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नवरात्रि व्रत को बनाएं हेल्दी और स्वादिष्ट, वरई पुलाव और बेलामृत शरबत की रेसिपी

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Navratri Fasting Recipes: नवरात्रि का पर्व देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. इस दौरान लोग देवी की पूजा-अर्चना के साथ-साथ उपवास भी रखते हैं. उपवास के दिनों में हल्का, पौष्टिक और स्वादिष्ट खाना ऊर्जा बनाए रखने के लिए ज़रूरी होता है. अक्सर व्रत में साबूदाना खिचड़ी या फल खाना आम है, लेकिन हर बार वही व्यंजन खाने से ऊब हो सकती है. ऐसे में अगर आप कुछ अलग और स्वादिष्ट रेसिपी आज़माना चाहते हैं, तो वरई पुलाव और बेलामृत शरबत आपके व्रत के मेनू को खास बना सकते हैं. ये दोनों ही व्यंजन बनाने में आसान, स्वादिष्ट और पौष्टिक हैं.

वरई पुलाव (सामक चावल पुलाव)
वरई या सामक चावल व्रत के दिनों में खूब खाया जाता है. यह हल्का और ऊर्जा देने वाला होता है.

ज़रूरी सामग्री
सामक चावल 200 ग्राम, हरी मिर्च 10 ग्राम, मूंगफली 20 ग्राम, काजू 20 ग्राम, बादाम 20 ग्राम, अनार के दाने 30 ग्राम (गार्निश के लिए), सेंधा नमक 1 छोटा चम्मच, दूध 350 मिलीलीटर, घी 40 मिलीलीटर.

बनाने का तरीका
सामक चावल को अच्छी तरह धोकर पानी निकाल लें. एक कड़ाही में घी गरम करें और उसमें हरी मिर्च, मूंगफली, काजू और बादाम हल्का सुनहरा होने तक भूनें. अब इसमें धुले हुए सामक चावल और सेंधा नमक डालें. फिर दूध डालकर मिलाएं और धीमी आंच पर ढककर 10 मिनट तक पकाएं, जब तक चावल नरम हो जाएं और दूध सूख जाए. गैस बंद करने के बाद 5 मिनट रहने दें. कांटे से हल्के-हल्के फुलाएं और ऊपर से अनार व ड्राईफ्रूट्स डालकर सर्व करें.

बेलामृत शरबत
व्रत के दौरान ताज़ा और ठंडा पेय शरीर को हाइड्रेटेड और ताज़गीभरा रखता है. बेलामृत शरबत इस काम के लिए बिल्कुल सही है.

ज़रूरी सामग्री
एक पका बेल फल, एक पैशन फ्रूट, नींबू का रस 20 मिली, कच्चा शहद सिरप 25 मिली.

बनाने का तरीका
बेल और पैशन फ्रूट का गूदा निकाल लें. इसे एक बड़े जार या शेकर में डालें. नींबू का रस और शहद सिरप डालकर बर्फ के साथ अच्छी तरह हिला लें. मिश्रण को छानकर बर्फ वाले लंबे गिलास में डालें. ऊपर से नींबू का टुकड़ा या पुदीने की पत्ती से सजाकर ठंडा-ठंडा परोसें. इन दोनों रेसिपीज़ से आपका नवरात्रि उपवास पौष्टिक, स्वादिष्ट और एनर्जी से भरपूर रहेगा.


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Written by: Taushif

27 Sep 2025  ·  Published: 12:18 IST

रात में क्यों बढ़ जाती है खांसी? कफ सिरप नहीं, अपनाएं ये 5 घरेलू नुस्खे

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राजस्थान और मध्यप्रदेश से हाल ही में आई खबरों ने पूरे देश को झकझोर दिया है. दोनों राज्यों में कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं. इस घटना के बाद से लोगों में डर और गुस्सा दोनों है. जिस कंपनी का ये सिरप था, उस पर जांच चल रही है कि आखिर इन मौतों की असली वजह क्या थी.

