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कमजोर हृदय बढ़ा सकता है परेशानी, कम ईएफ को बिलकुल न करें नजरअंदाज

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फाइल फोटो

Low Ejection Fraction Heart: दिल की ताकत समझनी हो तो कभी भी इजेक्शन फ्रैक्शन (EF) को हल्के में नहीं लेना चाहिए. दिल हर धड़कन में जितना खून शरीर में भेजता है, उसी का प्रतिशत ईएफ कहलाता है. अगर दिल मजबूती से सिकुड़ता है तो पम्पिंग अच्छी रहती है और ईएफ नॉर्मल आता है, लेकिन जब दिल की मांसपेशियां थकने लगती हैं, जकड़न बढ़ने लगती है या दिल को जरूरी ताकत नहीं मिल पाती, तब ईएफ कम होने लगता है.

इसी वजह से डॉक्टर हार्ट मरीज का सबसे पहले ईएफ की रिपोर्ट चेक करते हैं. ईएफ मापने के लिए सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है इको टेस्ट. इसमें दिल की दीवारें साफ दिखाई देती हैं और पता चलता है कि दिल कितना खून पंप कर रहा है, वाल्व ठीक काम कर रहे हैं या नहीं और खून का फ्लो कैसा है. साल में कम से कम एक बार ये टेस्ट कराना अच्छा माना जाता है. ईएफ की रेंज भी बहुत कुछ बताती है. 55-70 नॉर्मल, 41-54 हल्की कमी, 31-40 मध्यम कमी और 30 से कम गंभीर स्थिति मानी जाती है.

ईएफ कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे पुराना हाई बीपी, हार्ट अटैक का इतिहास, ज्यादा तनाव, शराब का अधिक सेवन, अनकंट्रोल शुगर, ब्लॉकेज, थायरॉयड समस्या, स्मोकिंग और कुछ वायरल इंफेक्शन जो दिल की मांसपेशियों को कमजोर कर देते हैं. ईएफ कम होने के लक्षण भी अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं, जैसे सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, जल्दी थक जाना, धड़कन बढ़ना, पैरों में सूजन या रात में सांस लेने में परेशानी.

आयुर्वेद के मुताबिक, जब हृदय कमजोर होता है तो शरीर की शक्ति और प्राणवायु पर असर पड़ने लगता है. रसधातु की कमी, दोषों का असंतुलन और मानसिक तनाव इसे और बिगाड़ सकते हैं. अर्जुन, द्राक्ष, अश्वगंधा और पुष्करमूल जैसी औषधियां हृदय को पोषण देने वाली मानी जाती हैं. हल्की वॉक, संतुलित भोजन और मन को शांत रखकर भी काफी सुधार देखा गया है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ईएफ कम होने का मतलब है कि दिल की मांसपेशियां कमजोर या डैमेज हैं. 

सही मेडिसिन और लाइफस्टाइल सुधार मिलकर कई मरीजों में ईएफ को 10-15 प्रतिशत तक बढ़ा देते हैं. कम नमक, हल्का खाना, सुबह टहलना, बीपी–शुगर कंट्रोल, तनाव कम करना और समय पर सोना-जागना दिल को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, लेकिन अगर अचानक सांस रुकने लगे, तेज सीने में दर्द हो या धड़कन बहुत तेज महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
 


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Written by: Taushif

24 Nov 2025  ·  Published: 11:21 IST

Detox Herbs: सुबह तक पेट और लिवर हो जाएंगे साफ, बस अपनाएं किचन के ये 4 पत्ते

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Detox Herbs: शरीर में जब गंदगी जमा होती है तो उसका असर सीधे डाइजेशन, स्किन और एनर्जी लेवल पर दिखने लगता है. थकान, मुंहासे , पेट में भारीपन या सुस्ती, ये सब इसी की निशानी हैं. डिटॉक्स के लिए लोग महंगे ग्रीन जूस या सप्लीमेंट्स लेते हैं, लेकिन असली सफाई तभी होती है जब आंतें और लिवर ठीक से काम करें. इसका आसान उपाय आपके किचन में ही छिपा है. चार ऐसे पत्तों में, जो शरीर को भीतर से साफ कर देते हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं ये 4 पत्ते और इस्तेमाल कैसे करें.

