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रात में पिएं ये डिटॉक्स ड्रिंक, पेट की चर्बी होगी गायब; बिना एक्सरसाइज पाएं फ्लैट टमी

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Belly Fat: अगर आप सेब का सिरका, ग्रीन टी या नींबू पानी जैसे घरेलू नुस्खे आजमा चुके हैं, लेकिन पेट की जिद्दी चर्बी कम नहीं हो रही, तो यह खबर आपके लिए है. आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर एक आसान सा मिश्रण रात में पीने से न केवल वजन कम करने में मदद मिलती है, बल्कि पेट फूलने की समस्या, नींद की गुणवत्ता और शुगर क्रेविंग पर भी असर पड़ता है. खास बात यह है कि यह ड्रिंक पूरी तरह घरेलू और सुरक्षित है.

इस मिश्रण को बनाने के लिए ज़रूरी है - धनिया, मेथी, सौंफ, दालचीनी और अदरक.

1.    धनिया के बीज लिवर को साफ करने और सूजन घटाने में मदद करते हैं.

2.    मेथी के बीज ब्लड शुगर कंट्रोल करते हैं और भूख कम करने में सहायक होते हैं.

3.    सौंफ गैस और पेट फूलने को कम करती है तथा पाचन सुधारती है.

4.    दालचीनी इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाती है और शुगर लेवल को संतुलित रखती है.

5.    अदरक मेटाबॉलिज्म तेज करता है और शरीर को ज्यादा कैलोरी जलाने में मदद करता है.

कैसे बनाएं यह ड्रिंक?
एक-एक चम्मच धनिया और मेथी को रात भर डेढ़ कप पानी में भिगो दें. शाम को इस पानी में आधा चम्मच सौंफ, आधा इंच दालचीनी और कद्दूकस किया हुआ अदरक डालकर 5 मिनट उबालें. छानकर रात के खाने के लगभग एक घंटे बाद पिएं.

रात में पीना क्यों फायदेमंद है?
नींद के दौरान शरीर स्वाभाविक रूप से डिटॉक्स होता है. लिवर रीसेट होता है, इंसुलिन सेंसिटिविटी सबसे बेहतर रहती है और तनाव से जुड़े हार्मोन कम हो जाते हैं. इन सभी प्रक्रियाओं से फैट बर्निंग और डाइजेशन दोनों तेज़ होते हैं, जिससे खासकर पेट की चर्बी घटाने में मदद मिलती है.


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Written by: Taushif

03 Oct 2025  ·  Published: 09:56 IST

प्रेग्नेंसी में महिलाओं के लिए वरदान हैं ये योगासन, मां और बच्चे दोनों को रखें हेल्दी!

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Pregnancy Yoga Benefits: कहते हैं कि बच्चे को जन्म देने के समय माताओं को 206 हड्डियों के टूटने जैसा दर्द होता है. हालांकि, उसके पहले का भी सफर आसान नहीं होता है क्योंकि गर्भावस्था में महिलाओं को कई शारीरिक परेशानियां झेलनी पड़ती हैं, लेकिन योगासन इसमें बड़ा सहारा बन सकता है. ऐसे ही एक योगासन के बारे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय जानकारी देता है और भद्रासन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है.

'भद्र' शब्द का अर्थ 'दृढ़,' 'सज्जन,' या 'सौभाग्यशाली' होता है. यह आसन शरीर को मजबूत बनाता है और मस्तिष्क को स्थिरता प्रदान करता है. खासकर गर्भवती महिलाओं और मासिक धर्म के दौरान पेट दर्द से जूझ रही महिलाओं के लिए यह वरदान से कम नहीं है. 

