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Kidney Health: किडनी, जिसे हिंदी में गुर्दे कहा जाता है, हमारे शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है. यह खून को साफ रखने, शरीर से अपशिष्ट पदार्थ निकालने और पानी व खनिजों का संतुलन बनाए रखने का काम करती है. इसे शरीर का फिल्टर प्लांट भी कहा जाता है. अगर यह फिल्टर कमजोर पड़ जाए या सही से काम करना बंद कर दे तो शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं, जिससे सेहत गंभीर रूप से प्रभावित होती है.
किडनी क्यों है इतनी जरूरी?
अमेरिका के नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक, किडनी हर दिन लगभग 200 लीटर खून फिल्टर करती है और शरीर के केमिकल बैलेंस को बनाए रखती है. जब किडनी कमजोर होती है, तो शरीर कई संकेत देने लगता है. इन्हीं संकेतों में से एक है नींद की कमी या ठीक से नींद न आना.
किडनी रोग से पीड़ित लोगों में नींद की समस्या काफी आम है. खासतौर पर क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD) वाले आधे से ज्यादा मरीज किसी न किसी तरह की स्लीप डिसऑर्डर से जूझते हैं.
1. खून में टॉक्सिन जमा होना
NKF की रिपोर्ट बताती है कि जब गुर्दे शरीर से टॉक्सिन को बाहर नहीं निकाल पाते, तो ये खून में ही जमा होने लगते हैं. इससे शरीर को आराम करने में परेशानी होती है और दिमाग भी शांत नहीं हो पाता. नतीजा, सोने में दिक्कत और बार-बार नींद टूटना.
2. रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (RLS)
किडनी के मरीजों में RLS बहुत आम है. इसमें पैरों में अजीब सी झुनझुनी, खुजली या बेचैनी महसूस होती है, जिससे बार-बार पैर हिलाने का मन करता है. यह समस्या रात में ज्यादा होती है और नींद को बुरी तरह प्रभावित करती है. यह अक्सर आयरन की कमी या मिनरल असंतुलन से जुड़ी होती है.
3. स्लीप एपनिया
किडनी रोगियों में साधारण लोगों की तुलना में स्लीप एपनिया काफी ज्यादा पाया जाता है. इसमें नींद के दौरान सांस रुक-रुक कर चलती है, जिससे बार-बार नींद खुल जाती है. इसके कारण मरीज दिन भर थका हुआ और नींद से वंचित महसूस करता है.
4. हार्मोनल बदलाव
किडनी शरीर के हार्मोन संतुलन को नियंत्रित करने में भी मदद करती है. जब यह बीमार हो जाती है, तो मेलाटोनिन जैसे नींद नियंत्रित करने वाले हार्मोन का स्तर बिगड़ने लगता है. इससे नींद का पैटर्न प्रभावित होता है और मरीज को सोने में कठिनाई होती है.
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Navratri Fasting Recipes: नवरात्रि का पर्व देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. इस दौरान लोग देवी की पूजा-अर्चना के साथ-साथ उपवास भी रखते हैं. उपवास के दिनों में हल्का, पौष्टिक और स्वादिष्ट खाना ऊर्जा बनाए रखने के लिए ज़रूरी होता है. अक्सर व्रत में साबूदाना खिचड़ी या फल खाना आम है, लेकिन हर बार वही व्यंजन खाने से ऊब हो सकती है. ऐसे में अगर आप कुछ अलग और स्वादिष्ट रेसिपी आज़माना चाहते हैं, तो वरई पुलाव और बेलामृत शरबत आपके व्रत के मेनू को खास बना सकते हैं. ये दोनों ही व्यंजन बनाने में आसान, स्वादिष्ट और पौष्टिक हैं.
वरई पुलाव (सामक चावल पुलाव)
वरई या सामक चावल व्रत के दिनों में खूब खाया जाता है. यह हल्का और ऊर्जा देने वाला होता है.
ज़रूरी सामग्री
सामक चावल 200 ग्राम, हरी मिर्च 10 ग्राम, मूंगफली 20 ग्राम, काजू 20 ग्राम, बादाम 20 ग्राम, अनार के दाने 30 ग्राम (गार्निश के लिए), सेंधा नमक 1 छोटा चम्मच, दूध 350 मिलीलीटर, घी 40 मिलीलीटर.
बनाने का तरीका
सामक चावल को अच्छी तरह धोकर पानी निकाल लें. एक कड़ाही में घी गरम करें और उसमें हरी मिर्च, मूंगफली, काजू और बादाम हल्का सुनहरा होने तक भूनें. अब इसमें धुले हुए सामक चावल और सेंधा नमक डालें. फिर दूध डालकर मिलाएं और धीमी आंच पर ढककर 10 मिनट तक पकाएं, जब तक चावल नरम हो जाएं और दूध सूख जाए. गैस बंद करने के बाद 5 मिनट रहने दें. कांटे से हल्के-हल्के फुलाएं और ऊपर से अनार व ड्राईफ्रूट्स डालकर सर्व करें.
बेलामृत शरबत
व्रत के दौरान ताज़ा और ठंडा पेय शरीर को हाइड्रेटेड और ताज़गीभरा रखता है. बेलामृत शरबत इस काम के लिए बिल्कुल सही है.
ज़रूरी सामग्री
एक पका बेल फल, एक पैशन फ्रूट, नींबू का रस 20 मिली, कच्चा शहद सिरप 25 मिली.
