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नवरात्रि व्रत तोड़ते समय रखें ये 6 सावधानियां, नहीं होगी पेट की समस्या; जानें कैसे रखें डाइजेशन सही

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Navratri Vrat Breaking Tips: नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ उपवास भी रखते हैं. इस दौरान लोग हल्का, सात्विक और फलाहार वाला भोजन करते हैं. चूंकि कई दिनों तक शरीर हल्का खाना खाता है, इसलिए मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है. ऐसे में व्रत खत्म होने के तुरंत बाद भारी, तैलीय या मसालेदार खाना खाने से डाइजेशन पर असर पड़ सकता है. इससे गैस, एसिडिटी, पेट फूलना या कमजोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि व्रत को सही तरीके से तोड़ा जाए और धीरे-धीरे सामान्य डाइट पर लौटा जाए.

हल्का और सिंपल खाना खाएं
उपवास के तुरंत बाद तली-भुनी चीजों से परहेज करें. शुरुआत फल, छाछ, नारियल पानी या खिचड़ी जैसे हल्के भोजन से करें. इससे पेट पर दबाव नहीं पड़ता और शरीर आराम से सामान्य खानपान की ओर लौट पाता है.

पानी और लिक्विड का सेवन करें
व्रत के दौरान अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इसलिए पहले पानी या लिक्विड जरूर लें. नींबू पानी, हर्बल टी या वेजिटेबल सूप लेना बेहतर रहेगा. ये शरीर को हाइड्रेट करते हैं और डाइजेशन को खाने के लिए तैयार करते हैं.

धीरे-धीरे सामान्य खाना शुरू करें
पहले उबला या स्टीम्ड खाना खाएं. अचानक पूरी, पराठा या भारी सब्जियां खाने से बचें. 1–2 दिन में धीरे-धीरे सामान्य डाइट पर लौटें.

स्पाइसी, ऑयली और मीठे से दूरी बनाएं
उपवास के बाद मन लजीज खाने की ओर जाता है, लेकिन तुरंत मसालेदार, तैलीय या ज्यादा मीठा खाना पेट को नुकसान पहुंचा सकता है. पकौड़ी, समोसा, पूरी या बहुत ज्यादा मिठाइयां तुरंत खाने से बचें.

छोटे-छोटे हिस्सों में खाएं
एक बार में ज्यादा खाने के बजाय दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना सही रहता है. इससे डाइजेशन पर दबाव नहीं पड़ता और शरीर धीरे-धीरे नॉर्मल रूटीन में ढल जाता है.

प्रोबायोटिक्स और फाइबर लें
पेट की सेहत बनाए रखने के लिए दही, छाछ, सलाद, खीरा और गाजर जैसी चीजें खाएं. ये डाइजेशन को बेहतर बनाते हैं और शरीर को एनर्जी देते हैं.


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Written by: Taushif

02 Oct 2025  ·  Published: 10:15 IST

सर्दी-खांसी और जुकाम में चाहिए तुरंत राहत, पिएं ये 5 आयुर्वेदिक काढ़े

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Ayurvedic Kadha for Cold and Cough: सर्दियों के मौसम में खांसी और जुकाम की वजह से शरीर पूरे दिन थका हुआ और एनर्जी की कमी महसूस करता है. नाक बहना, गले में खराश और हल्का बुखार जैसे लक्षण आम हैं. ऐसे मामलों में आयुर्वेदिक काढ़ा बहुत मददगार हो सकता है. ये शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं, इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और वायरस से लड़ने की ताकत देते हैं.

आयुर्वेद के मुताबिक, सर्दी और खांसी मुख्य रूप से कफ दोष बढ़ने के कारण होती है. इसलिए, गर्म, तीखे और हल्के सूखने वाले गुणों वाले काढ़े कफ को कम करते हैं और तुरंत आराम देते हैं. अदरक, दालचीनी, काली मिर्च और तुलसी कफ को बैलेंस करते हैं, जबकि गिलोय और हल्दी शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं.

पहला असरदार काढ़ा है अदरक-तुलसी का काढ़ा
अदरक शरीर की अकड़न और सूजन को कम करता है और तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाती है. इसे बनाने के लिए एक इंच अदरक का टुकड़ा और 10-12 तुलसी के पत्ते दो कप पानी में उबालें. स्वाद के लिए शहद मिला सकते हैं. इसे दिन में 1-2 बार पीना काफी है.

दूसरा काढ़ा है काली मिर्च-लौंग-दालचीनी का काढ़ा
इसका बहुत गर्म असर होता है, जो बलगम को पतला करके बाहर निकालने में मदद करता है. काली मिर्च वायरल एक्टिविटी को कम करती है, लौंग गले की खराश से राहत देती है, और दालचीनी शरीर को गर्म रखती है.

तीसरा है गिलोय-अदरक का काढ़ा
गिलोय को आयुर्वेद में अमृत माना जाता है और जब इसे अदरक के साथ लिया जाता है, तो यह इन्फेक्शन को जल्दी कम करने में मदद करता है. चौथा है हल्दी वाला दूध (गोल्डन मिल्क) हल्दी एंटीवायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी है और दूध शरीर को आराम देता है और गले की खराश से तुरंत राहत देता है.

पांचवां है मुलेठी-तुलसी का काढ़ा
मुलेठी गले की जलन को शांत करती है और तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाती है. हालांकि, याद रखें कि बहुत गर्म काढ़े ज़्यादा मात्रा में न पिएं. काढ़ा दवा का विकल्प नहीं है, लेकिन ये राहत देने और इम्यूनिटी बढ़ाने में बहुत मददगार होते हैं.


