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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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इन तारीखों पर जन्मे लोगों के लिए 'चालाक' टैग फिट, काम निकलवाने में भी माहिर

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Clever Personality Traits: कुछ लोग थोड़े अलग और बहुत चालाक पैदा होते हैं। खासकर किसी भी महीने की 5, 14 या 23 तारीख को जन्म लेने वालों को ज्योतिष में नंबर 5 वाला माना जाता है. इन लोगों पर बुध ग्रह का असर होता है, जो न सिर्फ उन्हें तेज दिमाग देता है बल्कि उन्हें बातचीत और मेलजोल की कला भी सिखाता है. ये लोग किसी भी हालात में खुद को और अपने काम को आसानी से आगे बढ़ाने में माहिर होते हैं.

नंबर 5 वाले लोग स्वभाव से बहुत मिलनसार और खुशमिजाज होते हैं. उनके आस-पास हमेशा हंसी-खुशी का माहौल रहता है. वे बातूनी होते हैं, और उनकी बातचीत करने की अच्छी स्किल की वजह से लोग उन्हें सुनना पसंद करते हैं. उनमें लोगों की भावनाओं को पढ़ने और उन्हें प्रभावित करने की कमाल की क्षमता होती है. यही वजह है कि वे जहां भी जाते हैं, अपनी तरकीबों और चालाकी से हर काम आसानी से पूरा कर लेते हैं.

उनकी एक और खासियत यह है कि वे बहुत एनर्जेटिक होते हैं. वे हमेशा एनर्जी से भरे रहते हैं, और इसे सही दिशा में लगाकर, वे सबसे मुश्किल चुनौतियों को भी आसानी से पार कर लेते हैं. कड़ी मेहनत उनके स्वभाव में होती है. काम छोटा हो या बड़ा, ये हमेशा अपने लक्ष्य को पाने के लिए अपना दिमाग और मेहनत लगाते हैं. यह होशियारी और सरलता इतनी नैचुरल होती है कि लोग इससे हैरान रह जाते हैं.

नंबर 5 वाले लोगों को नई जगहों पर घूमना और नई चीज़ों का अनुभव करना पसंद होता है. यह नेचर उन्हें ज़िंदगी में अलग-अलग मौकों और अनुभवों से जोड़ता है. इनके हमेशा दोस्त और साथी होते हैं, क्योंकि लोग इनके खुशमिजाज और मिलनसार नेचर की ओर खिंचे चले आते हैं. मिलनसार होने के कारण, ये आसानी से लोगों के बीच अपनी जगह बना लेते हैं और किसी भी ग्रुप में तुरंत घुल-मिल जाते हैं.

इनकी चतुराई की बात करें तो, नंबर 5 वाले लोग किसी भी सिचुएशन में काम करवाने के लिए अपनी ट्रिक्स और इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना जानते हैं. यह न केवल उन्हें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में मदद करता है, बल्कि प्रोफेशनल और पर्सनल दोनों लेवल पर सफलता में भी योगदान देता है. इनकी चतुराई इंटेलिजेंस और अनुभव का एक परफेक्ट मिक्सचर है. लोग अक्सर इनके तेज़ दिमाग और सोचने की क्षमता से हैरान रह जाते हैं.
 


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Written by: Taushif

04 Dec 2025  ·  Published: 11:19 IST

देश में मौसमी इन्फ्लूएंजा सहित श्वसन संबंधी बीमारियों की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

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Seasonal influenza in India: सर्दियों के मौसम में इन्फ्लूएंजा को फैलने से रोकने के लिए की गई तैयारियों का रिव्यू करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और केमिकल्स और फर्टिलाइजर मंत्री, जे.पी. नड्डा की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग हुई. कर्तव्य भवन 1 में हुई मीटिंग के दौरान, सेक्रेटरी (हेल्थ) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि भारत में आमतौर पर इन्फ्लूएंजा के दो सीज़नल पीक होते हैं. 

