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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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खजूर खाने से होती है चमकदार स्किन और मजबूत हड्डियां, जानिए कैसे!

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Dates Health Benefits: खजूर एक ऐसा मीठा और स्वादिष्ट फल है जो न सिर्फ टेस्ट में बेहतरीन होता है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. खजूर को नेचुरल हेल्थ बूस्टर भी कहा जाता है. खजूर के पेड़ ज्यादातर गर्म और शुष्क इलाकों में पाए जाते हैं. खजूर की खेती हजारों सालों से की जा रही है और यह खासतौर पर भारत के राजस्थान, गुजरात और पंजाब में उगाया जाता है.

इसके पोषक तत्वों की बात करें, तो खजूर में कार्बोहाइड्रेट, आयरन, फाइबर, प्रोटीन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और विटामिन बी6 जैसे जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसमें ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और सुक्रोज होते हैं जो इसे न सिर्फ मीठा बनाते हैं, बल्कि शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का भी काम करते हैं. अगर कभी आपको थकान महसूस हो तो 2–3 खजूर खा लेने से तुरंत एनर्जी मिल जाती है.

खजूर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है. इसमें मौजूद फाइबर कब्ज को दूर करता है और पाचन में मदद करता है. इसके अलावा, खजूर दिल के लिए भी बहुत अच्छा होता है क्योंकि इसमें पोटेशियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखती है और दिल की सेहत को बनाए रखती है. हड्डियों के लिए भी यह कमाल का फल है क्योंकि इसमें कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है.

खजूर में मौजूद आयरन खून की कमी (एनीमिया) में बहुत फायदेमंद होता है. इसके अलावा, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन और बालों के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं. ये त्वचा को जवां और चमकदार रखते हैं और बालों को मजबूती देते हैं. गर्भवती महिलाओं के लिए भी खजूर बहुत उपयोगी होता है क्योंकि यह उन्हें ऊर्जा और पोषण देता है.

खजूर को कई तरीकों से खाया जा सकता है. इसे डायरेक्ट ऐसे ही खाया जाता है. आप चाहें तो इसे दूध में भिगोकर या शेक, हलवा या मिठाई में भी डालकर खा सकते हैं. हालांकि, डायबिटीज के मरीज इसे सीमित मात्रा में ही खाएं, क्योंकि इसमें शुगर की मात्रा अधिक होती है.


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Written by: Taushif

10 Nov 2025  ·  Published: 10:40 IST

किस्मत के धनी होते हैं इन तिथियों को जन्मे लोग, कमाते हैं खूब नाम और पैसा

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Lucky Birth Dates Astrology: न्यूमरोलॉजी में कहा जाता है कि जन्म की तारीख का हमारी ज़िंदगी की दिशा और किस्मत पर बहुत ज़्यादा असर पड़ता है. इसी तरह, कुछ खास तारीखों पर पैदा हुए लोग सच में बहुत भाग्यशाली माने जाते हैं. ये लोग न सिर्फ नाम कमाते हैं, बल्कि बहुत सारा पैसा भी जमा करते हैं. आइए जानते हैं कि ये कौन सी तारीखें हैं और इनकी क्या खास बातें हैं.

सबसे पहले, उन लोगों की बात करते हैं जिनकी जन्म तारीख 1, 10, 19 और 28 है. इन्हें रूट नंबर 1 वाले लोग कहा जाता है. ज्योतिष के अनुसार, यह सूर्य का नंबर है। ऐसे लोगों में जन्म से ही लीडरशिप क्वालिटी होती है. वे किसी भी काम में पीछे नहीं रहते. चाहे नौकरी हो या बिज़नेस, वे हमेशा आगे रहते हैं. उनकी सोच बड़ी होती है और वे हमेशा अपने तरीके से कुछ नया और अलग करने की कोशिश करते हैं. हार मानना ​​उनके लिए कोई ऑप्शन नहीं है. वे जो भी करने का फैसला करते हैं, उसे पूरा करते हैं.

फिर आते हैं 2, 11, 20 और 29 तारीख को पैदा हुए लोग. इनका रूट नंबर 2 माना जाता है. ये लोग इमोशनल होते हैं, लेकिन साथ ही बहुत इंटेलिजेंट और शांति पसंद भी होते हैं. इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये आसानी से दोस्त बना लेते हैं और हर जगह अपनेपन का एहसास फैलाते हैं. इनमें सफलता पाने की कला होती है. ये आसानी से नाम और पैसा दोनों कमा लेते हैं.

अगर हम 3, 12, 21 और 30 तारीख को पैदा हुए लोगों की बात करें, तो उनका रूट नंबर 3 होता है. उनकी पर्सनैलिटी में एक जादू होता है. लोग उनके आस-पास खुश रहते हैं. वे बहुत क्रिएटिव होते हैं, और उनके दिमाग में हमेशा नए-नए आइडिया आते रहते हैं. वे अपने टैलेंट से अपनी किस्मत बदलते हैं और बहुत नाम कमाते हैं. उनकी बातों में ऐसा आकर्षण होता है कि लोग आसानी से उनके प्रभाव में आ जाते हैं. ज्योतिष के अनुसार, इन खास तारीखों पर पैदा हुए लोगों की किस्मत में पहले से ही सफलता और धन लिखा होता है. ये लोग किसी भी फील्ड में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल होते हैं.
 


