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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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घर पर ही बनाएं वेज सूप पाउडर, हर सिप में स्वाद और सेहत

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Homemade Veg Soup Powder: सर्दियों में शरीर को गर्म, हल्का और पौष्टिक खाना चाहिए होता है. वेजिटेबल सूप सबसे अच्छा ऑप्शन माना जाता है. यह न सिर्फ शरीर को गर्म रखता है बल्कि इम्यूनिटी भी बढ़ाता है, डाइजेशन बेहतर करता है और तुरंत एनर्जी देता है. मार्केट में मिलने वाले सूप पाउडर में अक्सर मैदा, MSG, प्रिजर्वेटिव और फ्लेवर भरे होते हैं, जो बच्चों और बड़ों दोनों के लिए अनहेल्दी होते हैं. इसलिए, घर पर वेजिटेबल सूप पाउडर बनाना सबसे अच्छा और सेफ तरीका है.

घर पर सूप पाउडर बनाने के लिए, सबसे पहले सात सबसे पौष्टिक सब्जियां (गाजर, टमाटर, चुकंदर, शिमला मिर्च, पत्तागोभी, मटर और अदरक) चुनें. इनमें विटामिन A, C, K और आयरन भरपूर होता है, जो सर्दियों में इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं. पोषक तत्वों को खोने से बचाने के लिए इन्हें स्टीम या हल्का उबाल लें. इसके बाद, सब्जियों को अच्छी तरह सुखाकर बारीक पीस लें. आप इसमें काली मिर्च, हल्दी, अजवायन और सेंधा नमक भी मिला सकते हैं. यह पाउडर न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है बल्कि गर्मी, हीलिंग प्रॉपर्टीज और मेडिसिनल गुण भी देता है.

बारीक पिसे हुए पाउडर को एयरटाइट जार में स्टोर करें; यह 3-4 महीने तक फ्रिज में रखा जा सकता है. सूप बनाने के लिए, बस एक बड़ा चम्मच पाउडर लें, उसमें एक कप गर्म पानी और थोड़ा घी या मक्खन मिलाएं. सिर्फ़ 2 मिनट में एक हेल्दी, गर्म और पौष्टिक सूप तैयार हो जाता है. यह बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए हल्का और आसानी से पचने वाला ऑप्शन है.

इस सूप के कई फ़ायदे हैं. यह डाइजेशन में मदद करता है और ब्लोटिंग कम करता है. विटामिन C और बीटा-कैरोटीन तुरंत इम्यूनिटी बूस्ट करते हैं. गर्म सब्ज़ियां और मसाले ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं और सर्दियों की अकड़न को कम करते हैं. हल्का, ज़्यादा फाइबर और कम कैलोरी वाला होने के कारण, यह वज़न बनाए रखने में भी मदद करता है.

सर्दियों में लोग अक्सर कम पानी पीते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. इससे सिरदर्द, थकान, ड्राई स्किन, गहरे रंग का यूरिन और कमज़ोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बुज़ुर्ग, बच्चे और प्रेग्नेंट महिलाएं खास तौर पर कमज़ोर होते हैं. गुनगुना पानी पीना, दिन भर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना और सूप या हर्बल ड्रिंक्स पीना जैसी आसान सावधानियां शरीर को हाइड्रेटेड रखती हैं.


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Written by: Taushif

03 Dec 2025  ·  Published: 01:39 IST

बरसात में डेंगू-मलेरिया के साथ बर्ड फ्लू का कहर, अंडा खाने से कितना खतरा? जानिए एक्सपर्ट की राय

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

मॉनसून के दिनों में बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. जहां एक ओर मच्छरों से होने वाले डेंगू और मलेरिया जैसे बुखार लोगों को परेशान करते हैं, वहीं दूसरी ओर एच-5 एवियन इन्फ्लुएंजा, जिसे आमतौर पर बर्ड फ्लू कहा जाता है, भी खतरे की घंटी बजा देता है. यह बीमारी ज़्यादातर पक्षियों में पाई जाती है, लेकिन कुछ मामलों में इंसानों को भी प्रभावित कर सकती है.

ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से सामने आया है, जहां एक पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों को सतर्क रहने और रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

क्या अंडे से फैल सकता है बर्ड फ्लू?
यह सवाल फिलहाल आम लोगों में चर्चा का विषय है, खासकर उन लोगों में जो रोजाना अंडा खाते हैं.
हैदराबाद के चिकित्सक और टेलीमेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मुरली भास्कर एम के अनुसार:-
बर्ड फ्लू का वायरस सामान्यतः मुर्गियों को संक्रमित करता है. संक्रमित पक्षी के अंडे में वायरस मौजूद होने की संभावना बहुत कम होती है. अगर अंडा पूरी तरह पका हुआ हो, तो वायरस नष्ट हो जाता है और अंडा खाने के लिए सुरक्षित होता है. 