1. सेना पत्ता (Senna Leaf)
सेना पत्ता सबसे असरदार डिटॉक्स माना जाता है. यह आंतों की मसल्स को एक्टिव करता है और पुरानी जमा गंदगी को बाहर निकालता है. कब्ज या सख्त स्टूल की समस्या वाले लोगों के लिए यह बेहद फायदेमंद है. सबसे पहले आधा चम्मच सेना पाउडर में थोड़ा काला नमक मिलाकर रात को गर्म पानी के साथ लें. साथ ही इसका सेवन हफ्ते में 1-2 बार ही करें, क्योंकि ज्यादा लेने से आदत बन सकती है.

2. नीम की पत्तियां (Neem Leaves)
नीम की पत्तियां शरीर से बैक्टीरिया और टॉक्सिन्स को बाहर करती हैं. यह पेट में संक्रमण, माउथ अल्सर, फूड पॉइजनिंग और स्किन प्रॉब्लम्स में मददगार है. सबसे पहले सुबह खाली पेट कुछ नीम की पत्तियां चबाएं या नीम कैप्सूल लें. इसके बाद पेट की सफाई के साथ-साथ त्वचा भी साफ और चमकदार रहती है.

3. करी पत्ता (Curry Leaves)
करी पत्ता लिवर को एक्टिव करता है और बाइल प्रोडक्शन बढ़ाता है, जिससे पाचन बेहतर होता है. यह फैटी लिवर और पेट के आसपास जमा फैट को घटाने में मदद करता है. करी पत्ते को चबाकर या उसका पाउडर गर्म पानी के साथ रात को सोने से पहले लें.

4. पुदीना (Mint Leaves)
पुदीना पेट की मसल्स को रिलैक्स करता है, गैस और ब्लोटिंग को कम करता है और पेट की जलन को शांत करता है. यह इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याओं में भी असरदार है. सबसे पहले रात को सोने से पहले पुदीने की चाय पीएं. इसके बाद पेट ठंडा रहता है और नींद भी अच्छी आती है.


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Written by: Taushif

19 Oct 2025  ·  Published: 20:46 IST

दिनभर खुश और फोकस्ड रहना चाहते हैं? अपनाइए आर्थर ब्रूक्स की मॉर्निंग आदतें

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

Harvard Morning Routine: हमारी सुबह की शुरुआत सिर्फ मूड पर ही नहीं, बल्कि दिनभर की एनर्जी, क्रिएटिविटी और फोकस पर भी असर डालती है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आर्थर ब्रूक्स ने ऐसा मॉर्निंग रूटीन तैयार किया है, जो उन्हें पूरे दिन एनर्जेटिक, पॉजिटिव और खुश रखता है. आइए जानते हैं उनका पूरा रूटीन...

सूर्योदय से पहले उठना
ब्रूक्स रोज़ाना सुबह 4:30 बजे उठते हैं. उनका मानना है कि जल्दी उठने से दिमाग शांत रहता है और दिन की शुरुआत फोकस के साथ होती है. कई रिसर्च में भी यह साबित हुआ है कि सुबह जल्दी उठने वाले लोग ज़्यादा क्रिएटिव और आत्मविश्वासी होते हैं.

हर दिन एक्सरसाइज
ब्रूक्स उठने के करीब 15 मिनट बाद अपने घर के जिम में एक घंटे की एक्सरसाइज करते हैं. इसमें कार्डियो और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग दोनों शामिल होते हैं. वह कहते हैं, “मैं हफ्ते के सातों दिन एक्सरसाइज करता हूं. इससे मेरा मूड अच्छा रहता है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है.”

मेडिटेशन या जर्नलिंग
हर दिन वे एनालिटिकल मेडिटेशन करते हैं, जो दलाई लामा से प्रेरित है. कभी वे चर्च में जाकर ध्यान लगाते हैं या कार में बैठकर कैथोलिक मेडिटेशन करते हैं. उनका कहना है कि यह उन्हें आत्मा से जोड़ता है और मन को शांत रखता है. जो लोग ध्यान नहीं कर पाते, वे 20-30 मिनट जर्नलिंग करके भी मन की शांति पा सकते हैं.