आयुष मंत्रालय के मुताबिक, भद्रासन का नियमित अभ्यास गर्भावस्था के समय को आसान बनाता है, जिससे प्रसव आसान हो सकता है. यह आसन महिलाओं को मासिक धर्म के समय होने वाले असहनीय पेट दर्द, ऐंठन से भी राहत दिलाता है. साथ ही, यह शरीर को मजबूती भी देता है और मन को शांत रखता है. गर्भावस्था में होने वाली कमर दर्द, थकान और तनाव जैसी समस्याओं में भी यह प्रभावी साबित होता है.

योग एक्सपर्ट भद्रासन का अभ्यास कैसे करें? इस विषय में विस्तार से जानकारी देते हैं. भद्रासन करने के लिए सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाकर बैठें. दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाएं. अब घुटनों को मोड़कर पैरों के तलुए को आपस में जोड़ें. एड़ियां पेट के पास लाएं और हाथों से पैरों को पकड़कर रखें. इस दौरान पीठ और गर्दन को सीधा रखें और आंखें बंद कर गहरी सांस लें और छोड़ें. शुरुआत में 1-2 मिनट तक इस आसन में रहें, धीरे-धीरे समय बढ़ाएं.

महिलाओं के लिए भद्रासन कई तरह से फायदेमंद है. पीरियड्स के दौरान पेट में ऐंठन और दर्द को भी कम करने में सहायक है. यह रीढ़ की हड्डी को लचीला रखता है और कब्ज जैसी समस्या से छुटकारा दिलाता है. भद्रासन न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है. यह तनाव मुक्ति में भी सहायक है. हालांकि, गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही अभ्यास करना चाहिए. किसी भी योगासन से पहले चिकित्सक की सलाह जरूरी है.
 


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Written by: Taushif

09 Nov 2025  ·  Published: 10:12 IST

जावित्री सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाती, शरीर की कई बीमारियों से भी देती है सुरक्षा

प्रतीकात्मक फोटो

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Javitri Benefits: जावित्री, जायफल का बाहरी लाल रंग का आवरण होता है. इसका टेस्ट थोड़ा तीखा और बेहद खुशबूदार होता है, इसलिए इसे मसालों में खास जगह दी जाती है. आयुर्वेद में इसे गर्म तासीर वाला माना जाता है. आम भाषा में कहें तो जावित्री शरीर को गर्माहट देती है और पाचन को तेज करती है. खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही ये आपके सेहत का भी ख्याल रखता है. पुराने समय से लोग इसे मन को प्रसन्न रखने, भूख बढ़ाने और शरीर को हल्का महसूस कराने वाली चीज के रूप में भी इस्तेमाल करते आए हैं.

पुरानी घरेलू विधियों में जावित्री को पेशाब ज्यादा आने या बार-बार लगने की समस्या में इस्तेमाल किया जाता था. लोग इसका थोड़ा-सा चूर्ण खांड या मिश्री के साथ पानी या दूध में मिलाकर पीते थे. नपुंसकता जैसी समस्याओं में भी पुराने वैद्य जावित्री, जायफल, बड़ी इलायची और थोड़ी सी अफीम मिलाकर बनाई गई औषधि का उपयोग करते थे, लेकिन आज के समय में ऐसे मिश्रण बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल नहीं लेने चाहिए.

श्वास या दमे जैसी दिक्कतों में जावित्री को पान में रखकर खाने का चलन भी पुराने समय में देखा गया है. दांत के दर्द में इसे माजूफल व कुटकी के साथ उबालकर कुल्ला करने के लिए कहा जाता था. दस्त, पेचिश या बार-बार टट्टी होने पर जावित्री को छाछ या दही के साथ देने की परंपरा भी रही है. गठिया यानी जोड़ों के दर्द में जावित्री के साथ सोंठ को गर्म पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है. हृदय को मजबूत बनाने के लिए दालचीनी, अकरकरा और जावित्री का चूर्ण शहद के साथ लेने की सलाह दी जाती थी.