अंडे को सुरक्षित तरीके से खाने के उपाय
बर्ड फ्लू के दौरान अंडा खाते समय कुछ सावधानियां अपनाना ज़रूरी है. अंडे को अच्छी तरह पकाएं-योक (पीला हिस्सा) पूरी तरह सख्त होना चाहिए. वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए अंडे का तापमान कम से कम 74°C (165°F) तक पहुंचना चाहिए.

हाथ धोना न भूलें - कच्चे अंडे को छूने के बाद साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं. रसोई की सतह और बर्तन साफ रखें. अंडा तोड़ने या छूने के बाद इस्तेमाल किए गए बर्तन और सतह को अच्छी तरह धो लें. कच्चे अंडे को बाकी खाने से अलग रखें, ताकि संक्रमण का खतरा न बढ़े. अलग उपकरण का इस्तेमाल करें. अगर आप चिकन और अंडे दोनों पका रहे हैं, तो दोनों के लिए अलग चाकू और कटिंग बोर्ड इस्तेमाल करें.

नई रिसर्च में सामने आया बड़ा खतरा
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के वैज्ञानिकों ने एक ताज़ा अध्ययन में बर्ड फ्लू के वायरस में ऐसे बदलाव (म्यूटेशन) पाए हैं, जो इंसानों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. शोधकर्ताओं ने H5N1 वायरस के 2.3.4.4b नामक क्लेड का अध्ययन किया. यह वायरस दुनिया के कई हिस्सों में पक्षियों को संक्रमित कर रहा है. इसमें ऐसे जेनेटिक बदलाव पाए गए हैं, जो इसे इंसानों को आसानी से संक्रमित करने में सक्षम बना सकते हैं.

म्यूटेशन क्यों है चिंता का कारण?
अध्ययन का नेतृत्व करने वाले डॉ. केशवर्धन सन्नुला के मुताबिक, H5N1 स्ट्रेन में पाए गए जेनेटिक म्यूटेशन पहले भी कई महामारी फैलाने वाले फ्लू वायरसों में देखे गए हैं. इसका मतलब यह है कि अगर ये बदलाव और विकसित हुए तो यह वायरस मानव से मानव में फैल सकता है, जो महामारी का रूप भी ले सकता है.

सावधानी ही बचाव है
अंडे और चिकन को हमेशा अच्छी तरह पकाकर खाएं. पोल्ट्री फार्म या बीमार पक्षियों के संपर्क से बचें. किसी भी तरह के फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. सरकारी और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें.


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Written by: Taushif

14 Aug 2025  ·  Published: 06:27 IST

डायबिटीज से लेकर पाचन तक, हरे धनिये में छिपा है इन बड़ी बीमारियों का इलाज

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Health benefits of Coriander leaves: दाल और सब्जी धनिया के बिना अधूरी है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि हरा धनिया सिर्फ गार्निश नहीं है, यह हमारी थाली में एक नेचुरल दवा है. सर्दी हो या गर्मी, हर मौसम में धनिया खाने के अपने अलग फायदे हैं. आयुर्वेद इसे त्रिदोष बैलेंसर, पाचन बढ़ाने वाला और खून साफ ​​करने वाला मानता है. मॉडर्न साइंस इसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर एक सुपर हर्ब कहता है.

धनिया का एक छोटा सा पत्ता विटामिन A, C, K, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और कई तरह के एंजाइम्स से भरा होता है. इसके अलावा, एक मुट्ठी धनिया एक सेब जितने एंटीऑक्सीडेंट्स देता है. यह शरीर को साफ करने और सेल्स को बचाने में बहुत असरदार है. इसलिए, भारतीय किचन में इसे थाली के लिए एक रिफ्रेशिंग टॉनिक माना जाता है.

अब सवाल यह है कि इसे हर दाल और सब्जी में क्यों डाला जाता है? इसका मुख्य कारण थर्मोरेगुलेशन है. पकी हुई सब्जियां शरीर में थोड़ी गर्मी पैदा करती हैं, जबकि धनिया ठंडा होता है. ये दोनों मिलकर डाइजेशन को आसान बनाते हैं, जिससे खाना भारी नहीं लगता.