कफ सिरप हर घर में आम दवा मानी जाती है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हर खांसी में सिरप पीना जरूरी नहीं होता, बल्कि गलत तरीके से लिया गया सिरप नुकसान भी पहुंचा सकता है. आइए जानते हैं कि खांसी के कितने प्रकार होते हैं और कब कफ सिरप से परहेज करना चाहिए.

खांसी क्यों होती है?
खांसी हमारे शरीर की एक प्राकृतिक रक्षा प्रणाली (Natural Defense System) है. जब गले या फेफड़ों में धूल, गंदगी या कोई बाहरी चीज जाती है, तो शरीर उसे बाहर निकालने के लिए खांसी करता है. यानी खांसी हमेशा बुरी नहीं होती यह शरीर को साफ रखने का तरीका भी है.

खांसी के प्रकार

  1. गीली खांसी (Wet Cough): इसमें कफ या बलगम निकलता है. यह फेफड़ों की सफाई में मदद करती है.
  2. सूखी खांसी (Dry Cough): इसमें बलगम नहीं होता, लेकिन गले में जलन होती है.
  3. क्रूप खांसी: बच्चों में पाई जाने वाली वायरल खांसी जिसमें आवाज भारी या भौंकने जैसी हो जाती है.
  4. पुरानी खांसी: जो कई हफ्तों तक बनी रहती है और किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है.

कफ सिरप हर बार क्यों नहीं पीना चाहिए?
गलत सिरप नुकसानदायक होता है. हर सिरप अलग तरह की खांसी के लिए बनाया जाता है. गलत सिरप असर नहीं करता, बल्कि साइड इफेक्ट दे सकता है.

गीली खांसी में नुकसान: जब शरीर बलगम निकालने की कोशिश करता है, तब सिरप खांसी को दबा देता है, जिससे बलगम अंदर रह जाता है.

बच्चों के लिए खतरा: कई सिरप में अल्कोहल या स्लीपिंग एजेंट होते हैं, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं.

बार-बार सिरप पीने से शरीर की नैचुरल सफाई प्रक्रिया कमजोर हो जाती है.

खांसी में क्या करें?
गुनगुना पानी या तुलसी-अदरक वाला काढ़ा पिएं.

नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें.

भाप लें और हवा में नमी बनाए रखें.

सिर थोड़ा ऊंचा रखकर सोएं ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो.

डॉक्टर के पास कब जाएं?
अगर खांसते समय खून आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है, खांसी तीन हफ्ते से ज्यादा चल रही है या सीने में दर्द है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.


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Written by: Taushif

07 Oct 2025  ·  Published: 14:28 IST

बाजरा और सेहत का है खास कनेक्शन, हड्डियों को मजबूती देने में कारगर

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फाइल फोटो

Bajra Health Benefits: सर्दी के मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए बहुत सारे देसी उपाय होते हैं. काढ़ा बनाने से लेकर या हल्दी वाला दूध पीने से शरीर को ठंड से बचाया जा सकता है. लेकिन ये चीजें शरीर को ऊर्जा प्रदान नहीं करतीं. ऐसे में बाजरा एक ऐसा अन्न है, जो ऊर्जा के साथ-साथ कई बीमारियों से भी बचाता है. सिर्फ खाना ही नहीं, बाजरे का पानी भी शरीर के लिए लाभकारी होता है.

बाजरा एक ग्लूटेन मुक्त अनाज है. बाजरे की तासीर गर्म होती है तो इसका इस्तेमाल मुख्यत: सर्दियों में किया जाता है, लेकिन राजस्थान में हर सीजन में बाजरे का सेवन किया जाता है. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, कर्नाटक, और गुजरात में बाजरे की खेती की जाती है और पशुओं को भी आहार के तौर पर दिया जाता है.

बाजरा तासीर में गर्म होने के साथ कई गुणों से भरपूर होता है. बाजरे में आयरन, फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक और पोटेशियम होता है. इसमें विटामिन बी1, बी2, बी3 और बी6 सबसे अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. ऐसे में बाजरा युक्त खाद्य पदार्थों को अपने खाने में शामिल करना अच्छा रहेगा. बाजरा युक्त खाद्य पदार्थ सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने गए हैं. बाजरा युक्त खाद्य पदार्थ न सिर्फ कुपोषण दूर करने में मदद करते हैं, बल्कि ये संभावित प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक्स भी माने जाते हैं.

