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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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हाई कोलेस्ट्रॉल नहीं बनेगा ‘साइलेंट किलर’, अपनाएं ये आसान टिप्स; दिल रहेगा फिट

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फाइल फोटो

High Cholesterol Tips: आजकल की भागदौड़ और अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है. यह दिल की सेहत के लिए एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर पता नहीं चलते. अच्छी खबर यह है कि डाइट और रोजमर्रा की आदतों में बदलाव कर केलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है और दिल की सेहत को मजबूत रखा जा सकता है.

फाइबर को बनाएं डाइट का हिस्सा
फाइबर शरीर में कोलेस्ट्रॉल को जमने नहीं देता और उसे बाहर निकालने में मदद करता है. हर दिन 5–10 ग्राम फाइबर लेने से बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) के स्तर को कम किया जा सकता है. इसके लिए डाइट में ओट्स, दाल, राजमा, चने जैसी चीजें शामिल करें.

अनहेल्दी फैट्स को कहें ना
रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड में पाए जाने वाले सैचुरेटेड व ट्रांस फैट्स कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं. इनकी जगह हेल्दी फैट्स लें, जैसे ऑलिव ऑयल, एवोकाडो और ड्राई फ्रूट्स. रेड मीट की जगह हफ्ते में 1–2 बार मछली, दाल, राजमा या टोफू जैसी प्लांट-बेस्ड प्रोटीन चुनना बेहतर है.

वर्कआउट से घटेगा बैड कोलेस्ट्रॉल
नियमित एक्सरसाइज बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) बढ़ाने में मदद करती है. हफ्ते में पांच दिन, रोजाना 30 मिनट तेज चलना ही काफी असरदार है. आप चाहें तो लंच ब्रेक में वॉक कर सकते हैं या डिनर के बाद टहलने की आदत डालें.

ओमेगा-3 से करें दिल की सुरक्षा
सैल्मन और मैकेरल जैसी मछलियों में पाए जाने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड्स हार्ट हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. हफ्ते में दो बार मछली खाने की कोशिश करें. अगर आप वेजिटेरियन हैं, तो अलसी के बीज, चिया सीड्स और अखरोट से ओमेगा-3 की जरूरत पूरी कर सकते हैं.

शुगर और मैदा कम करें
ज्यादा चीनी और मैदा वाली चीजें ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाती हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है. इसलिए सोडा, मीठे ड्रिंक्स और व्हाइट ब्रेड छोड़कर पानी, ताजे जूस और होल ग्रेन ब्रेड लें.

छोटे बदलाव, बड़ा असर
डाइट और लाइफस्टाइल में इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर आप हाई कोलेस्ट्रॉल को काबू में रख सकते हैं और दिल की सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित बना सकते हैं.


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Written by: Taushif

28 Sep 2025  ·  Published: 01:43 IST

सर्दी-खांसी और जुकाम में चाहिए तुरंत राहत, पिएं ये 5 आयुर्वेदिक काढ़े

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Ayurvedic Kadha for Cold and Cough: सर्दियों के मौसम में खांसी और जुकाम की वजह से शरीर पूरे दिन थका हुआ और एनर्जी की कमी महसूस करता है. नाक बहना, गले में खराश और हल्का बुखार जैसे लक्षण आम हैं. ऐसे मामलों में आयुर्वेदिक काढ़ा बहुत मददगार हो सकता है. ये शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं, इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और वायरस से लड़ने की ताकत देते हैं.

आयुर्वेद के मुताबिक, सर्दी और खांसी मुख्य रूप से कफ दोष बढ़ने के कारण होती है. इसलिए, गर्म, तीखे और हल्के सूखने वाले गुणों वाले काढ़े कफ को कम करते हैं और तुरंत आराम देते हैं. अदरक, दालचीनी, काली मिर्च और तुलसी कफ को बैलेंस करते हैं, जबकि गिलोय और हल्दी शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं.

पहला असरदार काढ़ा है अदरक-तुलसी का काढ़ा
अदरक शरीर की अकड़न और सूजन को कम करता है और तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाती है. इसे बनाने के लिए एक इंच अदरक का टुकड़ा और 10-12 तुलसी के पत्ते दो कप पानी में उबालें. स्वाद के लिए शहद मिला सकते हैं. इसे दिन में 1-2 बार पीना काफी है.

दूसरा काढ़ा है काली मिर्च-लौंग-दालचीनी का काढ़ा
इसका बहुत गर्म असर होता है, जो बलगम को पतला करके बाहर निकालने में मदद करता है. काली मिर्च वायरल एक्टिविटी को कम करती है, लौंग गले की खराश से राहत देती है, और दालचीनी शरीर को गर्म रखती है.

तीसरा है गिलोय-अदरक का काढ़ा
गिलोय को आयुर्वेद में अमृत माना जाता है और जब इसे अदरक के साथ लिया जाता है, तो यह इन्फेक्शन को जल्दी कम करने में मदद करता है. चौथा है हल्दी वाला दूध (गोल्डन मिल्क) हल्दी एंटीवायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी है और दूध शरीर को आराम देता है और गले की खराश से तुरंत राहत देता है.

पांचवां है मुलेठी-तुलसी का काढ़ा
मुलेठी गले की जलन को शांत करती है और तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाती है. हालांकि, याद रखें कि बहुत गर्म काढ़े ज़्यादा मात्रा में न पिएं. काढ़ा दवा का विकल्प नहीं है, लेकिन ये राहत देने और इम्यूनिटी बढ़ाने में बहुत मददगार होते हैं.