बनाने का तरीका
बेल और पैशन फ्रूट का गूदा निकाल लें. इसे एक बड़े जार या शेकर में डालें. नींबू का रस और शहद सिरप डालकर बर्फ के साथ अच्छी तरह हिला लें. मिश्रण को छानकर बर्फ वाले लंबे गिलास में डालें. ऊपर से नींबू का टुकड़ा या पुदीने की पत्ती से सजाकर ठंडा-ठंडा परोसें. इन दोनों रेसिपीज़ से आपका नवरात्रि उपवास पौष्टिक, स्वादिष्ट और एनर्जी से भरपूर रहेगा.
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Yellow Phlegm Ayurvedic Treatment: सर्दियों का मौसम आते ही बच्चों से लेकर बड़े तक संक्रमण, सर्दी-बुखार और जकड़न का शिकार हो जाते हैं. सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यादा शरीर में कफ बनने की परेशानी होती है. कई बार कफ का रंग पीला हो जाता है, जो शरीर में पनप रहे संक्रमण या सूजन की तरफ इशारा करता है. हालांकि कफ बनने के शुरुआती दिन में डरने वाली कोई बात नहीं होती है, लेकिन अगर कफ 10 या उससे ज्यादा दिन तक पीले रंग का निकल रहा है और उसके साथ बुखार और सर्दी के लक्षण हैं, तो ऐसे में डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
आयुर्वेद में इसे कफ और पित्त दोष के संतुलन के तौर पर देखा जाता है. जब हमारी शरीर की श्वेत रक्त कोशिकाएं शरीर में मौजूद संक्रमण से लड़ती हैं और नष्ट हो जाती हैं, तो कफ का रंग पीला होता है. ये संकेत देता है कि हमारा शरीर इंफ्लेमेशन और संक्रमण से लड़ रहा है.
आयुर्वेद में कफ से निपटने के लिए कई घरेलू और देसी उपाय बताए गए हैं, जिनके निरंतर प्रयास से शरीर में कफ जमने की समस्या को धीमा किया जा सकता है, जैसे भाप लेना. भाप लेने से शरीर में जकड़न और कफ दोनों से राहत मिलती है. भाप लेते समय एक बात का ध्यान रखें कि जब भी कफ की समस्या बने तो मुंह खोलकर भाप अंदर की तरफ लेनी चाहिए, इससे कफ बाहर आना शुरू हो जाता है. लोग नाक के जरिए भाप को लेने की कोशिश करते हैं, जो गलत है.
हल्दी वाला दूध भी कफ में राहत देता है. रात में कच्ची हल्दी और दूध को साथ में उबालकर लेने से लाभ मिलता है. इससे शरीर गर्म रहता है और कफ निकलने लगता है. हल्दी कफ की वजह से होने वाली सूजन को भी कम करने का काम करती है. मुलेठी एक ऐसी औषधि है जिसे एक नहीं बल्कि कई रोगों में काम में लिया जाता है.
खांसी से लेकर बुखार तक को ठीक करने में मुलेठी का इस्तेमाल किया जाता है. मुलेठी का काढ़ा बनाकर सुबह और शाम लिया जा सकता है या दिन के समय मुलेठी को चबाया जा सकता है. इसके अलावा, तुलसी का अर्क शहद के साथ लिया जा सकता है. इसके लिए तुलसी के पत्तों को पीसकर उसमें शहद और सोंठ मिलाकर हल्का गुनगुना कर लें. दिन में तीन बार इसका सेवन किया जा सकता है. ये नुस्खा बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए फायदेमंद है.
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आजकल की डिजिटल जीवनशैली में दिन भर फ़ोन और लैपटॉप का इस्तेमाल आम बात हो गई है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका आपकी आंखों पर कितना असर पड़ता है? स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों पर तनाव बढ़ाती है. नतीजा आंखों के नीचे सूजन और पफीनेस के रूप में सामने आता है.
आंखों में सूजन सिर्फ़ स्क्रीन की वजह से ही नहीं होती-नींद की कमी, ज़्यादा नमक वाला खाना, एलर्जी, हार्मोनल बदलाव या रोना भी इसके कारण हो सकते हैं. आंखों के आसपास तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे ऊतकों में सूजन आ जाती है और चेहरा थका हुआ दिखने लगता है. लेकिन अच्छी खबर यह है कि कुछ आसान घरेलू उपायों से इस समस्या को कम किया जा सकता है.
1. DIY एंटी-पफ सीरम
1 बड़ा चम्मच एलोवेरा जेल लें, उसमें विटामिन E की 2 बूंदें और लैवेंडर या गुलाब के एसेंशियल ऑयल की 1 बूंद मिलाएं. रात को सोने से पहले आंखों के नीचे हल्के हाथों से लगाएं.
2. कैमोमाइल टी बैग से सिकाई
दो कैमोमाइल टी बैग्स को गर्म पानी में भिगोएं और फ्रिज में ठंडा होने दें. फिर इसे 10 मिनट तक आंखों पर रखें. इससे सूजन कम होगी और आंखों को आराम मिलेगा.
3. गुनगुना नमक का पानी
एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच समुद्री नमक मिलाएं. रुई भिगोकर आंखों के नीचे 5-10 मिनट तक रखें. यह उपाय अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने में मदद करता है, लेकिन ध्यान रखें कि यह सीधे आंखों में न जाए.
4. एलोवेरा और विच हेज़ल जेल
एक चम्मच एलोवेरा जेल में विच हेज़ल की 2-3 बूंदें मिलाकर आंखों के नीचे लगाएं. यह त्वचा में कसाव लाता है और सूजन कम करता है.
5. मालिश से जलनिकासी करें
नारियल या लैवेंडर के तेल से आंखों की अंदर से बाहर की ओर धीरे से मालिश करें. इससे लसीका जल निकासी में सुधार होता है और सूजन कम होती है.