इसके अलावा, धनिया शरीर से टॉक्सिन, हेवी मेटल और नुकसानदायक चीज़ों को निकालने में मदद करता है. इसे नैचुरल कीलेटिंग एजेंट माना जाता है. यह शरीर को साफ़ करने का एक आसान तरीका है. धनिए की खास खुशबू सिर्फ़ खुशबू नहीं है. इसे सूंघने से दिमाग में डाइजेस्टिव एंजाइम तुरंत एक्टिवेट हो जाते हैं, जिससे भूख बढ़ती है और डाइजेशन तेज़ होता है.

धनिए को लिवर का डिटॉक्स स्विच भी कहा जाता है. इसके एंजाइम लिवर की सफ़ाई की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं. धनिए का जूस सिर्फ़ 15 मिनट में सीने की जलन या गैस से राहत देता है. यह उन लोगों के लिए खास तौर पर फ़ायदेमंद है जो ज़्यादा सोडियम लेते हैं या हाई ब्लड प्रेशर में हैं क्योंकि यह ब्लड सोडियम लेवल को कम करने में मदद करता है. तीन दोषों (वात, पित्त और कफ) को बैलेंस करने वाली खाने की चीज़ें बहुत कम मिलती हैं, लेकिन धनिया उनमें से एक है.

धनिए का पानी यूरिक एसिड और ज़्यादा नमक को बाहर निकालकर किडनी को काम करने में मदद करता है. इसलिए, बहुत से लोग इसे सुबह खाली पेट पीते हैं. लेकिन अगर सही तरीके से लिया जाए तो इसके फायदे दोगुने हो जाते हैं, जैसे कि धनिया के बीज पकाने के बाद डालें, न कि आंच बंद करने के बाद ताकि विटामिन C और उसके एसेंशियल ऑयल्स खराब न हों. नींबू के साथ यह और भी असरदार होता है, क्योंकि नींबू आयरन एब्जॉर्प्शन को बढ़ाता है.
 


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Written by: Taushif

03 Dec 2025  ·  Published: 01:27 IST

सेल्फ केयर सिर्फ शरीर नहीं, मन और आत्मा के लिए भी जरूरी; ऐसे रखें ख्याल

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हर साल 24 जुलाई को इंटरनेशनल सेल्फ केयर डे के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 2011 में इंटरनेशनल सेल्फ केयर फाउंडेशन (ISF) ने की थी। इस दिन का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि खुद की देखभाल सिर्फ एक दिन की बात नहीं, बल्कि 24 घंटे और 7 दिन की जरूरत है। इसी सोच के तहत 24/7 के प्रतीक के रूप में 24 जुलाई की तारीख तय की गई।

सेल्फ केयर क्या है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सेल्फ केयर का मतलब है – व्यक्ति, परिवार या समुदाय द्वारा खुद की फिजिकल, मेंटल और इमोशनल हेल्थ का ध्यान रखना, चाहे वह मेडिकल मदद से हो या बिना उसके। इसका मकसद बीमारी से बचाव और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना होता है।

सेल्फ केयर जरूरी क्यों है?

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी, बदलती जीवनशैली और मानसिक दबाव के बीच सेल्फ केयर आपको न केवल स्वस्थ रखता है, बल्कि आपको मानसिक रूप से भी सशक्त बनाता है। यह स्वास्थ्य एजेंसियों पर दबाव को भी कम करता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।

कैसे करें सेल्फ केयर?

  1. सिर्फ शरीर नहीं, मन और भावना की भी देखभाल करें। तीनों पहलुओं का संतुलन बेहद जरूरी है।
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  3. पोषक आहार लें। फलों, सब्जियों और विटामिन्स से भरपूर भोजन शरीर को ऊर्जा देता है।
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  5. 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है। चाहे वह वॉक हो, रनिंग, जॉगिंग या योग।
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  7. मेडिटेशन करें। यह मन को शांत रखने और फोकस बढ़ाने में मदद करता है।
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  9. अच्छी किताबें पढ़ें। यह मानसिक रूप से सुकून और आत्मविकास दोनों देती हैं।
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  11. कोई क्रिएटिव या मजेदार एक्टिविटी अपनाएं। जैसे डांस, म्यूजिक, आर्ट आदि।
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  13. प्रकृति के करीब जाएं। पार्क में बिना हेडफोन के टहलें, खुद को वातावरण से जोड़ें।


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Written by: Taushif

24 Jul 2025  ·  Published: 04:40 IST