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Written by: Taushif

13 Dec 2025  ·  Published: 22:11 IST

पेट रहेगा स्वस्थ तो शरीर रहेगा तंदरुस्त, जानिए किन चीज़ों से मिलेगा फायदा

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Fermented Foods For Gut Health: अगर आप अपनी सेहत को लंबे समय तक अच्छा बनाए रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने गट यानी पाचन तंत्र की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. एक हेल्दी गट न सिर्फ पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है, बल्कि यह हार्मोन बैलेंस, इम्युनिटी बढ़ाने और स्किन ग्लो तक में अहम भूमिका निभाता है. रिसर्च से यह भी साबित हो चुका है कि हेल्दी गट हमारे मूड और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है.

गट हेल्थ सुधारने में फर्मेंटेड फूड्स (Fermented Foods) की अहम भूमिका होती है. ये फूड्स प्रोबायोटिक्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन से भरपूर होते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं और शरीर में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं. आइए जानते हैं ऐसे कुछ बेहतरीन फर्मेंटेड फूड्स के बारे में जो आपके गट के लिए रामबाण की तरह काम कर सकते हैं.

1. घर का बना दही
दही भारतीय रसोई में रोज़मर्रा का हिस्सा है और यह सबसे लोकप्रिय प्रोबायोटिक फूड है. यह अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है, सूजन कम करता है और पाचन शक्ति मजबूत बनाता है.

2. सॉरक्रॉट (Sauerkraut)
यह फर्मेंटेड पत्ता गोभी से बनाया जाता है. इसमें फाइबर, विटामिन C और प्रोबायोटिक्स भरपूर मात्रा में होते हैं. यह गट के बैक्टीरियल बैलेंस को सुधारने में मदद करता है.

3. इडली और डोसा
इडली और डोसा भी फर्मेंटेड फूड की श्रेणी में आते हैं. ये चावल और उड़द दाल को भिगोकर और फर्मेंट करके बनाए जाते हैं, जिससे पाचन में आसानी होती है.

4. कोम्बुचा
कोम्बुचा एक फर्मेंटेड चाय है जो प्रोबायोटिक्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होती है। यह डाइजेशन, डिटॉक्स और एनर्जी बूस्ट के लिए बहुत लाभकारी मानी जाती है.

5. फर्मेंटेड चावल
बचे हुए चावल को रात भर पानी में भिगोकर सुबह छाछ या दही के साथ खाने से यह एक बेहतरीन प्रोबायोटिक फूड बन जाता है. यह शरीर को ठंडक देता है और गट हेल्थ को सपोर्ट करता है.

6. किमची और मिसो (वैकल्पिक विदेशी विकल्प)
कोरियन डिश किमची और जापानी मिसो भी बेहतरीन फर्मेंटेड फूड्स हैं. हालांकि ये हर जगह आसानी से नहीं मिलते, लेकिन जहां उपलब्ध हों वहां ये गट हेल्थ के लिए बहुत लाभकारी हैं.


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Written by: Taushif

31 Jul 2025  ·  Published: 05:05 IST

उम्र बढ़ने पर हड्डियों को कैसे रखें मजबूत? जानिए आसान उपाय

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Strong Bones: हड्डियां हमारे शरीर की आधारशिला होती हैं। ये न केवल हमारे शरीर को आकार और सहारा देती हैं, बल्कि हमारे महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाती हैं. इसलिए हड्डियों को मजबूत बनाए रखना हर उम्र में ज़रूरी है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है, जिससे फ्रैक्चर और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन अच्छी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल से इन्हें मजबूत रखा जा सकता है.

1. कैल्शियम से भरपूर आहार अपनाएं
कैल्शियम हड्डियों की संरचना का प्रमुख हिस्सा है. यह हड्डियों के विकास और उन्हें मजबूत बनाए रखने में बेहद सहायक होता है. दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक, मेथी), फोर्टिफाइड अनाज, सोया उत्पाद और छोटी हड्डी वाली मछलियों में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. रोजाना कैल्शियम युक्त आहार लेने से हड्डियों का घनत्व बेहतर बना रहता है और टूटने की संभावना कम हो जाती है.

2. विटामिन D की कमी न होने दें
विटामिन D, कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है. अगर शरीर में इसकी कमी हो, तो चाहे कैल्शियम जितना भी ले लिया जाए, उसका असर नहीं दिखेगा. विटामिन D का सबसे अच्छा स्रोत सूरज की रोशनी है. इसके अलावा अंडे की ज़र्दी, फेटी फिश (जैसे साल्मन, टूना) और फोर्टिफाइड दूध/अनाज में भी यह पोषक तत्व मिलता है.

3. अन्य ज़रूरी पोषक तत्व
हड्डियों की मजबूती के लिए केवल कैल्शियम और विटामिन D ही नहीं, बल्कि मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, विटामिन K और प्रोटीन भी ज़रूरी हैं. ये पोषक तत्व हड्डियों की मजबूती बढ़ाने, उनके निर्माण और मरम्मत में मदद करते हैं. नट्स, बीज, साबुत अनाज और हरी सब्जियां इनका अच्छा स्रोत हैं.

4. नियमित एक्सरसाइज करें
व्यायाम न केवल हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ाता है. रोजाना वॉक करना, सीढ़ियां चढ़ना, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, डांस, टेनिस और बास्केटबॉल जैसे एक्टिविटीज़ हड्डियों पर सही दबाव डालती हैं, जिससे उनमें मजबूती आती है. वेट-बेयरिंग और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज मांसपेशियों को भी मजबूत करती हैं, जिससे हड्डियों पर तनाव कम होता है.
 


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Written by: Taushif

08 Aug 2025  ·  Published: 06:34 IST