चेचक (मसूरिका/माता) जैसी बीमारियों में भी इसे बहुत बारीक पीसकर छोटी मात्रा में देने की पुरानी मान्यता बताई जाती है. ध्यान रखने वाली सबसे जरूरी बात यह है कि जावित्री का अधिक मात्रा में सेवन करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे सिरदर्द या घबराहट जैसे लक्षण हो सकते हैं.
 


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Written by: Taushif

21 Nov 2025  ·  Published: 21:56 IST

सुबह खाली पेट सिर्फ एक ग्लास सौंफ का पानी और बदल जाएगी आपकी बॉडी लैंग्वेज!

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Fennel Water Benefits: आयुर्वेद में सौंफ को एक प्रभावशाली औषधि माना गया है, जो विशेष रूप से पाचन और शरीर की प्राकृतिक सफाई में सहायक मानी जाती है. अगर आप दिन की शुरुआत सौंफ का पानी पीकर करते हैं, तो यह न सिर्फ आपकी डाइजेस्टिव हेल्थ को सुधारता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को एक्टिव करता है और हार्मोन बैलेंस को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकता है.

क्यों फायदेमंद है सौंफ का पानी?

1. पाचन तंत्र को मजबूत करता है
सौंफ में प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं, जो गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं. सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पीने से पाचन अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) को बल मिलता है, जिससे खाना बेहतर तरीके से पचता है और शरीर में टॉक्सिन जमा नहीं होते.

2. वजन घटाने में सहायक
सौंफ मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और अनावश्यक भूख को नियंत्रित करने में मदद करती है. यह शरीर से अतिरिक्त पानी (वॉटर रिटेंशन) को बाहर निकालने में भी उपयोगी है. नियमित सेवन से 2-3 हफ्तों में हल्का-फुल्का फर्क देखा जा सकता है.

3. महिलाओं के लिए वरदान
सौंफ में फाइटोएस्ट्रोजेन जैसे कंपाउंड होते हैं, जो हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं. यह पीरियड्स से जुड़ी ऐंठन, मूड स्विंग्स और ब्रेस्ट मिल्क की कमी जैसी स्थितियों में भी लाभकारी है. इसलिए इसे त्रिदोष शामक हर्ब कहा गया है, जो वात, पित्त और कफ-तीनों को संतुलित करता है.

4. डिटॉक्स और हाइड्रेशन में सहायक
सुबह इसका पानी पीने से शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से होती है. यह शरीर को हाइड्रेट करता है और दिनभर के लिए ऊर्जा देता है.

5. मॉडर्न रिसर्च का समर्थन
विज्ञान भी सौंफ के लाभों को मानता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे हार्ट डिजीज, डायबिटीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. यह आईबीएस (इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम) के लक्षणों में भी राहत देता है.

कैसे बनाएं सौंफ का पानी?
आप दो आसान तरीकों से सौंफ का पानी बना सकते हैं. एक या दो चम्मच सौंफ को एक गिलास पानी में रातभर भिगो दें. सुबह इसे छानकर खाली पेट पिए. दूसरा एक चम्मच सौंफ को हल्का क्रश करें और दो कप पानी में उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छानकर गुनगुना पीएं. वहीं, वजन घटाने के लिए इसे खाने से 30 मिनट पहले लेना असरदार हो सकता है.

सावधानी जरूरी है
हालांकि सौंफ अधिकतर लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन कुछ स्थितियों में इसके सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. 

1.    प्रेग्नेंसी या ब्रेस्टफीडिंग
2.    हार्मोनल समस्याएं
3.    मिर्गी या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर
4.    यदि आप ब्लड थिनर दवाएं ले रहे हों

बोनस टिप
सौंफ के साथ अगर आप जीरा और अजवाइन भी मिलाकर सेवन करते हैं, तो यह त्रिकटु जैसा प्रभाव देता है. पाचन और वजन घटाने में और भी अधिक मददगार.


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Written by: Taushif

12 Aug 2025  ·  Published: 06:52 IST