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Written by: Taushif

13 Dec 2025  ·  Published: 22:11 IST

हर दिन बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, अकेले हैं तो जानिए कैसे बचा सकते हैं अपनी जान

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Heart attack symptoms: आजकल हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा एक आम बीमारी बनती जा रही है. पहले यह समस्या उम्रदराज़ लोगों में ही दिखती थी, लेकिन अब 30-35 साल के युवाओं को भी इसका शिकार होते देखा जा रहा है. आंकड़े डराने वाले हैं — WHO के मुताबिक, साल 2019 में दुनियाभर में 1.79 करोड़ लोगों की मौत दिल और ब्लड वेसल्स से जुड़ी बीमारियों के कारण हुई, जिनमें 85% की जान हार्ट अटैक या स्ट्रोक ने ली.

हार्ट अटैक कई बार बिना किसी चेतावनी के आता है. इसलिए ऐसे वक्त पर हर एक सेकेंड कीमती होता है, खासकर अगर आप उस समय अकेले हों. 25 साल का अनुभव रखने वाले मशहूर हार्ट सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने बताया है कि ऐसी स्थिति में कुछ आसान से कदम आपकी जान बचा सकते हैं.

सबसे पहले इमरजेंसी हेल्प को कॉल करें

अगर आपको छाती में तेज दर्द, सांस लेने में दिक्कत या शरीर के बाएं हिस्से में कमजोरी महसूस हो रही हो, तो बिना देर किए एम्बुलेंस या इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें. कॉल पर बने रहें और अपने लक्षण साफ-साफ बताएं. देर करना जानलेवा हो सकता है.

घर को इमरजेंसी के लिए तैयार करें

जब तक मदद आ रही है, अपने घर का मुख्य दरवाजा खोल दें. अगर रात का समय है, तो बाहर की लाइट जला दें ताकि मेडिकल टीम आसानी से आपका घर पहचान सके. इससे समय की बचत होगी.

आराम करें और हिलने-डुलने से बचें

अपने शरीर की एनर्जी बचाएं. बिस्तर या सोफे पर लेट जाएं और पैरों को थोड़ा ऊपर रखें, ताकि ब्लड फ्लो बना रहे. अगर लेटना मुमकिन न हो, तो कुर्सी पर आराम से बैठें और शांत रहें. ज्यादा हिलने-डुलने से बेहोशी या गिरने का खतरा बढ़ सकता है.

किसी करीबी को फोन करें

इमरजेंसी सेवा को कॉल करने के बाद, अपने किसी परिवार के सदस्य या दोस्त को फोन करें. उन्हें बताएं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं और एम्बुलेंस आ रही है. वे अस्पताल में पहुंचकर डॉक्टरों को आपकी मेडिकल हिस्ट्री बता सकते हैं.

ऐसे रखें ध्यान

  1. हार्ट अटैक कभी भी, किसी को भी आ सकता है.
  2. समय पर मदद मिलना जान बचा सकता है.
  3. खुद को शांत और स्थिर रखना बहुत ज़रूरी है.


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Written by: Taushif

28 Jul 2025  ·  Published: 05:18 IST

50 की उम्र के बाद तेजी से बढ़ता है बुढ़ापा, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

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Aging after 50: समय तो निरंतर आगे बढ़ता रहता है, लेकिन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया हर इंसान के लिए समान नहीं होती। बचपन में शरीर तेजी से बढ़ता है, युवावस्था में स्थिरता रहती है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र आगे बढ़ती है, शरीर में कमजोरी झलकने लगती है। हाल ही में चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा की गई एक स्टडी में पाया गया है कि यह बुढ़ापा 50 की उम्र के बाद अचानक तेज़ी से बढ़ने लगता है।

इस शोध में 14 से 68 साल की उम्र के 76 लोगों के अंगों का विश्लेषण किया गया, जिनकी मृत्यु सिर में चोट लगने से हुई थी. वैज्ञानिकों ने हार्ट, लिवर, स्किन, मसल्स और खून जैसे अंगों के सैंपल लिए और बारीकी से यह समझने की कोशिश की कि शरीर के कौन से हिस्से कब सबसे अधिक प्रभावित होते हैं.

शोध के अनुसार, 45 से 55 साल की उम्र के बीच शरीर में सबसे अधिक जैविक परिवर्तन देखे गए. खासकर एओर्टा यानी शरीर की मुख्य रक्त वाहिका में उम्र का असर सबसे तीव्र देखा गया. इसके अलावा प्लीहा और पैंक्रियास में भी उम्र के साथ बदलाव स्पष्ट रूप से देखे गए.

वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में 48 ऐसे प्रोटीन बनने लगते हैं जो हृदय रोग, फैटी लिवर, फाइब्रोसिस और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े होते हैं. ये परिवर्तन कुछ अंगों में सामान्य रूप से दिखाई देते हैं जबकि कुछ में विशिष्ट बदलाव होते हैं.

इस शोध का उद्देश्य केवल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझना नहीं, बल्कि इस आधार पर ऐसी दवाएं विकसित करना है जो इस प्रक्रिया को धीमा कर सकें या उससे जुड़ी बीमारियों को रोका जा सके. शोधकर्ताओं ने अब तक 50 की उम्र के बाद के प्रोटीन परिवर्तनों का विस्तृत डाटा तैयार कर लिया है, जिससे शरीर के अंगों में उम्र के साथ होने वाले असंतुलन को समझा जा सके.

यह रिसर्च उम्र बढ़ने से जुड़ी जटिलताओं को समझने और उन्हें नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है. भविष्य में इसके जरिए बुढ़ापे को न केवल सहज बनाया जा सकेगा, बल्कि उससे जुड़ी बीमारियों को समय रहते रोका भी जा सकेगा.


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Written by: Taushif

31 Jul 2025  ·  Published: 04:49 IST