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Written by: Taushif

06 Dec 2025  ·  Published: 10:39 IST

छोटा बाजरा: सर्दियों में सेहत के लिए सुपरफूड, आयुर्वेद भी करता है इसकी सिफारिश

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Little Millet Benefits: भारत के कई ग्रामीण इलाकों में सदियों से खाया जाने वाला छोटा बाजरा, जिसे अंग्रेज़ी में Little Millet कहा जाता है, आज एक बार फिर लोकप्रिय हो रहा है. पहले यह आम भोजन का हिस्सा था, लेकिन अब इसे एक सुपरफूड माना जा रहा है, क्योंकि इसके फायदों की सूची लंबी है.

छोटा बाजरा पोषण का बेहतरीन स्रोत है और इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, विटामिन बी और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. यह शरीर को ऊर्जा देने, खून की कमी दूर करने, हड्डियों को मजबूत करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. खासकर सर्दियों के मौसम में इसे खाना बेहद फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को गर्म रखता है और पाचन शक्ति को मजबूत करता है.

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी छोटा बाजरा को सुपरफूड की श्रेणी में रखा है. मंत्रालय का कहना है कि यह अनाज शरीर में ऊर्जा बनाए रखने, मेटाबॉलिज्म सुधारने और कई पाचन संबंधी बीमारियों में मदद करता है.

आयुर्वेद में छोटा बाजरा के फायदे और भी विस्तार से बताए गए हैं. आयुर्वेदिक सिद्ध साहित्य के अनुसार इसमें गैलिक एसिड, क्लोरोजेनिक एसिड, फेरुलिक एसिड और पी-कौमरिक एसिड जैसे सक्रिय बायो-कंपाउंड होते हैं. ये तत्व शरीर में एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करते हैं, जिससे सूजन कम होती है और शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता बढ़ती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि रोज़ाना भोजन में छोटा बाजरा शामिल करने से पाचन मजबूत होता है और मोटापे, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. साथ ही यह डायबिटीज वालों के लिए भी सुरक्षित विकल्प है, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है. छोटा बाजरा को खिचड़ी, उपमा, दलिया या रोटी की तरह आसानी से रोज़ाना की डाइट में शामिल किया जा सकता है.
 


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Written by: Taushif

24 Nov 2025  ·  Published: 11:41 IST

सर्दियों में आपकी ये एक गलती बिगाड़ सकती है सेहत, पहले ही हो जाएं सावधान

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Winter Health Mistakes: सर्दियों में लोगों को अक्सर कम प्यास लगती है. ठंडी हवा, हीटर और सूखा माहौल धीरे-धीरे शरीर को अंदर से सुखा देते हैं. बहुत से लोग पानी पीना भूल जाते हैं और यह छोटी सी आदत धीरे-धीरे डिहाइड्रेशन का बड़ा कारण बन जाती है. डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में दस में से एक मरीज़ डिहाइड्रेशन से परेशान रहता है और इस समस्या को नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है. डिहाइड्रेशन सिर्फ़ गर्मियों की समस्या नहीं है; यह सर्दियों में भी एक छिपा हुआ खतरा पैदा करता है.

जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो कई प्रोसेस पर असर पड़ता है. ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है, किडनी टॉक्सिन को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ जाता है और इम्यूनिटी कमज़ोर होने लगती है. शुरुआती लक्षणों में सिरदर्द, थकान, रूखी त्वचा, फटे होंठ, गहरे रंग का यूरिन, मांसपेशियों में ऐंठन, दिल की धड़कन तेज़ होना, लो ब्लड प्रेशर और हल्का चक्कर आना शामिल हैं. बुज़ुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं इस स्थिति के प्रति सबसे ज़्यादा संवेदनशील होते हैं.

आयुर्वेद में इसे "तृष्णा विकार" कहा जाता है. पानी की कमी से रस धातु कमज़ोर हो जाती है, अग्नि धीमी हो जाती है और वात बढ़ जाता है. इससे शरीर ड्राई हो जाता है, एनर्जी कम हो जाती है और कब्ज़ और गैस जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. मॉडर्न साइंस भी कहता है कि शरीर का लगभग 60 परसेंट हिस्सा पानी है और इसके बिना शरीर के सभी कामों पर असर पड़ता है.

सबसे अच्छा तरीका है कि उठते ही गुनगुना पानी पिएं, दिन भर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पिएं और खाने से 30 मिनट पहले पानी पिएं. खाने के दौरान ज़्यादा पानी पीने से बचें. सर्दियों में भी 7-8 गिलास पानी ज़रूरी है. अगर ज़्यादा मेहनत हो तो पानी की मात्रा बढ़ा दें. सर्दियों में गुनगुना पानी सबसे अच्छा होता है. पेशाब रोकने की आदत से भी खतरा बढ़ सकता है. इससे किडनी पर दबाव पड़ता है, टॉक्सिन जमा होते हैं और UTI होने की संभावना बढ़ जाती है. ब्लैडर कमज़ोर हो जाता है.
 


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Written by: Taushif

03 Dec 2025  ·  Published: 01:33 IST