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Parvatasana Benefits: सर्दी शुरू होते ही हाथ-पैर ठंडे पड़ना, शरीर में सुस्ती और ब्लड सर्कुलेशन कम होना आम शिकायत बन जाती है. ऐसे में लाख गर्म चीजों का सेवन करने के बाद भी आपके हाथ-पैरों में झनझनाहट रहती है तो पर्वतासन का अभ्यास आपके लिए बेहद फायदेमंद है.
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय पर्वतासन को आसान और असरदार उपाय बताता है, रोजाना पर्वतासन के अभ्यास से कई लाभ मिलते हैं, यह शरीर में रक्त संचार को तेज करता है, कंधों को मजबूत बनाता है और कई पुरानी तकलीफों को दूर करने में भी मददगार है. पर्वतासन यानी पहाड़, यह आसन करने पर शरीर पहाड़ की चोटी जैसा दिखता है. इसे वज्रासन या पद्मासन में बैठकर किया जाता है, इसलिए हर उम्र के लोग आसानी से इसका अभ्यास कर सकते हैं.
एक्सपर्ट पर्वतासन के अभ्यास का सही तरीका बताते हैं, जिसके लिए सबसे पहले वज्रासन या सुखासन की मुद्रा में आराम से मैट पर बैठ जाएं. दोनों हाथ सिर के ऊपर ले जाकर उंगलियों को आपस में लॉक कर लें. सांस भरते हुए हाथों को ऊपर की ओर खींचें, कंधे कान से दूर रखें, पीठ और कमर सीधी रखें. 15 से 20 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें और गहरी सांस लें. इसके बाद धीरे-धीरे हाथ नीचे लाएं और वापस की स्थिति में आएं. इसे 5 से 10 बार दोहराएं.
पर्वतासन के अभ्यास से मिलने वाले मुख्य लाभ पर नजर डालें तो यह लिस्ट लंबी है. इससे शरीर में रक्त संचार तेज होता है, हाथ-पैर गर्म रहते हैं। कंधे, गर्दन और कमर का दर्द-जकड़न दूर होता है. फेफड़े मजबूत होते हैं, सांस गहरी चलती है. रीढ़ की हड्डी लचीली और सीधी रहती है। थायरॉइड और डायबिटीज में भी लाभ मिलता है. साथ ही तनाव, चिंता और सिर दर्द कम होता है. इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और अपच की समस्या दूर होती है.
एक्सपर्ट बताते हैं कि सिर्फ 5 से 10 मिनट पर्वतासन करने से शरीर में गजब का फर्क होता है. यह प्रभावी योगाभ्यास है. हालांकि, कुछ सावधानियों को भी रखना चाहिए. हाई ब्लड प्रेशर के मरीज, कंधे या गर्दन में गंभीर चोट या ऑपरेशन हुआ हो, चक्कर आने की समस्या हो और गर्भवती महिलाओं को भी डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह के बिना पर्वतासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए.
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Benefits of Figs: अंजीर एक खास और पौष्टिक ड्राई फ्रूट है, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। अंजीर का रोजाना सेवन करने से शरीर को कई बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है। यह त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाता है, पाचन क्रिया को बेहतर करता है और शरीर की इम्यूनिटी को भी मजबूत बनाता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी अंजीर को ‘सुपरफ्रूट’ बताया है। मंत्रालय के अनुसार अंजीर रोज खाने से गठिया, लकवा और पेशाब में जलन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है और ताकत बढ़ाता है।
अंजीर में पोटेशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और दिल को स्वस्थ रखते हैं। पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है जबकि कैल्शियम हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अंजीर को रात में पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाना सबसे अच्छा तरीका है। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और वजन घटाने में भी मदद मिलती है। अंजीर का पानी पीना भी लाभकारी होता है क्योंकि यह शरीर की चर्बी कम करने की प्रक्रिया को तेज करता है।
इसमें मौजूद फाइबर पेट की समस्याओं जैसे कब्ज या गैस में राहत देता है। साथ ही यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ रखने में मदद करता है, जिससे अधिक खाने की इच्छा नहीं होती और वजन भी नियंत्रित रहता है।
अंजीर में विटामिन सी होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और नेचुरल शुगर भी होता है, जो शरीर को ऊर्जा देता है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को अंजीर का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए क्योंकि इसमें नैचुरल शुगर होती है।
कुल मिलाकर, अंजीर एक स्वादिष्ट और सेहतमंद फल है जिसे नियमित रूप से खाने से शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं। यह एक आसान, सस्ता और असरदार तरीका है अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का।
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Immunity Boosting Foods: आजकल बहुत से लोग बदलते मौसम में बार-बार बीमार पड़ जाते हैं. कभी सर्दी-जुकाम, कभी गले में खराश तो कभी बुखार जैसी परेशानियां उन्हें घेर लेती हैं. इसका सबसे बड़ा कारण होता है कमजोर इम्यून सिस्टम. जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है, तो मामूली बदलाव भी हमें बीमार कर देते हैं. इसलिए जरूरी है कि हम अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर खास ध्यान दें.
