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अंडा एक ऐसा पोषक तत्वों से भरपूर भोजन है जो लगभग हर घर में आसानी से उपलब्ध रहता है. इसे लोग नाश्ते से लेकर डिनर तक अपनी डाइट में शामिल करते हैं. अंडे में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स होते हैं, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं. इसके अलावा, अंडा कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाता है, जिससे यह व्यस्त जीवन में भी आसान और हेल्दी विकल्प बन जाता है.
लेकिन अगर अंडा खराब हो जाए, तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है. पुराने या खराब अंडे खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कई बार लोग फ्रिज में रखे अंडों को देखकर सोचते हैं कि वे ताजे हैं, लेकिन अंदर साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया पनप चुके होते हैं. इसलिए यह जानना जरूरी है कि अंडा खाने योग्य है या नहीं.
एक्सपायरी डेट: डिब्बे पर लिखी “यूज बाय” या “बेस्ट बिफोर” तारीख देखें.
छिलका टूटा या फटा: फटे अंडे में बैक्टीरिया जा सकते हैं.
छिलका चिपचिपा या गीला: यह खराबी की निशानी है.
फफूंदी या सफेद परत: छिलके पर सफेद धूल या फफूंदी दिखे तो अंडा न खाएं.
पानी टेस्ट: ठंडे पानी में डालें, ताजा अंडा नीचे लेटता है, तैरने वाला पुराना.
बदबू: फोड़ते ही सड़ी या सल्फर जैसी गंध आए तो फेंक दें.
सफेदी या योक का रंग: सफेदी में गुलाबी, हरा या ग्रे और योक फीका या फ्लैट हो तो खराब.
सफेदी पतली हो: पतली सफेदी पुराने अंडे की निशानी है.
पीला हिस्सा दबा या फीका: ताजगी के लिए योक गोल और टाइट होना चाहिए.
हिलाने पर आवाज: छपछप की आवाज अंडे के खराब होने का संकेत है.
लाइट टेस्ट: टॉर्च में देखें, बड़े हवादार बुलबुले वाला अंडा पुराना होता है.
अंडे हमेशा फ्रिज में और बंद डिब्बे में रखें. ताजे अंडे हेल्दी और सेहतमंद होते हैं, लेकिन खराब अंडे से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
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Makhana farming UP: उत्तर प्रदेश के बागवानी, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार और कृषि निर्यात राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को लखनऊ में मखाना विकास योजना की औपचारिक घोषणा की. भारत सरकार द्वारा 2025 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन के बाद शुरू की गई यह योजना पहले चरण में उत्तर प्रदेश सहित 10 राज्यों में लागू की जा रही है.
इस योजना का संचालन उत्तर प्रदेश का बागवानी विभाग करेगा. केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कार्य योजना को मंजूरी दे दी है और 158 लाख रुपये जारी किए हैं, जिसके माध्यम से राज्य में मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए व्यापक कार्यक्रम चलाए जाएंगे.
इस फंड का उपयोग तालाबों के चयन और निर्माण, किसान प्रशिक्षण, फ्रंटलाइन प्रदर्शन, खरीदार-विक्रेता बैठकों, मखाना पवेलियन के माध्यम से प्रचार, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में निर्यातकों की भागीदारी और जिला और राज्य स्तरीय सेमिनारों के आयोजन के लिए किया जाएगा. मखाना के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का भी प्रस्ताव है. मंत्री सिंह ने कहा कि मखाना एक सुपरफूड है, जिसकी मांग देश और विदेश दोनों जगह तेजी से बढ़ रही है और उत्तर प्रदेश की जलवायु इसके उत्पादन के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है.
पूर्वांचल के कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, बलिया, महाराजगंज, वाराणसी और बस्ती जिलों को मखाना की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है. जहां भी सिंघाड़े की खेती सफल होती है, वहां मखाना आसानी से उगाया जा सकता है. सरकार अगले वित्तीय वर्ष में मखाना उत्पादन क्षेत्र का काफी विस्तार करने, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराने और प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है, ताकि मखाना किसानों को सीधे आर्थिक लाभ मिल सके.