बाजरे का सेवन करने से हड्डियों को मजबूती मिलती है. बाजरे में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. बाजरे का सेवन करने के अलग-अलग तरीके हैं. इसके लिए बाजरे की रोटी, बाजरे की टिक्की, बाजरे की रोटी और खिचड़ी बनाई जा सकती हैं. बाजरे को भिगोकर सुबह उसका पानी पीना भी फायदेमंद होता है.

बाजरे में मैग्नीशियम और पोटेशियम सही मात्रा में होते हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करते हैं. अगर बाजरे का सेवन रोजाना सही मात्रा में किया जाए तो ये शरीर के लिए लाभकारी होगा. अगर बाजरा खाने से कब्ज की समस्या बनती है, तो एक-एक दिन छोड़कर इसका सेवन किया जा सकता है. कुछ लोगों को बाजरे से पाचन संबंधी समस्या हो सकती है. ऐसे में सेवन कम मात्रा में करें. इसके अलावा बाजरा के सेवन से डायबटिज नियंत्रित रहती है, वजन कंट्रोल रहता है, शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है और ऊर्जा और शक्ति भी मिलती है.
 


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Written by: Taushif

01 Nov 2025  ·  Published: 10:10 IST

जावित्री सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाती, शरीर की कई बीमारियों से भी देती है सुरक्षा

प्रतीकात्मक फोटो

फाइल फोटो

Javitri Benefits: जावित्री, जायफल का बाहरी लाल रंग का आवरण होता है. इसका टेस्ट थोड़ा तीखा और बेहद खुशबूदार होता है, इसलिए इसे मसालों में खास जगह दी जाती है. आयुर्वेद में इसे गर्म तासीर वाला माना जाता है. आम भाषा में कहें तो जावित्री शरीर को गर्माहट देती है और पाचन को तेज करती है. खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही ये आपके सेहत का भी ख्याल रखता है. पुराने समय से लोग इसे मन को प्रसन्न रखने, भूख बढ़ाने और शरीर को हल्का महसूस कराने वाली चीज के रूप में भी इस्तेमाल करते आए हैं.

पुरानी घरेलू विधियों में जावित्री को पेशाब ज्यादा आने या बार-बार लगने की समस्या में इस्तेमाल किया जाता था. लोग इसका थोड़ा-सा चूर्ण खांड या मिश्री के साथ पानी या दूध में मिलाकर पीते थे. नपुंसकता जैसी समस्याओं में भी पुराने वैद्य जावित्री, जायफल, बड़ी इलायची और थोड़ी सी अफीम मिलाकर बनाई गई औषधि का उपयोग करते थे, लेकिन आज के समय में ऐसे मिश्रण बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल नहीं लेने चाहिए.

श्वास या दमे जैसी दिक्कतों में जावित्री को पान में रखकर खाने का चलन भी पुराने समय में देखा गया है. दांत के दर्द में इसे माजूफल व कुटकी के साथ उबालकर कुल्ला करने के लिए कहा जाता था. दस्त, पेचिश या बार-बार टट्टी होने पर जावित्री को छाछ या दही के साथ देने की परंपरा भी रही है. गठिया यानी जोड़ों के दर्द में जावित्री के साथ सोंठ को गर्म पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है. हृदय को मजबूत बनाने के लिए दालचीनी, अकरकरा और जावित्री का चूर्ण शहद के साथ लेने की सलाह दी जाती थी.

चेचक (मसूरिका/माता) जैसी बीमारियों में भी इसे बहुत बारीक पीसकर छोटी मात्रा में देने की पुरानी मान्यता बताई जाती है. ध्यान रखने वाली सबसे जरूरी बात यह है कि जावित्री का अधिक मात्रा में सेवन करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे सिरदर्द या घबराहट जैसे लक्षण हो सकते हैं.
 


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Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

21 Nov 2025  ·  Published: 21:56 IST