संतुलित आहार है सबसे जरूरी
हमारा शरीर तभी मजबूत रह सकता है, जब हम उसे सही पोषण दें. इसके लिए हमें रोजाना संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए. फलों, हरी सब्जियों, दालों, बीन्स, ड्राई फ्रूट्स, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल करने से शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं.
साबुत अनाज जैसे ओट्स, चना, किनोआ और स्प्राउट्स में भरपूर मात्रा में फाइबर, मिनरल्स और विटामिन्स पाए जाते हैं. ये न केवल पेट को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि लंबे समय तक एनर्जी भी देते हैं. इसके साथ ही ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम और अखरोट इम्युनिटी बूस्ट करने में काफी फायदेमंद होते हैं.
विटामिन सी वाले फल हैं सबसे असरदार
अगर आप अपनी इम्युनिटी को तेजी से बढ़ाना चाहते हैं तो विटामिन सी से भरपूर फलों का सेवन जरूर करें. संतरा, मौसंबी, नींबू, अमरूद और कीवी ऐसे फल हैं जिनमें विटामिन सी की मात्रा बहुत अधिक होती है. विटामिन सी शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं (WBCs) के उत्पादन को बढ़ाता है. ये कोशिकाएं संक्रमणों से लड़ने का काम करती हैं और शरीर को बीमारियों से बचाती हैं. इसके अलावा, खट्टे फलों में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और हमें जल्दी थकान महसूस नहीं होने देते.
नींद और व्यायाम भी है जरूरी
सिर्फ खानपान ही नहीं, बल्कि जीवनशैली भी इम्युनिटी को प्रभावित करती है. रोजाना पर्याप्त नींद लेना, नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी करना और तनाव को कम करना उतना ही जरूरी है जितना अच्छा आहार लेना. अगर आप देर रात तक जागते हैं और नींद पूरी नहीं करते, तो शरीर कमजोर हो सकता है और बीमारियां जल्दी घेर सकती हैं.
खट्टे फलों के फायदे
खट्टे फल न सिर्फ इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं बल्कि इनके और भी कई फायदे हैं. इनमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. वहीं, इनमें पाया जाने वाला फाइबर पाचन को दुरुस्त करता है और वजन को नियंत्रित रखता है. यही वजह है कि इन फलों को रोजाना की डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है.
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Winter Digestion Problems: सर्दियों का मौसम अपने साथ ठंडक, आलस और गरमागरम खाने का मजा जरूर लाता है, लेकिन इसी मौसम में पाचन से जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ जाती हैं. डॉक्टरों और आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक, ठंड के कारण शरीर की गतिविधियां धीमी हो जाती हैं, जिससे चयापचय (मेटाबॉलिज्म) प्रभावित होता है और पाचन अग्नि असंतुलित हो सकती है. इसका सीधा असर पेट पर पड़ता है और गैस, कब्ज, सीने में जलन, भारीपन और भूख न लगने जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं.
आयुर्वेद का मानना है कि सर्दियों में शरीर की पाचन अग्नि वैसे तो तेज होती है, लेकिन अगर खानपान गलत हो जाए तो यही अग्नि कमजोर भी पड़ जाती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मौसम में वात और कफ दोनों दोष बढ़ जाते हैं. वात बढ़ने से गैस, पेट दर्द और कब्ज की समस्या होती है, जबकि कफ बढ़ने से पेट भारी रहना, अपच और सुस्ती बढ़ जाती है. अगर अग्नि मंद पड़ जाए, तो शरीर में ‘आमा’ बनने लगता है, जिससे थकान बढ़ती है और इम्युनिटी भी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है.
सर्दियों में पेट खराब होने के सामान्य लक्षणों में भूख कम लगना, खट्टी डकारें, पेट कड़ा महसूस होना, खाना खाने के बाद सुस्ती या नींद-सी आना शामिल हैं. ऐसे में खानपान को समझदारी से चुनना बेहद जरूरी हो जाता है. इस मौसम में हल्का, गरम और आसानी से पचने वाला भोजन सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. अदरक, काली मिर्च, जीरा, अजवायन और हल्दी पाचन को मजबूत बनाते हैं और गैस की समस्या को कम करते हैं.
विशेषज्ञों की सलाह है कि ठंड के मौसम में ठंडा पानी, फ्रिज का खाना, रात में दही, बहुत मीठा या तला-भुना भोजन जितना हो सके कम करें. चाय-कॉफी की जगह गरम पानी या हर्बल टी पीना ज्यादा फायदेमंद रहता है. इससे पाचन तंत्र सक्रिय रहता है.
घरेलू उपायों पर भरोसा करने से भी काफी राहत मिलती है. सुबह खाली पेट अदरक और काली मिर्च वाला गुनगुना पानी पीना, भोजन के बाद सौंफ चबाना, अजवायन और काले नमक का पानी लेना गैस और अपच में तुरंत राहत देता है. अगर पेट में ज्यादा गैस बनती हो तो हिंग वाला गुनगुना पानी आराम पहुंचाता है.
इसके साथ ही योग और हल्की एक्सरसाइज को भी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी जाती है. रोज सुबह कपालभाति और खाने के बाद 10 मिनट टहलना पाचन को मजबूत रखने का सबसे आसान और असरदार तरीका माना जाता है.