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Padahastasana Benefits: भारत की प्राचीन संस्कृति योग में ऐसे कई सारे आसन हैं, जो शरीर को लचीला बनाने के साथ-साथ मन को हल्का और शांत भी रखते हैं. ऐसा ही एक योगासन का नाम 'पादहस्तासन' है. यह योगासन पेट की मांसपेशियों की अच्छे से मालिश करता है, जिससे पाचन तंत्र सक्रिय रहता है और अपच और पेट से संबंधित स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं होती है.
प्राचीन मान्यता के मुताबिक, पादहस्तासन सूर्य नमस्कार का एक हिस्सा रहा है, जो सूर्य की ऊर्जा को ग्रहण करने और शरीर में प्राणशक्ति को बढ़ाने के लिए किया जाता था. इसे करने के दौरान शरीर पृथ्वी की ओर झुकता है. योग विशेषज्ञों का मानना है कि इसे नियमित करने से शरीर न केवल शारीरिक लचीलापन बढ़ता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है.
आधुनिक जीवनशैली में जहां ज्यादातर समय हम मोबाइल या कंप्यूटर के सामने झुके रहते हैं, ऐसे में यह आसन रीढ़ को राहत देता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है. इसका नियमित अभ्यास करने के लिए योगा मैट पर घुटनों के बल बैठें. एड़ियां बाहर की ओर और कूल्हे एड़ियों पर टिकाएं. हथेलियों को जांघों पर रखें और रीढ़ को सीधा रखें. सामान्य सांस लेते हुए 5-10 मिनट तक इस मुद्रा में रहना चाहिए.
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, पादहस्तासन मासिक धर्म की तकलीफों से राहत दिलाता है, जिससे शरीर को संतुलन और ऊर्जा मिलती है. इसे करते समय क्षमता का ध्यान रखना और जबरदस्ती खिंचाव से बचना चाहिए. इसके करने से सिर की ओर रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है, जो मस्तिष्क और आंखों के लिए अच्छा है. साथ ही यह मन को शांत करने और तनाव दूर करने में सहायक है. योगासन करते समय हमेशा क्षमता पर ध्यान दें. जबरदस्ती या जरूरत से ज्यादा खिंचाव शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए हर व्यक्ति को अपनी सुविधा और गति के अनुसार ही योग करना चाहिए.
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Ayurvedic Remedies for Swollen Gums: मुस्कान तभी खूबसूरत लगती है जब दांत और मसूड़े दोनों स्वस्थ हों, लेकिन अगर मसूड़ों में सूजन, दर्द या खून आने लगे, तो यह जिंजीवाइटिस का संकेत है. यह समस्या आमतौर पर मुंह की सफाई में लापरवाही, बहुत गर्म या ठंडी चीजें खाने, सख्त वस्तु चबाने, विटामिन सी की कमी या धूम्रपान-तंबाकू जैसी आदतों से होती है.
आयुर्वेद के अनुसार, यह रोग पित्त और रक्त दोष के बढ़ने से होता है, जिससे मसूड़ों के ऊतकों में सूजन और कमजोरी आ जाती है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह मसूड़ों से खून आने, दांतों के हिलने या गिरने जैसी गंभीर समस्या का कारण बन सकता है. इसके लिए आयुर्वेद में कुछ बेहद असरदार और सरल घरेलू नुस्खे बताए गए हैं.
सबसे पहला उपाय है फिटकरी, सेंधा नमक, हरड़ और काली मिर्च का मंजन. इन सभी को बराबर मात्रा में कूटकर मंजन बना लें और रोज सुबह-शाम हल्के हाथों से मसूड़ों पर मलें. इससे सूजन और दर्द में आराम मिलता है और मसूड़े मजबूत बनते हैं. दूसरा आसान उपाय है सोंठ (सूखी अदरक) का सेवन. तीन ग्राम सोंठ का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ दिन में दो बार लेने से सूजन और दर्द दोनों में राहत मिलती है.
अगर मसूड़ों से खून आ रहा हो, तो जली हुई सुपारी का चूर्ण भी बहुत उपयोगी है. इसे मंजन की तरह इस्तेमाल करें, इससे मसूड़े सख्त बनते हैं और खून आना बंद होता है. इसके अलावा, सेंधा नमक और मीठा सोडा को पानी में मिलाकर कुल्ला करने से तुरंत राहत मिलती है. प्याज का रस भी काफी फायदेमंद है. इसमें मौजूद सल्फर बैक्टीरिया को खत्म करते हैं.
त्रिफला क्वाथ भी एक असरदार उपाय है. हरड़, बहेड़ा और आंवला को पानी में उबालकर उसका काढ़ा बनाएं और उससे दिन में 2–3 बार गरारा करें. यह मसूड़ों की सूजन, दर्द और खून बहने की समस्या को खत्म करता है. रोजमर्रा की देखभाल के लिए सुबह-शाम ब्रश करने के बाद तिल तेल से ऑयल पुलिंग करें. खाने के बाद कुल्ला करने की आदत डालें. मसालेदार और बहुत गर्म खाना खाने से बचें और पाचन को दुरुस्त रखें, क्योंकि पेट की गड़बड़ी से भी मसूड़ों में सूजन बढ़ती है.