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Ulcerative Colitis Ayurvedic Treatment: अल्सरेटिव कोलाइटिस एक ऐसा रोग है, जो अक्सर पेट की सामान्य समस्याओं की तरह नजर आता है, लेकिन इसके पीछे आंतों में क्रॉनिक सूजन छिपी होती है. यह बड़ी आंत और रेक्टम को प्रभावित करता है और बार-बार पतले दस्त, खून के साथ मल, पेट में मरोड़ या दर्द, वजन घटने, भूख न लगना, कमजोरी और कभी-कभी बुखार जैसे लक्षण दिखाता है.
आयुर्वेद के मुताबिक, इस रोग का मुख्य कारण पित्त और वात दोष की वृद्धि है. पाचन शक्ति कमजोर होने से आंतों में सूजन और घाव बनते हैं. इसे संतुलित करने के लिए शीतल, पौष्टिक और दोष शांत करने वाले आहार की सलाह दी जाती है. कुछ आयुर्वेदिक औषधियां जैसे कुटजघन वटी, एलोवेरा रस, बेल फल, ईसबगोल, मुस्ता, सूतशेखर रस और कमदुधा रस आंतों की सूजन और दर्द कम करने में मदद करती हैं.
घरेलू उपाय भी काफी लाभकारी हैं. सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच ईसबगोल, रोज बेल का शरबत या पल्प, छाछ में पुदीना और सेंधा नमक और दिन में दो बार एलोवेरा और आंवला रस मिलाकर पीना बहुत फायदेमंद होता है. मसालेदार, खट्टे या बहुत गर्म भोजन से बचना चाहिए. आहार में दलिया, मूंग दाल खिचड़ी, उबली सब्जियां, नारियल पानी, छाछ और बेल शरबत शामिल करना चाहिए.
इसके साथ ही अपनी जीवनशैली में भी सुधार करें. नियमित योग और हल्की एक्सरसाइज जैसे वज्रासन, पवनमुक्तासन और भुजंगासन करें. साथ ही, तनाव कम लें, पर्याप्त नींद लें और सुबह हल्की सैर करें, क्योंकि किसी भी बीमारी या समस्या से छुटकारा पाने के लिए जीवनशैली में संतुलन बनाकर रखना बहुत जरूरी है.
वैज्ञानिक दृष्टि से अल्सरेटिव कोलाइटिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही आंतों की सेल्स पर हमला करती है. इससे आंतों में क्रॉनिक सूजन और धीरे-धीरे अल्सर बन जाते हैं. लेकिन सही समय पर उपचार, संतुलित आहार, आयुर्वेदिक औषधि और जीवनशैली परिवर्तन से यह पूरी तरह नियंत्रित रखा जा सकता है.
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योग हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को शांत और सक्रिय बनाने में भी मदद करता है. इन्हीं में से एक बेहद फायदेमंद आसन है चक्रासन. इसे व्हील पोज़ भी कहा जाता है, क्योंकि इस आसन में शरीर पहिए जैसा आकार बना लेता है. चक्रासन रीढ़, कमर, पेट, आंखों और पूरे शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है.
चक्रासन कैसे करें?
चक्रासन के फायदे
आयुष मंत्रालय और योग एक्सपर्ट के मुताबिक, नियमित चक्रासन करने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं. रीढ़ और कमर मजबूत होती है, शरीर में लचीलापन बढ़ता है, पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं, पाचन सुधरता है, कब्ज की समस्या में राहत मिलती है, हाथ, पैर और कंधे मजबूत होते हैं, मुद्रा (पोश्चर) में सुधार होता है, तनाव, चिंता और मानसिक थकान कम होती है और ऊर्जा और सक्रियता बढ़ती है. चक्रासन पूरे शरीर पर काम करता है, इसलिए इसे रोज़ाना करने से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से फायदा मिलता है.
किन लोगों को चक्रासन नहीं करना चाहिए?
चक्रासन बहुत लाभदायक है, लेकिन कुछ लोगों को इससे बचना चाहिए.
इसके अलावा, चक्रासन खाली पेट करना चाहिए और शुरुआत में योग प्रशिक्षक की निगरानी में करना बेहतर होता है. चक्रासन सही तरीके से और नियमित रूप से करने पर न केवल शरीर मजबूत होता है, बल्कि मन भी शांत और संतुलित रहता है. यह आसन वास्तव में पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाला एक संपूर्ण योग अभ्यास है.