अगस्त-अक्टूबर (मॉनसून पीक) और जनवरी-मार्च (सर्दियों का पीक). 2014-15 के दौरान सीज़नल इन्फ्लूएंजा के मामलों में हुई काफ़ी बढ़ोतरी को याद करते हुए, नड्डा ने मौजूदा स्थिति पर अपडेट मांगा और पूछा कि क्या अभी चल रहे वायरस स्ट्रेन पुराने ट्रेंड से कोई बदलाव दिखाते हैं. नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (NCDC) और इंटीग्रेटेड डिज़ीज़ सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि दुनिया भर में और भारत में इन्फ्लूएंजा की एक्टिविटी कम बनी हुई है.

सर्विलांस से पता चलता है कि सर्कुलेटिंग स्ट्रेन आम मौसमी वेरिएंट – H3N2 और इन्फ्लूएंजा B (विक्टोरिया) ही हैं, जिनमें H1N1 का थोड़ा हिस्सा है. मंत्री को नियर-रियल-टाइम सर्विलांस मैकेनिज्म के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसमें IDSP का इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (ILI) और गंभीर एक्यूट रेस्पिरेटरी बीमारी (SARI) सर्विलांस नेटवर्क, मीडिया स्कैनिंग के ज़रिए AI से चलने वाला इवेंट-बेस्ड सर्विलांस, और रेस्पिरेटरी पैथोजन्स के लिए ICMR का सेंटिनल सर्विलांस शामिल है. सभी सिस्टम में अभी इन्फ्लूएंजा के मामलों में किसी असामान्य बढ़ोतरी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं.

NCDC के डायरेक्टर प्रोफेसर (डॉ.) रंजन दास ने यह भी बताया कि NCDC इस महीने के आखिर में इन्फ्लूएंजा पर दो दिन का नेशनल चिंतन शिविर आयोजित करेगा, जिसमें मुख्य मंत्रालय, डिपार्टमेंट और राज्य सरकारें शामिल होंगी, ताकि इन्फ्लूएंजा की तैयारियों का पूरी तरह से रिव्यू किया जा सके और भविष्य के लिए प्लान बनाया जा सके. नड्डा ने चल रही तैयारियों की तारीफ़ की और सभी राज्य नोडल अधिकारियों को इन्फ्लूएंजा की तैयारियों का रिव्यू करने और सभी केंद्र सरकार के अस्पतालों की तैयारी पक्का करने का निर्देश दिया.

उन्होंने निर्देश दिया कि सभी ज़िला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में तैयारियों का रिव्यू अगले दो हफ़्ते में पूरा कर लिया जाए. मंत्री ने इस बारे में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक एडवाइज़री जारी करने और हेल्थ सेंटर्स पर रेगुलर मॉक ड्रिल करने की भी सलाह दी. मीटिंग में यूनियन हेल्थ एंड फ़ैमिली वेलफ़ेयर सेक्रेटरी पुण्य सलिला श्रीवास्तव, यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री की हेल्थ सर्विसेज़ (DGHS) की डायरेक्टर जनरल डॉ. सुनीता शर्मा, जॉइंट सेक्रेटरी (पब्लिक हेल्थ) वंदना जैन, नेशनल सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (NCDC) के डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) रंजन दास, और डिज़ास्टर मैनेजमेंट (DM) सेल और इंटीग्रेटेड डिज़ीज़ सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के एक्सपर्ट्स शामिल हुए.
 


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Written by: Taushif

04 Dec 2025  ·  Published: 11:09 IST

अच्छी नींद की कीमत रिश्ते में दूरी? कपल्स में बढ़ा स्लीप डिवोर्स का चलन

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यूरोप के कई देशों में इन दिनों ‘स्लीप डिवोर्स’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. यानी पति-पत्नी एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग बिस्तर या कमरों में सोते हैं ताकि नींद बेहतर हो सके. स्वीडन, नॉर्वे जैसे नॉर्डिक देशों में यह तरीका काफी लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि लोग मानते हैं कि इससे खर्राटे, देर तक जागने या एक-दूसरे की नींद में खलल जैसी दिक्कतें कम होती हैं.

लेकिन ताइवान के वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च में इस ट्रेंड को लेकर चिंता जताई गई है. ‘बीएमसी पब्लिक हेल्थ’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, अलग सोने से कपल्स की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ सकता है. इस रिसर्च में उत्तरी ताइवान के 860 जोड़ों पर सर्वे किया गया, जिसमें उनकी नींद की आदतों और मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण किया गया. इसमें पाया गया कि जो कपल्स अलग-अलग कमरों में सोते हैं, खासकर बुजुर्ग जोड़े, उनकी मेंटल हेल्थ साथ सोने वालों की तुलना में कमजोर पाई गई.