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चेहरे पर झाइयां या हाइपरपिग्मेंटेशन होना एक आम स्किन प्रॉब्लम है. ये डार्क स्पॉट्स न सिर्फ खूबसूरती को कम कर देते हैं बल्कि आत्मविश्वास पर भी असर डालते हैं. महंगे प्रोडक्ट और ट्रीटमेंट्स के बावजूद कई बार ये जिद्दी धब्बे जाते नहीं हैं. लेकिन अच्छी खबर यह है कि इसका असरदार इलाज आपके घर में मौजूद नारियल तेल (Coconut Oil) से भी संभव है. हाइपरपिग्मेंटेशन आमतौर पर सूरज की किरणों, हार्मोनल बदलाव, उम्र बढ़ने, ड्राई स्किन या एक्ने के दाग की वजह से होता है. महिलाओं में यह समस्या प्रेग्नेंसी के दौरान या उसके बाद और भी ज्यादा दिखती है. इसे मेलाज्मा भी कहा जाता है.
नारियल तेल एक नेचुरल मॉइस्चराइज़र है जो स्किन को गहराई से हाइड्रेट करता है और डैमेज स्किन को रिपेयर करता है. इसमें मौजूद लॉरिक एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स सूजन को कम करते हैं और स्किन को हेल्दी बनाते हैं. आइए जानते हैं नारियल तेल से बनने वाले 5 असरदार घरेलू नुस्खे जो हाइपरपिग्मेंटेशन को कम करने में मदद करते हैं:
नारियल तेल और नींबू का रस
नींबू में मौजूद विटामिन C स्किन को ब्राइट करता है और डार्क स्पॉट्स हल्के करता है. बस ध्यान रखें कि नींबू लगाने के बाद सनस्क्रीन जरूर लगाएं.
नारियल तेल और हल्दी
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन पिगमेंटेशन को कम करता है और स्किन टोन को ग्लोइंग बनाता है. यह खासतौर पर ड्राई और नॉर्मल स्किन वालों के लिए अच्छा है.
नारियल तेल और एलोवेरा जेल
यह सूदिंग कॉम्बिनेशन सेंसेटिव स्किन के लिए बेहतरीन है. एलोवेरा मेलानिन प्रोडक्शन को कम करके धीरे-धीरे दाग-धब्बे हल्के करता है.
नारियल तेल और विटामिन ई
यह मिश्रण स्किन रिपेयर करता है, पिगमेंटेशन और झुर्रियों को कम करता है. यह ड्राई और एजिंग स्किन के लिए फायदेमंद है.
नारियल तेल और शहद
यह एक नेचुरल क्लींजर है. शहद स्किन की हाइड्रेशन बनाए रखता है और डलनेस दूर करके चेहरे को ब्राइट बनाता है.
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Best Rice for Weight Loss: भारत में चावल हमारी रोज़मर्रा की थाली का अहम हिस्सा है. दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक, चावल हर घर की रसोई में नियमित रूप से पकाया जाता है लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर चावल से दूरी बनाने लगते हैं कि इससे वजन बढ़ जाता है. हकीकत यह है कि चावल वजन बढ़ाने का सीधा कारण नहीं है, बल्कि चावल का चुनाव और उसका सेवन करने का तरीका मायने रखता है. अगर सही किस्म के चावल चुने जाएं तो न सिर्फ़ वजन नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि शरीर को ज़रूरी पोषण भी मिल सकता है.
रेड राइस
रेड राइस वजन घटाने के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और ओवरईटिंग से बचाता है. इसमें मौजूद एंथोसायनिन एंटीऑक्सीडेंट शरीर में सूजन को कम करते हैं और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं. यही वजह है कि रेड राइस खाने वालों को बार-बार भूख नहीं लगती और कैलोरी का सेवन नियंत्रित रहता है.
ब्राउन राइस
ब्राउन राइस उन लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है जो फिटनेस और वजन घटाने पर ध्यान देते हैं. यह पॉलिश नहीं किया जाता, इसलिए इसमें ब्रान लेयर सुरक्षित रहती है, जिसमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहता है. यही कारण है कि ब्राउन राइस धीरे-धीरे पचता है और शरीर को ज्यादा देर तक एनर्जी प्रदान करता है. नियमित रूप से ब्राउन राइस का सेवन वजन घटाने में मदद करता है.
ब्लैक राइस
ब्लैक राइस, जिसे फॉरबिडन राइस भी कहा जाता है, पोषण से भरपूर और बेहद खास माना जाता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट, प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अन्य चावलों की तुलना में कहीं ज्यादा होती है. यह शरीर की सूजन को कम करता है और मेटाबॉलिज्म को तेज़ करता है, जिससे फैट बर्निंग की प्रक्रिया तेज़ होती है. हालांकि, यह हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होता, लेकिन अगर आप वजन घटाने की सोच रहे हैं तो ब्लैक राइस सबसे असरदार विकल्प हो सकता है.
सफेद चावल
सफेद चावल भारतीय खाने में सबसे आम है, लेकिन वजन घटाने के दौरान इसका सेवन सीमित रखना चाहिए. इसमें फाइबर और पोषण की मात्रा कम होती है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. अगर सफेद चावल खाना हो तो उसे कभी-कभार और संतुलित मात्रा में ही लेना चाहिए.