हेल्दी और प्रोटीन से भरपूर नाश्ता
ब्रूक्स सुबह के नाश्ते में करीब 60 ग्राम प्रोटीन लेते हैं. वे ग्रीक योगर्ट, व्हे प्रोटीन, अखरोट और बेरीज का मिश्रण खाते हैं. इससे उनका पेट लंबे समय तक भरा रहता है और वे दिनभर एक्टिव महसूस करते हैं.

सुबह के वक्त फोकस्ड वर्क
ब्रूक्स अपनी सुबह की एनर्जी सोशल मीडिया पर बर्बाद नहीं करते. इसके बजाय, वे इस वक्त को अपने सबसे क्रिएटिव और गहन काम में लगाते हैं. उनका कहना है, “सुबह के दो घंटे मेरा सबसे प्रोडक्टिव टाइम होता है.”

अपना रूटीन खुद बनाएं
वे कहते हैं कि हर व्यक्ति का मॉर्निंग रूटीन अलग होता है. किसी को एक्सरसाइज, किसी को मेडिटेशन या राइटिंग सूट करती है. ज़रूरी यह है कि आप एक स्थिर और अनुशासित शुरुआत करें, जिससे दिनभर पॉजिटिविटी बनी रहे.


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Written by: Taushif

25 Oct 2025  ·  Published: 19:12 IST

लिवर की गंदगी साफ करेगा ये डाइट प्लान, सिर्फ 7 फूड्स से मिलेगा कमाल का असर

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फाइल फोटो

Fatty Liver Diet: अमेरिका के फ्लोरिडा के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जोसेफ सलहब ने बताया है कि कुछ खास फल और सब्जियां आपकी लिवर हेल्थ को बेहतर बना सकती हैं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में ऐसे 7 फूड्स का जिक्र किया है जो लिवर को मजबूत करते हैं और शरीर की ओवरऑल हेल्थ को भी सुधारते हैं. डॉ. सलहब कहते हैं कि फल और सब्जियां सिर्फ रंग और स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि इनमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करते हैं.

क्रैनबेरी: इसमें मौजूद पॉलीफेनॉल्स पेट के बैक्टीरिया को संतुलित रखते हैं, जिससे लिवर का कामकाज सही रहता है.

तरबूज और नींबू: तरबूज में सिट्रूलाइन और नींबू में विटामिन C होता है, जो लिवर में ब्लड फ्लो बढ़ाकर उसे एक्टिव रखता है.

अनार: इसमें एलागिटैनिन और प्यूनिकैलेगिन्स जैसे तत्व होते हैं, जो लिवर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं.

रास्पबेरी: यह फाइबर और एंथोसायनिन से भरपूर होती है, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है और फैट मेटाबॉलिज्म को सुधारती है.

सेब और दालचीनी: सेब में मौजूद पेक्टिन और दालचीनी के तत्व इंसुलिन रेसिस्टेंस को कम करते हैं और हेल्दी लिपिड्स बनाए रखते हैं.

चुकंदर (बीटरूट): इसमें नाइट्रेट और बीटाइन होता है, जो लिवर की कोशिकाओं से फैट को बाहर निकालने और टॉक्सिन्स को साफ करने में मदद करता है.

स्ट्रॉबेरी और डार्क चॉकलेट: यह कॉम्बो फ्लेवनॉल्स और एंथोसायनिन से भरपूर है, जो ब्लड वेसल्स को मजबूत बनाता है और दिल की सेहत के लिए अच्छा होता है.

डॉ. सलहब सलाह देते हैं कि अगर आप डार्क चॉकलेट खाते हैं, तो उसमें 70% या उससे अधिक कोको होना चाहिए. उनका कहना है कि इन फलों और सब्जियों को रोज की डाइट में शामिल करने से लिवर टॉक्सिन्स कम होते हैं और शरीर ज्यादा एनर्जी से भर जाता है.


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Written by: Taushif

15 Oct 2025  ·  Published: 10:59 IST