवर लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है. स्वादिष्ट पकवानों का मज़ा लेते हुए फिट रहना. अगर आप भी सोच रहे हैं कि दिवाली पर खाने-पीने का मजा भी लें और वजन भी न बढ़े, तो ये 5 आसान फिटनेस टिप्स आपके लिए हैं.
ध्यान से खाएं
त्योहार के दौरान सबसे जरूरी बात है. Mindful Eating. खाने के वक्त सिर्फ स्वाद पर ध्यान न दें, बल्कि यह भी सोचें कि आप कितना और क्या खा रहे हैं. ओवरईटिंग से बचें. जो भी खाएं, छोटे हिस्सों में खाएं और सिर्फ स्वाद के लिए, पेट भरने के लिए नहीं.
छेना वाली मिठाइयां चुनें
मावा या दूध से बनी भारी मिठाइयों के बजाय हल्की मिठाइयां चुनें जैसे छेना बेस्ड मिठाइयां, रसगुल्ला, छेना पायस या सैंडेश। इनमें कैलोरी कम होती है. अगर चाशनी ज्यादा लगे तो मिठाई से उसका सिरप निकाल दें. इससे मिठाई हल्की और सेहतमंद बन जाएगी.
पैदल चलने की आदत डालें
दिवाली की तैयारियों में खुद को फिजिकली एक्टिव रखें. बाजार या रिश्तेदारों के घर पैदल जाकर अपने कदम बढ़ाएं. घर की सफाई या सजावट में भी हाथ बटाएं, इससे कैलोरी बर्न होगी और आप एक्टिव बने रहेंगे.
ज्यादा पानी पिएं
कई बार हमें भूख नहीं बल्कि प्यास लगती है. इसलिए जब भी खाने का मन करे, पहले एक गिलास पानी पी लें. इससे आप ओवरईटिंग से बचेंगे और शरीर हाइड्रेट रहेगा. पानी पीने से मेटाबॉलिज्म भी अच्छा रहता है.
जिम या रनिंग न छोड़ें
त्योहारों के बीच वर्कआउट को नजरअंदाज न करें. अगर जिम नहीं जा पा रहे हैं तो सुबह की रनिंग या हल्की एक्सरसाइज जरूर करें. इससे आप अपने कैलोरी इनटेक को बैलेंस कर पाएंगे और त्योहार के मजे के साथ फिटनेस भी बनी रहेगी.
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Fermented Foods For Gut Health: अगर आप अपनी सेहत को लंबे समय तक अच्छा बनाए रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने गट यानी पाचन तंत्र की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. एक हेल्दी गट न सिर्फ पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है, बल्कि यह हार्मोन बैलेंस, इम्युनिटी बढ़ाने और स्किन ग्लो तक में अहम भूमिका निभाता है. रिसर्च से यह भी साबित हो चुका है कि हेल्दी गट हमारे मूड और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है.
गट हेल्थ सुधारने में फर्मेंटेड फूड्स (Fermented Foods) की अहम भूमिका होती है. ये फूड्स प्रोबायोटिक्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन से भरपूर होते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं और शरीर में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं. आइए जानते हैं ऐसे कुछ बेहतरीन फर्मेंटेड फूड्स के बारे में जो आपके गट के लिए रामबाण की तरह काम कर सकते हैं.
1. घर का बना दही
दही भारतीय रसोई में रोज़मर्रा का हिस्सा है और यह सबसे लोकप्रिय प्रोबायोटिक फूड है. यह अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है, सूजन कम करता है और पाचन शक्ति मजबूत बनाता है.
2. सॉरक्रॉट (Sauerkraut)
यह फर्मेंटेड पत्ता गोभी से बनाया जाता है. इसमें फाइबर, विटामिन C और प्रोबायोटिक्स भरपूर मात्रा में होते हैं. यह गट के बैक्टीरियल बैलेंस को सुधारने में मदद करता है.
3. इडली और डोसा
इडली और डोसा भी फर्मेंटेड फूड की श्रेणी में आते हैं. ये चावल और उड़द दाल को भिगोकर और फर्मेंट करके बनाए जाते हैं, जिससे पाचन में आसानी होती है.
4. कोम्बुचा
कोम्बुचा एक फर्मेंटेड चाय है जो प्रोबायोटिक्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होती है। यह डाइजेशन, डिटॉक्स और एनर्जी बूस्ट के लिए बहुत लाभकारी मानी जाती है.
5. फर्मेंटेड चावल
बचे हुए चावल को रात भर पानी में भिगोकर सुबह छाछ या दही के साथ खाने से यह एक बेहतरीन प्रोबायोटिक फूड बन जाता है. यह शरीर को ठंडक देता है और गट हेल्थ को सपोर्ट करता है.
6. किमची और मिसो (वैकल्पिक विदेशी विकल्प)
कोरियन डिश किमची और जापानी मिसो भी बेहतरीन फर्मेंटेड फूड्स हैं. हालांकि ये हर जगह आसानी से नहीं मिलते, लेकिन जहां उपलब्ध हों वहां ये गट हेल्थ के लिए बहुत लाभकारी हैं.
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Gudmar Benefits for Diabetes: गुड़मार, जिसे आयुर्वेद में मधुनाशिनी या गुरमार कहा जाता है, एक झाड़ीदार लता है जो भारत, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में पाई जाती है. आयुर्वेद में इसे कफ और वात दोष को शांत करने वाली, कड़वी और तीखी रस वाली औषधि माना गया है. इसके पत्ते, जड़ और बीज सभी औषधीय काम आते हैं. सबसे ज्यादा गुड़मार मधुमेह (डायबिटीज) को कंट्रोल करने के लिए जानी जाती है.
गुड़मार खून में शुगर को घटाता है, इंसुलिन स्राव बढ़ाता है और पाचन के दौरान कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को कम करता है. यह टाइप 1 और टाइप 2 दोनों तरह की डायबिटीज में मदद करता है. इसके अलावा, यह मीठा खाने की क्रेविंग भी कम करता है.
वजन घटाने में भी यह काम आता है. यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है, वसा जलाने में मदद करता है और भूख को नियंत्रित करता है. श्वसन संबंधी समस्याओं में जैसे अस्थमा या कफ, यह श्वास नली को साफ करता है और सांस लेने में आसानी लाता है. गुड़मार मूत्र उत्पादन बढ़ाकर गुर्दे की पथरी को घोलने और संक्रमण कम करने में भी मदद करता है.
इसके अलावा, यह जिगर को मजबूत बनाता है, पीलिया में लाभकारी है, त्वचा पर सूजन, फोड़े या जलन कम करता है और घाव जल्दी भरने में सहायक है. हृदय के लिए भी फायदेमंद है, यह खराब कोलेस्ट्रॉल कम और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है. कुछ लोग इसे सर्पदंश, उल्टी, नेत्र विकार, रक्तस्राव, बालों के लिए और बुखार में भी इस्तेमाल करते हैं.
घरेलू नुस्खों में आप गुड़मार के सूखे पत्तों का पाउडर (4-6 ग्राम) या ताजा पत्तियों का रस (25-30 मिली) सुबह खाली पेट ले सकते हैं. मीठा खाने की इच्छा कम करने के लिए ताजे पत्ते चबाना फायदेमंद है. सर्पदंश या त्वचा पर इसे सीधे लगाना भी उपयोगी है. गुड़मार को अन्य जड़ी-बूटियों जैसे करेले, जामुन, मेथी और नीम के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. यह डायबिटीज और मोटापा दोनों में ही फायदेमंद होता है.