वैज्ञानिकों का मानना है कि नींद की व्यवस्था सिर्फ एक फिजिकल फैक्टर नहीं है, बल्कि यह रिश्ते की इमोशनल बॉन्डिंग से भी जुड़ी होती है. यानी साथ सोने से भले नींद थोड़ी डिस्टर्ब हो, लेकिन मानसिक जुड़ाव मजबूत रहता है. अमेरिकी वैज्ञानिक वेंडी ट्रॉक्सेल, जो किताब ‘Sharing the Covers: Every Couple’s Guide to Better Sleep’ की लेखिका हैं, ने भी कहा कि अलग-अलग सोना कई बार रिश्ते में दूरी का संकेत हो सकता है. 

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर जोड़े की जरूरत अलग होती है, इसलिए नींद और रिश्ते के बीच सही संतुलन बनाना जरूरी है. अंत में शोधकर्ताओं का निष्कर्ष यह रहा कि अगर कपल्स चाहते हैं कि उनका रिश्ता और मानसिक स्वास्थ्य दोनों मजबूत रहें, तो उन्हें नींद की गुणवत्ता के साथ-साथ भावनात्मक नजदीकी पर भी ध्यान देना चाहिए.


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Written by: Taushif

04 Nov 2025  ·  Published: 22:16 IST

ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में कैसे मदद करता है मेथी दाना, जानें हेल्थ सीक्रेट

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Fenugreek Seeds Benefits: भारतीय रसोई में मसालों का ख़ास स्थान है और मेथी दाना (Fenugreek Seeds) उनमें से एक ज़रूरी मसाला है. लगभग हर घर में यह मौजूद रहता है. इसका स्वाद कड़वा और कसैला होता है, इसलिए बहुत कम लोग इसे सीधे खाना पसंद करते हैं. लेकिन सेहत के लिहाज से यह किसी अमृत से कम नहीं है. मेथी दाना पाचन सुधारने, ब्लड शुगर नियंत्रित रखने, वजन कम करने और दिल की सेहत बनाए रखने जैसे कई बड़े फायदे देता है.

पाचन के लिए लाभकारी
मेथी के दाने आपके पेट की कई परेशानियों को दूर करने में मददगार हैं. यह गैस, एसिडिटी, अपच और कब्ज से राहत दिलाता है. नियमित रूप से सही मात्रा में मेथी दाना लेने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और पेट की समस्याएं कम होती हैं.

ब्लड शुगर कंट्रोल
मेथी दाना डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है. इसमें घुलनशील फाइबर भरपूर होता है, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है. इस वजह से यह प्राकृतिक तरीके से शुगर लेवल कम करने का आसान उपाय माना जाता है.

वजन घटाने में मददगार
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो मेथी दाना आपके लिए उपयोगी हो सकता है. इसमें मौजूद फाइबर भूख कम लगने में मदद करता है और पेट भरा होने का अहसास कराता है. इससे आप अनावश्यक कैलोरी लेने से बचते हैं और वजन घटाने में आसानी होती है.

दिल और बालों के लिए फायदेमंद
मेथी दाना बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने और हृदय रोग के खतरे को घटाने में सहायक होता है. इसके अलावा यह बालों के झड़ने और त्वचा की समस्याओं को भी कम करता है.

कैसे करें सेवन
वजन घटाने और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए मेथी दाना लेने का तरीका बेहद आसान है. एक चम्मच मेथी दाना रातभर पानी में भिगो दें. सुबह खाली पेट इस पानी को पिएं. इससे आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होगा, भूख कम लगेगी और पाचन बेहतर रहेगा.

इस तरह मेथी दाना स्वाद में भले कड़वा हो, लेकिन स्वास्थ्य लाभों की वजह से इसे रोज़ाना के आहार में शामिल करना शरीर को कई बीमारियों से बचाने और फिट रहने में मदद कर सकता है.


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Written by: Taushif

27 Sep 2025  ·  Published: 12:03 IST